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	<title>State Police Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>State Police Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>भारत की पुलिस का चेहरा कब बदलेगा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/when-will-the-face-of-indias-police-change/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Jan 2022 09:28:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[India News]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Police System]]></category>
		<category><![CDATA[Police]]></category>
		<category><![CDATA[Police Forces]]></category>
		<category><![CDATA[State Police]]></category>
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					<description><![CDATA[आलोक वर्मा भारत की पुलिस और इसका चेहरा कब बदलेगा? सवाल आपके जेहन में हर उस वक्त में उठता होगा जब आप भारत की पुलिस के बारे में सोचते होंगे या इससे पाला पड़ता होगा। सवाल जायज भी है आजादी की अमृत महोत्सव हम धूमधाम से मना रहे हैं मगर पुलिस अत्याचार की खबरें अभी &#8230;]]></description>
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<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/IMG-20211218-WA0029.jpg" alt="Alok Verma" class="wp-image-213006139408" width="89" height="95"/><figcaption><a href="https://hindikhabar.com/author/alok-verma/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"><strong>आलोक वर्मा</strong></a></figcaption></figure></div>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की पुलिस और इसका चेहरा कब बदलेगा? सवाल आपके जेहन में हर उस वक्त में उठता होगा जब आप भारत की पुलिस के बारे में सोचते होंगे या इससे पाला पड़ता होगा। सवाल जायज भी है आजादी की अमृत महोत्सव हम धूमधाम से मना रहे हैं मगर पुलिस अत्याचार की खबरें अभी भी आम ही हैं। चाहे वह ग्रेटर नोएडा में बदमाश भूरा का फर्जी एनकाउंटर हो या गोरखपुर में होटल में ठहरे कारोबारी को घसीटकर मारने की घटना। </p>



<p class="wp-block-paragraph">यूपी हो या दिल्ली या फिर कोई और राज्य पुलिस की बर्बरता की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कोरोना की शुरूआत में भारत की पुलिस ने अपना इंसानियत वाला चेहरा दिखाने की पूरजोर कोशिश की थी। दिल्ली पुलिस ने दिल की पुलिस का नारा दिया था तो दूसरे राज्यों की पुलिस भी अनाज, भोजन वितरण कर अपनी सहृदयता दिखाने की कोशिश की थी।  लेकिन फिर समय के साथ दिल वाली पुलिस का चेहरा बदल रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने पुलिस हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामलों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रक्षा कवच के बावजूद अभी भी पुलिस हिरासत में शोषण, उत्पीड़न और मौत होती है। इसके चलते पुलिस स्टेशनों में ही मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। हमारे देश में कस्टोडियल डेथ हमेशा ही बहस का विषय रहा है और इस बाबत आंकड़े हमेशा ही डराने वाले रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या कहता है एमसीआरबी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक 2017 में पुलिस हिरासत में कम-से-कम 100 लोगों की मौत हुई जिनमें से अधिकांश निर्दोष थे। इनमें से 58 तो ऐसे थे जिन्हें गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट के सामने पेश भी नहीं किया जा सका था। जबकि 42 ऐसे थे जो पुलिस या न्यायिक रिमांड पर थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एनसीआरबी के ही मुताबिक 2001 से 2018 के बीच पुलिस हिरासत में 1,727 लोग मरे। वहीं नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टार्चर नामक संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि केवल 2019 में हिरासत के दौरान 1,731 मौतें हुईं। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सभी लोग पुलिस की पिटाई से ही मरते हैं। इनमें कुछ बीमारी तो कुछ दूसरे कारणों से भी अपनी जान गंवाते हैं।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="450" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1.jpg" alt="" class="wp-image-213006141617" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1.jpg 800w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1-300x169.jpg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure></div>



<h3 class="wp-block-heading">भारत की पुलिस के लिए लोगों के दिलों में खौफ क्यों?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि  तमाम सरकारी कवायदों भारत की  पुलिस का चेहरा अंग्रेजों की पुलिस से अलग क्यों नहीं हो रही, क्यों लोगों के दिल में पुलिस से मित्रता की जगह खौफ निवास करती है। प्रायः देखा जाता है कि यातनाओं के मामले में पुलिसकर्मी बच कर निकल जाते हैं। ज्यादा कुछ हुआ तो कुछ दिनों के लिए निलंबित हो जाते हैं और फिर काम पर लौट आते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में जिन सौ कैदियों की मौत हुई, उन मौतों के लिए एक भी पुलिस अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">एनसीआरबी द्वारा 2001 से 2018 के बीच जिन 1,727 लोगों की मौत का आंकड़ा दिया गया है, उन मामलों में सिर्फ 26 अधिकारी ही दोषी ठहराए जा सके हैं और इनमें से ज्यादातर जमानत पर बाहर हैं। कस्टोडियल डेथ से अलग देखें तो साल 2000 से 2018 के दौरान पुलिस के खिलाफ 2,041 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें सिर्फ 344 पुलिसकर्मी ही दोषी साबित हो सके। पुलिसकर्मियों के आसानी से बचकर निकल जाने से ही हिरासत में हो रही मौतों पर लगाम नहीं लग पा रही है। वे कैदियों से सच उगलवाने के लिए यातना और हिंसा को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करते हैं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-background wp-block-paragraph" style="background-color:#fffb00"><strong>यह भी पढ़ें:</strong> <a href="https://hindikhabar.com/one-such-group-of-police-system-which-is-cracking-down-on-the-miscreants-of-742-districts/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"><strong>पुलिस सिस्टम का एक ऐसा ग्रुप जो 742 जिलों के बदमाशों पर कस रहा नकेल</strong></a></p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरी वजह है कि देश में पुलिस सुधार का अभाव है। बार-बार सरकारी समितियां और अदालतें पुलिस सुधार की बात करती रही हैं, लेकिन पुलिस सुधार के निर्देशों को हमेशा ही नजरअंदाज किया जाता रहा है। पुलिस सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट गिरफ्तारी के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दे चुका है। इस मामले में 1996 के डीके बसु केस बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला एक नजीर है। गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट ने 11 सूत्रीय दिशानिर्देश जारी किए थे। </p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="450" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2.jpg" alt="" class="wp-image-213006141618" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2.jpg 800w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2-300x169.jpg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure></div>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ महत्वपूर्ण निर्देशों की बात करें तो इनमें एक यह है कि गिरफ्तार या पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मी अपने नाम और पहचान का नेम प्लेट लगा कर रखेंगे। दूसरा, गिरफ्तारी का विवरण रजिस्टर पर दर्ज किया जाएगा जिसमें गिरफ्तारी की तारीख, समय और स्थान का जिक्र होगा। परिवार के किसी सदस्य द्वारा सत्यापित सभी विवरण शामिल होंगे। तीसरा, गिरफ्तारी के समय एक गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के दस्तखत लिए जाएंगे। उसे एक मित्र या रिश्तेदार से बात करने का मौका दिया जाएगा और गिरफ्तार व्यक्ति को उसके अधिकार की सूचना दी जाएगी, लेकिन इन निर्देशों के पालन में कोताही बरती जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि इन सबसे बड़ी बात राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। सता चाहे जिसकी भी हो पुलिस पर अधिकार रखे बिना पावर की फिलिंग ना आने की बात राजनेताओं में घर की हुई है इसकी वजह से पुलिस विभाग का राजनीतिकरण हो गया है। चूंकि पुलिस राज्य का मामला है, ऐसे में राज्य सरकारें अपनी छवि चमकाने के लिए अक्सर ही पुलिस के गुनाहों पर पर्दा डालने की कोशिश करती रहती हैं। साथ ही राज्य सरकारों पर कई बार पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप भी लगते रहे हैं। दशकों से पुलिस सुधार के विभिन्न पहलुओं पर सरकारों की खामोशी समस्या को और जटिल बनाती रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की पुलिस की छवि कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश में रह रहे भारत के गुनहगारों के प्रत्यर्पण में अपेक्षा के विपरीत समय लगता है। क्रिकेट सट्टेबाजी के मामले में सट्टेबाज संजीव चावला ब्रिटेन की अदालत में यह तर्क देकर दो दशक तक प्रत्यर्पण से बचता रहा था कि भारतीय जेलों और पुलिस हिरासत में यातना जगजाहिर है जिससे उसे अपनी जान का खतरा है। जाहिर है पुलिस की यह शैली न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि विश्व समुदाय में भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>Blue Book और ASL Report क्या है? PM Modi की Security से क्या है इसका संबंध</title>
		<link>https://hindikhabar.com/what-is-blue-book-and-asl-report/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Jan 2022 03:35:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Blue Book]]></category>
		<category><![CDATA[PM Modi]]></category>
		<category><![CDATA[pm modi news]]></category>
		<category><![CDATA[Prime Minister]]></category>
		<category><![CDATA[SPG Security]]></category>
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					<description><![CDATA[बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) अपने पंजाब दौरे पर थे। मौसम खराब होने की वजह वे सड़क मार्ग से ही अपने कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। लेकिन इस दौरान रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी के काफिले को रोक दिया। प्रधानमंत्री करीब 20 मिनट कर प्रदर्शनस्थल पर ही रहे। बाद में उन्हें &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) अपने पंजाब दौरे पर थे। मौसम खराब होने की वजह वे सड़क मार्ग से ही अपने कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। लेकिन इस दौरान रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी के काफिले को रोक दिया। प्रधानमंत्री करीब 20 मिनट कर प्रदर्शनस्थल पर ही रहे। बाद में उन्हें बिना कार्यक्रम किए ही दिल्ली लौटना पड़ा। मामले में गृहमंत्रालय सख्त हो गया है और कहा है कि पंजाब पुलिस ने ब्लू बुक (Blue Book) का पालन नहीं किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है Blue Book?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि ब्लू बुक (Blue Book) एक तरह का प्रोटोकॉल है जिसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री के किसी भी दौरे से पहले किया जाता है। इसमें केंद्रीय एजेंसियां ​​और राज्य पुलिस बल शामिल होते हैं। ब्लू बुक (Blue Book) में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश होते हैं और उसी के मुताबिक, प्रधानमंत्री की सुरक्षा की रचना की जाती है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री की पहले निर्धारित की गई यात्रा से तीन दिन पहले, पीएम की सुरक्षा की जिम्मेदारी रखने वाली एसपीजी (विशेष सुरक्षा समूह) द्वारा एक हाई लेवल मीटिंग की जाती है। इसे एएसएल (Advance Security Liaison) कहते हैं। इसमें पीएम के कार्यक्रम से जुड़े आधिकारिक लोग, संबंधित राज्य में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी, राज्य के पुलिस अधिकारी और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट शामिल होते हैं। प्रधानमंत्री के सभी कार्यक्रम को लेकर प्रत्येक बिंदुओं पर चर्चा की जाती है। बैठक खत्म होने के बाद एएसएल रिपोर्ट तैयार की जाती है और उसी के आधार पर सारे इंतजाम किए जाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ब्लू बुक के अनुसार, प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी जवानों के साथ-साथ राज्य पुलिस के हाथों में भी होती है। किसी भी विपरित स्थिति में राज्य पुलिस को प्रधानमंत्री की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आकस्मिक मार्ग तैयार करना होता है। किसी भी बदलाव और अप्रत्याशित घटनाक्रम पर राज्य पुलिस एसपीजी को जानकारी देती है। जिसके बाद उसी सूचना के आधार पर पीएम के मूवमेंट में बदलाव किया जाता है। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>VIP रूट का प्रोटोकॉल क्या है</strong>?</h3>



<p class="wp-block-paragraph"> प्रधानमंत्री और अन्य वीआईपी दौरे के लिए हमेशा ही दो रूट तय होते हैं। इस रूट की जानकारी किसी को पहले से नहीं होती है। एसपीजी ही इस रूट का चुनाव करती है। हालांकि परिस्थियों के मुताबिक, रूट को एसपीजी कभी भी बदल सकती है। पूरे दौरे या कार्यक्रम के दौरान राज्य पुलिस और एसपीजी के बीच बेहतर तालमेल होता है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इस संबंध में पीएम की सुरक्षा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी की हवाई यात्रा के लिए एक हेलीकॉप्टर को 1,000 मीटर दृश्यता की आवश्यकता होती है। “कई बार सर्दियों के दौरान, पीएम को कोहरे के कारण सड़क मार्ग से जाना पड़ता है। अगर किसी वजह से सड़क मार्ग को क्लियरेंस नहीं मिलती तो राज्य पुलिस इसकी अनुमति नहीं देती है। ऐसे में यात्रा रद्द कर दी जाती है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सिविल ड्रेस में होते हैं एनएसजी कमांडो</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि प्रधानमंत्री की कार बुलेटप्रूफ होती है। हमलावरों को गुमराह करने के लिए पीएम के काफिले में दो डमी कारें भी शामिल होती हैं। इसके अलावा कारों पर जैमर एंटिना लगे होते हैं। ये एंटिना सड़क के दोनों ओर रखे गए बमों को 100 मीटर की दूरी पर डिफ्यूज करने में सक्षम होते हैं। इन सभी कारों पर NSG के सटीक निशानेबाजों का कब्जा होता है। इसके अलावा काफिले में सिविल ड्रेस में एनएसजी के कमांडो मौजूद होते हैं।</p>
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		<title>पुलिस सिस्टम का एक ऐसा ग्रुप जो 742 जिलों के बदमाशों पर कस रहा नकेल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/one-such-group-of-police-system-which-is-cracking-down-on-the-miscreants-of-742-districts/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Dec 2021 12:28:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[All India Police Family]]></category>
		<category><![CDATA[Judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[National Police]]></category>
		<category><![CDATA[National Police Group]]></category>
		<category><![CDATA[Police System]]></category>
		<category><![CDATA[State Police]]></category>
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					<description><![CDATA[पुलिस सिस्टम&#8230;। एक ऐसा सिस्टम जो ब्रिटिश राज में बना और अब तक चल रहा है। पुलिस सिस्टम जहां इलाके को लेकर पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई ना करने की बातें आम हैं। जहां ज्यूरिस्डिक्शन(अपने इलाके) को लेकर पुलिसवाले अक्सर आपस में ही उलझते रहते हैं। इसी सिस्टम में चंद पुलिसवालों ने एक ऐसा सामानांतर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>पुलिस सिस्टम&#8230;। एक ऐसा सिस्टम जो ब्रिटिश राज में बना और अब तक चल रहा है। पुलिस सिस्टम जहां इलाके को लेकर पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई ना करने की बातें आम हैं। जहां ज्यूरिस्डिक्शन(अपने इलाके) को लेकर पुलिसवाले अक्सर आपस में ही उलझते रहते हैं। इसी सिस्टम में चंद पुलिसवालों ने एक ऐसा सामानांतर सिस्टम खड़ा कर लिया, जिसमें पूरे देश की पुलिस एक हो गई है। मैं इसी सिस्टम की कहानी लेकर हाजिर हूं।</strong></p>



<h4 class="wp-block-heading">बड़ा होता पुलिस सिस्टम</h4>



<p class="wp-block-paragraph">पुलिस का यह सिस्टम सोशल मीडिया पर खड़ा हो गया है। पुलिस विभाग में यह सिस्टम नेशनल पुलिस ग्रुप के नाम से जाना जाता है। यह पुलिस सिस्टम देश भर के 28 स्टेट, 8 केंद्र-शासित प्रदेश, 742 जिले और 15700 पुलिस थानों तक फैला हुआ है। वर्तमान में नेशनल पुलिस ग्रुप के 13 हजार सदस्य हैं। इनमें 500 से अधिक महिलाएं हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांस्टेबल से लेकर डीजीपी तक इस ग्रुप के सदस्य हैं। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने वाले इस ग्रुप की परिकल्पना दिल्ली पुलिस के एसीपी राजपाल डबास, एसीपी (यूपी पुलिस) विनोद सिंह सिरोही, इंस्पेक्टर (उत्तराखंड) हरपाल सिंह ने की थी। </p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1.jpg" alt="" class="wp-image-213006138298" width="600" height="413" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1.jpg 431w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1-300x207.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<h4 class="wp-block-heading">हम पंछी एक डाल के नाम से बना व्हाट्सएप ग्रुप</h4>



<p class="wp-block-paragraph">हम पंछी एक डाल के नामक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। बाद में सदस्यों की संख्या बढ़ती गई तो हरियाणा पुलिस के यशवंत,सुरेंद्र, केवल सिंह और महाराष्ट्र पुलिस के श्रीराम घोडके आदि भी सक्रिय हुए औऱ टेलीग्राम एप्प पर इस ग्रुप का संचालन शुरू हुआ। समूह आपसी विश्वास के सिद्धांत पर काम करता है और सदस्यों से एक-दूसरे की हरसंभव मदद करने की अपेक्षा की जाती है। समूह में कई सुपरकॉप औऱ एक्सपर्ट हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साल 2014 में 50 पुलिस अफसरों के साथ यह ग्रुप शुरू हुआ था। इस ग्रुप में ना केवल पुलिस के बल्कि सीबीआई, साइबर एक्सपर्ट, आईबी, मिलिट्री इंटेलीजेंस, एनसीबी, एनएचआरसी, एनएचएआई, सेना, कस्टम, नेवी, एयरफोर्स,&nbsp; सभी पैरामिलिट्री फोर्स, एनआईए,डीआरआई, रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी, तकनीकी एकस्पर्ट, नेपाल पुलिस औऱ मिसिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल के अलावा सभी राज्यों और सुरक्षा बलों में भी अलग से ग्रुप बनाए गए है। इसके अलावा क्राइम और क्रिमिनल के तौर तरीकों पर आधारित ग्रुप भी इसी बैनर के अंतर्गत बनाए गए हैं। ग्रुप के सदस्यों को संबंधित राज्य से मदद के लिए प्रशंसा पत्र देने का रिवाज भी इस ग्रुप में है। ग्रुप के सदस्यों में आपसी तालमेल बना रहे इसके लिए हर साल एक गेट-टूगेदर का आयोजन भी किया जाता है। </p>



<h3 class="wp-block-heading">जहां ग्रुप के सदस्य अपराध और आपराधिक सूचनाओं या डाटा को साझा करते हैं। </h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसी तरह महिलाओं के लिए भी अलग से ग्रुप काम कर रहा है जिसमें सभी राज्यों से सिपाही से आईजी स्तर तक की 500 महिलाएं हैं। यहां ग्रुप एडमिन ना होकर एडमिन का समूह होता है। सभी राज्यों औऱ केंद्रशासित प्रदेश से 4-5 लोगों को एडमिन बनाया जाता है। इसके तहत एक कोर ग्रुप भी है जो फैसले लेने का काम करता है। इसी तरह ये ग्रुप फेसबुक पर भी काम करता है। फेसबुक पर इस समय इसके 54 सौ से ज्यादा सदस्य हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading">हर गुजरते दिन के साथ, समूह बड़ा और बड़ा होता जा रहा है, और आने वाले समय में,इसका महत्व और उपयोगिता कैसी होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।</h4>



<p class="wp-block-paragraph">देश की सीमा से निकलकर इस ग्रुप के सदस्य नेपाल तक पहुंच गए हैं। नेपाल पुलिस के साथ साथ ग्रुप में एनसीबी, एमआईए, आईबी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी, आरपीएफ, असम राइफल्स, एयरफोर्स, सेना आदि के जवान और अधिकारी भी इसके सदस्य हैं। जब भी ग्रुप का कोई सदस्य किसी दूसरे इलाके में पुलिसिया कार्रवाई के लिए जाता है ग्रुप के सदस्य उसकी मदद करते हैं। विशेष हालातो में मदद के लिए इस ग्रुप में विभिन्न क्षेत्रों में एक्सपर्ट सीविलियन को भी शामिल किया गया है।</p>
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