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	<title>Constitution Day Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<lastBuildDate>Thu, 01 Jan 2026 08:55:45 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Constitution Day Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>पंजाब में संविधान दिवस पर मॉक विधानसभा सत्र आयोजित, विद्यार्थियों को राजनीति में भागीदारी के लिए किया गया प्रेरित</title>
		<link>https://hindikhabar.com/constitution-day-mock-assembly-session-punjab-students-politics-participation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 08:55:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Ravjot Singh]]></category>
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		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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		<category><![CDATA[students participation]]></category>
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					<description><![CDATA[Chandigarh : पंजाब सरकार ने संविधान दिवस के अवसर पर आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के कार्यक्रमों के तहत विशेष रूप से तैयार की गई पंजाब विधानसभा में राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए मॉक विधानसभा सत्र आयोजित कर उन्हें प्रोत्साहित किया, ताकि प्रदेश के विद्यार्थी राजनीति &#8230;]]></description>
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<p><strong>Chandigarh : </strong>पंजाब सरकार ने संविधान दिवस के अवसर पर आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के कार्यक्रमों के तहत विशेष रूप से तैयार की गई पंजाब विधानसभा में राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए मॉक विधानसभा सत्र आयोजित कर उन्हें प्रोत्साहित किया, ताकि प्रदेश के विद्यार्थी राजनीति में भागीदारी करें और भविष्य के नेता बनने के योग्य बन सकें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आज के विद्यार्थी ही भविष्य के नेता हैं – रवजोत सिंह</h3>



<p>इस अवसर पर पंजाब के संसदीय कार्य मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने विभिन्न नेताओं की भूमिका निभा रहे विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य के नेता हैं और पंजाब सरकार की यह विशेष पहल राज्य के बच्चों को शासन करने योग्य बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने इस मौके पर स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए राजनीति में बढ़-चढक़र भाग लेने की अपील भी की।</p>



<p>डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि चालू वर्ष के दौरान बी.बी.एम.बी. और मनरेगा मामलों से संबंधित विशेष विधानसभा सत्र भी आयोजित किए गए हैं। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 से पंजाब विधानसभा के समूचे कामकाज को कागज-रहित कर दिया गया है और विधानसभा सत्र का पूरा कार्य पूर्णत: डिजिटल और पेपरलेस तरीके से किया जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) परियोजना लागू</h3>



<p>पंजाब विधानसभा में पहली बार नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) परियोजना लागू की गई है। विधायकों और प्रशासनिक सचिवों को नई प्रणाली के तहत कार्य करने का प्रशिक्षण दिया गया है। पंजाब विधानसभा के कामकाज को हाई-टेक बनाने और आधुनिक तकनीक से जोडऩे के लिए डिजिटल विंग की स्थापना की गई है। डिजिटल विंग में आईटी सेल, एनआईसी सेल, हाई-टेक ट्रेनिंग रूम (नेवा सेवा केंद्र), हाई-टेक कंट्रोल रूम और नेटवर्क कंट्रोल रूम शामिल हैं।</p>



<p>नेवा ऐप के उपयोग से जहां सदन की कार्यवाही की लाइव वेबकास्टिंग के माध्यम से जनता की भागीदारी बढ़ी है, वहीं पंजाब विधानसभा सचिवालय का कामकाज भी अधिक सुगम हुआ है। सदन में कागजात भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रस्तुत किए जा रहे हैं और विधानसभा सदस्यों तथा स्टाफ को कागज-रहित सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें &#8211;</strong> <a href="http://15,000 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने ब्लॉक अधिकारी को किया गिरफ्तार">15,000 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने ब्लॉक अधिकारी को किया गिरफ्तार</a></p>



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<p><a href="https://hindikhabar.com/#whatsapp" rel="noreferrer noopener" target="_blank"></a></p>
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		<title>Secularism: सभी धर्मों के लोगों को करना चाहिए धर्मनिरपेक्षता का पालन</title>
		<link>https://hindikhabar.com/secularism-people-of-all-religions-should-follow-secularism/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 12:14:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[fundamental duties]]></category>
		<category><![CDATA[fundamental right]]></category>
		<category><![CDATA[secularism]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[Secularism: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह ने रविवार को कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए धर्मनिरपेक्षता का पालन करना अनिवार्य बनाता है और इसे चयनात्मक नहीं किया जा सकता है या इसे केवल एक धार्मिक समूह के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा, भारत में रहने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Secularism: </strong>सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह ने रविवार को कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए धर्मनिरपेक्षता का पालन करना अनिवार्य बनाता है और इसे चयनात्मक नहीं किया जा सकता है या इसे केवल एक धार्मिक समूह के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा, भारत में रहने वाले सभी लोगों और सभी समुदायों को धर्मनिरपेक्षता का पालन करना चाहिए क्योंकि यह संविधान के तहत मौलिक कर्तव्यों में से एक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Secularism: </strong>सभी धर्मों द्वारा अपनाया जाए</h3>



<p>न्यायमूर्ति ने कहा, &#8220;संविधान के अनुसार, हम धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन धर्मनिरपेक्षता एकतरफा या केवल एक धर्म या समुदाय द्वारा नहीं हो सकती है। इसे भारत में रहने वाले सभी धर्मों और नागरिकों द्वारा अपनाया जाना चाहिए और यह चयनात्मक नहीं हो सकता है। अन्य धर्मों का सम्मान करना मौलिक कर्तव्यों का एक हिस्सा है’’। न्यायाधीश ने आगे कहा कि संविधान में मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य दोनों दिए जाने के बावजूद, नागरिक अक्सर केवल अधिकारों के बारे में ही बोलते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या कर्तव्य के बारे में सोचते हैं नागरिक?</h3>



<p>न्यायाधीश ने ने कहा, &#8220;सवाल यह है कि जब नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं तो क्या वे अपने कर्तव्यों के बारे में सोचते हैं? हर कोई अधिकारों के बारे में बात करना चाहता है लेकिन कर्तव्यों के बारे में नहीं&#8221;। बता दें कि न्यायाधीश  20 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए टिप्पणी की।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/national/stalin-unveiled-the-statue-of-former-pm-vp-singh-in-chennai/">चेन्नई में स्टालिन ने पूर्व पीएम वीपी सिंह की प्रतिमा का किया अनावरण</a></p>
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		<item>
		<title>Vice President: संसद लोगों की इच्छा को करती है प्रतिबिंबित, अपने संबोधन में VP ने कहा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/vice-president-parliament-reflects-the-will-of-the-people-vp-said-in-his-address/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 11:01:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[PARLIAMENT]]></category>
		<category><![CDATA[RAJYASABHA CHAIR]]></category>
		<category><![CDATA[vice president]]></category>
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					<description><![CDATA[Vice President: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि संसद भारत के संविधान की एकमात्र वास्तुकार है और न तो न्यायपालिका और न ही कार्यपालिका इसके मामलों में हस्तक्षेप कर सकती है। उन्होंने आगे कहा, &#8220;जब संविधान सभा द्वारा संविधान विकसित किया गया था, तो संदेश जोरदार और स्पष्ट था&#8230;यह संसद के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Vice President:</strong> भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि संसद भारत के संविधान की एकमात्र वास्तुकार है और न तो न्यायपालिका और न ही कार्यपालिका इसके मामलों में हस्तक्षेप कर सकती है। उन्होंने आगे कहा, &#8220;जब संविधान सभा द्वारा संविधान विकसित किया गया था, तो संदेश जोरदार और स्पष्ट था&#8230;यह संसद के विशेष क्षेत्र में है और किसी अन्य एजेंसी को छोड़कर केवल संसद ही संविधान की निर्माता है&#8230; चाहे वह कार्यपालिका हो या न्यायपालिका।” उपराष्ट्रपति ने बताया, संसद सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को नहीं लिख सकती और इसी तरह, सर्वोच्च न्यायालय हमारे लिए किसी कानून को नहीं बना सकता।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Vice President:</strong> लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है संसद</h3>



<p>उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा, &#8220;संसद लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करती है और लोग एक वैध तंत्र के माध्यम से वहां मौजूद हैं। संविधान के एकमात्र वास्तुकार के रूप में संसद की सर्वोच्चता है और कार्यपालिका या न्यायपालिका द्वारा हस्तक्षेप के लिए उत्तरदायी नहीं है। न्यायपालिका भी तब जीवित रहती है जब इसे संसद द्वारा पवित्र किया जाता है। लोगों का जनादेश लोगों की इच्छा में किसी भी घुसपैठ की इजाजत नहीं दे सकता।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">संविधान दिवस के मौके कर रहे थे संबोधित</h3>



<p>उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय में संविधान दिवस समारोह के दौरान बोलते हुए यह टिप्पणी की, ‘’डॉ. बीआर अंबेडकर ने कभी नहीं सोचा था कि संसद की शक्तियों में घुसपैठ हो सकती है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि किसी भी अंग का अपमान न हो’’। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि विधायिका को कानून बनाने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए, कार्यपालिका को किसी भी कानून को लागू करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए और न्यायपालिका को कानूनों की व्याख्या करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/cji-ambedkars-statue-is-a-symbol-of-strong-commitment-towards-brotherhood/">CJI: भाईचारे के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है अम्बेडकर की मूर्ति</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>CJI: भाईचारे के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है अम्बेडकर की मूर्ति</title>
		<link>https://hindikhabar.com/cji-ambedkars-statue-is-a-symbol-of-strong-commitment-towards-brotherhood/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 10:17:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BR Ambedkar Statue]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Justice of india]]></category>
		<category><![CDATA[CJI]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[DR AMBEDKAR]]></category>
		<category><![CDATA[DY Chandrachood]]></category>
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					<description><![CDATA[CJI: भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने संविधान दिवस के मौके पर रविवार को कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर केवल दलित समुदाय के नेता नहीं हैं, बल्कि वह पूरे देश के नेता हैं। सीजेआई ने सामाजिक न्याय के लिए लोगों को संगठित करने के डॉ. अंबेडकर के प्रयासों पर विशेष रूप से चर्चा की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>CJI: </strong>भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने संविधान दिवस के मौके पर रविवार को कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर केवल दलित समुदाय के नेता नहीं हैं, बल्कि वह पूरे देश के नेता हैं। सीजेआई ने सामाजिक न्याय के लिए लोगों को संगठित करने के डॉ. अंबेडकर के प्रयासों पर विशेष रूप से चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय केवल हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने संबोधित करते हुए कहा, &#8221; डॉ. अंबेडकर सभी के हैं। वह सिर्फ दलितों के नेता नहीं हैं, वह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही कारण है कि हम यह सत्र आयोजित कर रहे हैं और प्रतिमा स्थापित कर रहे है&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>CJI: </strong>भाईचारे के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है मूर्ति</h3>



<p>मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. अम्बेडकर की मुख्यधारा के साथ पहचान और इसमें सुधार के उनके प्रयासों को रेखांकित किया। सीजेआई के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अंबेडकर की मूर्ति समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। सीजेआई ने आगे कहा, &#8220;उन्होंने खुद को मुख्यधारा के हिस्से के रूप में पहचाना और इसे सुधारने का प्रयास किया। यह प्रतिमा स्वतंत्रता और भाईचारे के साथ समानता की स्थायी भावना का प्रतिनिधित्व करती है।&#8221; उन्होंने सकारात्मक कार्रवाई के महत्व पर भी चर्चा की और कहा कि यह व्यक्तियों को समान स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>CJI:</strong> महिला प्रतिनिधित्व पर की टिप्पणी</h3>



<p>मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर, टिप्पणी करते हुए बताया कि बार और जिला न्यायपालिका में उपलब्ध प्रतिभा का सीमित पूल उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व में योगदान देता है। उन्होंने जिला न्यायपालिका में सकारात्मक विकास का भी उल्लेख किया जहां अब 60-80% नई भर्तियां महिलाएं हैं।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/constitution-day-demand-to-ban-the-practice-of-making-free-promises-during-elections/">Constitution Day: चुनाव के दौरान मुफ्त वादा करने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग</a></p>
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			</item>
		<item>
		<title>Constitution Day: चुनाव के दौरान मुफ्त वादा करने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग</title>
		<link>https://hindikhabar.com/constitution-day-demand-to-ban-the-practice-of-making-free-promises-during-elections/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 08:10:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[Election Commission]]></category>
		<category><![CDATA[Election News]]></category>
		<category><![CDATA[nhrc chaiperson]]></category>
		<category><![CDATA[NHRC Foundation Day]]></category>
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					<description><![CDATA[Constitution Day: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त का वादा करने की प्रथा पर उचित कानून बनाकर अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि वैध वादों और मुफ्त सुविधाओं के माध्यम से मतदाताओं को लुभाने के बीच अंतर को उचित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Constitution Day:</strong> राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त का वादा करने की प्रथा पर उचित कानून बनाकर अंकुश लगाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि वैध वादों और मुफ्त सुविधाओं के माध्यम से मतदाताओं को लुभाने के बीच अंतर को उचित स्तर पर निर्धारित किया जाना चाहिए, भले ही इसके लिए कानून की आवश्यकता हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Constitution Day:</strong> स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की है आवश्यकता</h3>



<p>बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह में बोल रहे थे। पूर्व न्यायाधीश ने सकारात्मक सुधार लाने में पत्र याचिकाओं और जनहित याचिका (पीआईएल) याचिकाओं के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। हालांकि, उन्होंने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उनके दुरुपयोग के प्रति आगाह किया और ऐसी प्रथाओं को रोकने का आग्रह किया। संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिंसा की निंदा करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि निष्पक्ष चुनाव को मौलिक मानवाधिकार के रूप में मान्यता दी गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हाशिए पर मौजूद वर्गों के लिए जताई चिंता</h3>



<p>एनएचआरसी अध्यक्ष ने विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पिछड़े वर्गों के भीतर हाशिए पर मौजूद वर्गों के उत्थान के लिए सकारात्मक कार्यों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मौजूदा उपायों के सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति मिश्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इन समुदायों के भीतर कुछ वंचित वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए अभी भी आरक्षण की आवश्यकता है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/constitution-day-collaborative-dialogue-between-the-executive-judiciary-and-legislature/">Constitution Day: कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बीच हो सहयोगात्मक बातचीत</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Constitution Day: कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बीच हो सहयोगात्मक बातचीत</title>
		<link>https://hindikhabar.com/constitution-day-collaborative-dialogue-between-the-executive-judiciary-and-legislature/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Nov 2023 16:24:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[excutive]]></category>
		<category><![CDATA[Jagdeep Dhankhad]]></category>
		<category><![CDATA[Judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[legislature]]></category>
		<category><![CDATA[vice president]]></category>
		<category><![CDATA[vigyan bhavan]]></category>
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					<description><![CDATA[Constitution Day: संविधान दिवस के मौके पर देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने संबोधन में संसद की संप्रभुता को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि इसके विशेष क्षेत्र में किसी भी तरह का अतिक्रमण एक संवैधानिक संकट होगा, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Constitution Day: </strong>संविधान दिवस के मौके पर देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने संबोधन में संसद की संप्रभुता को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि इसके विशेष क्षेत्र में किसी भी तरह का अतिक्रमण एक संवैधानिक संकट होगा, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के विज्ञान भवन में कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Constitution Day: </strong>टकराव के बजाय हो सहयोगात्मक बातचीत </h3>



<p>उन्होंने आगे कहा कि देश के निरंतर विकास के लिए, कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को टकराव की धारणा अपनाने के बजाय सहयोगात्मक बातचीत में शामिल होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा, &#8220;संसद लोकतंत्र की आत्मा है, इसकी सर्वोच्चता कार्यपालिका या न्यायपालिका के किसी भी हस्तक्षेप के लिए उत्तरदायी नहीं है।&#8221;</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">To ensure continual growth of Bharat; it is imperative, it is unavoidable, it is a must that the Executive, the Judiciary and the Legislature generate collaborative discourse rather than the confrontational perception. <a href="https://twitter.com/hashtag/ConstitutionDay?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ConstitutionDay</a> <a href="https://t.co/eHmZyBXgPc">pic.twitter.com/eHmZyBXgPc</a></p>&mdash; Vice-President of India (@VPIndia) <a href="https://twitter.com/VPIndia/status/1728805233101279478?ref_src=twsrc%5Etfw">November 26, 2023</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<h3 class="wp-block-heading">370 का मसौदा किया था इनकार</h3>



<p>राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 मसौदा समिति द्वारा तैयार नहीं किया गया था। उपराष्ट्रपति ने कहा, अन्य सभी लेखों का मसौदा तैयार किया गया था, और डॉ. अंबेडकर ने इसका मसौदा तैयार करने से इनकार कर दिया।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/big-news/milk-production-22-81-increase-in-milk-production-in-last-five-years-up-ahead-in-production/">Milk Production: पिछले पांच सालों में दुध उत्पादन में 22.81% की बढ़ोतरी, उत्पादन में UP आगे</a></p>
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		<item>
		<title>Fellowship: &#8220;अंबेडकर फेलोशिप फॉर पॉलिटिकल चेंज&#8221; प्रोग्राम को मिली हरी झंडी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/fellowship-ambedkar-fellowship-for-political-change-program-gets-green-signal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Nov 2023 15:26:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[aap]]></category>
		<category><![CDATA[Arvind Kejriwal]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi News]]></category>
		<category><![CDATA[Dr BR Ambedkar]]></category>
		<category><![CDATA[FELLOWSHIP]]></category>
		<category><![CDATA[Raghav Chadda]]></category>
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					<description><![CDATA[Fellowship: आम आदमी पार्टी ने अपने स्थापना दिवस पर &#8220;अंबेडकर फेलोशिप फॉर पॉलिटिकल चेंज&#8221; की शुरुआत की है। इस फेलोशिप का उद्देश्य देश के राजनीतिक परिवर्तन में युवाओं को शामिल करना है। राजनीतिक परिवर्तन के लिए अंबेडकर फ़ेलोशिप का इरादा देश के युवाओं को क्षमताओं से लैस करना है, ताकि वो राजनैतिक तौर पर मजबृत &#8230;]]></description>
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<p><strong>Fellowship:</strong> आम आदमी पार्टी ने अपने स्थापना दिवस पर &#8220;अंबेडकर फेलोशिप फॉर पॉलिटिकल चेंज&#8221; की शुरुआत की है। इस फेलोशिप का उद्देश्य देश के राजनीतिक परिवर्तन में युवाओं को शामिल करना है। राजनीतिक परिवर्तन के लिए अंबेडकर फ़ेलोशिप का इरादा देश के युवाओं को क्षमताओं से लैस करना है, ताकि वो राजनैतिक तौर पर मजबृत हो सके। अपनी समस्याओं के समाधान खोज सकें और चुनावों का गहन अवलोकन कर सकें। चयनित फेलोज को फील्ड कैंपेन, मीडिया व संचार एवं अनुसंधान और डेटा विश्लेषण के कार्य में शामिल किया जाना है। यह फ़ेलोशिप 11 महीने के लिए होगी और काम करने का स्थान हाइब्रिड आधार पर होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Fellowship:</strong> ईमानदार और शिक्षित लोग का पार्टी है AAP</h3>



<p>पार्टी स्थापना दिवस के अवसर पर देश के युवाओं को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि &#8220;आप&#8221; भारत के इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ने वाली पार्टी है क्योंकि यह ईमानदार और शिक्षित लोगों की पार्टी है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप देश में कहां रहते हैं। अगर आप में भारतीय राजनीति को बदलने और भारत को दुनिया का नंबर 1 देश बनाने का जज्बा है तो यह फेलोशिप प्रोग्राम आपके लिए एक सुनहरा अवसर है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">क्या आप एक युवा हैं? क्या आप देश बदलना चाहते हैं? क्या आप भारत को दुनिया का नंबर वन देश बनाना चाहते हैं? <br><br>तो बाबा साहिब अंबेडकर फेलोशिप में आप भी हिस्सा लें। आइये मिलकर देश बदलते हैं! आइये मिलकर देश की राजनीति साफ़ करते हैं! <a href="https://t.co/iqDwSHK7wu">https://t.co/iqDwSHK7wu</a></p>&mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) <a href="https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/1728793897076154759?ref_src=twsrc%5Etfw">November 26, 2023</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<h3 class="wp-block-heading">युवाओं के लिए सुनहरा अवसर</h3>



<p>आम आदमी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से कहा गया है कि &#8216;अंबेडकर फ़ेलोशिप फ़ॉर पॉलिटिकल चेंज&#8217; नाम से एक पहल शुरू कर रही है। इस फ़ेलोशिप प्रोग्राम के शुभारंभ के साथ हम राजनीतिक के प्रति उत्साही युवाओं को आमंत्रित कर रहे हैं जिनके पास राजनीति के प्रति जुनून है और वो देश में बदलाव लाना चाहते हैं। आम आदमी पार्टी ने डॉ. बीआर अम्बेडकर के कहे हुए शब्दों को याद करते हुए कहा कि एक सफल क्रांति के लिए केवल असंतोष का होना ही काफी नहीं है, बल्कि न्याय के प्रति पूर्ण विश्वास, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार जरूरी है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/constitution-day-feel-free-to-approach-the-court-cji-said-in-his-address/">Constitution Day: बेझिझक कोर्ट का दरवाजा खटखटाए, CJI ने अपने संबोधन में कहा</a></p>
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		<item>
		<title>संविधान है हमारे लोकतंत्र की जीवन रेखा : मल्लिकार्जुन खड़गे</title>
		<link>https://hindikhabar.com/constitution-is-the-lifeline-of-our-democracy-mallikarjun-kharge/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ankur Pratap Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Nov 2023 13:23:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BJP]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution In India]]></category>
		<category><![CDATA[Freedom of Speech]]></category>
		<category><![CDATA[Mallikarjun Kharge]]></category>
		<category><![CDATA[Modi Govt]]></category>
		<category><![CDATA[RSS]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[खड़गे]]></category>
		<category><![CDATA[बीजेपी]]></category>
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					<description><![CDATA[New Delhi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर संविधान प्रदत्त आजादी को कुचलने और इसमें कटौती करने का हरसंभव तरीका अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही, कहा कि भारत का संविधान हमारे लोकतंत्र की जीवन रेखा है। संविधान निर्माताओं को अत्यंत श्रद्धा से नमन करते हैं खड़गे ने सोशल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>New Delhi: </strong>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर संविधान प्रदत्त आजादी को कुचलने और इसमें कटौती करने का हरसंभव तरीका अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही, कहा कि भारत का संविधान हमारे लोकतंत्र की जीवन रेखा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संविधान निर्माताओं को अत्यंत श्रद्धा से नमन करते हैं</h3>



<p>खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर लिखा कि भारत का संविधान हमारे लोकतंत्र की जीवन रेखा है। जब हम 74 वां संविधान दिवस मना रहे हैं, तो ऐसे में हम इसके निर्माताओं को अत्यंत श्रद्धा से नमन करते हैं। क्योंकि, उन्होंने प्रत्येक भारतीय के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की गारंटी दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सरकार पर लगाया आरोप</h3>



<p>खड़गे ने कहा कि हमारे संविधान को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान शासन संविधान प्रदत्त सभी स्वतंत्रताओं को कुचलने और कम करने के लिए हरसंभव तरीका इस्तेमाल कर रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सामाजिक बदलाव की आड़ में नफरत परोसी जा रही है <strong></strong></h3>



<p>खड़गे ने संविधान दिवस के अवसर पर यह टिप्पणी की। दरअसल, आज ही के दिन 1949 में भारत ने संविधान को अपनाया था। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सामाजिक बदलाव की आड़ में नफरत परोसी जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">असहमति को दबाया जा रहा है</h3>



<p>खड़गे ने कहा कि असहमति को दबाया जा रहा है, संस्थानों को सत्तावादी व्यवस्था लागू करने के बड़े खेल में मोहरा बनने की कगार पर धकेला जा रहा है और सामाजिक बदलाव की आड़ में नफरत परोसी जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लोगों से किया अपील</h3>



<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा-आरएसएस पर संविधान पर व्यवस्थित और तीक्ष्ण हमला करने का आरोप लगाया और लोगों से विभाजन और नफरत की राजनीति के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें &#8211;</strong> <a href="https://hindikhabar.com/national/students-interested-in-judicial-service-should-get-opportunity-president-murmu/">न्यायिक सेवा में रुचि रखने वाले छात्रों को मिले मौका : राष्ट्रपति मुर्मू</a></p>
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		<item>
		<title>Constitution Day Of India: आज के दिन मनाया जाता है संविधान दिवस, पढ़े क्या है इतिहास</title>
		<link>https://hindikhabar.com/constitution-day-is-celebrated-today-read-the-history/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Nov 2023 10:12:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day Of India]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day Of India 2023]]></category>
		<category><![CDATA[history of Constitution Day]]></category>
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					<description><![CDATA[Constitution Day: देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस (Constitution Day) मनाया जाता है. इस दिन को पहले राष्ट्रीय कानून दिवस के तौर पर मनाया जाता था. हालांकि, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय कानून दिवस को बदलकर संविधान दिवस कर दिया. दरअसल, 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Constitution Day:</strong> देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस <strong>(Constitution Day)</strong> मनाया जाता है. इस दिन को पहले राष्ट्रीय कानून दिवस के तौर पर मनाया जाता था. हालांकि, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय कानून दिवस को बदलकर संविधान दिवस कर दिया. दरअसल, 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत के संविधान को अपनाया. इसके बाद 26 नवंबर 1950 को संविधान लागू हुआ, जिसे गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाया जाता है.</p>



<p>हर साल संविधान अपनाने की तारीख को याद करने के लिए संविधान दिवस मनाया जाता है. भले ही संविधान 26 नवंबर, 1949 तक तैयार कर लिया गया था, लेकिन इसे लागू करने से पहले दो महीने तक हर बारीकी पर नजर रखी गई. संविधान को अच्छे से पढ़ा गया और फिर अंग्रेजी से हिंदी में इसका ट्रांसलेशन किया गया. भारत के संविधान को तैयार होने में दो साल, 11 महीने और 18 दिन का वक्त लगा. इस दौरान संविधान सभा ने 166 दिनों तक मुलाकात की.</p>



<h3 class="wp-block-heading">Constitution Day: <strong>24 जनवरी को संविधान सभा में इन लोगों ने किया साइन</strong></h3>



<p>संविधान सभा के सदस्यों ने 24 जनवरी, 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित प्रतियों (हिंदी और अंग्रेजी में एक-एक) पर साइन किया. दो दिन बाद यानी 26 जनवरी, 1950 को भारत का संविधान देश का कानून बन गया और लागू हुआ. इस तरह भारत अंग्रेजों से आजाद होने के बाद एक गणतंत्र बना. संविधान लागू करने से पहले इसमें तय किए गए कानूनों पर काफी बहस हुई. भाषा, अधिकार, अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर संविधान सभा में काफी बहस की गई थी.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>Judicial Appointment: राष्ट्रपति ने AIJS की स्थापना का दिया सुझाव, लंबे समय से हो रही है मांग</title>
		<link>https://hindikhabar.com/judicial-appointment-president-suggested-establishment-of-aijs-demand-has-been-there-for-a-long-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Nov 2023 09:32:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[CJI]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[Draupadi Murmu]]></category>
		<category><![CDATA[President Of India]]></category>
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					<description><![CDATA[Judicial Appointment: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान दिवस के मौके पर रविवार, 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अदालतों में न्यायाधीशों का चयन राष्ट्रव्यापी अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) परीक्षा के आयोजन के माध्यम से किया जा सकता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस तरह के कदम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Judicial Appointment:</strong> भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान दिवस के मौके पर रविवार, 26 नवंबर को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अदालतों में न्यायाधीशों का चयन राष्ट्रव्यापी अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) परीक्षा के आयोजन के माध्यम से किया जा सकता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस तरह के कदम से वंचित पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को न्यायपालिका में शामिल होने में भी मदद मिल सकती है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">वंचित लोगों को मिलेगा लाभ</h2>



<p>आगे उन्होंने कहा, &#8220;आज दुनिया भारत को प्रगति करते देखने का इंतजार कर रही है। हमें वंचित वर्गों के बच्चों को न्यायपालिका में शामिल करने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए। एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है और जो लोग बेंच में रहने की इच्छा रखते हैं उन्हें देश भर से चुना जा सकता है। उन्होंने कहा, &#8221;देश प्रतिभा पूल। मैं एक तंत्र तैयार करने का काम आप पर छोड़ती हूं ताकि न्याय वितरण के इस पहलू को मजबूत किया जा सके।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>Judicial Appointment:</strong> 1986 में गठन करने की हुई सिफारिश</h2>



<p>बता दें कि भारत के विधि आयोग ने 1986 में जारी अपनी 116वीं रिपोर्ट में एआईजेएस के गठन की सिफारिश की थी। 1992 में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि केंद्र द्वारा विधि आयोग की सिफारिशों की &#8220;शीघ्रता से जांच की जाए और लागू किया जाए&#8221;। एआईजेएस बनाने के प्रस्ताव पर कुछ वर्षों से बहस चल रही है, फिर भी इसको लेकर मतभेद हैं जिसके कारण आज तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सरकार और न्यायपालिका के बीच गतिरोध</h2>



<p>बता दें कि केंद्र सरकार ने 2016 में दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि केंद्र और न्यायपालिका के बीच इस मुद्दे को लेकर गतिरोध हैं। अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन पर जनवरी 2017 में कानून मंत्रालय द्वारा औपचारिक रूप से चर्चा भी की गई थी। इसके अलावे पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी अखिल भारतीय स्तर पर न्यायिक अधिकारियों की चयन के लिए एक बॉडी बनाने की बात कही थी। साल 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की भर्ती के लिए एआईजेएस के निर्माण की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार कर दिया, यह देखते हुए कि यह ऐसा कुछ नहीं है जो &#8220;न्यायिक आदेश&#8221; द्वारा किया जा सकता है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/constitution-day-new-initiative-of-supreme-court-portal-launched-for-release-of-prisoners/">Constitution Day: सुप्रीम कोर्ट की नई पहल, कैदियों की रिहाई के लिए पोर्टल लांच</a></p>
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