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	<title>Sardar Udhham Singh Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>&#8216;सरदार उधम&#8217; में विक्की कौशल की एक्टिंग के कायल हुए लोग, जानिए उधम सिंह की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Oct 2021 11:00:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: हाल ही एक्टर विक्की कौशल की फिल्म सरदार उधम चर्चा में है। &#8216;सरदार उधम&#8217; फिल्म देशभक्ती का ढ़िढोरा पीटने वाली फिल्‍मों से अलग है। इस फिल्म में बगैर शोर-गुल के चुपचाप देश के लिए काम करने वाले सरदार उधम सिंह द्वारा लंदन जाकर अपने मकसद को पूरा करने की कहानी बताई गयी है। &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्ली:</strong> हाल ही एक्टर विक्की कौशल की फिल्म सरदार उधम चर्चा में है। &#8216;सरदार उधम&#8217; फिल्म देशभक्ती का ढ़िढोरा पीटने वाली फिल्&#x200d;मों से अलग है। इस फिल्म में बगैर शोर-गुल के चुपचाप देश के लिए काम करने वाले सरदार उधम सिंह द्वारा लंदन जाकर अपने मकसद को पूरा करने की कहानी बताई गयी है। जलियांवाला बाग हत्&#x200d;याकांड के सरदार उधम सिंह, भगत सिंह के सोच और सामाजिक चेतना को उजागर करती है ये फिल्म। इस फिल्म में विक्की कौशल ने शानदार एक्टिंग की है। </p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>उधम सिंह का जन्म</strong> </h4>



<p>उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम में शेर सिंह के रूप में एक पंजाबी कम्बोज सिख परिवार में हुआ था। बाल्यकाल में उनकी माँ की मृत्यु हो गई थी और इसके कुछ साल बाद उनके पिता तेहल सिंह की मृत्यु हो गई। उनके पिता एक किसान थे और उपल्लिक गांव में रेलवे क्रॉसिंग पर चौकीदार के रूप में भी काम करते थे।</p>



<p>अपने पिता की मृत्यु के बाद उधम और उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह को अमृतसर में केंद्रीय खालसा अनाथालय पुतली-घर में रहना पड़ा। अनाथालय में उधम सिंह को सिख दीक्षा संस्कार दिया गया और उधम सिंह का नाम प्राप्त किया। उन्होंने 1918 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और 1919 में अनाथालय में रहना छोड़ दिया।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>जलियांवाला बाग हत्याकांड</strong> </h4>



<p>जलियांवाला बाग हत्याकांड से तीन दिन पहले 10 अप्रैल 1919 को सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू सहित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े कई स्थानीय नेताओं को रॉलेट एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। </p>



<p>इसके बाद 13 अप्रैल 1919 तकरीबन 20,000 लोग शांतिपूर्वक ढंग से इस गिरफ्तारी के विरोध में एकजुट हुए थे, तभी जनरल डायर ने सरेआम गोलियां चलावाई थी। कहते है कि इस विरोध प्रर्दशन के दौरान उधम सिंह भी अपने दोस्तों के साथ मौजुद थे और लोगों की सेवा में पानी पिला रहे थे।</p>



<p>उधम सिंह 1924 में ग़दर पार्टी में शामिल हो गए। ग़दर पार्टी से जुड़ते ही उन्होंने औपनिवेशिक (Colonial) शासन को उखाड़ फेंकने के लिए भारतीयों को विदेशों में संगठित किया। 1927 में भगत सिंह के आदेश पर &nbsp;वे 25 सहयोगियों के साथ-साथ रिवाल्वर और गोला-बारूद लेकर भारत लौट आए। इसके तुरंत बाद उसे बिना लाइसेंस के हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और पांच साल जेल की सजा सुनाई गई। </p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>माइकल ओ&#8217; डायर की हत्या </strong> </h4>



<p>1931 में जेल से निकलने के बाद उधम पर पुलिस की नजर थी। पुलिस को चकमा देकर वे जर्मनी चले गए और फिर 1934 में वहां से लंदन गए। लंदन पहुंचने के बाद 13 मार्च 1940 को माइकल ओ&#8217;डायर को लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और सेंट्रल एशियन सोसाइटी (अब रॉयल सोसाइटी फॉर एशियन अफेयर्स) की एक संयुक्त बैठक में बोलने के लिए निर्धारित किया गया था।</p>



<p> उधम सिंह भी इस बैठक में शामिल थे उन्होंने एक किताब के अंदर एक रिवॉल्वर छुपाई थी, जिसके पन्ने रिवॉल्वर के आकार में कटे हुए थे। जैसे ही बैठक समाप्त हुई, उन्होंने माइकल ओ&#8217; डायर को दो बार गोली मार दी क्योंकि वह बोलने वाले मंच की ओर बढ़ रहा था। इनमें से एक गोली ओ&#8217;डायर के दिल में लगी और डायर की मौत हो गयी। गोली चलने के तुरंत बाद उधम को गिरफ्तार कर लिया गया और 31 जुलाई को उन्हें दोषी पाया गया और मौत की सजा दी गई। </p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>राम मोहम्मद सिंह आजाद बताया था नाम</strong> </h4>



<p>रिमांड के दौरान जब उनसे उनका नाम पूछा गया तब उन्होंने अपना नाम राम मोहम्मद सिंह आजाद बताया था। जब उनसे डायर के मारने की वजह पूछी गयी तब उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मुझे उससे नफरत थी। वह इसके लायक है। वह असली अपराधी था। वह मेरे लोगों की आत्मा को कुचलना चाहता था, इसलिए मैंने उसे कुचल दिया है। पूरे 21 साल से मैं बदला लेने की कोशिश कर रहा हूं। मुझे खुशी है कि मैंने ये काम किया है। मैं मौत से नहीं डरता। मैं अपने देश के लिए मर रहा हूं। मैंने अपने लोगों को ब्रिटिश शासन के तहत भारत में भूख से मरते देखा है। मैंने इसका विरोध किया है, यह मेरा कर्तव्य था। मातृभूमि के लिए मृत्यु से बड़ा सम्मान मुझे और क्या हो सकता है’। </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="870" height="429" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/10/UDDHAM-SINGH.png" alt="" class="wp-image-213006133653" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/10/UDDHAM-SINGH.png 870w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/10/UDDHAM-SINGH-300x148.png 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/10/UDDHAM-SINGH-768x379.png 768w" sizes="(max-width: 870px) 100vw, 870px" /></figure>
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