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	<title>Marital Rape Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Marital Rape Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>Marital Rape: &#8220;रेप, रेप ही होता है, चाहे वह पति ने किया हो&#8221;, गुजरात HC की टिप्पणी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/marital-rape-rape-is-rape-even-if-it-is-committed-by-the-husband-comments-gujarat-hc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Dec 2023 10:11:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[GUJARAT HC]]></category>
		<category><![CDATA[gujarat high court]]></category>
		<category><![CDATA[IPC]]></category>
		<category><![CDATA[Marital Rape]]></category>
		<category><![CDATA[Rape]]></category>
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					<description><![CDATA[Marital Rape: गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में टिप्पणी करते हुए कहा कि बलात्कार, बलात्कार ही होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित कर दिया है। एकल-न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने अपने 8 दिसंबर के आदेश में बताया कि 50 अमेरिकी राज्यों, तीन ऑस्ट्रेलियाई राज्यों, न्यूजीलैंड, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Marital Rape:</strong> गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में टिप्पणी करते हुए कहा कि बलात्कार, बलात्कार ही होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित कर दिया है। एकल-न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने अपने 8 दिसंबर के आदेश में बताया कि 50 अमेरिकी राज्यों, तीन ऑस्ट्रेलियाई राज्यों, न्यूजीलैंड, कनाडा, इज़राइल, फ्रांस, स्वीडन, डेनमार्क, नॉर्वे, सोवियत संघ, पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया में वैवाहिक बलात्कार अवैध है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Marital Rape:</strong> यूनाइटेड किंगडम का दिया उदाहरण</h3>



<p>कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, &#8220;यूनाइटेड किंगडम में, जो काफी हद तक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) से लिया गया है, ने भी 1991 में एक फैसले के अनुसार अपवाद (धारा 376 जो पति को बलात्कार के आरोप से छूट देती है) को हटा दिया है। इसलिए, आईपीसी जो कि बनाया गया था तब के शासकों ने स्वयं पतियों को दिए गए अपवाद को समाप्त कर दिया है&#8221;।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Marital Rape:</strong> रेप, रेप होता है</h3>



<p>कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इसलिए, अगर कोई पुरुष किसी महिला का यौन उत्पीड़न करता है तो आईपीसी की धारा 376 के तहत सजा दी जा सकती है। न्यायमूर्ति जोशी ने मामलों को रेखांकित करते हुए कहा, &#8220;ऐसी प्रकृति के अधिकांश मामलों में, सामान्य प्रथा यह है कि यदि पुरुष पति है और दूसरे पुरुष के समान कार्य करता है, तो उसे छूट दी जाती है। मेरे विचार में, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। पुरुष एक पुरुष है; एक कृत्य एक कृत्य है। बलात्कार, बलात्कार है, चाहे वह किसी पुरुष द्वारा किया गया हो, चाहे वह &#8216;पति&#8217; हो&#8221;।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/international/canada-politics-two-thirds-of-voters-want-pm-trudeau-to-resign/">Canada Politics: दो-तिहाई वोटर चाहते हैं PM ट्रूडो दें इस्तीफा</a></p>



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		<item>
		<title>शादीशुदा हो या कुंवारी हर महिला को गर्भपात का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/married-or-unmarried-every-woman-has-the-right-to-abortion-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Sep 2022 06:53:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Law]]></category>
		<category><![CDATA[Marital Rape]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Termination of Pregnancy]]></category>
		<category><![CDATA[Right To Abortion]]></category>
		<category><![CDATA[Safe Abortion]]></category>
		<category><![CDATA[Society]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Women]]></category>
		<category><![CDATA[Women Rights]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "विवाहित महिलाएं भी यौन उत्पीड़न या बलात्कार के पीड़ितों के वर्ग का हिस्सा बन सकती हैं। एक महिला अपने पति के साथ गैर-सहमति के यौन संबंध के परिणामस्वरूप गर्भवती हो सकती है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) मामले में फैसला सुनाते समय सभी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8220;एक महिला की वैवाहिक स्थिति को उसे अनचाहे गर्भ गिराने के अधिकार से वंचित करने के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता है। सिंगल और अविवाहित महिलाओं को गर्भावस्था के 24 सप्ताह तक चिकित्सा समाप्ति अधिनियम और नियमों के तहत गर्भपात का अधिकार है।&#8221; .</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा, &#8220;गर्भपात के लिए बलात्कार में वैवाहिक बलात्कार शामिल होगा।&#8221;</p>
<p>SC ने अपने बड़े फैसले में कहा, &#8220;सिंगल या अविवाहित गर्भवती महिलाओं को 20-24 सप्ताह के बीच गर्भपात करने से रोकना, जबकि विवाहित महिलाओं को अनुमति देना अनुच्छेद 14 का मार्गदर्शन करने वाली भावना का उल्लंघन होगा।&#8221;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, &#8220;आधुनिक समय में कानून इस धारणा को छोड़ रहा है कि विवाह व्यक्तियों के अधिकारों के लिए एक पूर्व शर्त है। एमटीपी अधिनियम को आज की वास्तविकताओं पर विचार करना चाहिए और पुराने मानदंडों से प्रतिबंधित नहीं होना चाहिए। कानून नहीं रहना चाहिए। स्थिर और बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखना चाहिए।&#8221;</p>
<p>असुरक्षित गर्भपात पर चिंता व्यक्त करते हुए, SC ने कहा, &#8220;असुरक्षित गर्भपात मातृ मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण बना हुआ है। भारत में होने वाले 60% गर्भपात असुरक्षित हैं। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुंच से इनकार करने से प्रतिबंधात्मक गर्भपात प्रथाएं होने लगती हैं जो असुरक्षित गर्भपात को बढ़ाता हैं।&#8221;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8220;विवाहित महिलाएं भी यौन उत्पीड़न या बलात्कार के पीड़ितों के वर्ग का हिस्सा बन सकती हैं। एक महिला अपने पति के साथ गैर-सहमति के यौन संबंध के परिणामस्वरूप गर्भवती हो सकती है।</p>
<p>अगर एक महिला ने बलात्कार का दावा किया है, यहां तक कि एक विवाहित साथी द्वारा भी, तो गर्भपात के लिए बलात्कार के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजीकृत चिकित्सा याचिकाकर्ताओं को पोस्को अधिनियम के तहत गर्भपात की मांग करने पर नाबालिग की पहचान का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है।&#8221;</p>
<p>इसने कहा, &#8220;विधायिका का इरादा नाबालिगों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानी एमटीपी से वंचित करना नहीं है। एक महिला की सामाजिक परिस्थितियों का उसके बर्खास्तगी के फैसले पर असर पड़ सकता है।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Marital Rape मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस, अब इस तारीख को होगी सुनवाई</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-sent-notice-to-center-on-marital-rape-issue-now-hearing-will-be-held-on-this-date/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Sep 2022 09:09:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Central Government]]></category>
		<category><![CDATA[delhi hc]]></category>
		<category><![CDATA[Marital Rape]]></category>
		<category><![CDATA[Marriage]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Society]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[11 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विभाजित फैसला दिया था जिसमें से एक न्यायाधीश ने कानून में अपवाद को खत्म करने का समर्थन किया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) के अपराधीकरण के मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय के विभाजित फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया।</p>
<p>न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ ने बताया कि वैवाहिक बलात्कार से संबंधित सभी लंबित मामलों को एक साथ मिलाने पर सहमति जताते हुए, शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को आगे की सुनवाई के लिए फरवरी, 2023 में सूचीबद्ध किया है।</p>
<p>11 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विभाजित फैसला दिया था जिसमें से एक न्यायाधीश ने कानून में अपवाद को खत्म करने का समर्थन किया, जो पतियों को उनकी पत्नियों के साथ गैर-सहमति से यौन संबंध के लिए मुकदमा चलाने से सुरक्षा प्रदान करता है तो वहीं दूसरे जज ने इसे &#8216;असंवैधानिक&#8217; करार देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>हालांकि, दोनों न्यायाधीशों ने मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के लिए छुट्टी का प्रमाण पत्र देने पर सहमति व्यक्त की क्योंकि इसमें कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं जिनके लिए शीर्ष अदालत के निर्णय की आवश्यकता होती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>‘रेप’ और ‘मैरिटल रेप’ में क्‍या है फर्क, क्या कहता है भारतीय कानून</title>
		<link>https://hindikhabar.com/what-is-the-difference-between-rape-and-marital-rape-what-indian-law-says/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 May 2022 10:53:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Marital Rape]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में पिछले कुछ सालों के दौरान मैरिटल रेप पर कानून बनाने की मांग तेज हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट 2015 से ही इस मामले पर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>इन दिनों देश में मैरिटल रेप चर्चाओं में है। रेप को जहां बड़ा अपराध माना जाता है, वहीं मैरिटल रेप को अभी अपराध की श्रेणी में रखने या न रखने को लेकर बहस हो रही है। मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में रखने के लिए दिल्&#x200d;ली हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है।<br>हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने मैरिटल रेप को अपराध धोशित करने के मामले में खंडित निर्णय सुनाया। खंडित यानी दो जजों की दो अलग अलग राय। अदालत के एक न्यायाधीश ने इस प्रावधान को समाप्त करने का समर्थन किया, जबकि दूसरे न्यायाधीश ने कहा कि यह असंवैधानिक नहीं है। जबकि न्यायामूर्ति राजीव शकधर ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को समाप्त करने का समर्थन किया। ऐसे में सवाल उठता है कि ‘रेप’ व ‘मैरिटल रेप’ में क्या फर्क है इसे लेकर क्या कहता देश का कानून।</p>



<p><strong>क्या है रेप</strong></p>



<p>आईपीसी की धारा 375 के मुताबिक, कोई व्यक्ति अगर किसी महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसकी मर्जी के बिना संबंध बनाता है, तो वह रेप कहा जाएगा।<br>महिला की सहमति से संबंध बनाया गया हो, लेकिन यह सहमति उसकी हत्&#x200d;या, उसे नुकसान पहुंचाने या फिर उसके किसी करीबी के साथ ऐसा करने का डर दिखाकर हासिल की गई हो, तो यह भी रेप होगा।<br>महिला की मर्जी से, लेकिन ये सहमति देते वक्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हो या फिर उस पर किसी नशीले पदार्थ का प्रभाव हो और लड़की कंसेट देने के नतीजों को समझने की स्थिति में न हो।<br>महिला की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी मर्जी से या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स।</p>



<p><strong>क्या है मैरिटल रेप</strong></p>



<p>आईपीसी या भारतीय दंड विधान रेप की परिभाषा तो तय करता है लेकिन उसमें वैवाहिक बलात्कार का कोई जिक्र नहीं है। बिना पत्नी का इजाजत के पति द्वारा जबरन सेक्स संबंध बनाने को मैरिटल रेप कहा जाता है। बिना सहमति के संबंध बनाने की वजह से ही इसे इस रेप की श्रेँणी में रखा जाता है।</p>



<p>भारत में पिछले कुछ सालों के दौरान मैरिटल रेप पर कानून बनाने की मांग तेज हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट 2015 से ही इस मामले पर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर कोई कानून बनाने से पहले एक व्यापक विचार- विमर्श की जरूरत है, क्योंकि ये समाज पर गहरा प्रभाव डालेगा।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें</strong>: <a href="https://hindikhabar.com/big-news/cbi-raid-karti-chidambaram-cbi-raids-the-premises-of-karti-chidambaram/">कार्ति चिदंबरम के ठिकानों पर CBI का छापा, चीनी नागरिकों को वीजा दिलाने के लिए 50 लाख रिश्वत लेने का आरोप</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पति-पत्नी के बीच बलपूर्वक शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में नही: छत्तीसगढ़ HC</title>
		<link>https://hindikhabar.com/forced-sex-between-husband-and-wife-does-not-amount-to-rape-chhattisgarh-hc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Aug 2021 13:52:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Chattisgarh HC]]></category>
		<category><![CDATA[Chattisgarh High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Marital Rape]]></category>
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					<description><![CDATA[रायपुर: मैरिटल रेप का मामला लंबे समय से भारतीय समाज के बीच चर्चा का विषय रहा है। कुछ लोग इसे सही मानते है तो कुछ इसकी परिभाषा के आधार को ही खारिज कर देते है। फिर भी समय-समय ऐसे मामले आते रहते हैं, जो इस मामले को बहस का मुद्दा बनाते रहते हैं। ऐसा ही &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>रायपुर:</strong> मैरिटल रेप का मामला लंबे समय से भारतीय समाज के बीच चर्चा का विषय रहा है। कुछ लोग इसे सही मानते है तो कुछ इसकी परिभाषा के आधार को ही खारिज कर देते है। फिर भी समय-समय ऐसे मामले आते रहते हैं, जो इस मामले को बहस का मुद्दा बनाते रहते हैं।</p>



<p>ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ हाई-कोर्ट से सामने आया है, जहां पीड़िता का आरोप है कि उसके ससुराल वाले उससे दहेज की मांग करते थे। उसके मना करने पर उसके पति द्वारा जबरदस्ती अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया जाता था। लेकिन गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आरोपी को वैवाहिक बलात्कार के आरोप से बरी कर दिया।</p>



<p>कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच बनाए जाने वाले संबंध बलात्कार की श्रेणी में नही आएंगे, भले ही संबंध जबरन क्यों न बनाए गए हों। हांलाकि कोर्ट ने आरोपी शख्स के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध की धारा 377 को बरकरार रखा है।</p>



<p>जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी के साथ मैथुन या यौन क्रिया करना, जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम न हो, उसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। इस मामले में शिकायतकर्ता आवेदक संख्या 1 की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, इसलिए आवेदक संख्या 1/पति द्वारा उसके साथ यौन संबंध या कोई भी यौन कृत्य बलात्कार का अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।</p>



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<h4 class="wp-block-heading">न्यायधीश मोहम्मद असलम ने खुशाबे अली को दी थी जमानत</h4>



<p>ऐसे ही एक मामले में नाबालिग लड़की ने मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। लड़की का आरोप था कि उसका पति(वयस्क) खुशाबे अली उसके साथ दहेज के लिए मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाता था। इस मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायधीश मोहम्मद असलम ने अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने पर कहा था कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को इस आधार पर बेल दे दी थी।</p>
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