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	<title>Health Care India Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>पंजाब के पटियाला की महिला को ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ से मिला जीवनदान, किडनी स्टोन और शुगर का हुआ इलाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:39:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[CM health scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Swasthya Yojana : पटियाला में जब सूरज निकलता था, तब 46 वर्षीय सुनीता रानी उससे कई घंटे पहले ही जाग चुकी होती थीं। उनके लिए नींद लेना मुश्किल हो गया था। कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता था, जो खड़े होते ही शरीर के एक तरफ तेजी से फैल जाता था। हर &#8230;]]></description>
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<p><strong>Mukhyamantri Swasthya Yojana :</strong> पटियाला में जब सूरज निकलता था, तब 46 वर्षीय सुनीता रानी उससे कई घंटे पहले ही जाग चुकी होती थीं। उनके लिए नींद लेना मुश्किल हो गया था। कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता था, जो खड़े होते ही शरीर के एक तरफ तेजी से फैल जाता था। हर सुबह उनके पैर पहले से अधिक सूजे हुए होते थे और रसोई तक चलकर जाना भी थकावट भरा हो गया था। वे बीच-बीच में रुक जाती थीं, एक हाथ दीवार पर और दूसरा पेट पर रखकर दर्द कम होने का इंतजार करती थीं।</p>



<p>दर्द के बावजूद सुनीता ने अपने रोजमर्रा के काम जारी रखे और उम्मीद करती रहीं कि समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन जब दर्द और सूजन बढ़ने लगी तो परिवार ने उन्हें डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा। इसी दौरान उन्हें ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत मिल रही सुविधाओं के बारे में पता चला, जिसके बाद उन्होंने अपने परिवार सहित पंजीकरण करवाने का फैसला किया।</p>



<p>सुनीता ने तुरंत योजना के तहत पंजीकरण करवाया और अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। इलाज के लिए उन्हें माता कौशल्या अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां डॉक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद पता लगाया कि उनके यूरेटर में किडनी स्टोन फंसा हुआ है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि उनकी शुगर और गंभीर सूजन का इलाज किए बिना सर्जरी करना सुरक्षित नहीं होगा।</p>



<p>अपना अनुभव साझा करते हुए सुनीता रानी ने कहा, “जब दर्द असहनीय हो गया तो मैंने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पंजीकरण करवाया और अपने परिवार का स्वास्थ्य कार्ड बनवाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद किडनी स्टोन की पुष्टि की। मेरा शुगर लेवल बहुत ज्यादा था और शरीर में काफी सूजन थी, इसलिए डॉक्टरों ने पहले इन दोनों समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए इलाज शुरू किया।”</p>



<p>उन्होंने आगे कहा, “मैं नियमित रूप से अस्पताल में चेक-अप के लिए जा रही हूं और डॉक्टर लगातार मेरी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अब सूजन कम हो गई है और शुगर को नियंत्रित रखने के लिए मेरी दवाइयां भी बदल दी गई हैं।” सुनीता रानी इस बात से खुश हैं कि उनका इलाज कैशलैस तरीके से हो रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे अभी 10 दिनों का और इलाज दिया गया है, जिसके बाद डॉक्टर ऑपरेशन की तारीख तय करेंगे। शुरुआती इलाज से लेकर आने वाले दिनों में होने वाली सर्जरी तक, मुझे किसी भी प्रकार की राशि का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। यह मेरे लिए बहुत बड़ी राहत और सुकून की बात है।”</p>



<p>डॉक्टरों के अनुसार शुगर, शरीर में पानी की कमी और अस्वस्थ खानपान की आदतों के कारण किडनी स्टोन के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज में देरी होने से गंभीर संक्रमण और अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए समय रहते जांच और चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है।</p>



<p>सुनीता और उनके परिवार के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना मुश्किल समय में बड़ी राहत साबित हुई। इस योजना के तहत उन्हें तुरंत पंजीकरण, नियमित चिकित्सकीय निगरानी, किफायती इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक बिना आर्थिक बोझ के पहुंच मिली। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इससे परिवार को यह भरोसा मिला कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अब उनकी पहुंच में हैं।</p>



<p>आज सुनीता की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा, “अब सूजन काफी कम हो गई है और जल्द ही मेरा शुगर लेवल भी नियंत्रण में आ जाएगा। मेरा इलाज अभी भी जारी है, लेकिन अब स्वास्थ्य कार्ड की मदद से इलाज के दौरान मेरे मन में डर नहीं, बल्कि जल्द ठीक होने की उम्मीद है।”</p>



<p>भावुक होकर सुनीता ने कहा, “मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं परिवारों को बिना खर्चों की चिंता किए समय पर इलाज दिलाने में मदद कर रही हैं।” उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि आसान और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं तथा समय पर इलाज किस तरह लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं, आत्मविश्वास वापस ला सकते हैं और मुश्किल समय में परिवारों का सहारा बन सकते हैं।</p>



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		<title>हेल्थ इंश्योरेंस के बावजूद मरीज उठा रहे 95% इलाज खर्च का बोझ, NSO रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/health-insurance-patients-bear-95-percent-medical-cost-nso-report-big-revelation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:31:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health Care India]]></category>
		<category><![CDATA[Health Insurance]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Expenses]]></category>
		<category><![CDATA[NSO Report]]></category>
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					<description><![CDATA[Health Insurance : देश में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों की जेब पर इलाज का बोझ कम होता नहीं दिख रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 2025 के ताजा सर्वे में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है कि बीमा होने के बावजूद लोग इलाज &#8230;]]></description>
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<p><strong>Health Insurance :</strong> देश में हेल्थ इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों की जेब पर इलाज का बोझ कम होता नहीं दिख रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 2025 के ताजा सर्वे में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है कि बीमा होने के बावजूद लोग इलाज का बड़ा हिस्सा खुद ही चुकाने को मजबूर हैं।</p>



<p>जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच किए गए घरेलू उपभोग सर्वे के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च का बड़ा हिस्सा अब भी परिवार अपनी बचत, कर्ज या संपत्ति बेचकर पूरा कर रहे हैं। सर्वे में बताया गया कि 2017-18 की तुलना में स्वास्थ्य बीमा कवरेज तो बढ़ा है, लेकिन अपनी जेब से होने वाला खर्च (Out-of-Pocket Expenditure) में खास कमी नहीं आई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति</h3>



<p>ग्रामीण भारत में सरकारी और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का कवरेज 13% से बढ़कर 46% तक पहुंच गया है। हालांकि अस्पताल में औसतन 33,000 रुपये के इलाज में से करीब 95% यानी लगभग 31,500 रुपये मरीजों को खुद ही देने पड़ रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शहरी क्षेत्रों में स्थिति</h3>



<p>शहरों में बीमा कवरेज 9% से बढ़कर 32% हुआ है, लेकिन यहां भी 47,000 रुपये के औसत अस्पताल खर्च में लगभग 83% यानी करीब 39,000 रुपये मरीजों की जेब से जा रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इलाज महंगा हुआ तेजी से</h3>



<p>पिछले लगभग 7-8 वर्षों में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च लगभग दोगुना हो गया है। ग्रामीण इलाकों में यह वृद्धि करीब 97% और शहरी क्षेत्रों में लगभग 77% दर्ज की गई है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च सरकारी अस्पतालों की तुलना में काफी अधिक होने से यह बढ़ोतरी और तेज हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खर्च लगभग समान स्तर पर पहुंचा</h3>



<p>रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्रसव के दौरान होने वाला खर्च और मरीजों की जेब से किया गया खर्च लगभग समान स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में बीमा योजनाओं का लाभ ग्रामीण इलाकों की तुलना में थोड़ा बेहतर मिल रहा है।</p>



<p>देश में प्रति 1,000 लोगों पर अस्पताल में भर्ती होने की दर 29 के आसपास स्थिर बनी हुई है, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मामूली बदलाव देखा गया है।</p>



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