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	<title>Pt. Jawahar lal Nehru Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Pt. Jawahar lal Nehru Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>अमित शाह के &#8216;नेहरू से गलती&#8217; वाले आरोप पर बोले फ़ारूक़ अब्दुल्ला.. &#8216;अगर ऐसा न हुआ होता तो राजौरी और पुंछ भी पाकिस्तान&#8230;&#8230;&#8217;</title>
		<link>https://hindikhabar.com/farooq-abdullah-reacts-on-comment-of-home-minister-amit-shah-on-nehru-mistakes-on-pok/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Dec 2023 13:46:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Amit Shah]]></category>
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		<category><![CDATA[POK]]></category>
		<category><![CDATA[Pt. Jawahar lal Nehru]]></category>
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					<description><![CDATA[Farooq Abdullah on Amit Shah Comment on Nehru&#8217;s Decision on POK: जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के उस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में दो बड़ी गलतियां हुई थीं. फ़ारूक़ &#8230;]]></description>
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<p><strong>Farooq Abdullah on Amit Shah Comment on Nehru&#8217;s Decision on POK:</strong> <strong>जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के उस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में दो बड़ी गलतियां हुई थीं.</strong></p>



<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, &#8220;उस वक्त आप पैदा नहीं हुए थे.. जिंदा नहीं थे &#8230; उस वक्त क्या स्थिति थी.. उस समय, पुंछ और राजौरी को बचाने के लिए सेना को डायवर्ट किया गया था.. हटाया गया था. अगर राजौरी आज भारत का हिस्सा है तो ये उसी मेहरबानी से है.. अगर ऐसा नहीं किया गया होता, तो पुंछ और राजौरी भी पाकिस्तान में चला जाता. उस समय की जो स्थिति थी तब और कोई रास्ता नहीं था, लॉर्ड माउंटबेटन और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी सुझाव दिया था कि यह संयुक्त राष्ट्र संघ में जाना चाहिए.&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">ये लोग झूठ बोल रहे हैं.. उस वक्त जो रास्ता था अपनाया गया</h2>



<p>&#8221;अब ये लोगों को झूठ बोल रहे हैं.. उस वक्त हालात ऐसे थे..उसके बाद कोई रास्ता नहीं था. फिर UN सिक्योरिटी काउंसिल में जिन्होंने हमला किया और जिनपर हमला हुआ उन्हें एक ही पटल पर रखा. इससे पहले वो हमला करने वालों को कुछ कहते.. तब अमेरिका का जोर था..वो पाकिस्तान की तरफ था..&#8221;</p>



<p>&#8216;अगर उस वक्त फौज राजौरी और पूंछ को नहीं बचाती तो ये दोनों भी पाकिस्तान चले गए होते.&#8217;</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | On Union HM Amit Shah&#39;s remark on Pandit Nehru, Former J&amp;K CM and National Conference (NC) President Farooq Abdullah says, &quot;&#8230;At that time, the army was diverted to save Poonch and Rajouri. If it had not been done, Poonch and Rajouri would have also gone to… <a href="https://t.co/tjqx537TRw">pic.twitter.com/tjqx537TRw</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1732372747748249947?ref_src=twsrc%5Etfw">December 6, 2023</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>दरअसल, कश्मीर समस्या पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में एक चर्चा के दौरान कहा था कि, &#8220;दो बड़ी गलतियां (पूर्व पीएम) पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री काल में उनके लिए हुए निर्णयों से हुईं, जिसके कारण कश्मीर को कई वर्षों तक नुकसान उठाना पड़ा. पहला है, जब हमारी सेना जीत रही थी तब युद्धविराम की घोषणा करना. सीजफायर लगाया गया, अगर तीन दिन बाद सीजफायर होता तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आज भारत का हिस्सा होता. दूसरा है अपने आंतरिक मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना.&#8221;</p>



<p>फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने अमित शाह के उस बयान पर भी अपना पक्ष रखा जिसमें उन्होंने जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद का मुद्दा उठाया था.</p>



<h2 class="wp-block-heading">अगर आतंकवाद खत्म हुआ है तो हमारे जवान कैसे मारे गए ?- Farooq Abdullah</h2>



<p>पत्रकारों ने ज फारूक से पूछा कि 370 हटने के बाद घाटी से दहस्त का माहौल कम हुआ है ? तो उस जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, &#8220;कितनी फौज है वहां, कितनी बीएसएफ, कितनी सीआरपीएफ है? अगर इतनी फौज होने के बाद भी हमारे फौजी, जवान और अफसर मर रहे हैं तो वजह क्या है. अगर सचमुच आतंकवाद खत्म हो गया है तो हमारे जवान कैसे मारे गए?&#8221;</p>



<p>इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था, &#8220;साल 1994 से 2004 तक आतंकवाद की कुल 40,164 घटनाएं दर्ज की गईं. 2004 से 2014 तक जब मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के शासन का समय था, आतंकवाद की कुल 7,217 घटनाएं हुईं. नरेंद्र मोदी सरकार में यानी 2014 से 2023 तक सिर्फ 2,000 घटनाएं हुईं. इसलिए मैं ठीक ही कहता था कि अलगाववाद की भावना का मूल, उसका उद्भव स्थान, अनुच्छेद 370 है.&#8221;</p>



<p>इस बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी कश्मीर के मुद्दे पर अमित शाह के बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है.</p>



<h2 class="wp-block-heading">फिर तो एक से ज्यादा संविधान और ध्वज होने चाहिए- Shashi Tharoor</h2>



<p>कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, &#8220;&#8230;कल गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा था कि किसी देश में एक से अधिक संविधान, एक से अधिक ध्वज कैसे हो सकते हैं? अगर वे दुनिया भर में देखें तो ऐसे कई देश हैं जहां एक से अधिक संविधान, एक से अधिक ध्वज हैं. उदाहरण के लिए, अमेरिका के, 50 राज्यों में हर एक का अपना संविधान और अपना ध्वज है. इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया में उनके पास न केवल अपना संविधान है और अपना ध्वज है, बल्कि प्रत्येक राज्य का अपना प्रधानमंत्री भी है. आप कह सकते हैं कि भारत में हम ऐसा नहीं चाहते. यह ठीक है लेकिन यह मत कहो कि किसी भी देश के पास यह नहीं हो सकता क्योंकि अन्य देशों के पास यह है.&#8221;</p>



<p>लोकसभा में जम्मू और कश्मीर से संबंधित विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, &#8220;एक देश में दो प्रधानमंत्री, दो संविधान और दो झंडे कैसे हो सकते हैं? जिन लोगों ने ऐसा किया, उन्होंने गलत किया. पीएम मोदी ने इसे ठीक किया. हम 1950 से कह रहे हैं कि देश में &#8216;एक प्रधान, एक निशान, एक विधान&#8217; होना चाहिए और हमने यह किया.&#8221; </p>



<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://hindikhabar.com/national/parliament-winter-session-due-to-jawahar-lal-nehru-mistake-pok-was-made/">नेहरू की गलती के कारण बना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर- अमित शाह</a></strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>नेहरू संग्रहालय का नाम बदलने को लेकर कांग्रेस ने कसा तंज-&#8216;नेहरू से इतनी नफ़रत है तो खानदान से कितनी होगी?&#8217;</title>
		<link>https://hindikhabar.com/congress-taunts-on-changing-the-name-of-nehru-museum-if-there-is-so-much-hatred-for-nehru-how-much-will-it-be-for-the-family/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jun 2023 06:10:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Pt. Jawahar lal Nehru]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली के तीन मूर्ति भवन परिसर में स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी (एनएमएमएल) का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी’ कर दिया गया है। जिसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तंज कसा है। आपको बता दे कि तीन मूर्ति भवन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आधिकारिक आवास था। भाजपा ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली के तीन मूर्ति भवन परिसर में स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी (एनएमएमएल) का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी’ कर दिया गया है। जिसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तंज कसा है।</p>



<p>आपको बता दे कि तीन मूर्ति भवन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का आधिकारिक आवास था। भाजपा ने जिसका नाम बदल कर ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसाइटी’ कर दिया है। इस बात से रूष्ट कांग्रेस ने इस बात की जमकर आलोचना की है। कांग्रेसी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने टिप्पणी करते ट्विट किया कि &#8220;नेहरू से इतनी नफ़रत है तो नेहरू खानदान से कितनी होगी?&#8221; दरअसल, संस्कृति मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि एनएमएमएल की एक विशेष बैठक में इसका नाम बदलने का फैसला किया गया है। उसने बताया कि सोसाइटी के उपाध्यक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक की अध्यक्षता की।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">नेहरू से इतनी “नफ़रत” है तो नेहरू “खानदान”<br>से कितनी होगी…?</p>&mdash; Acharya Pramod (@AcharyaPramodk) <a href="https://twitter.com/AcharyaPramodk/status/1669768081588248576?ref_src=twsrc%5Etfw">June 16, 2023</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>बयान में बताया गया है कि राजनाथ सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए ‘‘नाम में बदलाव के प्रस्ताव का स्वागत’’ किया क्योंकि अपने नए प्रारूप में यह संस्थान जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक सभी प्रधानमंत्रियों के योगदान और उनके सामने आई विभिन्न चुनौतियों के दौरान उनकी प्रतिक्रियाओं को दर्शाता है. सिंह ने प्रधानमंत्रियों को एक संस्था बताते हुए और विभिन्न प्रधानमंत्रियों की यात्रा की इंद्रधनुष के विभिन्न रंगों से तुलना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ‘‘इंद्रधनुष को सुंदर बनाने के लिए उसके सभी रंगों का उचित अनुपात में प्रतिनिधित्व किया जाना’’ चाहिए.</p>



<p>इसमें कहा गया, ‘‘इसलिए प्रस्ताव में एक नया नाम दिया गया है, हमारे सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का सम्मान किया गया है और इसकी सामग्री लोकतांत्रिक है.’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एनएमएमएल का नाम बदले जाने की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘संकीर्णता और प्रतिशोध का दूसरा नाम मोदी है. नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय 59 वर्षों से अधिक समय से एक वैश्विक बौद्धिक ऐतिहासिक स्थल और पुस्तकों एवं अभिलेखों का खजाना रहा है. अब से इसे प्रधानमंत्री स्मारक एवं सोसाइटी कहा जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी भारतीय राष्ट्र के शिल्पकार के नाम और विरासत को विकृत करने, नीचा दिखाने और नष्ट करने के लिए क्या नहीं करेंगे? अपनी असुरक्षा के बोझ तले दबा एक छोटे कद का व्यक्ति स्वघोषित विश्वगुरु बना फिर रहा है.’’</p>



<p>ये भी पढ़े: <a href="https://hindikhabar.com/politics/a-person-caught-from-brij-bhushan-singhs-residence-was-asking-such-questions-to-the-staff/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">बृजभूषण सिंह के आवास से पकड़ा गया एक शख्स, स्टाफ से पूछ रहा था ऐसे सवाल</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रधानमंत्री सीरीज: पंडित नेहरू की नीति और नियत में क्या था फ़र्क</title>
		<link>https://hindikhabar.com/what-was-the-difference-between-pandit-nehrus-policy-and-intention/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Sep 2022 11:37:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिंदी ख़बर स्पेशल]]></category>
		<category><![CDATA[Pt. Jawahar lal Nehru]]></category>
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					<description><![CDATA[नेहरू की महात्मा गांधी से पहली मुलाकात 1916 में कांग्रेस के लखनऊ सम्मेलन के दौरान ही हुई थी। वो गांधी जी के व्यक्त्तिव से बहुत अधिक प्रभावित हुए थे। ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>कहते है इतिहास एक दिन में नहीं बनता, लेकिन किसी एक दिन की बड़ी घटना इतिहास में एक बड़ा मोड़ ले आती है। स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने के बाद आजाद भारत के प्रथम <strong>प्रधानमंत्री </strong>के तौर पर <strong>जवाहर लाल नेहरू</strong> की उपलब्धियों से इतिहास भरा पड़ा है। पंडित नेहरू को वैसे तो देश को बनाने वाला हीरो के तौर पर याद किया जाता है। लेकिन कई लोगों के नजरिए से उन्हें देश के विलेन के रूप में भी पेश किया जाता है। नेहरू वैसे एक समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के वास्तुकार मानें जाते थे। पर उनकी कई नीतियां देश के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है ये वो खुद नहीं जानते थे। उनकी कुछ गलत नीतियों पर कई नेताओं ने चेतावनी भी दी थी। लेकिन नेहरू ने इन सभी चेतावनियों को नजर अंदाज कर दिया था।</p>



<p><strong>भारत की आजादी में नेहरू का योगदान</strong></p>



<p>ज्वाहर लाल नेहरू इंग्लैंड से अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद 1912 में भारत आए थे। उसके बाद से उनका राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई थी। पंडित नेहरू ने भारत लौटने के कुछ दिनों बाद ही पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सम्मेलन में भाग लिया था। जो पटना के बाकीपोर में हुआ था। इसके साथ ही नेहरू जी 1915 में उत्तर प्रदेश के किसान सभा के फंक्शन में भी एक्टिव हो गए थे। नेहरू की महात्मा गांधी से पहली मुलाकात 1916 में कांग्रेस के लखनऊ सम्मेलन के दौरान ही हुई थी। वो गांधी जी के व्यक्त्तिव से बहुत अधिक प्रभावित हुए थे। इसके बाद गांधी जी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आदोलन में नेहरू ने पहली बार नेशनल लेवल के आदोलन में भाग लिया। इस आदोलन को यू समझिए की पंडित नेहरू ही इसे लीड कर रहे थे। इस दौरान उन्हें बिट्रिश सरकार द्वारा अरेस्ट भी किया गया। फिर इसके बाद 1923 में नेहरू जी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (All India Congress Comitee) के जनरल सेक्रेटरी बने।</p>



<p><strong>आधुनिक भारत के निर्माता पं जवाहरलाल नेहरू</strong></p>



<p>नेहरू रिपोर्ट के अनुसार 1928 में कोलकाता सम्मेलन के दौरान नेहरू जी और सुभाष चंद्र बोस पूर्ण स्वतंत्रता की मांग करते है। जिस पर काग्रेंस के बड़े नेता और गांधी जी इस बात पर सहमत नहीं होते। लेकिन बाद में क्या था, गांधी जी को इन युवा नेता की मांग के आगे झुकना पड़ता है। इसका परिणाम देखने को मिलता है। 1929 के लाहौर कांग्रेस सम्मेलन में, जहां यंग नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना जाता है। तब पंडित नेहरू जी भारतीय राष्ट्रीय काग्रेंस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा कर दी थी यानी ब्रिटिश साम्राज्य से पूरी तरह से स्वतंत्र होकर अपना राज बनाने के लिए संघर्ष करने की प्रतिज्ञा की थी। यहां से कांग्रेस की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। अब यहां से कांग्रेस की कमान युवा नेता के हाथों में चली जाती है। जिसमें नेहरू को अलावा सुभाष चंद्र बोस जैसे लीडर भी शामिल हुए। 26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया।</p>



<p>ज्वाहर लाल नेहरू गांधी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े। चाहे वो नमक सत्याग्रह या फिर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की बात हो उन्होंने गांधी जी के हर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। नेहरू की विश्व के बारे में जानकारी से गांधी जी काफी प्रभावित थे और इसीलिए आजादी के बाद वह उन्हें प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते थे। फिर क्या 1947 में भारत और पाकिस्तान की आजादी के समय उन्होंने अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।  और यही से शुरू हुई नेहरू के प्रधानमंत्री बनने की कहानी। </p>



<p><strong>भारत की आजादी और विभाजन का एलान</strong></p>



<p>इसके बाद 15 अगस्त&nbsp;1947&nbsp;भारत&nbsp;की आजादी की तारीख दशकों तक चले संघर्ष और आंदोलनों के बाद अंग्रेजी हुकूमत&nbsp;भारत&nbsp;छोड़ने पर मजबूर हो गई और 14 अगस्&#x200d;त की आधी रात&nbsp;भारत&nbsp;को सत्&#x200d;ता हस्&#x200d;तांतरित कर दी गई। आजाद होने के बाद जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="450" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/09/Jwahar-lala.jpg" alt="" class="wp-image-213006179196" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/09/Jwahar-lala.jpg 800w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/09/Jwahar-lala-300x169.jpg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/09/Jwahar-lala-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>



<p>देश का आजादी सिर्फ बंटवारा नहीं बल्कि गरीबी और 40 करोड़ लोगों का पेट भरने का संकट भी साथ लाई थी। पंचवर्षीय योजना देने वाले नेहरू खुद भी मानते थे, कि सरकारी योजनाएं जमीन में पहुंचने से पहले या तो दम तोड़ देती है या पूरा होने में देर लगती थी।</p>



<p><strong>1962 का युद्ध: विश्वासघात या कायरता</strong></p>



<p>देश के लोकतंत्र पिरोने वाले पं नेहरू के आज जितने चाहने वाले है, उतने ही आलोचक भी है। चीन के साथ जब भी बॉर्डर पर विवाद की बात होती है तो 1962 में हुआ युद्ध हमेशा याद आता है। उस युद्ध में चीन के खिलाफ भारत की शर्मनाक हार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जिम्मेदार थे। जिस समय पंडित नेहरू हिंदी चीनी भाई-भाई नारा बुलंद कर रहे थे, उस समय कई नेताओ ने उन्हें चीन को लेकर आगाह किया था। इतना ही नहीं भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन ने अपनी सरकार पर गंभीर आरोप तक लगा दिए थे उन्होंने चीन पर आसानी से विश्वास करने और वास्तविकताओं की अनदेखी के लिए सरकार को कठघरे में खड़ा किया था।</p>



<p>जवाहर लाल नेहरू ने भी खुद संसद में खेदपूर्वक कहा था, &#8220;हम आधुनिक दुनिया की सच्चाई से दूर हो गए थे और हम एक बनावटी माहौल में रह रहे थे, जिसे हमने ही तैयार किया था। नेहरू ने यह भी स्वीकार कर लिया था कि उन्होंने चीन पर भरोसा करके बड़ी गलती कर दी है। नेहरू को लगा चीन सीमा पर झड़प और गशती दल के स्तर पर तू-तू मैं- मैं से ज्यादा और कुछ नही करेगा।</p>



<p>लेकिन बॉर्डर पर चीन की इस करतूत से हर कोई हैरान था भारत को कभी यह शक नहीं हुआ कि चीन हमला भी कर सकता है। कहते है जवाहर लाल नेहरू की गलती की वजह से भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता ठुकरा दी और अपनी जगह ये स्थान चीन को दे दिया।</p>



<p>चीन के साथ संघर्ष के कुछ ही समय बाद नेहरू के स्वास्थ्य में गिरावट के लक्षण दिखाई देने लगे। उन्हें 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने सदा के लिए आंखें बंद कर ली।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें</strong>: <a href="https://hindikhabar.com/national/when-nehru-wept-after-hearing-o-mere-watan-ke-people/">https://hindikhabar.com/national/when-nehru-wept-after-hearing-o-mere-watan-ke-people/</a></p>
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