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	<title>Delhi High Court Orders Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Delhi High Court Orders Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>Delhi High Court: कैदियों को माता-पिता बनने का है मौलिक अधिकार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-high-court-prisoners-have-fundamental-right-to-become-parents/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Dec 2023 08:14:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi High Court Orders]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही माना है कि संतान उत्पत्ति और माता-पिता बनने का अधिकार एक दोषी का मौलिक अधिकार है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह अधिकार प्राप्त है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार पूर्ण नहीं है, बल्कि संदर्भ पर निर्भर करता &#8230;]]></description>
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<p><strong>Delhi High Court:</strong> दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही माना है कि संतान उत्पत्ति और माता-पिता बनने का अधिकार एक दोषी का मौलिक अधिकार है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह अधिकार प्राप्त है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार पूर्ण नहीं है, बल्कि संदर्भ पर निर्भर करता है और कैदी के माता-पिता की स्थिति और उम्र जैसे कारकों पर विचार करके, व्यक्तिगत अधिकारों और व्यापक सामाजिक विचारों के बीच नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए एक निष्पक्ष और उचित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Delhi High Court: कोर्ट परंपरा का कर रहा है पालन</h3>



<p>पीठ ने कहा, “भारत में न्यायपालिका ने हमेशा यह मानने से इनकार कर दिया है कि कैदियों के पास कोई मौलिक अधिकार नहीं है, यह न्यायालय उसी परंपरा का पालन कर रहा है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने सौंपी है और यह न्यायालय सम्मानपूर्वक संवैधानिक अधिकारों की व्याख्या करता है। नई स्थितियों और चुनौतियों को बनाए रखने और शामिल करने का मानना ​​है कि माता-पिता बनने और संतानोत्पत्ति का अधिकार किसी मामले की विशिष्ट परिस्थितियों में दोषी का मौलिक अधिकार है ”।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Delhi High Court: कुंदन सिंह की याचिका पर सुनवाई</h3>



<p>न्यायालय का विचार था कि दोषी ठहराए जाने और जेल में डाले जाने से विवाहित जीवन के कई पहलू सीमित हो जाते हैं, लेकिन अदालतों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दोषी को पैरोल देने से इनकार करने से उसके भविष्य के जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा कि दोषसिद्धि के बाद दंड देना नहीं बल्कि दंडित करना है। न्यायमूर्ति शर्मा हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुंदन सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Delhi High Court: संतान चाहता है दोषी कुंदन</h3>



<p>14 साल जेल में बिताने के बाद, सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि वह 41 साल का है और उसकी पत्नी 38 साल की है। उनके कोई बच्चा नहीं है और वे संतान पैदा करके अपने वंश की रक्षा करना चाहते हैं। अदालत को बताया गया कि सिंह कुछ मेडिकल परीक्षण कराना चाहते हैं और दंपति इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के जरिए बच्चा पैदा करना चाहते हैं।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/big-news/ram-mandir-inauguration-dont-invite-the-murderers-of-ram-devotees-to-the-consecration-ceremony/">Ram Mandir Inauguration:’राम भक्तों के हत्यारों को प्राण प्रतिष्ठा में ना बुलाएं’, बीजेपी सांसद सुब्रत का बड़ा बयान</a></p>
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		<item>
		<title>Delhi HC: संपत्ति दस्तावेजों को आधार से जोड़ने की याचिका पर सरकार ले फैसला</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-hc-government-should-take-decision-on-the-petition-to-link-property-documents-with-aadhaar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Dec 2023 08:02:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BJP leader Ashwini Kumar Upadhyay]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi High Court Orders]]></category>
		<category><![CDATA[PIL]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से संपत्ति दस्तावेजों को आधार से जोड़ने की याचिका पर तीन महीने के भीतर फैसला करने को कहा है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की खंडपीठ ने सरकार को भारतीय जनता पार्टी नेता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका (पीआईएल) को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi High Court: </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से संपत्ति दस्तावेजों को आधार से जोड़ने की याचिका पर तीन महीने के भीतर फैसला करने को कहा है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की खंडपीठ ने सरकार को भारतीय जनता पार्टी नेता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका (पीआईएल) को एक प्रतिनिधित्व के रूप में मानने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Delhi High Court: </strong>सरकार पर छोड़ देना बेहतर</h3>



<p>कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे सरकार पर छोड़ देना बेहतर है। आगे कोर्ट ने कहा, &#8220;कोई नहीं कह रहा है कि भ्रष्टाचार कोई समस्या नहीं है। समस्या अनुभवजन्य साक्ष्य है। सरकार को अध्ययन करना होगा और दोनों के अंतर और लाभों को देखना होगा&#8230; यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे हम यहां बैठकर कर सकें&#8221;।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Delhi High Court: </strong>याचिकाकर्ता से ले सकते हैं मदद</h3>



<p>खंडपीठ ने आगे कहा कि यदि आवश्यक हो तो अधिकारी उपाध्याय से भी सहायता ले सकते हैं। उपाध्याय ने अदालत में दलील दी कि आधार को संपत्ति दस्तावेजों से जोड़ने से भ्रष्टाचार, काले धन और बेनामी लेनदेन पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निर्धारित लक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने और बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के लिए कदम उठाने के लिए बाध्य है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/uttarakhand/uttarakhand-tribal-areas-will-be-connected-by-roads-under-pm-janman-yojana/">Uttarakhand: पीएम जनमन योजना के तहत सड़कों से जुड़ेंगे जनजातीय क्षेत्र</a></p>
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		<item>
		<title>दिल्ली: उच्च न्यायालय का “गतिशील निषेधादेश”, गैरकानूनी तरीके से वर्ल्ड कप प्रसारित करने का है मामला</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-dynamic-injunction-of-delhi-high-court-in-case-of-illegal-telecast-of-world-cup/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Oct 2023 10:02:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi High Court’s Dynamic Injunction: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को नौ वेबसाइटों को आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप, 2023 मैचों के अवैध प्रसारण से रोक दिया। हालाँकि, बता दें, विश्व कप इस साल 5 अक्टूबर से 9 नवंबर के बीच होने वाला है। लेकिन कोर्ट ने विश्व कप शुरू होने से पहले वर्ल्ड कप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi High Court’s Dynamic Injunction:</strong> दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को नौ वेबसाइटों को आईसीसी पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप, 2023 मैचों के अवैध प्रसारण से रोक दिया। हालाँकि, बता दें, विश्व कप इस साल 5 अक्टूबर से 9 नवंबर के बीच होने वाला है। लेकिन कोर्ट ने विश्व कप शुरू होने से पहले वर्ल्ड कप के प्रसारक, स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में एक &#8220;गतिशील निषेधाज्ञा&#8221; पारित कर दी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कॉपीराइट का है उल्लंघन</h2>



<p>उच्च न्यायालय ने यह देखा कि कुछ वेबसाइट जो पहले कॉपीराइट के उल्लंघन के तहत सामग्री की चोरी में शामिल रही हैं। ऐसी संभावना है कि &#8220;विश्व कप 2023 के दौरान भी वे कॉपीराइट का उल्लंघन जारी रखेगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रथिबा सिंह की एकल पीठ ने कहा कि इससे &#8220;स्टार इंडिया के राजस्व में गंभीर सेंध लगेगी”।</p>



<h2 class="wp-block-heading">गतिशील निषेधाज्ञा क्या है?</h2>



<p>गतिशील निषेधाज्ञा न्यायालय द्वारा जारी एक कानूनी और आधिकारिक आदेश है। आमतौर पर किसी को कुछ करने से रोकने के लिए इस तरह का आदेश जारी किया जाता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में, ऐसे निषेधाज्ञा अदालत द्वारा तभी दी जाती है जब अदालत काम की पहचान करती है और उस काम में वादी का कॉपीराइट निर्धारित करती है। बता दें, कॉपीराइट कार्यों को समय पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए, अदालतें कभी-कभी &#8220;गतिशील&#8221; निषेधाज्ञा की अवधारणा पर भरोसा करती हैं। इसलिए इस तरह का आदेश जारी किया जाता है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="राज्यसभा सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी के खिलाफ आप कार्यकर्ताओं का देशभर में हल्ला बोल">Delhi: राज्यसभा सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी के खिलाफ आप कार्यकर्ताओं का देशभर में हल्ला बोल</a></p>
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			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली: गाजियाबाद स्थित पिज़्ज़ा आउटलेट को &#8216;डोमिनिक पिज्जा&#8217; ट्रेडमार्क उपयोग करने पर प्रतिबंध</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-ghaziabad-based-pizza-outlet-banned-from-using-dominics-pizza-trademark/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Oct 2023 07:51:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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		<category><![CDATA[Domino&#039;s Pizza]]></category>
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		<category><![CDATA[Pizza lover]]></category>
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					<description><![CDATA[Pizza Outlet: दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में एक स्थायी निषेध आदेश जारी कर गाजियाबाद स्थित पिज्जा आउटलेट को &#8216;डोमिनिक पिज़्ज़ा&#8217; मार्क का उपयोग करने से रोक लगा दिया। कोर्ट ने कहा, क्योंकि यह बहुराष्ट्रीय पिज़्ज़ा कंपनी डोमिनोज़ पिज़्ज़ा के ट्रेडमार्क का उल्लंघन था। मामले की सुनवाई में न्यायमूर्ति सी हरि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Pizza Outlet:</strong> दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में एक स्थायी निषेध आदेश जारी कर गाजियाबाद स्थित पिज्जा आउटलेट को &#8216;डोमिनिक पिज़्ज़ा&#8217; मार्क का उपयोग करने से रोक लगा दिया। कोर्ट ने कहा, क्योंकि यह बहुराष्ट्रीय पिज़्ज़ा कंपनी डोमिनोज़ पिज़्ज़ा के ट्रेडमार्क का उल्लंघन था। मामले की सुनवाई में न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने पाया कि &#8216;डोमिनोज़ पिज़्ज़ा&#8217; और &#8216;डोमिनिक्स पिज़्ज़ा&#8217; ध्वनी के रूप से समान यानी सुनने में एक जैसा लगता है और ट्रेड चिह्नों ग्राहक को भ्रामित करेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ग्राहक हो सकते हैं भ्रमित</h3>



<p>न्यायाधीश ने बताया कि अगर औसत बुद्धि और अपूर्ण याददाश्त वाला कोई ग्राहक डोमिनोज़ आउटलेट पर जाता है और फिर डोमिनिक पिज़्ज़ा आउटलेट पर जाता है। तो उत्पाद खरीदने को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रतीत हो रहा है समान ट्रेडमार्क</h3>



<p>कोर्ट ने कहा, &#8220;जिस तरह से डोमिनिक पिज़्ज़ा वाले ने अपने LOGO को वर्गाकार रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है वे डोमिनोज द्वारा उपयोग किए गए अक्षरों के समान लगतै है, इससे भ्रम की संभावना बढ़ जाएगी।&#8221; न्यायाधीश ने इस बात पर भी जोर दिया कि अदालतों को यह सुनिश्चित करने में सतर्क रहना होगा कि ऐसे प्रयासों को ट्रेडमार्क में अनियंत्रित न होने दिया जाए। विशेषकर जब वे वस्तु जो भोजनालय से संबंधित हों।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="जंतर-मंतर से राजघाट तक TMC का हल्ला बोल, मनरेगा के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी">Delhi: जंतर-मंतर से राजघाट तक TMC का हल्ला बोल, मनरेगा के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी</a></p>
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			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली: UGC नियमों में खामियां, छात्रों को मिल रहा अमान्य डिग्री</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-flaws-in-ugc-rules-students-are-getting-invalid-degrees/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Sep 2023 12:41:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi High Court Orders]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[UGC]]></category>
		<category><![CDATA[universities]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi High Court:&#160;दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC से पूछा है कि क्या ऐसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है, जो छात्रों को कोर्स की ऐसी डिग्रियां ऑफर करते हैं, जो मान्य नहीं हैं। बता दें, ऐसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विरूद्ध UGC एक्ट, 1956 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi High Court:</strong>&nbsp;दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC से पूछा है कि क्या ऐसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है, जो छात्रों को कोर्स की ऐसी डिग्रियां ऑफर करते हैं, जो मान्य नहीं हैं। बता दें, ऐसे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विरूद्ध UGC एक्ट, 1956 के सेक्शन-24 के तहत जुर्माने का प्रावधान है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विश्वविद्यालयों में नहीं दी जाएगी अमान्य डिग्री</strong></h3>



<p>दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने ऑर्डर में कहा कि समय-समय पर यूजीसी अपने वेबसाइट पर नोटिफिकेशन जारी करती है। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए यह सुनिश्चित करना है कि छात्र ऐसे कॉलेज और विश्वविद्यालय से बचे जो अमान्य डिग्रियां ऑफर करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की लापरवाही</h3>



<p>मामले मे न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने यह आदेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की लापरवाही को उजागर करने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अमान्य विश्वविद्यालयों,संस्थानों और कॉलेजों के संबंध में आयोग आगे आएगा।और प्रत्येक शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले वर्ष में कम से कम दो बार अमान्य डिग्रियों की मिलान सूची का व्यापक प्रकाशन सुनिश्चित करेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अंधकार में</strong> <strong>छात्रों का भविष्य </strong></h3>



<p>इस मामले में वकील विक्रम सिंह कुशवाह ने याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि यूजीसी के कानूनों और नियमों में खामियों की वजह से छात्रों को ऐसी डिग्री दी जाती है जो यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। यह एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करता है जिसमें छात्रों को ऐसे भविष्य के लिए अपना समय, पैसा और प्रयास बर्बाद करना पड़ता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नियमों का संस्थान करे अनिवार्य रूप से पालन</strong></h3>



<p>उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यूजीसी द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को पत्र के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया था कि संस्थान नियमों का पालन करे।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/delhi-accused-cannot-be-leveled-on-the-basis-of-old-video-accused-acquitted/">दिल्ली: पुराने वीडियो के आधार पर आरोप नहीं लगाया जा सकता, आरोपी बरी</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्पाइसजेट को दिल्ली हाईकोर्ट से तगड़ा झटका, कलानिधि मारन की बकाया रकम पर देना होगा ब्याज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/big-blow-to-spicejet-from-delhi-high-court-will-have-to-pay-interest-on-kalanithi-marans-dues/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Aug 2023 14:12:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[Business]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi High Court Orders]]></category>
		<category><![CDATA[SpiceJet]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (24 अगस्त) को स्पाइसजेट एयरलाइन को पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन की बकाया रकम पर ब्याज में राहत देने से इनकार किया है। हाईकोर्ट ने चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह से 10 सितंबर तक कलानिधि मारन करने और ₹100 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है। उसने यह भी दिलाया कि अगर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (24 अगस्त) को स्पाइसजेट एयरलाइन को पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन की बकाया रकम पर ब्याज में राहत देने से इनकार किया है। हाईकोर्ट ने चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह से 10 सितंबर तक कलानिधि मारन करने और ₹100 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है। उसने यह भी दिलाया कि अगर एयरलाइन ऐसा नहीं करती है, तो हाईकोर्ट उसकी संपत्ति कुर्क करने की विचार कर सकती है।</p>



<p>बता दें अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। स्पाइसजेट द्वारा कहा गया है कि कंपनी एविएशन सेक्टर में बचाव के लिए संघर्ष कर रही है और पिछले काफी समय से आर्थिक संकट का सामना कर रही है। इस पर ध्यान देते हुए, कंपनी के पूर्व मालिक को बकाया राशि पर ब्याज के भुगतान में राहत देने का आदेश दिया गया है। स्पाइसजेट के स्पोक्सपर्सन ने इसके साथ ही बताया कि कंपनी अदालत के आदेश का पालन करेगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाया ब्याज का भुगतान कर देगी।</p>



<p>बता दें कलानिधि मारन और स्पाइसजेट के बीच विवाद की शुरुआत 2015 में तब शुरू हुई थी जब अजय सिंह ने मारन से स्पाइसजेट को वापस खरीद लिया था। कलानिधि ने एयरलाइन में अपनी 58.46% की हिस्सेदारी अजय सिंह को दे दी थी। इस सौदे के बदले मारन को एयरलाइन के प्रमोटर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा निवेश किए गए पैसे के बदले में Redeemable Warrants मिलने थे। मारन 18 करोड़ वारंट प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी थे, जिसका मतलब स्पाइसजेट में 26% हिस्सेदारी थी। लेकिन मारन को न अपने हिस्से का पैसा मिला, न परिवर्तनीय वारंट ना ही Preference Shares.</p>



<p>ये भी पढ़ें: <a href="https://hindikhabar.com/business/no-work-in-banks-for-16-days-in-september-settle-banking-related-work-in-advance/">सितंबर में 16 दिन बैंकों में कामकाज नहीं, पहले ही निबटा लें बैंकिंग से जुडे़ काम</a></p>
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