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	<title>Lifestyle Disease Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>यौन स्वास्थ्य की समस्या सिर्फ उम्र नहीं, हार्ट से जुड़ा हो सकता है कनेक्शन, कभी न करें नजरअंदाज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/sexual-health-problems-not-just-age-linked-to-heart-connection-never-ignore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:55:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Cardiology]]></category>
		<category><![CDATA[Erectile Dysfunction]]></category>
		<category><![CDATA[health awareness]]></category>
		<category><![CDATA[heart health]]></category>
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					<description><![CDATA[Erectile Dysfunction : उम्र बढ़ने के साथ शरीर कई बदलावों के संकेत देने लगता है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, नींद में गड़बड़ी, खर्राटे या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर बढ़ती उम्र का हिस्सा समझी जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत कई बार दिल &#8230;]]></description>
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<p><strong>Erectile Dysfunction :</strong> उम्र बढ़ने के साथ शरीर कई बदलावों के संकेत देने लगता है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, नींद में गड़बड़ी, खर्राटे या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर बढ़ती उम्र का हिस्सा समझी जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत कई बार दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चार प्रमुख संकेतों का जिक्र</h3>



<p>कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन (25 वर्षों के अनुभव के साथ) ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में ऐसे चार प्रमुख संकेतों का जिक्र किया है, जिन्हें पुरुष अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उनके अनुसार, ये लक्षण भविष्य में हार्ट संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इरेक्टाइल डिस्फंक्शन भी है सकेंत</h3>



<p>पहला संकेत इरेक्टाइल डिस्फंक्शन माना गया है। इसे केवल यौन समस्या समझना गलत हो सकता है, क्योंकि यह शरीर में ब्लड फ्लो की कमी या ब्लड वेसल्स में शुरुआती ब्लॉकेज का संकेत भी हो सकता है। कई मामलों में यह हार्ट की गंभीर समस्या से वर्षों पहले दिखाई दे सकता है, इसलिए अचानक ऐसी परेशानी होने पर हार्ट जांच की सलाह दी जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पेट की चर्बी बढ़ना और शारीरिक गतिविधि</h3>



<p>दूसरा संकेत लो टेस्टोस्टेरोन है, जिसे कई लोग उम्र बढ़ने का सामान्य प्रभाव मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे खराब लाइफस्टाइल, पेट की चर्बी बढ़ना और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी वजहें भी हो सकती हैं, जिन्हें सुधारकर हार्मोनल संतुलन बेहतर किया जा सकता है।</p>



<p><strong>पोस्ट देखें-</strong> <strong>https://www.instagram.com/reel/DZC4d0uop40/?utm_source=ig_web_copy_link</strong></p>



<h3 class="wp-block-heading">पुरुषों को हृदय पर देना चाहिए ध्यान</h3>



<p>तीसरा संकेत पुरुषों में हृदय रोग का जल्दी विकसित होना है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को एस्ट्रोजन हार्मोन से मिलने वाली प्राकृतिक सुरक्षा नहीं होती, जिसके कारण उनमें हार्ट संबंधी समस्याएं अपेक्षाकृत कम उम्र में सामने आ सकती हैं। इसलिए 30 से 40 की उम्र के बीच ही दिल की सेहत पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तेज खर्राटे, नींद के दौरान बार-बार जागना</h3>



<p>चौथा संकेत स्लीप एपनिया है। तेज खर्राटे, नींद के दौरान बार-बार जागना और पर्याप्त आराम के बावजूद थकान महसूस होना इसके लक्षण हो सकते हैं। यह स्थिति आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट रिद्म की गड़बड़ियों का कारण बन सकती है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।</p>



<p><strong>Disclaimer : </strong>यह जानकारी शोध और विशेषज्ञ राय पर आधारित है, इसे चिकित्सकीय सलाह न मानें। किसी भी नई गतिविधि या बदलाव से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।</p>



<p><strong> ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/royal-rajput-danish-instagram-love-story-dark-truth-dehradun-case/">‘रॉयल राजपूत’ निकला दानिश, इंस्टाग्राम की इस ‘लव स्टोरी’ के पीछे का खौफनाक सच जानकर कांप उठेंगे आप!</a></p>



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		<title>Obesity Awareness : “कम खाओ-ज्यादा चलो” की सोच मोटापे के लिए क्यों अधूरी है? जानें क्या है सच</title>
		<link>https://hindikhabar.com/awareness-why-eat-less-move-more-is-incomplete-understanding-of-obesity-truth-explained/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:03:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Living]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle Disease]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Metabolism]]></category>
		<category><![CDATA[Obesity Awareness]]></category>
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					<description><![CDATA[Obesity Awareness : मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है। वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक &#8230;]]></description>
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<p><strong>Obesity Awareness :</strong> मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है।</p>



<p>वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक और सीओओ सलोनी पालीवाल के अनुसार, मोटापे को केवल जीवनशैली की समस्या मानना सही नहीं है, क्योंकि इसमें जेनेटिक कारण, हार्मोन, नींद, तनाव, आंतों के बैक्टीरिया और पर्यावरण जैसे कई कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि एक जैसी डाइट और एक्टिविटी के बावजूद लोगों का वजन अलग-अलग हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हार्मोन भी निभाते हैं अहम भूमिका</h3>



<p>विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि “कम खाओ और ज्यादा चलो” जैसी सलाह मोटापे के समाधान के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है। यह तरीका सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन मोटापे जैसी जटिल स्थिति में भूख और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह यह धारणा भी गलत है कि वजन कम न हो पाने की वजह सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी होती है, जबकि घ्रेलिन, लेप्टिन, इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंगों के आसपास चर्बी हो सकती है जमा</h3>



<p>कई मामलों में मोटापा बाहर से स्पष्ट नहीं दिखता, क्योंकि शरीर के अंदर अंगों के आसपास चर्बी जमा हो सकती है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। दक्षिण एशियाई आबादी में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है, इसलिए केवल वजन या बीएमआई के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन पूरी तरह सही नहीं माना जाता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं</h3>



<p>यह भी देखा गया है कि वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होता, क्योंकि शरीर अक्सर अपने पुराने वजन की ओर लौटने की कोशिश करता है। इसी वजह से कई लोगों को लंबे समय तक मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। जीएलपी-1 दवाओं जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड को लेकर भी कई गलतफहमियां हैं, जबकि क्लीनिकल ट्रायल्स में इन्हें भूख और मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है और इन्हें इलाज का हिस्सा माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">WHO मानती है क्रॉनिक बीमारी</h3>



<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रमुख मेडिकल संस्थाएं मोटापे को एक क्रॉनिक बीमारी मानती हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर सहित 200 से अधिक बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में इसे सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या मानना सही नहीं है, बल्कि समय पर सही इलाज और मेडिकल सलाह लेना जरूरी माना जाता है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/ghaziabad-surya-murder-case-bulldozer-action-notice-placed-at-asad-house/">Ghaziabad Surya Murder Case : सूर्या हत्याकांड मामले पर बुलडोजर एक्शन, असद के घर पर चिपका नोटिस</a></p>



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