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	<title>Riz area od delhi Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>रिज एरिया में पेड़ काटने का मामला : सौरभ भारद्वाज का  मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध, &#8216;डीडीए के हलफनामे को पढ़ें&#8217;</title>
		<link>https://hindikhabar.com/pc-of-saurabh-bharadwaj-on-illegal-tree-cutting/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Aug 2024 08:05:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[Tree cutting issue]]></category>
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					<description><![CDATA[PC of Saurabh Bharadwaj : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, कल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक बेंच के समक्ष दिल्ली के सतबड़ी इलाके के रिज एरिया में लगभग 1100 पेड़ों को गैर कानूनी तरीके से काटे &#8230;]]></description>
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<p><strong>PC of Saurabh Bharadwaj : </strong>आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, कल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक बेंच के समक्ष दिल्ली के सतबड़ी इलाके के रिज एरिया में लगभग 1100 पेड़ों को गैर कानूनी तरीके से काटे जाने का मामला सुना जाएगाI उन्होंने कहा कि डीडीए के वाइस चेयरमैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल किए गए हालतनामे को यदि मुख्य न्यायाधीश एक बार पढ़ लें, तो उन्हें न केवल पर्यावरण के बारे में, न केवल डीडीए विभाग के बारे में बल्कि केंद्र सरकार और उनके द्वारा नियुक्त किए गए उपराज्यपाल के बारे में सब कुछ पता चल जाएगा.</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है, कि यदि मुख्य न्यायाधीश इस हलफनामे को केवल 10 मिनट पढ़ लेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि केंद्र में बैठी सरकार और उनके द्वारा नियुक्त किए गए उपराज्यपाल महोदय दिल्ली की चुनी हुई सरकार और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ क्या कर रहे हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘कोर्ट से सच छुपाया था’</h3>



<p>इस मामले में सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मैं पूर्व में लगातार अपनी प्रेस वार्ता में इस बात का खुलासा करता रहा हूं, कि डीडीए विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने ईमेल के जरिए डीडीए के ठेकेदार, जिसको पेड़ काटने का आदेश दिया गया था, उसे कहा कि उपराज्यपाल महोदय के मौखिक आदेश हैं, कि पेड़ों को काट दिया जाएI</p>



<p>उन्होंने कहा कि इस बिंदु पर जब कोर्ट में डीडीए के वकील से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि हमारा ईमेल हैक कर लिया गया हैI सौरभ भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष डीडीए के वाइस चेयरमैन द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे का हवाला देते हुए कहा, &nbsp;उन्होंने अपने हलफनामे में इस बात के लिए माफी मांगी है और कहा है कि हमने सुप्रीम कोर्ट से सच छुपाया था, जो पेड़ पहले ही काट दिए गए थे उसके काटने की परमिशन सुप्रीम कोर्ट में पेड़ों को काटने के बाद मांगने गए थे, इस झूठ के लिए उन्होंने माफी मांगीI यह हलफनामा इस बात का भी सबूत है, कि उन्होंने अपनी चोरी अर्थात इस बात को स्वीकार कर लिया है कि सैंकड़ों पेड़ गैर कानूनी तरीके से बिना अनुमति के काटे गए हैंI</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘गैरकानूनी तरीके से सतबड़ी रिज एरिया में सैंकड़ों पेड़ काटे गए’</h3>



<p>डीडीए के वाइस चेयरमैन द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी बताया कि वाइस चेयरमैन साहब ने इस बात को भी स्वीकार किया है, 16 फरवरी से लेकर अगले 10 दिनों में गैरकानूनी तरीके से सतबड़ी रिज एरिया में सैंकड़ों पेड़ बिना अनुमति लिए काटे गएI&nbsp;</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस हलफनामा के मुताबिक डीडीए के वाइस चेयरमैन साहब 16 फरवरी से 2 मार्च तक छुट्टी पर थेI उन्होंने कहा, क्योंकि उन्हें मालूम था कि गैर कानूनी तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं और यदि यह मामला गरमाया तो इसकी आंच मुझ तक भी आएगी इसीलिए वह पहले ही छुट्टी लेकर चले गएI</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘पहले तो पेड़ काटने की बात से ही इनकार किया जाता रहा’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस हलफनामे में डीडीए ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि उनके द्वारा 468 पेड़ वन्य क्षेत्र के और 174 पेड़ गैर वन्य क्षेत्र के काटे गए हैंI सौरभ भारद्वाज ने कहा हालांकि हमारा आंकड़ा लगभग 1100 पेड़ काटे जाने का है, परंतु यह बड़ी बात है कि डीडीए ने कम से कम इतने पेड़ काटे जाने की बात स्वीकार की हैI हालांकि पहले तो पेड़ काटने की बात से ही इनकार किया जाता रहाI</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अब डीडीए ने इस बात को भी स्वीकार किया है, &nbsp;उनका ईमेल कभी हैक हुआ ही नहीं था और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि डीडीए के ही ठेकेदार , JE और AE ने अपने ही विभाग के खिलाफ गवाही दे दी हैI</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘डीडीए के लिए अब झूठ बोलने की कोई गुंजाइश ही नहीं बची’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने बताया, &nbsp;जिस ठेकेदार ने यह पेड़ काटे उसने अपने हलफनामे में इस बात को कहा है, कि डीडीए के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, JE और AE लगातार इस जगह का दौरा करते रहे हैं, इसीलिए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, JE और AE तथा डीडीए के लिए अब झूठ बोलने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचीI परिणाम स्वरुप जब कोर्ट ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से यह प्रश्न पूछा कि आपको इन पेड़ों के काटने की जानकारी कब प्राप्त हुई &nbsp;तो एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने जवाब में कहा कि मुझे 28 फरवरी को इस बात का पता चला कि 16 फरवरी से 26 फरवरी के बीच रिज एरिया में गैर कानूनी तरीके से बिना परमिशन के यह पेड़ काट दिए गए हैंI</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसी प्रकार से जब डीडीए के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से पूछा गया की क्या आपको मालूम है कि इन पेड़ों को काटने के लिए कौन-कौन सी परमिशन चाहिए होती है, तो सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ने कहा कि जी मुझे मालूम है कि वन्य क्षेत्र में पेड़ों को काटने के लिए डिप्टी कंजरवेटर ऑफ़ फॉरेस्ट की एवं सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होती हैI</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘दिल्ली सरकार ने नहीं दी थी पेड़ काटने की परिमिशन’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बार-बार लगातार यह झूठ भी बोला जा रहा था कि इन पेड़ों को काटने की परमिशन दिल्ली सरकार की ओर से मिली है I उन्होंने कहा कि इस हलफनामे में डीडीए ने यह भी स्वीकार किया है, कि इन पेड़ों को काटने के लिए न तो दिल्ली सरकार की ओर से और न ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन्हें कोई भी परमिशन मिली थीI</p>



<p>&nbsp;उन्होंने कहा कि जब कोर्ट ने सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर से यह पूछा कि क्या आपको पता था कि पेड़ काटे जा रहे हैं, तो सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ने कहा कि मुझे भी पेड़ों के काटने की कोई जानकारी नहीं थीI मुझे तो एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने 28 फरवरी को बताया कि 16 फरवरी से 26 फरवरी के बीच सतबड़ी रिज एरिया में यह पेड़ काट दिए गए हैंI</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘बिना परमिशन के ठेकेदार को पेड़ काटने के आदेश दिए गए’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इन पेड़ों को काटने के लिए जो मौखिक अनुमति दी गई, उसके संबंध में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने जो ईमेल की थी, वह ईमेल सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर और चीफ इंजीनियर को भी भेजी गई थीI &nbsp;तो प्रश्न यह होता है कि जब उन दोनों अधिकारियों को यह ईमेल भेजी गई थी, तो उन लोगों ने इन पेड़ों की गैरकानूनी कटाई को क्यों नहीं रोका? इस पर डीडीए के चीफ इंजीनियर ने कहा कि मैंने वह ईमेल देखी ही नहीं और मेरा पीएस सारी ईमेल की प्रति प्रिंटआउट निकालकर मुझे देता है, परंतु इन दोनों ईमेल की प्रतियां उसने मुझे नहीं दींI</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसका मतलब बिल्कुल साफ है, कि ऊपर से नीचे तक सभी को यह बात भली-भांति मालूम थी, कि दबाव दिल्ली के उपराज्यपाल महोदय की ओर से है, पेड़ों को काटने की परमिशन नहीं है और बिना परमिशन के ठेकेदार को पेड़ काटने के आदेश दिए गए हैंI यही कारण है कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने ईमेल की और उच्च अधिकारियों को भी वह ईमेल भेजी क्योंकि उसे मालूम था, कि कल को यदि केवल ठेकेदार को ईमेल करूंगा तो इस मामले में केवल मैं ही फसूंगा.</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘क्या इस काम को रोकने की कोशिश की?’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में यह सारा दोष तीन निचले स्तर अधिकारियों पर थोप दिया गया है, जिसमें एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर शामिल हैंI उन्होंने कहा कि मैं उपराज्यपाल महोदय से जानना चाहता हूं कि इतने निचले स्तर के यह छोटे-छोटे अधिकारी इतने सारे पेड़ गैर कानूनी तरीके से क्यों काटेंगे? इस प्रकार गैर कानूनी तरीके से इतने पेड़ काटने से इन लोगों को क्या लाभ प्राप्त होगा?</p>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब हलफनामे में यह बात साफ तौर पर लिखी है, कि 13 तारीख को वन विभाग के अधिकारियों ने आकर पेड़ों की कटाई रुकवा दी थी, क्योंकि पेड़ों को काटने की परमिशन डीडीए के पास नहीं थी, तो 14 तारीख को आखिर ऐसा क्या हुआ कि अगले 10 दिन तक लगातार पेड़ों की कटाई वहां चली और न तो वन विभाग के किसी अधिकारी, न ही डीडीए के किसी अधिकारी और न ही पुलिस विभाग के किसी अधिकारी ने वहां जाकर देखा और इस काम को रोकने की कोशिश की?</p>



<h3 class="wp-block-heading">‘सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की साजिश’</h3>



<p>सौरभ भारद्वाज ने कहा यह कोरा ढकोसला है और इस देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की साजिश की जा रही हैI &nbsp;प्रेस वार्ता के अंत में सौरभ भारद्वाज में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अपील करते हुए कहा कि कृपया कर 10 मिनट का समय निकालकर इस हलफनामे को जरुर पढ़ें ताकि आपको सच्चाई का पता चल सके.</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें : <a href="https://hindikhabar.com/mauritius-treasure-of-gold-and-silver-found-in-the-construction-of-maheshwarnath-temple-in-mauritius/">Mauritius : मॉरीशस के महेश्वर नाथ मंदिर निर्माण में मिला सोने-चांदी का खजाना</a></strong></p>



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