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	<title>Hijab controversy Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<description>Hindi Khabar: Latest News Breaking News, हिंदी खबर चैनल, Hindi Khabar Live,Hindi News</description>
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	<title>Hijab controversy Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<item>
		<title>ईरान में हिजाब पर सख्त कानून, हिजाब न पहनने पर महिलाओं का होगी 10 साल की सजा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/in-iran-women-will-be-sentenced-to-10-years-for-not-wearing-hijab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Sep 2023 08:02:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab]]></category>
		<category><![CDATA[hijab case]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Controversy in Court]]></category>
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		<category><![CDATA[hijab vivad]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान में महिलाओं और लड़कियों को हिजाब न पहनने पर 10 साल तक की सजा होगी। ईरान की संसद ने सार्वजनिक स्थानों पर इस्लामिक हेडस्कार्फ़ पहनने से इनकार करने वाली महिलाओं और उनका समर्थन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए एक बिल को मंजूरी दे दी है। नए विधेयक  में कहा गया है &#8230;]]></description>
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<p>ईरान में महिलाओं और लड़कियों को हिजाब न पहनने पर 10 साल तक की सजा होगी। ईरान की संसद ने सार्वजनिक स्थानों पर इस्लामिक हेडस्कार्फ़ पहनने से इनकार करने वाली महिलाओं और उनका समर्थन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए एक बिल को मंजूरी दे दी है।</p>



<p> नए विधेयक  में कहा गया है कि जो लोग सार्वजनिक स्थानों पर &#8220;अनुचित&#8221; कपड़े पहने हुए पकड़े जाएंगे, उन्हें &#8220;चौथी डिग्री&#8221; की सजा दी जाएगी। नए कानून के तहत &#8216;अनुचित&#8217; कपड़े पहनने वाली महिलाओं को 10 साल तक की कैद हो सकती है। इतना ही नहीं अगर किसी ने नए कानून का मजाक बनाया तो उस पर भी कार्रवाई होगी। </p>



<p>गौरतलब है कि महिलाओं के लिए ये सख्त कानून का बिल महसा अमिनी की मौत की बरसी के ठीक एक दिन बाद आया है। महसा अमीनी जिसें ईरान की मौरल पुलिस ने हिजाब ठीक से हिजाब न पहनने पर प्रताड़ित किया और उसकी मौत हो गई और पूरे देश में विरोध प्रर्दशन शुरु हो गए थे।</p>



<p>ये भी पढे़ें:<a href="https://hindikhabar.com/big-news/delhi-british-pm-rishi-sunak-reached-akshardham-temple-along-with-his-wife-akshita-also-present/">Delhi: अक्षरधाम मंदिर पहुंचे ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक, साथ में पत्नी अक्षिता भी मौजूद</a></p>
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		<item>
		<title>हिजाब बैन हटाएंगी कर्नाटक सरकार, हलाल कट और गोहत्या कानूनों पर प्रतिबंध वापस</title>
		<link>https://hindikhabar.com/karnataka-government-to-lift-hijab-ban-withdraw-ban-on-cow-slaughter-laws/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 May 2023 13:09:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Row]]></category>
		<category><![CDATA[hijab row in karnataka]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka Government]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्य में कर्नाटक हिजाब विवाद के एक साल बाद, कांग्रेस सरकार ने राज्य में विवादास्पद हिजाब प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है, पिछले फैसले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा एक सांप्रदायिक विभाजन कदम बताया। कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक चुनाव 2023 में भारी बहुमत से जीत हासिल की और वर्तमान में बसने और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>राज्य में कर्नाटक हिजाब विवाद के एक साल बाद, कांग्रेस सरकार ने राज्य में विवादास्पद हिजाब प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है, पिछले फैसले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा एक सांप्रदायिक विभाजन कदम बताया।</p>



<p>कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक चुनाव 2023 में भारी बहुमत से जीत हासिल की और वर्तमान में बसने और अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने की प्रतीक्षा कर रही है। वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया राज्य के मुख्यमंत्री बने, डीके शिवकुमार ने डिप्टी सीएम का पद संभाला है।</p>



<p>राज्य में 10 मई के विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार करते हुए, कांग्रेस, विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जोर देकर कहा था कि हिजाब पर प्रतिबंध और पिछली भाजपा सरकार द्वारा सांप्रदायिक आधार पर बनाए गए सभी कानूनों को पार्टी के सत्ता में आने के बाद वापस ले लिया जाएगा।</p>



<p>कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध पर एमनेस्टी इंटरनेशनल की बढ़ती चिंता के बारे में पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने बुधवार को विधान सौध में कहा, &#8220;मैं हिजाब के मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहता क्योंकि यह एक नीतिगत मामला है।&#8221;</p>



<p>हालांकि, कैबिनेट मंत्री प्रियांक खड़गे ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस हिजाब, हलाल कट और गोहत्या कानूनों पर प्रतिबंध वापस लेगी। इसके अलावा कांग्रेस सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून को भी वापस लिया जा सकता है।</p>



<p>कर्नाटक हिजाब विवाद तब शुरू हुआ जब स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को स्कूल ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के लिए हिजाब पहनकर उनके शैक्षणिक संस्थानों के परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसने जल्द ही हिजाब पहनने वाली स्कूली छात्राओं द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।</p>



<p>हिजाब के बिना कक्षाओं में जाने से इनकार करने वाले छात्रों का अभी भी कहना है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे। इस मुद्दे ने सांप्रदायिक रंग ले लिया था और इसके परिणामस्वरूप राज्य में बदले की भावना से हत्याएं हुईं। इसने संकट के चरम पर वैश्विक आतंकवादी संगठन अल-कायदा का ध्यान खींचा था।</p>



<p>ये भी पढ़े:<a href="https://hindikhabar.com/state/other-states/karnataka-cabinet-minister-list-2023-read-here-the-list-of-all-ministers-who-took-oath-today/">Karnataka Cabinet Minister List 2023: यहां पढ़ें सभी मंत्रियों की सूची, जिन्होंने आज ली शपथ</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>मौलाना ने रामयाण पर दिया विवादित बयान, जानें क्या है फसाद की जड़</title>
		<link>https://hindikhabar.com/maulana-gave-controversial-statement-on-ramayana-know-what-is-the-root-of-the-riot/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Nov 2022 15:37:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Maulana speech]]></category>
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					<description><![CDATA[हिजाब एक बार फिर से एक बार सुर्खियों में आ गया है आपको बता दें कि&#160; हद तो तब हो गई जब&#160; एक मौलाना ने हिजाब के बहाने सनातनियों का सबसे बड़े महाकाव्य को तिरछी नजर दिखाते हुए विवादित बयान दिया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने जयपुर में एक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिजाब एक बार फिर से एक बार सुर्खियों में आ गया है आपको बता दें कि&nbsp; हद तो तब हो गई जब&nbsp; एक मौलाना ने हिजाब के बहाने सनातनियों का सबसे बड़े महाकाव्य को तिरछी नजर दिखाते हुए विवादित बयान दिया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने जयपुर में एक कार्यक्रम में अपनी जिहादी सोंच का परिचय देते हुए जहर उगलने का प्रयास किया है। आइए बतातें हैं कि मौलाना ने क्या जहर उगला</p>



<p>मौलाना सज्जाद नोमानी ने कहा कि आज हमारे देश में बच्चियों को हिजाब पहनने से रोका जा रहा है जबकि पूरी दुनिया को हिजाब पहनना भारत ने सिखाया था। मौलाना ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि लक्ष्मण जी 14 साल तक वन में माता सीता के साथ रहे लेकिन इसके बावजूद भी वो उनका चेहरा नहीं देख पाए क्योंकि वो पर्दा में थी।</p>



<p>हिजाब और पर्दा भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा&#8217;दरअसल, मौलाना जयपुर के ईदगाह में महिलाओं के एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने हिजाब को लेकर सरकार पर हमला बोला और साथ ही कहा कि ये हिजाब और पर्दा भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मौलाना ने कही बड़ी बात</h2>



<p>मौलाना ने कहा, &#8221;अब इस मुल्क के अंदर हिजाब पहनने में मुश्किल पेश आ रही है। इस बात को नोट कीजिएगा दुनिया को हिजाब, दुनिया को पर्दा सबसे पहले भारत ने सिखाया है। जिस मुल्क ने दुनिया को हिजाब सिखाया था, उस देश के अंदर हमारी बच्चियों को परेशानी उठानी पड़े&#8230;अगर वो असली भारतीय संस्कृति की तरफ वापस जाना चाहे.. अगर वो पर्दा करना चाहे। अगर आपकी रामायण के किसी स्कॉलर से मुलाकात हो, आपके कॉलेज में संस्कृत के कोई प्रोफेसर हों, रामायण को पढ़ने वाले स्कॉलर आपको मिल जाएं या गूगल पर खुद सर्च कर देखो। रामायण का अंग्रेजी अनुवाद पढ़ें.. या हिंदी में पढें और उस चैप्टर को खोलें जिसमें सीता जी की वापसी के बाद जो जश्न मनाया जा रहा है.. खुशी मनाई जा रही है।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिजाब बैन पर Supreme Court ने सुरक्षित रखा फैसला, छात्राओं के वकीलों ने जताया विरोध</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-reserved-decision-on-hijab-ban-students-lawyer-protested/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Sep 2022 10:17:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[hijab vivad]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme court intervention on hijab]]></category>
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					<description><![CDATA[इन दिनों देश में हिजाब (Hijab Row) को लेकर काफी विवाद चल रहा है, इतना ही नहीं मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। आपको बता दें कि मिली जानकारी के हिसाब से कर्नाटक हाई कोर्ट की ओर से शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर बैन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>इन दिनों देश में हिजाब (Hijab Row) को लेकर काफी विवाद चल रहा है, इतना ही नहीं मामला कोर्ट तक पहुंच गया है। आपको बता दें कि मिली जानकारी के हिसाब से कर्नाटक हाई कोर्ट की ओर से शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर बैन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।</p>



<p>जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंच ने इस केस की लगातार सुनवाई की है और इस दौरान दोनों पक्षों की बातों को भी सुना है। आज एक बार फिर से इस मामले में दोनों पक्षों के बीच गर्मागरम बहस देखने को मिली है। जिसमें पीएफआई (PFI) का भी जिक्र सामने आया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">छात्राओं के वकीलों ने कहीं बड़ी बातें</h2>



<p>इस पर छात्राओं के वकील दुष्यतं दवे और हुजेफा अहमदी ने विरोध जताया और कहा कि ऐसा कहना गलत है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पीएफआई का कोई मतलब नहीं है और उसका जिक्र करना केस को भटकाने जैसा है ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह पता चले कि इस केस में पीएफआई का भी कोई रोल है”।</p>



<p>इसी कड़ी में याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान कहा था कि यह तीन तलाक और गोहत्या जैसा नहीं है। हिजाब के बारे में तो कुरान में भी जिक्र किया गया है और मुस्लिम महिलाओं के लिए इसे पहनना फर्ज माना गया है।</p>



<p>यही नहीं छात्राओं के वकीलों ने &nbsp;ये भी कहा था कि हिजाब पहनना मूल अधिकारों के दायरे में यह आता है। इससे किसी और की आजादी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। वहीं कर्नाटक सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों ने कहा कि यह मामला धर्म के चश्में से देखना देश हित में नहीं होगा।</p>



<p>आपको बता दें कि उनका कहना था कि यह मामला तो शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य अनुशासन का है। हिजाब किसी धर्म में अनिवार्य है या नहीं, इससे स्कूल के ड्रेस कोड का कोई लेना देना नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हिजाब को लेकर मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय पर ही खड़े किए सवाल जानें</title>
		<link>https://hindikhabar.com/know-the-questions-raised-by-the-muslim-side-on-the-high-court-regarding-the-hijab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Sep 2022 14:18:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Government]]></category>
		<category><![CDATA[muslim paksha]]></category>
		<category><![CDATA[PM Modi]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[हिजाब पहनने पर उठे विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील आदित्य सोंधी ने दलील दी कि मैं जस्टिस सच्चर समिति की रिपोर्ट के निष्कर्ष का उल्लेख करता हूं। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि हिजाब, बुर्का आदि पहनने की अपनी प्रथाओं के कारण मुस्लिम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिजाब पहनने पर उठे विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील आदित्य सोंधी ने दलील दी कि मैं जस्टिस सच्चर समिति की रिपोर्ट के निष्कर्ष का उल्लेख करता हूं। इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि हिजाब, बुर्का आदि पहनने की अपनी प्रथाओं के कारण मुस्लिम महिलाएं भेदभाव का सामना कर रही थीं।</p>



<p>सोंधी ने नाइजीरियाई सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लागोस के पब्लिक स्कूलों में हिजाब के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। सरकार के आदेश को आखिरकार स्कूलों पर छोड़ देना चाहिए।&nbsp; इन परिस्थितियों में कौन सी सार्वजनिक व्यवस्था की समस्या पैदा होती है?</p>



<p>&nbsp;किसी आधार पर ही लड़कियों ने इसे पहना है। कर्नाटक हाई कोर्ट के सरकार के आदेश को न केवल धर्म की स्वतंत्रता, शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन, बल्कि अनुच्छेद 15 का भी उल्लंघन है, जो भेदभाव है छात्रों को हिजाब पहनने या अपनी शिक्षा जारी रखने का अधिकार कैसे चुनने के लिए कहा जा सकता है? छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति नहीं देने का मतलब यह भी है कि उन्हें शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। बता दें कि जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारतीय मुस्लिम महिलाओं को आगे बढ़ना है तो हिजाब को पीछे छोड़ना होगा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/indian-muslim-women-have-to-leave-the-hijab-behind-if-they-move-forward/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Mar 2022 05:25:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Row]]></category>
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		<category><![CDATA[स्कूल में हिजाब]]></category>
		<category><![CDATA[हिजाब पर प्रतिबंध]]></category>
		<category><![CDATA[हिजाब विवाद]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में इन दिनों मुस्लिम महिलाओं की पर्दा प्रथा की खूब चर्चा हो रही है। भारत के कर्नाटक में यह विवाद सबसे पहले शुरू हुआ। कर्नाटक ए उड्डपी में एक कॉलेज में यह विवाद उठा, जिसमें मुस्लिम छात्राओं को कक्षा के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी गई। इसके विरोध में छह लड़कियां धरने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारत में इन दिनों मुस्लिम महिलाओं की पर्दा प्रथा की खूब चर्चा हो रही है। भारत के कर्नाटक में यह विवाद सबसे पहले शुरू हुआ। कर्नाटक ए उड्डपी में एक कॉलेज में यह विवाद उठा, जिसमें मुस्लिम छात्राओं को कक्षा के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी गई। इसके विरोध में छह लड़कियां धरने पर बैठ गई।</p>



<p>फिलहाल कर्नाटक हाईकोर्ट में हिजाब विवाद पर सुनवाई चल रही है। कश्मीर की रहने वाली अर्शिया मलिक कहती हैं कि मुस्लिम समाज और खासकर इस समाज की महिलाओं को इससे परिचित होना चाहिए कि 1979 में इस्लामी जगत में तीन बड़ी घटनाएं हुईं, जिन्होंने रूढि़वादी तौर-तरीकों को पनपाया।</p>



<p>पहली, रूस ने अफगानिस्तान में अपनी सेनाएं भेज दीं, जिनका सामना करने के लिए मुजाहिदीन आ गए। दूसरी घटना, मक्का शरीफ में आतंकियों के हमले की थी। इन आतंकियों ने सैकड़ों लोगों को बंधक बनाने के बाद एलान किया कि सऊदी शासक इस्लाम के रास्ते से भटक गए हैं। इन आतंकियों से निपटने के लिए सऊदी शासकों ने अन्य देशों से मदद लेकर सैन्य कार्रवाई की।</p>



<p>1979 की तीसरी अहम घटना थी पेरिस में रह रहे आयतुल्ला खुमैनी की ईरान में वापसी और ईरान का वहाबी और सलाफी इस्लाम को अपनाना। इन तीनों घटनाओं ने एशिया के मुसलमानों को सदियों पीछे पहुंचा दिया।</p>



<p>अर्शिया मलिक के अनुसार, इन तीनों घटनाओं ने एशिया में मुस्लिम महिलाओं को सदियों पीछे धकेल दिया। इन घटनाओं का असर भारतीय राज्य कश्मीर में भी हुआ। कश्मीर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ की शह पर पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जनरल जिया ने आतंकवाद भड़काना शुरू किया। इसके कारण 1989-90 में कश्मीरी पंडितों को पलायन करना पड़ा। इस दौरान घाटी के सेक्युलर मुसलमानों को भी निशाना बनाया गया।</p>



<p>अर्शिया कहती हैं, &#8216;मैं श्रीनगर के लाल चौक इलाके से हूं और मुझे याद है कि कश्मीर में आतंक के उभार के साथ आतंकियों ने किस तरह लड़कियों और महिलाओं पर हिजाब, बुर्का, नकाब आदि थोपना शुरू कर दिया था। उन दिनों मस्जिदों और बिजली के खंभों पर पोस्टर चिपकाए जाते थे कि बुर्का न पहनने वाली महिलाओं पर एसिड फेंक दिया जाएगा।&#8217;</p>



<p>बकौल अर्शिया, ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिलाओं और सिनेमाघर मालिकों को भी निशाना बनाया जाने लगा। यह सब सलाफी और वहाबी इस्लाम के कारण हो रहा था, जो सऊदी अरब और अन्य इस्लामी देशों से पेट्रो डालर के जरिये फैलाया जा रहा था। सलाफी मुल्ला-मौलवी मुसलमानों को यह समझाते थे कि दुनिया में जहां भी काफिर रहते हैं, वह सब जगह इस्लाम के दायरे में आनी चाहिए। इसके लिए वे हदीसों और अन्य इस्लामी साहित्य की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते।</p>



<p>सारा इस्लामिक साहित्य अरबी भाषा में है और आम मुसलमान को इतनी फुरसत नहीं कि वह उसे सही तरह पढ़ और समझ सके। वे आलिम पर भरोसा करते हैं और यह मानते हैं कि वे ही उसे सही राह दिखाते हैं। जब पेट्रो डालर के जरिये वहाबी और सलाफी इस्लाम अन्य देशों में फैलाया जा रहा था, तब अपने देश की भी कुछ इस्लामी संस्थाओं ने उसे अपने स्तर पर फैलाना शुरू कर दिया।</p>



<p>अर्शिया आगे कहती हैं कि यह समझने की जरूरत है कि कुरान की आयतों में खिमार और जिलबाब का जिक्र तो है, लेकिन वह महिलाओं को पर्दे में रखने के लिए नहीं है। फिर भी शुक्रवार को होने वाली तकरीरों में मुस्लिम मर्दों को ऐसा ही बताया जाने लगा।</p>



<p>जब अपने देश में ऐसा हो रहा था, तब ट्यूनीशिया, मोरक्को, मिस्र, तुर्की आदि देशों में मुस्लिम महिला स्कालर कुरान की व्याख्या करके यह स्पष्ट कर रही थीं कि मर्द आलिमों ने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए हदीसों को अपने ढंग से लिखा और महिलाओं पर पर्दा थोपा। जो मुल्ला-मौलवी महिलाओं को पर्दे में रहना जरूरी बता रहे, वे दरअसल उस इस्लामी साहित्य का सहारा ले रहे हैं, जो अब्बासी खलीफाओं के जमाने में लिखा गया, न कि मुहम्मद साहब के समय में।</p>



<p>वह सवाल करती हैं कि आखिर भारत जैसा सेक्युलर देश अपने सभी समुदायों के लिए समान नागरिक संहिता क्यों नहीं ला सकता? देश ने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड बनाकर जो गलती की, उससे सबक लेना चाहिए। यह दुखद है कि भारत के कुछ मुसलमान अभी भी जिन्ना की टू नेशन थ्योरी में फंसे हैं। वे उन सियासी नेताओं से प्रभावित हैं, जो मुसलमानों को वहाबी इस्लाम के रास्ते पर धकेलकर खुद विलासी जीवन जीने में लगे हुए हैं।</p>



<p>यदि भारत का आम मुसलमान अपना और साथ ही अपनी लड़कियों और महिलाओं का भविष्य संवारना चाहता है तो उसे हिजाब, बुर्का आदि को छोडऩा होगा, क्योंकि ये न तो इस्लाम का जरूरी हिस्सा हैं और न ही आज इनकी कोई जरूरत रह गई है। भारतीय मुसलमानों को उस सबसे भी सबक सीखने की जरूरत है, जो कुछ आज अफगानिस्तान में हो रहा है। जब वहां मुस्लिम महिलाएं बुर्के से आजादी की लड़ाई लड़ रहीं हैं, तब भारत में कुछ लोग अपनी महिलाओं को बुर्का पहनाने की जिद ठाने हुए हैं।</p>



<p><strong>अर्शिया मलिक (लेखिका शिक्षिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं)</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Hijab Row: राजधानी के एक स्कूल में हिजाब पहने छात्रों को क्लास में जाने से रोका, वीडियो हुआ वायरल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/hijab-row-in-a-school-in-the-capital-students-wearing-hijab-were-stopped-from-going-to-class-the-video-went-viral/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Feb 2022 08:43:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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		<category><![CDATA[Muslim Women]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्लीः कर्नाटक से शुरुहुआ हिजाब विवाद जिसमें मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर अपनी क्लास में जाने से रोका गया, ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है। मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों में राजधानी दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के एक सरकारी स्कूल ने कथित तौर पर हिजाब पहने हुए छात्रों को कक्षाओं &#8230;]]></description>
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<p><strong>नई दिल्लीः </strong>कर्नाटक से शुरुहुआ हिजाब विवाद जिसमें मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर अपनी क्लास में जाने से रोका गया, ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है। मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों में राजधानी दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके के एक सरकारी स्कूल ने कथित तौर पर हिजाब पहने हुए छात्रों को कक्षाओं में जाने से रोका। जिसके बाद एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।</p>



<p>दरअसल यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित मुस्तफाबाद विधान सभा के तुकमीरपुर के सरकारी स्कूल का है। जिसमें छठी कक्षा में पढने वाली एक छात्रा को हिजाब पहन कर कक्षा में प्रवेश करने से रोका गया। वहीं, शिक्षा निदेशालय और स्कूल के प्रिंसिपल ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। इतना ही नहीं, स्कूल के अधिकारियों ने छात्राओं से कहा कि वे अब से अपनी मां की तरह स्कार्फ पहनकर स्कूल न आएं।</p>



<h4 class="wp-block-heading">हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश करने से रोका </h4>



<p>मालूम हो कि दुनिया भर में फैली महामारी कोरोना वायरस के चलते देश में कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं। जिसके बाद जानलेवा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया था। हालांकि, एक बार फिर से घटते कोरोना मामलों को ध्यान में रखते हुए 14 फरवरी से स्कूल खोलने का फैसला किया गया है. जिसके बाद हिजाब विवाद को लेकर दिल्ली के एक स्कूल से मामला सामने आया है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">क्लास में स्कार्फ पहनकर आने पर रोक</h4>



<p>सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में छात्रा को बताते हुए देखा जा सकता है कि क्लास में क्या हुआ, वीडियो में वह कहती हुई नजर आ रही है कि उनसे कहा जा रहा है कि कल से क्लास में स्कार्फ पहन कर मत आना। जिसके बाद बच्ची का कहना है कि उनके अलावा दो और छात्राओं का हिजाब उतरवाया। उन्हें मम्मी नहीं बनने की नसीहत भी दी गई।</p>



<p>जानकारी के अनुसार यह बच्ची उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित मुस्तफाबाद विधान सभा के तुकमीरपुर के सरकारी स्कूल में छठीं कक्षा की है। इस घटना के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन कुछ भी बोलने से बच रहा है। साथ ही शिक्षा निदेशालय के अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं। उनसे बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन इस मामले में वहां से कोई जवाब नहीं आया।</p>
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		<title>शिवमोगा में बजरंग दल के कार्यकर्ता की हत्या, हिजाब के खिलाफ लिखी थी पोस्ट, धारा 144 लागू</title>
		<link>https://hindikhabar.com/bajrang-dal-worker-dies-in-shivamogga-post-was-written-against-hijab-section-144-applied/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 10:11:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Row]]></category>
		<category><![CDATA[KARNATKA HOME MINISTER]]></category>
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					<description><![CDATA[देश में हिजाब को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब स्थिति हिंसा तक पहुंच गई है. बता दे कि कर्नाटक के शिवमोगा में एक 23 साल के युवक की हत्या कर दी गई. जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल पैदा हो गया और धारा 144 लागू हो गई. &#8230;]]></description>
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<p>देश में हिजाब को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब स्थिति हिंसा तक पहुंच गई है. बता दे कि कर्नाटक के शिवमोगा में एक 23 साल के युवक की हत्या कर दी गई. जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल पैदा हो गया और धारा 144 लागू हो गई.</p>



<p>जानकारी के मुताबिक मृतक युवक का नाम हर्ष था और वह बजरंगदल का कार्यकर्ता था. राज्य के गृह मंत्री अरागा जनेंद्र ने जिले के स्कूल कॉलेजों को अगले दो दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया है.</p>



<p>उन्होंने कहा कि 4 से 5 युवकों ने हर्ष की हत्या की है. अब तक इस घटना के पीछे किसी संगठन का नाम सामने नहीं आया है. फिलहाल जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति कंट्रोल में है. हालांकि कुछ लोगों ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया है.</p>



<p>जिले के सीगेहट्टी इलाके में कई लोगों ने कुछ वाहनों में आग लगा दी, जिन्हें बुझाने का काम जारी है. इस घटना ने हिजाब विवाद से पहले ही बढ़े राज्य के राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया है. हत्याकांड को लेकर बयानबाजी भी शुरू हो गई है. राज्य के सत्ताधारी नेता भी पूरी तरह नजर बनाए हुए है.</p>
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		<title>Karnataka Hijab Row: उडुपी में हिजाब विवाद के बाद खुला एमजीएम कॉलेज, जिले के सभी कॉलेजों में माहौल शांतिपूर्ण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/karnataka-hijab-row-mgm-college-opens-after-hijab-controversy-in-udupi-peaceful-atmosphere-in-all-colleges-of-the-district/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Feb 2022 10:58:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Other States]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Row]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka Hijab Row]]></category>
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					<description><![CDATA[Karnataka Hijab Row: कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कक्षा में कुछ छात्रों के हिजाब पहनने पर हुआ मामला अब राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भी फैल गया है। जिसके बाद कई जगहों से हिंसा की घटनाएं भी सामने आ चुकी है। मालूम हो कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित महात्मा गांधी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Karnataka Hijab Row: </strong>कर्नाटक के उडुपी में एक सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कक्षा में कुछ छात्रों के हिजाब पहनने पर हुआ मामला अब राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भी फैल गया है। जिसके बाद कई जगहों से हिंसा की घटनाएं भी सामने आ चुकी है। मालूम हो कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज को 10 दिन बंद रखने के बाद शुक्रवार को खोल दिया गया।</p>



<p>दरअसल पिछले सप्ताह इस कॉलेज (Mahatma Gandhi Memorial College) में हिजाब (Hijab Controversy) और भगवा शॉल को लेकर छात्र समूहों में नोकझोंक के साथ-साथ नारेबाजी की हुई थी। आपको बता दें कि प्री-यूनिवर्सिटी के छात्रों की प्रायोगिक परीक्षाएं होनी हैं। इसलिए कॉलेज को खोलने का निर्णय लिया गया।</p>



<p>आपको बता दें कि कॉलेज में केवल उन्हीं छात्रों को प्रवेश करने की अनुमति है जिन्हें परीक्षा देनी है। इस बीच कॉलेज में शुक्रवार से डिग्री कक्षाएं भी शुरू हो गई है। वहीं, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने राज्य रिजर्व पुलिस के जवानों समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया है। जानकारी के अनुसार 8 फरवरी को छात्रों के दो समूहों ने एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।</p>



<p>उधर, मुस्लिम छात्राओं का कहना था कि वे तब से हिजाब पहन रही हैं जब से उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लिया है। वहीं दूसरी तरफ लड़कों ने कहा कि अगर लड़कियों को हिजाब पहनकर आने की अनुमति दी जाती है तो वे भी भगवा शॉल पहनकर आएंगे। फिलहाल उडुपी के अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक सिद्दलिंगप्पा ने शुक्रवार को बताया कि जिले के सभी कॉलेजों में माहौल शांतिपूर्ण है।</p>
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		<item>
		<title>भारत में हिजाब विवाद पर कड़ा रुख अपनाने वाले पाकिस्तान को वहां की सांसद की सीख</title>
		<link>https://hindikhabar.com/the-lesson-of-the-parliamentarian-there-to-pakistan-who-took-a-tough-stand-on-the-hijab-controversy-in-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Feb 2022 13:14:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Hijab Row]]></category>
		<category><![CDATA[Pakistan]]></category>
		<category><![CDATA[Sherry Rehman]]></category>
		<category><![CDATA[Women&#039;s Day]]></category>
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					<description><![CDATA[पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सांसद शेरी रहमान ने पाकिस्तान में धार्मिक मामलों के केंद्रीय मंत्री नूर-उल-हक़ क़ादरी के महिलाओं की महिला दिवास को होने वाली रैली पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ख़त लिखकर चिंता ज़ाहिर की है। उन्होंने इस पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा है, “महिलाओं की रैली पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सांसद शेरी रहमान ने पाकिस्तान में धार्मिक मामलों के केंद्रीय मंत्री नूर-उल-हक़ क़ादरी के</strong> <strong>महिलाओं की महिला दिवास को होने वाली रैली पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ख़त लिखकर चिंता ज़ाहिर की है।</strong></p>



<p>उन्होंने इस पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा है, “महिलाओं की रैली पर प्रतिबंध लगाया जाना, चिंता का विषय है। केंद्रीय मंत्री का यह बयान हैरान करता है। आठ मार्च को महिला दिवस है और उस दिन यह प्रतिबंध।”</p>



<p>उन्होंने आगे लिखा है, “पाकिस्तान में किसी ने भी महिलाओं के हिजाब डे मनाने पर रोक नहीं लगाई है। जहां एक ओर हम हिजाब पर भारत के रवैए की आलोचना कर रहे हैं तो दूसरी ओर देश की महिलाओं की आठ मार्च को प्रस्तावित रैली को बैन करने की बात करते हैं।”</p>



<p>वो आगे लिखती हैं, “अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ग की महिला का नेतृत्व करता है, चाहे वो जहां कहीं भी हो। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य समाज में जेंडर से जुड़ी रूढ़ियों और महिलाओं को जागरूक करना है। रैली पर प्रतिबंध लगाने की मंशा जाहिर करके आप अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ही दिन ही उनकी स्वतंत्रता और अधिकारों से उन्हें वंचित कर रहे हैं।”</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="624" height="347" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Sherry-Rehman-1.jpg" alt="" class="wp-image-213006147774" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Sherry-Rehman-1.jpg 624w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Sherry-Rehman-1-300x167.jpg 300w" sizes="(max-width: 624px) 100vw, 624px" /></figure>



<p>पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए महिला मार्च की एक आयोजक ने कहा, &#8220;हमारे लिए पाकिस्तानियों का दिमाग़ और सोच बहुत छोटी है। मैं अब तक केवल एक प्लेकार्ड बनाने की वजह से घर में क़ैद हूं। मुझे किस तरह की गालियां नहीं दी गईं? चूंकि हिजाब पहनना हमारी सामूहिक सोच को दर्शाता है, इसलिए इसका पुरज़ोर समर्थन किया जा रहा है।&#8221;</p>
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