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	<title>Religious place Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>बिहार के गया शहर का नाम बदलकर हुआ &#8216;गया जी&#8217;, CM नीतीश ने कैबिनेट बैठक में दी मंजूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 May 2025 11:46:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[Bihar News : बिहार का गया शहर अब &#8216;गया जी&#8217; नाम से जाना जाएगा. इसका फैसला शुक्रवार (16 मई, 2025) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. बिहार सरकार ने गया शहर के पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मद्देनजर इसका नाम गयाजी करने का निर्णय लिया है. मंत्रीमंडल की &#8230;]]></description>
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<p><strong>Bihar News :</strong> बिहार का गया शहर अब &#8216;गया जी&#8217; नाम से जाना जाएगा. इसका फैसला शुक्रवार (16 मई, 2025) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. बिहार सरकार ने गया शहर के पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मद्देनजर इसका नाम गयाजी करने का निर्णय लिया है. </p>



<p>मंत्रीमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव डा. एस सिद्धार्थ ने बताया कि गयाजी नामकरण के साथ ही यह निर्णय भी लिया गया है कि बोधगया जहां निरंतर पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है वहां एक बौद्ध ध्यान एवं अनुभव केंद्र का निर्माण कराया जाएगा.</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्थानीय लोगों ने क्या कहा?</h3>



<p>वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने जमाने से गया का नाम गया जी के तौर पर चलन में था, लेकिन अब विधिवत तौर पर कैबिनेट की बैठक में इसका पारित होना एक बड़ी बात है. लोगों ने कहा कि गयाजी नाम होने से यहां के पौराणिक और धार्मिक अध्याय को पूरे विश्व में और प्रसिद्धि मिलेगी.</p>



<p>विष्णुपद क्षेत्र के लोगों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने गया जी नाम देकर जिले को और ऐतिहासिक बनाया है. इस खास मौके को लेकर सभी स्थानीय लोगों में काफी खुशी है.</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कैसे पड़ा ‘गया’ नाम</strong></h3>



<p>हिंदू ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग में &#8216;गयासुर&#8217; नामक एक राक्षस हुआ करता था, जो भगवान विष्णु की तपस्या में लीन रहता था. भक्त की भक्ति देखकर भगवान विष्णु ने गयासुर से वरदान मांगने को कहा. भगवान विष्णु से उसने कहा कि आप मेरे शरीर में वास करें, ताकि जो कोई मुझे देखे उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएं. वह जीव पुण्य आत्मा हो जाए और उसे स्वर्ग में जगह मिले. वरदान के बाद जो कोई भी उसे देखता उसके सारे कष्ट दूर हो जाते. विधि के विधान को समाप्त होता देखकर ब्रह्मा जी गयासुर के पास गए. उन्होंने कहा, “हे परमपुण्य गयासुर! मुझे ब्रह्म-यज्ञ करना है और तुम्हारे समान पुण्य-भूमि मुझे कहीं नहीं मिली. गयासुर के लेटते ही 5 कोस तक उसका शरीर फैल गया. उसके शरीर पर बैठकर सभी देवी-देवताओं ने यज्ञ किया.</p>



<p>विशाल यज्ञ के बाद भी गयासुर का शरीर अस्थिर रहा. ये देख देवता चिंतित हो गये. देवाताओं ने एक और योजना बनाई. सभी ने एक मत होकर भगवान विष्णु से कहा, अगर आप भी यज्ञ में शामिल हो जायें तो फिर गयासुर का शरीर स्थिर हो सकता है. कहा जाता है कि भगवान विष्णु की क्रिया से गयासुर स्थिर हो गया. त्याग को देखकर भगवान विष्णु ने गयासुर से वरदान मांगने के लिए कहा.</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;मुझे पत्थर की शिला बना दें&#8230;&#8217;</h3>



<p>गयासुर ने भगवान विष्णु से कहा कि आप मुझे पत्थर की शिला बना दें और यहीं स्थापित कर दें. साथ ही मेरी इच्छा है कि आप सभी देवताओं के साथ अप्रत्यक्ष रूप से इसी शिला पर विराजमान रहें ताकि यह स्थान मृत्यु के बाद किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के लिए तीर्थस्थल बन जाए. ऐसे में विष्णु ने कहा गयासुर तुम धन्य हो. तुमने लोगों के जीवित अवस्था में भी कल्याण का वरदान मांगा और मृत्यु के बाद भी मृत आत्माओं के कल्याण के लिए वरदान मांग रहे हो. तुम्हारी इस कल्याणकारी भावना से पितरों के श्राद्ध-तर्पण आदि करने यहां आएंगे और सभी आत्माओं को पीड़ा से मुक्ति मिलेगी. तब से ही यहां पर पितरों का श्राद्ध तर्पण किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार&nbsp;इस शहर का नाम गया जी पड़ा था लेकिन धीरे-धीरे लोग सिर्फ गया कहने लगे. अब एक बार फिर गया की पहचान गया जी से होगी. कैबिनेट ने नाम बदलने को मंजूरी दे दी है.</p>



<p>यह भी पढ़ें : <a href="https://hindikhabar.com/rcb-vs-kkr-ipl-2025-ipl-match-starts-from-today-match-will-played-between-rcb-and-kkr-know-pitch-report-and-playing-eleven/">आज से IPL का मैच फिर से शुरू, RCB और KKR के बीच खेला जाएगा मैच, जानें पिच रिपोर्ट और प्लेइंग इलेवन</a></p>



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		<title>देश के 18 शक्तिपीठों में से एक चामुंडेश्वरी चामुंडी हिल रोपवे परियोजना का किया अनावरण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chamundeshwari-chamundeshwari-one-of-the-18-shaktipeeths-of-the-country-unveiled-the-chamundi-hill-ropeway-project/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Mar 2024 14:17:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chamundeshwari Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Divine destinations]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka Chamundeshwari Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[Chamundeshwari : देश के 18 शक्तिपीठों में से एक चामुंडेश्वरी मंदिर है । ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। पहाड़ी पर महिषासुर की ऊंची मूर्ति और मां का मंदिर है। तो सर्दियों में यहां दर्शन की प्लानिंग है बेहतरीन आइडिया ।देश के 18 शक्तिपीठों में से &#8230;]]></description>
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<p></p>



<p class="has-medium-font-size"><strong>Chamundeshwari : </strong> देश के 18 शक्तिपीठों में से एक चामुंडेश्वरी मंदिर है । ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। पहाड़ी पर महिषासुर की ऊंची मूर्ति और मां का मंदिर है। तो सर्दियों में यहां दर्शन की प्लानिंग है बेहतरीन आइडिया ।देश के 18 शक्तिपीठों में से एक है चामुंडेश्वरी मंदिर जो कर्नाटक के मैसूर शहर से 13 किमी की दूरी पर चामुंडी नामक पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर मां दुर्गा के चामुंडेश्वरी स्वरूप को समर्पित है।</p>



<p class="has-medium-font-size">ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। पहाड़ी पर महिषासुर की ऊंची मूर्ति और मां का मंदिर है। यह मंदिर देश के प्रमुख 18 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि जब शिव जी सती के शव को कंधे पर लेकर तांडव नृत्य कर रहे थे और उनके क्रोध को शांत करने के लिए विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र चलाया था तो उससे कट कर सती के बाल इसी स्थल पर गिरे थे। इसी वजह से इस तीर्थस्थल को शक्तिपीठ की मान्यता दी गई है। पौराणिक काल में यह क्षेत्र क्रौंचपुरी कहलाता था, इसी कारण दक्षिण भारत में इस मंदिर को क्रौंचापीठम के नाम से भी जाना जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार इस शक्तिपीठ की रक्षा के लिए कालभैरव यहां सदैव विराजमान रहते हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading has-medium-font-size"><br>मंदिर की संरचना</h4>



<p class="has-medium-font-size"><br>द्राविड़ वास्तुशिल्प से निर्मित यह मंदिर बहुत सुंदर एवं कलात्मक है। मंदिर के अंदर गर्भगृह में देवी की प्रतिमा सोने से बनी है। सात मंजिला इमारत के रूप में निर्मित इस मंदिर का भव्य स्वरूप भक्तों को मुग्ध कर देता है। मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा-सा शिवमंदिर है, जो 1,000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। पहाडिय़ों की चोटी से मैसूर की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। मैसूर के दशहरे का त्योहार विश्वप्रसिद्ध है। विदेशी पर्यटकों के लिए यह एक अनूठा और अद्भुत दृश्य होता है, जिसे वे अपने कैमरों में कैद कर लेते हैं। यहां से मां चामुंडेश्वरी की पालकी भी निकाली जाती है। दक्षिण भारत के अन्य मंदिरों की तरह यहां भी विशेष दर्शन के लिए कूपन लेना आवश्यक होता है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><br>रोपवे परियोजना का किया अनावरण </h4>



<p class="has-medium-font-size"><br>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मैसूरु में चामुंडी बेट्टा में एक नई रोपवे परियोजना की योजना का अनावरण किया। यह घोषणा हाल ही में आयोजित 22 महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह के दौरान की गई। चामुंडी हिल तक जाने वाले सौर रोपवे के निर्माण के लिए 114 करोड़ की घोषणा मंत्री नितिन गडकरी ने की। </p>



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<p class="has-medium-font-size">चामुंडी हिल के लिए सौर रोपवे परियोजना 1.4 किलोमीटर लंबी होगी।इस रोपवे परियोजना का उद्देश्य मैसूर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री चामुंडेश्वरी मंदिर तक पहुंच बढ़ाना और पर्यटको, भक्तों के लिए परिवहन का एक सुविधाजनक साधन प्रदान करना है, तीर्थयात्रा के अनुभव को बढ़ाना है। गडकरी ने कर्नाटक में अन्य योजनाओं का भी खुलासा किया, जिसमें कुल 5000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। केंद्र द्वारा संचालित इंजीनियरों में न केवल कोडाचद्री हिल, अंजनाद्री हिल, कलहट्टीगिरी हिल और देवरायनदुर्गा हिल बल्कि मैसूरु में चामुंडी हिल भी शामिल हैं।</p>



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