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	<title>Citizenship Ammendment Act Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<description>Hindi Khabar: Latest News Breaking News, हिंदी खबर चैनल, Hindi Khabar Live,Hindi News</description>
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	<title>Citizenship Ammendment Act Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>CAA को चुनौती देने वाली 200 से ज्यादा याचिकाओं पर आज SC में  होगी सुनवाई</title>
		<link>https://hindikhabar.com/more-than-200-petitions-challenging-caa-will-be-heard-in-sc-today/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Sep 2022 04:17:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[CAA]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Ammendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[Hearing on CAA in supreme court today]]></category>
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					<description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय सोमवार को यानि आज विवादास्पद नागरिकता संशोधन कानून यानि (CAA)की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं समेत 200 से अधिक जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित की(Justice U.U Lalit)अध्यक्षता वाली पीठ सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगी। उच्चतम न्यायालय की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उच्चतम न्यायालय सोमवार को यानि आज विवादास्पद नागरिकता संशोधन कानून यानि <strong>(CAA)</strong>की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं समेत 200 से अधिक जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित की<strong>(Justice U.U Lalit)</strong>अध्यक्षता वाली पीठ सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगी।</p>



<p>उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट<strong>(Justice S.Ravindra Bhat) </strong>की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए 220 याचिकाएं<strong>(220 Petitions)</strong>सूचीबद्ध हैं, जिनमें सीएए के खिलाफ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग<strong> (IUML) </strong>की प्रमुख याचिका भी शामिल है। शीर्ष अदालत में कुछ वर्षों से लंबित कई जनहित याचिकाओं पर भी आज सुनवाई होगी।</p>



<p>प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ आज कुछ अन्य जनहित याचिकाओं पर भी सुनवाई करने वाली है, जिसमें एक संगठन &#8216;वी द वूमेन ऑफ इंडिया&#8217; द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।सीएए के तहत 31 दिसंबर 2014 को या फिर उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।</p>



<p>कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने 18 दिसंबर 2019 को संबंधित याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जनवरी 2020 के दूसरे सप्ताह तक जवाब दाखिल करने को कहा था। </p>



<p>हालांकि, कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों के कारण यह मामला सुनवाई के लिए नहीं आ सका, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में वकील और वादी शामिल थे।</p>



<p>सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक आईयूएमएल ने अपनी याचिका में कहा है कि यह कानून समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और अवैध प्रवासियों के एक वर्ग को धर्म के आधार पर नागरिकता देने का इरादा रखता है।</p>
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		<title>Supreme Court: CAA प्रदर्शनकारियों से वसूली गई रकम वापस करे UP सरकार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-up-government-should-return-the-amount-recovered-from-caa-protesters/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Feb 2022 13:45:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[CAA]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Ammendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[UP Government]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वो 2019 में CAA प्रदर्शनकारियों से वसूले गए करोड़ों रुपए वापस करे। यूपी सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Ammendment Act) के प्रदर्शनकारियों से करोड़ों रुपए वसूले थे। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वो 2019 में CAA प्रदर्शनकारियों से वसूले गए करोड़ों रुपए वापस करे।</strong></p>



<p>यूपी सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Ammendment Act) के प्रदर्शनकारियों से करोड़ों रुपए वसूले थे।</p>



<p>सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी थी कि उसने साल 2019 में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में जारी नोटिस को वापस ले लिया है। इसके तहत तब 274 नोटिस जारी किए गए थे।</p>



<p>जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि राज्य सरकार को कथित प्रदर्शनकारियों से वसूले गए करोड़ों रुपए वापस करने होंगे।</p>



<p>कोर्ट ने राज्य सरकार को सार्वजनिक और निजी संपत्ति के नुकसान की उत्तर प्रदेश वसूली विधेयक, 2020 के तहत नए सिरे से कार्रवाई और नोटिस देने की अनुमति दी है। यूपी सरकार नए कानून के तहत मामले में कार्रवाई कर सकती है।</p>



<p>इस नए क़ानून के तहत अगर प्रदर्शनकारियों को सरकारी और निजी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने का दोषी पाया जाता है तो उन्हें जेल या एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>शरजील इमाम को जामिया हिंसा मामले में मिली बेल लेकिन फिर भी काटेंगे जेल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/sharjeel-imam-gets-bail-in-jamia-violence-case-but-will-still-be-jailed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Dec 2021 15:30:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Asam News]]></category>
		<category><![CDATA[CAA]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Ammendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Police]]></category>
		<category><![CDATA[Jamia Islamia]]></category>
		<category><![CDATA[National Register of Citizens]]></category>
		<category><![CDATA[NRC]]></category>
		<category><![CDATA[Sharjeel Imam]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली की एक अदालत ने JNU के छात्र शरजील इमाम को साल 2019 में जामिया इस्लामिया में हिंसा मामले में जमानत दे दी है। लेकिन शरजील को अभी भी जेल में ही रहना होगा क्योंकि इन पर तीन अन्य मामले शेष हैं। शरजील पर आरोप हैं कि उन्होंने साल 2019 में जामिया इस्लामिया में भड़काऊ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>दिल्ली की एक अदालत ने JNU के छात्र शरजील इमाम को साल 2019 में जामिया इस्लामिया में हिंसा मामले में जमानत दे दी है। लेकिन शरजील को अभी भी जेल में ही रहना होगा क्योंकि इन पर तीन अन्य मामले शेष हैं।</strong></p>



<p>शरजील पर आरोप हैं कि उन्होंने साल 2019 में जामिया इस्लामिया में भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद वहां हिंसा भड़क गई थी।</p>



<p>दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2020 में शरजील इमाम पर एफआईआर दर्ज की थी।</p>



<p>शरजील इमाम ने नागरिकता संशोधन कानून पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान 15 दिसंबर 2019 को भाषण दिया था।</p>



<p>जिसके बाद 28 जनवरी 2020 को शरजील को बिहार से गिरफ्तार किया गया था।</p>



<p>CAA और NRC के विरोध प्रदर्शन के दौरान शरजील का भारत के हिस्से करने को लेकर एक वीडियो वायरल हुआ था।</p>



<p>वीडियो में कहा गया था,  &#8220;अगर हमें असम के लोगों की मदद करनी है तो उसे भारत से कट करना होगा।&#8221;</p>



<p>अप्रैल 2020 में दिल्ली पुलिस ने शरजील पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया था।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>CAA के नियम बनने में देरी, गृह मंत्रालय ने मांगा 6 महीने का वक्त</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delay-in-making-rules-of-caa-ministry-of-home-affairs-asked-for-6-months/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Jul 2021 10:54:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Amit Shah]]></category>
		<category><![CDATA[CAA]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Ammendment Act]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के नियम अभी तक तय नहीं हो पाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में इसकी जानकारी दी है। नागरिकता संशोधन कानून के नियम बनाने के लिए 6 महीने का और समय मांगा है। मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में इस संदर्भ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>नई दिल्ली:</strong> केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के नियम अभी तक तय नहीं हो पाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में इसकी जानकारी दी है।</p>



<p>नागरिकता संशोधन कानून के नियम बनाने के लिए 6 महीने का और समय मांगा है। मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में इस संदर्भ में जानकारी दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 जनवरी, 2022 तक का वक्त मांगा है, ताकि नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत नियमों को तैयार किया जा सके।</p>



<p>गृह मंत्रालय ने कहा है कि CAA को 12 दिसम्बर 2019 को नोटिफाई किया गया था। हालांकि 2020 में ये कानून का रूप ले चुका है लेकिन लोकसभा और राज्यसभा की कमेटियों ने नियम तैयार करने के लिए जनवरी, 2022 तक का वक्त मांगा है।</p>



<p>आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने साल 2019 में नागरिकता संशोधन एक्ट को पेश किया था। सीएए पाकिस्तान, बांगलादेश और अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक और उत्पीड़न का शिकार हुए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध समुदायों को नागरिकता देने के उद्देश्य से बनाया था।</p>



<p>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;केंद्र सरकार द्वारा कानून लाए जाने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में जमकर विरोध हुआ था। साथ ही विपक्ष भी इस कानून के खिलाफ था। हालांकि, बिल के कानून का रूप लेने के बाद से ही देश में कोरोना वायरस की एंट्री हो गई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>किसी मुसलमान को CAA से नुकसान नहीं- RSS प्रमुख मोहन भागवत</title>
		<link>https://hindikhabar.com/no-muslim-is-harmed-by-caa-rss-chief-mohan-bhagwat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jul 2021 11:42:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[CAA]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Ammendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[Mohan Bhagwat]]></category>
		<category><![CDATA[NRC]]></category>
		<category><![CDATA[Rashtriya Swayam Sevak Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[RSS]]></category>
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					<description><![CDATA[गुवाहाटी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने CAA को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत के मुसलमानों को नागरिकता संशोधन क़ानून यानी कि सीएए से घबराने की जरूरत नहीं है। किसी भी मुसलमान को कोई नुक़सान नहीं पहुँचेगा। भागवत दो दिन के असम क दौरे पर गए हैं। उन्होंने बुधवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>गुवाहाटी:</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने CAA को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत के मुसलमानों को नागरिकता संशोधन क़ानून यानी कि सीएए से घबराने की जरूरत नहीं है। किसी भी मुसलमान को कोई नुक़सान नहीं पहुँचेगा।</p>



<p>भागवत दो दिन के असम क दौरे पर गए हैं। उन्होंने बुधवार को गुवाहाटी में ये बात कही है। RSS प्रमुख ने कहा, &#8220;CAA, भारत के किसी भी नागरिक के विरुद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है। भारत के मुसलमान नागरिक को CAA से कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।&#8221;</p>



<p>मोहन भागवत ने गुवाहाटी में एक पुस्तक विमोचन समारोह में अपने भाषण में कहा कि नागरिकता क़ानून का मकसद पड़ोसी देशों में दमन का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षा पहुंचाना है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"> योजनाबद्ध तरीके से मुसलमानों की संख्या  को बढ़ाया गया</h4>



<p>RSS &nbsp;प्रमुख ने पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए कहा, &#8220;साल 1930 से योजनाबद्ध तरीके से मुसलमानों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके पीछे की मंशा साफतौर से जनसंख्या बढ़ाकर अपना वर्चस्व स्थापित करने और फिर इस देश को पाकिस्तान बनाने की थी।&#8221;</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">CAA किसी भारत के नागरिक के विरुद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है। भारत के नागरिक मुसलमान को CAA से कुछ नुकसान नहीं पहुंचेगा। विभाजन के बाद एक आश्वासन दिया गया कि हम अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता करेंगे। हम आजतक उसका पालन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने नहीं किया: गुवाहाटी में मोहन भागवत <a href="https://t.co/0ISfqT0A9S">pic.twitter.com/0ISfqT0A9S</a></p>&mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) <a href="https://twitter.com/AHindinews/status/1417780034689851393?ref_src=twsrc%5Etfw">July 21, 2021</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<p>उन्होंने आगे कहा कि भारत ने अल्पसंख्यकों का हमेशा ही ख़याल रखा है। साथ ही उन्होंने कहा, &#8221; विभाजन के बाद भारत सरकाक ने एक आश्वासन दिया था। आश्वासन में कहा था कि हम अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता करेंगे। भारत आजतक उसका पालन कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया।&#8221;</p>



<h4 class="wp-block-heading"> CAA और NRC का हिंदू-मुस्लिम से कोई लेना-देना नहीं </h4>



<p>मोहन भागवत ने अपने भाषण में ये भी कहा कि CAA और NRC का हिंदू-मुस्लिम से कोई लेना-देना नहीं है। इसे लेकर सांप्रदायिक कहानी कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ उठाने के तहत रची है।</p>



<p>नागरिकता रजिस्टर के समर्थन में चर्चा करते हुए भागवत ने कहा कि हर देश को ये जानने का अधिकार है कि उस देश के अपने नागरिक कौन हैं।</p>



<p>उन्होंने कहा, &#8220;इस मामले को राजनीतिक रंग दिया गया है क्योंकि इससे सरकार जुड़ी है। कुछ लोग इससे राजनीतिक फ़ायदा उठाना चाहते हैं इसलिए इन दोनों मुद्दों को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं।&#8221;</p>



<p>आरएसएस प्रमुख असम में इस साल बीजेपी के सत्ता में दोबारा लौटने के बाद पहली बार पहुंचे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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