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	<title>secularism Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>secularism Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<item>
		<title>संविधान की प्रस्तावना से &#8216;समाजवादी&#8217; और &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; शब्द हटाने की कोई योजना नहीं : कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/there-is-no-plan-to-remove-the-words-socialist-and-secular-from-the-preamble-of-the-constitution-law-minister-arjun-ram-meghwal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 05:01:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution]]></category>
		<category><![CDATA[Constitutional Values]]></category>
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		<category><![CDATA[Socialism]]></category>
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					<description><![CDATA[फटाफट पढ़ें सरकार का हटाने का कोई इरादा नहीं कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन बरकरार रखा &#8216;समाजवादी&#8217; कल्याणकारी राज्य का प्रतीक &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; संविधान की मूल भावना Constitution : कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने साफ किया है कि सरकार का संविधान की प्रस्तावना में &#8216;समाजवादी&#8217; और &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; शब्द हटाने का कोई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h3 class="wp-block-heading">फटाफट पढ़ें</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>सरकार का हटाने का कोई इरादा नहीं</li>



<li>कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई</li>



<li>सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन बरकरार रखा</li>



<li>&#8216;समाजवादी&#8217; कल्याणकारी राज्य का प्रतीक</li>



<li>&#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; संविधान की मूल भावना</li>
</ul>



<p><strong>Constitution :</strong> कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने साफ किया है कि सरकार का संविधान की प्रस्तावना में &#8216;समाजवादी&#8217; और &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; शब्द हटाने का कोई इरादा नहीं है. अदालत ने भी कहा है कि &#8216;समाजवादी&#8217; शब्द कल्याणकारी राज्य को सोच को दर्शाता है, जबकि &#8216;धर्मनिरपेक्ष&#8217; संविधान की मूल भावना का हिस्सा है.</p>



<p>सरकार ने संसद में बताया कि संविधान की प्रस्तावना में &#8216;समाजवादी&#8217; और &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; शब्दों पर पुनर्विचार करने या उन्हें हटाने की कोई योजना वर्तमान में नहीं है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन शब्दों को प्रस्तावना से हटाने के लिए उसने कोई औपचारिक कानूनी या संवैधानिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है. यह जानकारी कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर के माध्यम से दी.</p>



<h3 class="wp-block-heading">राजनीतिक क्षेत्रों में इस पर चर्चा या बहस हो सकती</h3>



<p>कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक क्षेत्रों में इस पर चर्चा या बहस हो सकती है, लेकिन इन शब्दों के संशोधन के संबंध में सरकार द्वारा किसी औपचारिक फैसले या प्रस्ताव की घोषणा नहीं की गई है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई</h3>



<p>कानून मंत्री ने कहा कि सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि संविधान की प्रस्तावना में &#8216;समाजवादी&#8217; और &#8216;धर्मनिरपेक्ष&#8217; शब्दों पर पुनर्विचार करने या उन्हें हटाने की फिलहाल कोई योजना या इरादा नहीं है. मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावना में संशोधन को लेकर किसी भी चर्चा के लिए गहन विचार-विमर्श और व्यापक सर्व-सम्मति की आवश्यकता होगी, लेकिन अब तक सरकार ने इन प्रावधानों में बदलाव करने के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है.</p>



<p>अर्जुनराम मेघवाल ने बताया कि नवंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने 1976 के 42वें संविधान संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति प्रस्तावना तक विस्तारित है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">निजी क्षेत्र के विकास में कोई बाधा नहीं डालता</h3>



<p>न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संदर्भ में &#8216;समाजवादी&#8217; शब्द एक कल्याणकारी राज्य (शासन) को दर्शाता है और यह निजी क्षेत्र के विकास में कोई बाधा नहीं डालता है, जबकि &#8216;पंथनिरपेक्ष&#8217; संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुछ समूह कर रहे हैं पुनर्विचार की वकालत</h3>



<p>वहीं कुछ सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बनाए गए माहौल के बारे में अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हो सकता है कि कुछ समूह अपनी राय व्यक्त कर रहे हों, या इन शब्दों पर पुनर्विचार की वकालत कर रहे हों. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियाँ मुद्दे पर सार्वजनिक विमर्श का माहौल तो बना सकती हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सरकार के आधिकारिक रुख या कार्रवाई को प्रतिबिंबित करे.</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="http://xn--%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20%20,%2023%20%20%20%20%20%20%20%20-cq4l7ap0zshna4ez1dgaggqwmd4ik1b6i1e9ja4b3spc2dttsb5b5lmb1kuaauf1c1lwc3uf4aeu7hvb7bis6cbo2mtdrb7wwdymmasf4i0ctyhijabbbeohudofnj9nhz5fvbzaf7bb6e6d8a03eha2ckob1ev9a4cva20a0bb48927h1fa/">संत सीचेवाल ने कामागाटा मारू को ‘गुरु नानक जहाज़’ के रूप में मान्यता देने की उठाई मांग, 23 जुलाई को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की अपील</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>भाजपा ने अल्पसंख्यकों के धर्मों पर डाका मारने का रास्ता खोला : आप सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/new-delhi-bjp-has-opened-the-way-to-rob-the-religions-of-minorities-aap-mp-gurmeet-singh-meet-hayer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Apr 2025 15:48:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[AAP MP]]></category>
		<category><![CDATA[BJP Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Gurmeet Singh Meet Hayer]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Parliament]]></category>
		<category><![CDATA[Minority Rights]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Freedom]]></category>
		<category><![CDATA[secularism]]></category>
		<category><![CDATA[Waqf Bill Protest]]></category>
		<category><![CDATA[अल्पसंख्यक अधिकार]]></category>
		<category><![CDATA[आम आदमी पार्टी]]></category>
		<category><![CDATA[आर्टिकल 14]]></category>
		<category><![CDATA[आर्टिकल 26]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय संविधान]]></category>
		<category><![CDATA[मीत हेयर]]></category>
		<category><![CDATA[वक्फ बिल विरोध]]></category>
		<category><![CDATA[वक्फ संपत्ति]]></category>
		<category><![CDATA[संसद बहस]]></category>
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					<description><![CDATA[New Delhi : संगरूर से आम आदमी पार्टी के लोक सभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर ने आज संसद में अपनी जोरदार दलीलों के साथ वक्फ बिल का कठोर विरोध करते हुए इसे भाजपा की सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के धर्मों पर डाका मारने वाला बिल करार दिया। यह बिल वक्फ़ की जायदादें हड़पने के लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>New Delhi : </strong>संगरूर से आम आदमी पार्टी के लोक सभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर ने आज संसद में अपनी जोरदार दलीलों के साथ वक्फ बिल का कठोर विरोध करते हुए इसे भाजपा की सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के धर्मों पर डाका मारने वाला बिल करार दिया। यह बिल वक्फ़ की जायदादें हड़पने के लिए लाया गया है।</p>



<p>मीत हेयर ने कहा कि इस बिल से अल्पसंख्यकों के धर्मों पर डाका मारने का आज रास्ता खोल दिया गया है। आज वक्फ़ पर हमला हो रहा है, भविष्य में सिख, बुद्ध आदि अन्य अल्पसंख्यकों धर्मों पर भी हमला करने के लिए रास्ता खोल दिया गया है। सीधे तौर पर आर्टिकल 14 का उल्लंघन किया गया है। कानून की एक धारा के अनुसार किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में इबादत करने का कैसे पता लगाओगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भाजपा की देश को बांटने की राजनीति साफ झलक रही</h3>



<p>मीत हेयर ने कहा कि भाजपा की देश को बांटने की राजनीति इस बिल से साफ झलक रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का मुसलमानों के प्रति रवैया पिछले 11 वर्षों में साफ दिखाई देता है। यह रवैया लच्छेदार भाषणों के बजाय कामों से पता चलता है। गृह मंत्री सरकार को मुसलमानों के प्रति संजीदा बताते हैं लेकिन भाजपा का एक भी लोक सभा सदस्य मुसलमान नहीं है और न ही उत्तर प्रदेश में कोई मुसलमान विधायक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">देश में 70 प्रतिशत वक्फ़ बोर्ड की जायदादों पर कब्जा किया गया</h3>



<p>सांसद ने कहा कि सरकार की तरफ से सच्चर कमेटी की सिफारिशें लागू करने की दलील दी गई है लेकिन सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में 70 प्रतिशत वक्फ़ बोर्ड की जायदादों पर कब्जा किया गया है और 355 पर तो सरकार का ही कब्जा है। इस बारे में सरकार ने क्या किया है? उन्होंने कहा कि देश में अनेक ऐतिहासिक इमारतें, मस्जिदें, शिक्षण संस्थाएं सैंकड़ों साल पुरानी हैं, वे कहां से कागज लेकर आयेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस बिल का विरोध करेंगे- सांसद मीत हेयर</h3>



<p>मीत हेयर ने अपने संसदीय हलके के शहर मालेरकोटला के शेर मोहम्मद खान के नारे के समय से अब तक सभी धर्मों के आपसी भाईचारे का एक की उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार से धर्म के आधार पर बांटने से रोका। उन्होंने कहा कि वे मालेरकोटला के निवासियों से किए गए वादे को पूरा करने की पूरी कोशिश करते हुए इस बिल का विरोध करेंगे।</p>



<p>आप लोक सभा मेंबर ने कहा कि इस बिल से देश के संविधान पर हमला किया गया है। आर्टिकल 26 के तहत अपनी संस्था बना भी सकते हैं और उसे चला भी सकते हैं और आज इसी पर हमला किया गया है।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/waqf-amendment-bill-all-three-amendments-of-tdp-accepted-chandrababu-naidus-party-will-support-wakf-amendment-bill/">TDP के तीनों संशोधन मंजूर, वक्फ संशोधन बिल को समर्थन देगी चंद्रबाबू नायडू की पार्टी</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>किस तरफ जा रहा बांग्लादेश… संविधान से अब हटेगा &#8216;सेक्युलरिज्म&#8217;, प्रस्ताव पेश</title>
		<link>https://hindikhabar.com/bangladesh-which-way-is-bangladesh-going-secularism-will-now-be-removed-from-the-constitution-proposal-presented/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jan 2025 03:32:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Bangladesh]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution]]></category>
		<category><![CDATA[Liberation War of 1971]]></category>
		<category><![CDATA[secularism]]></category>
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					<description><![CDATA[Bangladesh : आयोग के अध्यक्ष अली रियाज ने एक वीडियो बयान में कहा, हम साल 1971 के मुक्ति संग्राम के महान आदर्शों और 2024 के जनांदोलन के दौरान लोगों की आकांक्षाओं के प्रतिबिंब के लिए पांच राज्य सिद्धांतों- समानता, मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, बहुलवाद और लोकतंत्र का प्रस्ताव कर रहे हैं। बांग्लादेश में संविधान सुधार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Bangladesh :</strong> आयोग के अध्यक्ष अली रियाज ने एक वीडियो बयान में कहा, हम साल 1971 के मुक्ति संग्राम के महान आदर्शों और 2024 के जनांदोलन के दौरान लोगों की आकांक्षाओं के प्रतिबिंब के लिए पांच राज्य सिद्धांतों- समानता, मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, बहुलवाद और लोकतंत्र का प्रस्ताव कर रहे हैं।</p>



<p>बांग्लादेश में संविधान सुधार आयोग ने बुधवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और राष्ट्रवाद के राज्य सिद्धांतों को बदलने का प्रस्ताव दिया गया है। छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के चलते शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार द्वारा गठित आयोग ने देश के लिए द्विसदनीय संसद और पीएम कार्यकाल को दो अवधि तक सीमित करने का भी प्रस्ताव रखा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नए सिद्धांतों के साथ रखा गया</h3>



<p>यह तीन सिद्धांत बांग्लादेश देश के संविधान में राज्य नीति के मूलभूत सिद्धांतों के रूप में स्थापित चार सिद्धांतों में से हैं। नए प्रस्तावों के तहत, केवल एक लोकतंत्र को अपरिवर्तित रखा गया है। आयोग के अध्यक्ष अली रियाज ने एक वीडियो बयान में कहा, हम 1971 के मुक्ति संग्राम के महान आदर्शों और 2024 के जनांदोलन के दौरान लोगों की आकांक्षाओं के प्रतिबिंब के लिए पांच राज्य सिद्धांतों- समानता, मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, बहुलवाद और लोकतंत्र का प्रस्ताव कर रहे हैं। मोहम्मद यूनुस को प्रस्तुत रिपोर्ट में संविधान की प्रस्तावना में केवल लोकतंत्र को चार नए सिद्धांतों के साथ रखा गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सदन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर</h3>



<p>मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की मीडिया इकाई ने एक बयान में रियाज के हवाले से कहा कि आयोग ने द्विसदनीय संसद के गठन की सिफारिश की है जिसमें निचले सदन को नेशनल असेंबली और ऊपरी सदन को सीनेट नाम दिया जाएगा जिसमें क्रमशः 105 व 400 सीटें होंगी। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि प्रस्तावित दोनों सदनों का कार्यकाल संसद के मौजूदा पांच साल के कार्यकाल के बजाय चार साल का होगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि निचला सदन बहुमत के आधार पर और ऊपरी सदन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीमित करने की सिफारिश की</h3>



<p>वहीं आयोग का कहना है कि पिछले 16 वर्षों में बांग्लादेश के सामने आए निरंकुश अधिनायकवाद का एक मुख्य कारण संस्थागत शक्ति संतुलन का अभाव और प्रधानमंत्री कार्यालय में सत्ता का केंद्रीकरण था। प्रधानमंत्री के कार्यकाल को दो कार्यकाल तक सीमित करने की सिफारिश की।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/patna-cm-nitish-kumar-inaugurated-the-guest-house-of-bihar-assembly/">CM नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा के अतिथिशाला का किया उद्घाटन</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>अब सत्ता में बैठे लोगों के लिए धर्मनिरपेक्षता की कोई कीमत नहीं रह गई है : सोनिया गांधी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/now-secularism-has-no-value-for-those-in-power-sonia-gandhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ankur Pratap Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jan 2024 16:08:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Other States]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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		<category><![CDATA[भारत सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी सरकार]]></category>
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					<description><![CDATA[Thiruvananthapuram : धर्मनिरपेक्षता को देश के लोकतंत्र का मूलभूत स्तंभ बताते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि अभी जो लोग सत्ता में बैठे हैं, उनके लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द की कोई कीमत नहीं रह गयी है। जिसके परिणामस्वरूप समाज में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। गांधी ने ‘मनोरमा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Thiruvananthapuram :</strong><strong> </strong>धर्मनिरपेक्षता को देश के लोकतंत्र का मूलभूत स्तंभ बताते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि अभी जो लोग सत्ता में बैठे हैं, उनके लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द की कोई कीमत नहीं रह गयी है। जिसके परिणामस्वरूप समाज में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। गांधी ने ‘मनोरमा इयरबुक 2024&#8242; में हस्ताक्षरित लेख में लिखा कि वे कहते हैं कि वे ‘लोकतंत्र&#8217; के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन, साथ ही उन्होंने इसके सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए सुरक्षात्मक उपायों को भी कमजोर किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सोनिया गांधी ने क्या कहा?</h3>



<p>हमारे राष्ट्र को सद्भाव की तरफ ले जाने वाली रेल की पटरियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं, और इसका परिणाम समाज में बढ़ते ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा रहा है। लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं &#8211; एक ट्रैक पर दो रेल पटरियों की तरह, जो मौजूदा सरकार का एक आदर्श सामंजस्यपूर्ण समाज की तरफ मार्गदर्शन करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी</h3>



<p>कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हम सभी इन शब्दों से परिचित हैं, जिनसे हमारा सामना बहसों, भाषणों, नागरिक शास्त्र की पाठ्यपुस्तकों और संविधान की प्रस्तावना में होता है। यह जानने के बावजूद, इन अवधारणाओं के पीछे के गहरे अर्थ अक्सर अस्पष्ट होते हैं। इन शब्दावलियों की स्पष्ट समझ प्रत्येक नागरिक को भारत के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य के रास्ते को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या कई तरीकों से की जा सकती है</h3>



<p>गांधी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या कई तरीकों से की जा सकती है। लेकिन, भारत के लिए सबसे प्रासंगिक अर्थ वह है जो महात्मा गांधी ने अपने प्रसिद्ध शब्द ‘सर्व धर्म सम भाव&#8217; में निर्धारित किया था। यहां मलयाला मनोरमा द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में उन्हें उद्धृत करते हुए कहा गया कि गांधी जी सभी धर्मों की आवश्यक एकता को महसूस करते थे।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें &#8211;</strong> <a href="https://hindikhabar.com/state/stone-pelting-on-police-in-kaimur-bhabhua-bihar/">Kaimur: प्रदर्शनकारी चालकों ने किया पुलिस पर पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Secularism: सभी धर्मों के लोगों को करना चाहिए धर्मनिरपेक्षता का पालन</title>
		<link>https://hindikhabar.com/secularism-people-of-all-religions-should-follow-secularism/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 12:14:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Constitution Day]]></category>
		<category><![CDATA[constitution of india]]></category>
		<category><![CDATA[fundamental duties]]></category>
		<category><![CDATA[fundamental right]]></category>
		<category><![CDATA[secularism]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006275806</guid>

					<description><![CDATA[Secularism: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह ने रविवार को कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए धर्मनिरपेक्षता का पालन करना अनिवार्य बनाता है और इसे चयनात्मक नहीं किया जा सकता है या इसे केवल एक धार्मिक समूह के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा, भारत में रहने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Secularism: </strong>सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह ने रविवार को कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए धर्मनिरपेक्षता का पालन करना अनिवार्य बनाता है और इसे चयनात्मक नहीं किया जा सकता है या इसे केवल एक धार्मिक समूह के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा, भारत में रहने वाले सभी लोगों और सभी समुदायों को धर्मनिरपेक्षता का पालन करना चाहिए क्योंकि यह संविधान के तहत मौलिक कर्तव्यों में से एक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Secularism: </strong>सभी धर्मों द्वारा अपनाया जाए</h3>



<p>न्यायमूर्ति ने कहा, &#8220;संविधान के अनुसार, हम धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन धर्मनिरपेक्षता एकतरफा या केवल एक धर्म या समुदाय द्वारा नहीं हो सकती है। इसे भारत में रहने वाले सभी धर्मों और नागरिकों द्वारा अपनाया जाना चाहिए और यह चयनात्मक नहीं हो सकता है। अन्य धर्मों का सम्मान करना मौलिक कर्तव्यों का एक हिस्सा है’’। न्यायाधीश ने आगे कहा कि संविधान में मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य दोनों दिए जाने के बावजूद, नागरिक अक्सर केवल अधिकारों के बारे में ही बोलते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या कर्तव्य के बारे में सोचते हैं नागरिक?</h3>



<p>न्यायाधीश ने ने कहा, &#8220;सवाल यह है कि जब नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं तो क्या वे अपने कर्तव्यों के बारे में सोचते हैं? हर कोई अधिकारों के बारे में बात करना चाहता है लेकिन कर्तव्यों के बारे में नहीं&#8221;। बता दें कि न्यायाधीश  20 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए टिप्पणी की।</p>



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		<title>धर्मनिरपेक्षता को अब कहा जा रहा है तुष्टीकरण : पी. चिदंबरम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Ankur Pratap Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Nov 2023 08:12:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[West Bengal: पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि धर्मनिरपेक्षता शब्द को अब तुष्टीकरण कहा जा रहा है। उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय में ‘लोकतंत्र का भविष्य’ विषय पर एक व्याख्यान में कहा कि धर्मनिरपेक्षता शब्द की गलत व्याख्या की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने कहा कि तुष्टीकरण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>West</strong><strong> </strong><strong>Bengal:</strong> पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि धर्मनिरपेक्षता शब्द को अब तुष्टीकरण कहा जा रहा है। उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय में ‘लोकतंत्र का भविष्य’ विषय पर एक व्याख्यान में कहा कि धर्मनिरपेक्षता शब्द की गलत व्याख्या की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने कहा कि तुष्टीकरण शब्द धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को बदनाम करने की एक कोशिश है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यदि आप हिंदू नहीं हैं, तो आप आधे नागरिक हैं</h3>



<p>चिदंबरम ने कहा कि यदि आप हिंदू नहीं हैं, तो आप आधे नागरिक हैं। यदि आप मुसलमान हैं, तो आप नागरिक नहीं हैं। चुनाव में धर्म का जिक्र नहीं होना चाहिए। लेकिन, आज चुनाव में यह काफी हद तक हो रहा है। धर्म आस्था पर आधारित होना चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि एक राजनीतिक दल लगातार हिंदुओं के अलावा किसी अन्य को उम्मीदवार बनाने से इनकार करता आ रहा है और इसकी मूल संरचना अखंड भारत, हिंदू राष्ट्र लगती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">धर्म ही निर्णायक कारक नजर आता है &nbsp;</h3>



<p>धर्म ही निर्णायक कारक नजर आता है। चिदंबरम ने कहा कि देश केंद्रीकरण की ओर बढ़ रहा है जो लोकतंत्र के विपरीत है। हम लोकतंत्र को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को कमजोर कर रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भाजपा सरकार ने जनगणना नहीं कराई</h3>



<p>पी चिदंबरम ने कहा कि किसी भी आरक्षण के लाभ के संदर्भ में कोई निर्णय लेने से पहले जातिवार सर्वेक्षण जरूरी है और इसे केंद्र को जनगणना के साथ कराना चाहिए। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने जनगणना नहीं कराई है जो 2021 में होनी चाहिए थी, वह 2024 के आम चुनाव के बाद तक इसे टाल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">राज्य सरकारें राष्ट्रीय जनगणना नहीं करा सकती &nbsp;</h3>



<p>सनद रहे कि उनका यह बयान बिहार सरकार द्वारा जातिवार सर्वेक्षण कराने और वंचित वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश करने के कुछ दिनों बाद आया है। चिदंबरम ने कहा कि राष्ट्रीय जनगणना केवल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। राज्य सरकारें राष्ट्रीय जनगणना नहीं करा सकती हैं।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें &#8211;</strong> <a href="https://hindikhabar.com/national/caa-draft-will-be-done-by-march-says-central-minister-ajay-mishra/">अगले साल मार्च में आएगा CAA का ड्राफ्ट- केंद्रीय मंत्री</a></p>
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