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	<title>Justice BR Gavai Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Justice BR Gavai Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट के सभी जज फुल पेंशन के होंगे हकदार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-big-decision-of-the-supreme-court-all-high-court-judges-will-be-entitled-to-full-pension/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 May 2025 11:32:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[Additional Judges]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 19 मई, 2025 को एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि अतिरिक्त न्यायाधीशों सहित हाई कोर्ट के सभी जज पूर्ण पेंशन और रिटायरमेंट लाभ के हकदार होंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधिशों को पेंशन के रूप में सालाना 15 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 19 मई, 2025 को एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि अतिरिक्त न्यायाधीशों सहित हाई कोर्ट के सभी जज पूर्ण पेंशन और रिटायरमेंट लाभ के हकदार होंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधिशों को पेंशन के रूप में सालाना 15 लाख रुपए मिलेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;पेंशन देने से इनकार करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा&#8217;</h3>



<p>मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा, पेंशन देने से इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन होगा। सभी को पुरी पेंशन दी जाएगी। चाहे उनकी नियुक्ति कभी भी हुई हो और चाहे वे अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में रिटायर हुए हों या बाद में स्थायी किए गए हों।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;भेदभाव करना मौलिक अधिकार का उल्लंघन&#8217;</h3>



<p>बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि नियुक्ति के समय के आधार पर या पद के आधार पर जजों के बीच भेदभाव करना मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है। मुख्य न्यायाधिश ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, हाई कोर्ट के ऐसे अतिरिक्त जज जो अब जीवित नहीं हैं, के परिवार भी स्थायी जजों के परिवारों के समान पेंशन और रिटायरमेंट लाभ के हकदार हैं। </p>



<h3 class="wp-block-heading">बेंच ने अनुच्छेद 200 का किया उल्लेख</h3>



<p>बेंच ने अनुच्छेद 200 (हाई कोर्ट के रिटायर जजों को देय पेंशन से संबंधित है) का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा मानना है कि रिटायरमेंट से जुड़े लाभ के लिए हाई कोर्ट के जजों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।  इस प्रकार हम हाई कोर्ट के सभी जजों को चाहे वे किसी भी समय सेवा में आए हों, फुल पेंशन का हकदार मानते हैं.”</p>



<p>बेंच ने कहा, “संघ (भारत) अतिरिक्त जजों सहित हाई कोर्ट के सभी जजों को हर साल 13.50 लाख रुपये की फुल पेंशन का भुगतान करेगा।” इससे पहले देश की शीर्ष अदालत ने ‘जिला न्यायपालिका और हाई कोर्ट में सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए पेंशन के पुनर्निर्धारण के संबंध में’ समेत कई अन्य याचिकाओं पर 28 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। </p>



<p>हाई कोर्ट के जजों को पेंशन के भुगतान में कई आधारों पर असमानता का आरोप लगाया गया था, जिसमें यह भी शामिल था कि रिटायरमेंट के समय जज स्थायी जज थे या अतिरिक्त जज।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/andhra-pradesh-news-4-kids-were-playing-in-a-car-suddenly-the-door-got-locked/">आंध्र प्रदेश : खेल-खेल में कार में बैठे 4 बच्चे, अचानक लॉक हुआ दरवाजा, फिर जो हुआ जानकर हैरान रह जाएंगे आप</a></p>



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		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट ने HC के जजों की जांच करने के लोकपाल के आदेश पर लगाई रोक, जानें वजह</title>
		<link>https://hindikhabar.com/sc-supreme-court-bans-lokpals-order-to-investigate-hc-judges-know-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Feb 2025 08:35:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[HC]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[Justice BR Gavai]]></category>
		<category><![CDATA[Kapil Sibal]]></category>
		<category><![CDATA[SC]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi SC : जस्टिस बीआर गवई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अभय ओक की पीठ ने सुनवाई के दौरान लोकपाल के उच्च न्यायालय के जज के खिलाफ शिकायत सुनने पर नाराजगी जताई और इसे बेहद परेशान करने वाली बात बताया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश के खिलाफ शिकायतों पर विचार करने संबंधी लोकपाल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi SC : </strong>जस्टिस बीआर गवई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अभय ओक की पीठ ने सुनवाई के दौरान लोकपाल के उच्च न्यायालय के जज के खिलाफ शिकायत सुनने पर नाराजगी जताई और इसे बेहद परेशान करने वाली बात बताया।</p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक वर्तमान न्यायाधीश के खिलाफ शिकायतों पर विचार करने संबंधी लोकपाल के आदेश पर बृहस्पतिवार को रोक लगाते हुए इसे बहुत परेशान करने वाला आदेश करार दिया। न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने लोकपाल द्वारा 27 जनवरी को पारित आदेश पर स्वत संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही के संबंध में केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गोपनीय रखने का भी निर्देश</h3>



<p>इस पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अभय एस ओका भी शामिल हैं। पीठ ने शिकायतकर्ता को न्यायाधीश का नाम उजागर करने से रोक दिया है। उसने शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया।</p>



<p>लोकपाल ने हाई कोर्ट के एक वर्तमान अतिरिक्त न्यायाधीश के विरुद्ध दायर दो शिकायतों पर यह आदेश पारित किया था। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने राज्य के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और उसी हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश को जिन्हें एक निजी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई करनी थी उस कंपनी के पक्ष में प्रभावित किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">2013 के दायरे में नहीं आता</h3>



<p>यह आरोप लगाया गया है कि निजी कंपनी हाई कोर्ट के न्यायाधीश की उस समय मुवक्किल थी जब वह (न्यायाधीश) वकालत करते थे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय लोकपाल अधिनियम 2013 के दायरे में नहीं आता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रोक लगाने का आग्रह किया</h3>



<p>वहीं न्यायालय की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि लोकपाल का आदेश बहुत ही परेशान करने वाला है। मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट के न्यायाधीश कभी भी लोकपाल अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बहुत ही परेशान करने वाला</h3>



<p>कपिल सिब्बल ने इस टिप्पणी से सहमति जताई कि यह बहुत ही परेशान करने वाला है। कपिल सिब्बल ने कहा कि असाधारण रूप से और खतरे से भरा हुआ। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोर देकर कहा कि कानून बनाना जरूरी है। पीठ ने कहा कि संविधान लागू होने के बाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारी हैं न कि केवल वैधानिक पदाधिकारी जैसा कि लोकपाल ने निष्कर्ष निकाला है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आक्षेपित आदेश पर रोक</h3>



<p>दलील सुनने के बाद पीठ ने कहा कि आक्षेपित आदेश पर रोक रहेगी। हम शिकायतकर्ता को उस न्यायाधीश का नाम बताने से रोकते हैं जिसके खिलाफ उसने शिकायत दर्ज की थी। शिकायत की विषय-वस्तु बताने से भी रोकते हैं।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/mahakumbh-2025-ngt-report-came-out-sangam-water-is-not-fit-for-bathing-shankaracharya-avimukteshwaranand-angry-at-yogi-government/">NGT की रिपोर्ट आई सामने, संगम का पानी नहाने योग्य नहीं, योगी सरकार पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद</a></p>



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		<item>
		<title>Access To Justice: बीआर गवई बने SC कानूनी सेवा समिति के अध्यक्ष</title>
		<link>https://hindikhabar.com/access-to-justice-br-gavai-becomes-chairman-of-sc-legal-services-committee/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jan 2024 13:15:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Access To Justice]]></category>
		<category><![CDATA[Justice BR Gavai]]></category>
		<category><![CDATA[legal service]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi news]]></category>
		<category><![CDATA[SCLSC]]></category>
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					<description><![CDATA[Access To Justice: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, जस्टिस बीआर गवई को सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। केंद्रीय न्याय विभाग ने एक अधिसूचना के जरिए 29 दिसंबर, 2023 को इस बात की जानकारी दी। न्यायमूर्ति गवई को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण नियम, 1995 के नियम 10 के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Access To Justice: </strong>उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, जस्टिस बीआर गवई को सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। केंद्रीय न्याय विभाग ने एक अधिसूचना के जरिए 29 दिसंबर, 2023 को इस बात की जानकारी दी। न्यायमूर्ति गवई को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण नियम, 1995 के नियम 10 के अनुसार कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 3 ए की शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा इस पद पर नामित किया गया। कानूनी सेवा प्राधिकरणों को समाज के कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को कानूनी सहायता और सहायता प्रदान करने का काम सौंपा गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Access To Justice: </strong>क्या है SCLSC ?</h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति, समाज के हाशिए पर रहने वाले और कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करने की कोशिश करता है। सर्वोच्च न्यायालय देश का अंतिम न्याय न्यायालय है। यह कानून का न्यायालय है और लोग इसे न्याय के मंदिर के रूप में देखते हैं। बता दें कि भारत की बड़ी आबादी न्याय के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय तक जाने का जोखिम नहीं उठा सकती। धन की कमी, सामाजिक या आर्थिक पिछड़ेपन या किसी अन्य विकलांगता के आधार पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अधिकार से वंचित होने की इस भावना को दूर करने के लिए इस संस्था का गठन किया गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Access To Justice: </strong>मुफ्त कानूनी सहायता के जरिए न्याय तक पहुंच</h3>



<p>SCLSC के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान करने की पूरी अवधारणा की कल्पना की गई थी। बड़े पैमाने पर लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का उद्देश्य अधूरा रह जाता, अगर यह अधिकार सर्वोच्च न्यायालय &#8211; सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए जनता के लिए उपलब्ध नहीं होता। व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से (कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत), सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति का गठन किया गया था।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/international/plane-collision-5-crew-members-of-coast-guard-aircraft-killed/">Plane Collision: तटरक्षक विमान के 5 Crew Members की मौत</a></p>
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