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	<title>Chaitra navratri 2023 Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Chaitra navratri 2023 Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>Navratri 2023: महापर्व नवरात्रि शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Oct 2023 03:32:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
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					<description><![CDATA[Navratri 2023: रविवार, 15 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवी आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है और मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री का &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Navratri 2023:</strong> रविवार, 15 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवी आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है और मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री का पूजा की जाती है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग हो तो उस समय कलश स्थापना नहीं की जा सकती, लेकिन शास्त्रों के अनुसार चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण से चौथे चरण तक कलश स्थापना की जा सकती है। पंचांग के अनुसार 14 अक्टूबर, शनिवार को सायं 4:25 मिनट पर चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। यह नक्षत्र रविवार को शाम 6:12 मिनट तक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त</h3>



<p class="wp-block-paragraph">घटस्थापना और देवी पूजा प्रात: काल करने का विधान हैं। लेकिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में कलश स्थापना वर्जित है। पंचांग के अनुसार, 15 अक्टूबर, रविवार, चित्रा नक्षत्र सायं 6:12 मिनट तक है और वैधृति योग सुबह 10:24 मिनट तक रहेगा। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में जब चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र के दो चरण व्यतीत हो चुके हैं तो घटस्थापना की जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कलश स्थापना करना शुभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">15 अक्टूबर को प्रात: काल में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दो दो चरण संपूर्ण हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में घटस्थापना प्रातः काल भी कर सकते हैं। साथ ही अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है। 15 अक्तूबर 2023 को अभिजीत मुहूर्त 11:31 मिनट से लेकर 12:17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप घटस्थापना कर सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें:</strong><a href="https://hindikhabar.com/religious/rashifal-the-day-will-bring-progress-for-people-of-aquarius-and-capricorn/">Rashifal: कुंभ और मकर राशि वालों के लिए उन्नति लेकर आएगा दिन, जानें अन्य का हाल</a></p>
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		<title>चैत्र नवरात्रि में आज मां कालरात्रि की पूजा, जानें पूजन विधि और कथा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/worship-of-maa-kalratri-today-in-chaitra-navratri-know-the-worship-method-and-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Mar 2023 03:21:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2023 Mahurat]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Kalratri]]></category>
		<category><![CDATA[maa Kalratri pujan]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्रि में आज मां कालरात्रि की पूजा होगी। मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। मां कालरात्रि त्री नेत्रधारी है। इनके गले में विधुत की अद्भुत माला है। इनके हाथों में खड्ग और कांटा है। गधा देवी का वाहन है। ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। इनकी &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">चैत्र नवरात्रि में आज मां कालरात्रि की पूजा होगी। मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। मां कालरात्रि त्री नेत्रधारी है। इनके गले में विधुत की अद्भुत माला है। इनके हाथों में खड्ग और कांटा है। गधा देवी का वाहन है। ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। इनकी उपासना से जीवन से सारे दुख-संकट दूर हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के समक्ष घी का दीपक जलाएं। देवी को लाल फूल अर्पित करें। साथ ही गुड़ का भोग लगाएं। देवी मां के मंत्रो का जाप करें या सप्तशती का पाठ करें। फिर लगाए गए गुड़ का आधा भाग परिवार में बाटें। बाकी आधा गुड किसी ब्राह्मण को दान कर दें। इस दिन काले रंग के वस्त्र धारण करके तंत्र-मंत्र की विध्या से किसी को नुकसान ना पहुंचाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करने के लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है। इनकी उपासना से भय, दुर्घटना तथा रोगों का नाश होता है। इनकी उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का असर नहीं आता है। ज्योतिष में शनि नामक ग्रह को नियंत्रित करने के लिए इनकी पूजा करना अद्भुत परिणाम देता है। जिन लोगों की कुंडली में शनि से जुड़ी समस्या है, उनके लिए भी कालरात्रि की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">श्वेत या लाल वस्त्र धारण करके रात्रि में मां कालरात्रि की पूजा करें, मां के समक्ष दीपक जलाएं और उन्हें गुड का भोग लगाएं। इसके बाद 108 बार नवार्ण मंत्र पढ़ते जाएं और एक-एक लौंग चढ़ाते जाएं। नवार्ण मंत्र है -&#8220;ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे।&#8221; उन 108 लौंग को इकठ्ठा करके अग्नि में डाल दें। आपके विरोधी और शत्रु शांत होंगे।</p>
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		<title>Chaitra Navratri के छठें दिन मां कात्यायनी की विधिपूर्ण ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://hindikhabar.com/worship-maa-katyayani-methodically-on-the-sixth-day-of-chaitra-navratri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Mar 2023 11:45:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2023 Mahurat]]></category>
		<category><![CDATA[chaitra navratri muhurat]]></category>
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					<description><![CDATA[Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें मां दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मां कात्यायनी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में माता कात्यायनी को छठ मैया के नाम &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Chaitra Navratri</strong>: चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें मां दुर्गा का उग्र रूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मां कात्यायनी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में माता कात्यायनी को छठ मैया के नाम से जाना जाता है। भगवती कात्यायनी देवियों में सबसे सुंदर हैं। मान्यता है कि इस दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से हर काम में सफलता मिलती है। साथ ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। जानिए मां कात्यायनी का स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शुभ मुहूर्त</h2>



<p class="wp-block-paragraph">चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि प्रारंभ- 26 मार्च 2023 को शाम 04 बजकर 32 मिनट</p>



<p class="wp-block-paragraph">चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि समाप्त- 27 मार्च 2023 को शाम 05 बजकर 27 मिनट</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 06 बजकर 35 मिनट से शाम 06 बजकर 58 मिनट तक</p>



<p class="wp-block-paragraph">पूजा विधि नवरात्रि के छठे दिन सबसे पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद मां दुर्गा और उनके स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। पूजा विधि शुरू करने से पहले हाथ में एक फूल लेकर मां का ध्यान करें। इसके बाद मां को भोग लगाएं। फिर माता को कुमकुम, अक्षत, फूल आदि अर्पित करने के बाद सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद मां को उनका प्रिय भोग यानी शहद का भोग लगाएं। आप चाहें तो मिठाई आदि का भोग लगा सकते हैं। फिर जल चढ़ाएं और दीपक और धूप जलाकर मां के मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती कर किसी भी गलती के लिए माता से क्षमा मांगें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये भी पढ़े:<a href="https://hindikhabar.com/religious/how-to-worship-mother-skandamata-on-the-5th-day-of-chaitra-navratri-know-auspicious-time/">Chaitra Navratri के 5वें दिन कैसे करे मां स्कंदमाता की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त</a></p>
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		<title>आज चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन करें स्कंदमाता की पूजा, जानें मुहूर्त, पूजा विधि</title>
		<link>https://hindikhabar.com/worship-skandamata-today-on-the-fifth-day-of-chaitra-navratri-know-muhurta-method-of-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Mar 2023 02:52:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[आज 26 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन है। आज मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा करते हैं। शेर पर सवार मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। वे अपने हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और उनकी गोद में उनके पुत्र स्कंदकुमार होते हैं। स्कंद कुमार की माता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आज 26 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन है। आज मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा करते हैं। शेर पर सवार मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। वे अपने हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और उनकी गोद में उनके पुत्र स्कंदकुमार होते हैं। स्कंद कुमार की माता होने के कारण देवी का नाम मां स्कंदमाता है। स्कंद कुमार भगवान कार्तिकेय को ​कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर के वध के लिए देवी ने 6 मुखवाले स्कंद कुमार की उत्पत्ति की, आगे चलकर स्कंदकुमार ने तारकासुर का वध करके धर्म स्थापना की।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मां स्कंदमाता का पूजा मुहूर्त</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">पंचांग के अनुसार, आज 26 मार्च को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शाम 04 बजकर 32 मिनट तक है। आज प्रात:काल से प्रीति योग बना है, जो रात 11 बजकर 33 मिनट तक है। उसके बाद से आयुष्मान योग प्रारंभ होगा। आज रवि योग दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से कल सुबह 06 बजकर 18 मिनट तक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मां स्कंदमाता के मंत्र</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:<br>पूजा मंत्र: ओम देवी स्कन्दमातायै नमः<br>महाबले महोत्साहे महाभय विनाशिनी। त्राहिमाम स्कन्दमाते शत्रुनाम भयवर्धिनि।।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मां स्कंदमाता की पूजा विधि</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज प्रात: स्नान के बाद मां स्कंदमाता की पूजा करें। मां स्कंदमाता को लाल पुष्प जैसे गुड़हल, गुलाब, अक्षत्, कुमकुम, धूप, दीप, नैवेद्य, गंध आदि चढ़ाएं। इस दौरान मां स्कंदमाता के मंत्रों का उच्चारण करें। उसके बाद माता को केले और बताशे का भोग लगाएं। उसके बाद उनके बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। फिर कपूर या घी के दीपक से स्कंदमाता की आरती करें। उसके बाद अपनी मनोकामना देवी के समक्ष व्यक्त करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>Chaitra Navratri के 5वें दिन कैसे करे मां स्कंदमाता की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2023 13:37:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2023 Mahurat]]></category>
		<category><![CDATA[chaitra navratri muhurat]]></category>
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					<description><![CDATA[Chaitra Navratri :पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता माता पार्वती का उग्र रूप हैं। इस संबंध में एक कथा कही गई है। कि एक बार जब माता पार्वती क्रोधित होकर कुमार कार्तिकेय की रक्षा के लिए आदिशक्ति के रूप में प्रकट हुईं थी। तो इंद्र भय से कांपने लगे। इंद्र अपनी जान बचाने के लिए देवी &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Chaitra Navratri</strong> :पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता माता पार्वती का उग्र रूप हैं। इस संबंध में एक कथा कही गई है। कि एक बार जब माता पार्वती क्रोधित होकर कुमार कार्तिकेय की रक्षा के लिए आदिशक्ति के रूप में प्रकट हुईं थी। तो इंद्र भय से कांपने लगे। इंद्र अपनी जान बचाने के लिए देवी से क्षमा याचना करने लगे। चूंकि कुमार कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है।  इसलिए सभी देवी-देवताओं ने मां दुर्गा के रूप का उत्सव मनाने के लिए उन्हें स्कंदमाता कहना शुरू कर दिया और उनकी स्तुति करने लगे। तब से, माँ दुर्गा के पाँचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाने लगा, और उन्हें पाँचवीं अधिक्षत्री के रूप में पूजा जाने लगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पूजा विधि</h2>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रह्म मुहूर्त में स्कंदमाता की पूजा करने से अधिक शुभ फल मिलते हैं। इसके लिए आप सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद स्कंदमाता की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं और फिर उन्हें फूल और भोग आदि अर्पित करें। स्कंदमाता को केले का प्रसाद चढ़ाया जाता है। अगर केला न हो तो बताशे का प्रसाद भी स्कंदमाता को अर्पित कर सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शुभ मुहूर्त</h2>



<p class="wp-block-paragraph">चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देवी स्कंदमाता के लिए भोग</p>



<p class="wp-block-paragraph">भक्त स्कंदमाता को प्रसाद के रूप में केले चढ़ा सकते हैं। देवी स्कंदमाता का प्रिय रंग</p>



<p class="wp-block-paragraph">हरा रंग मां स्कंदमत का प्रिय रंग है, इसलिए भक्त सुख-समृद्धि की देवी को प्रसन्न करने के लिए हरा रंग धारण कर सकते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">ये भी पढ़े:<a href="https://hindikhabar.com/religious/on-the-fourth-day-of-chaitra-navratri-maa-kushmanda-should-worship-ritually-see-auspicious-time/">Chaitra Navratri के चौथे दिन मां कुष्मांडा विधिपूर्ण करें  पूजा, देखे शुभ मुहूर्त</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Chaitra Navratri के चौथे दिन मां कुष्मांडा विधिपूर्ण करें  पूजा, देखे शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://hindikhabar.com/on-the-fourth-day-of-chaitra-navratri-maa-kushmanda-should-worship-ritually-see-auspicious-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anukampa]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Mar 2023 13:01:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri 2023 Mahurat]]></category>
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					<description><![CDATA[Chaitra Navratri: देवी कुष्मांडा को अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाने के लिए जाना जाता है। भक्त जीवन में अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए उनकी पूजा करते हैं। मां दुर्गा के सभी भक्त चैत्र नवरात्रि के नौ शुभ दिन मना रहे हैं। कल चौथा दिन है और यह मां कुष्मांडा को समर्पित है।  जिन्हें ऊर्जा से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">Chaitra Navratri: देवी कुष्मांडा को अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाने के लिए जाना जाता है। भक्त जीवन में अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए उनकी पूजा करते हैं। मां दुर्गा के सभी भक्त चैत्र नवरात्रि के नौ शुभ दिन मना रहे हैं। कल चौथा दिन है और यह मां कुष्मांडा को समर्पित है।  जिन्हें ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। कुष्मांडा नाम तीन शब्दों से मिलकर बना है &#8211; &#8216;कू&#8217;, &#8216;उष्मा&#8217; और &#8216;अंदा&#8217;। कु का अर्थ है थोड़ा, उष्मा का अर्थ है गर्मी और अंडा का अर्थ है अंडा। तो, कुष्मांडा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए है जिसने ब्रह्मांड को एक छोटे ब्रह्मांडीय अंडे की तरह बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देवी को प्रकाश फैलाने के लिए अंधकार को मिटाने के लिए जाना जाता है। भक्त जीवन में अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए उनकी पूजा करते हैं। मान्यता के अनुसार कुष्मांडा की पूजा करने से निर्णय लेने में मदद मिलती है और बुद्धि का स्तर भी बढ़ता है। कुष्मांडा के भक्तों को अच्छी दृष्टि और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ कुष्मांडा ने प्रकाश, जीवन दिया और ब्रह्मांड का निर्माण किया। मां दुर्गा का यह अवतार सूर्य के केंद्र में रहता है और इसलिए प्रकाश का कारण है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पूजा मुहूर्त</h2>



<p class="wp-block-paragraph">हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 24 मार्च को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट पर हो रहा है और इसका समापन 25 मार्च को दोपहर 02 बजकर 53 मिनट पर होगा। इस दिन बहुत ही शुभ योग यानी रवि योग बन रहा है। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन रवि योग सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मां कुष्मांडा की पूजा करने से विशेष फल मिलता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">जानिए मां कुष्मांडा की पूजा करने की विधि</h2>



<p class="wp-block-paragraph">माँ कुष्मांडा की पूजा करने के लिए, आपको पूरे समर्पण के साथ सभी नवरात्रि-व्रतों को पूरा करने की शक्ति के लिए भगवान गणेश की पूजा करके शुरुआत करनी चाहिए। आपको मां कुष्मांडा की मूर्ति को विभिन्न श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए। इनमें सिंदूर, मेहंदी, काजल, बिंदी, चूड़ियां, बिछिया, कंघा, आलता, शीशा, पायल, इत्र, झुमके, नोजपिन, हार, लाल चुनरी, महावर, हेयरपिन आदि शामिल हैं। प्रसाद के रूप में आपको मालपुए, हलवा या दही का भोग लगाना चाहिए, जिसे आप बाद में किसी दुर्गा मंदिर के पुजारियों को दे सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये भी पढ़े:<a href="https://hindikhabar.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-thousands-of-people-gathered-in-chetrichandra-festival-cm-baghel-said-land-will-be-given-to-sindhi-community-in-nava-raipur/">Chhattisgarh: चेट्रीचंड्र महोत्सव में हजारों लोग जुटे, सीएम बघेल बोले- ‘नवा रायपुर में सिंधी समाज को दी जाएगी जमीन’</a></p>
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		<item>
		<title>Chaitra Navratri 2023: इस माता के मंदिर में डकैत भी झुकाते थे शीश</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chaitra-navratri-2023-dacoits-also-used-to-bow-their-heads-in-the-temple-of-this-mother/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 04:33:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्र शुरू हो चुके हैं। नौ दिन तक पूरा नगर मां भवानी की आराधना में लीन रहेगा। इन नौ दिन तक माता के ​मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ रहेगी, इनमें कुछ भक्त आसपास के क्षेत्रों के रहेंगे।इतना ही नही कुछ भक्त मां भवानी के दरबार में नंगे पैर चलकर जाएंगे। नव नवरात्र को &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">चैत्र नवरात्र शुरू हो चुके हैं। नौ दिन तक पूरा नगर मां भवानी की आराधना में लीन रहेगा। इन नौ दिन तक माता के ​मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ रहेगी, इनमें कुछ भक्त आसपास के क्षेत्रों के रहेंगे।इतना ही नही कुछ भक्त मां भवानी के दरबार में नंगे पैर चलकर जाएंगे। नव नवरात्र को लेकर माता मंदिरों में तैयारियां पूर्ण गत रोज ही कर ली गई थीं। आज से सुबह से भक्तों ने मंदिरों पर पहुंचना शुरू कर दिया। भक्तों की सुरक्षा के लिए पुलिस के जवानों का पहरा भी नजर आया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन देवी मंदिरों में नवरात्र में उत्सव और मेले जैसे माहौल रहता है। शहर के कुछ मंदिर तो ऐसे, जिनके पीछे रोचक घटनाक्रम छिपा हुआ है। इनमें से एक सिं​धिया घराने की मांढरे की माता। राजपरिवार कोई शुभ कार्य करने से पहले मांढरे की माता की चौखट पर शीश नवाकर आशीर्वाद लेना नहीं भूलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सौ सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं दरबार में</p>



<p class="wp-block-paragraph">कंपू स्थित पहाड़िया पर महिषासुर मर्दिनी रूपी माता का मंदिर हैं। मांढरे की माता के रूप में अंचल में ही नहीं पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध हैं। पहाड़ी पर मंदिर होने के कारण इस पहाड़ी का नाम भी मांढरे की पहाड़ी है। लगभग 100 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिये पहुंचते हैं। मांढरे की माता का निर्माण लगभग सवा सौ साल से पहले तत्कालीन ग्वालियर रियासत के महाराज जयाजीराव सिंधिया ने कराया था। बताया जाता है कि आनंदराव मांढरे सिंधिया की सेना में कर्नल पद पर कार्यरत थे। उन्हीं के अनुरोध पर राजपरिवार की कुलदेवी का मंदिर का निर्माण कराया था। आज भी उन्ही का परिवार इस मंदिर की पूजा-अर्चना का दायित्व संभालता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विजयदशमी पर सिंधिया राजपरिवार का मुखिया शमी पूजन के लिये आते हैं। इसके साथ ही मंदिर को पहाड़ी पर इसलिये बनाया था कि ताकि राजपरिवार महल से ही प्रतिदिन कुलदेवी के दर्शन कर सकें। महल में दूरबीन लगी हैं, जो सीधे मंदिर के गर्भगृह की सीध में हैं। महल से दूरबीन के माध्यम से देवी के दर्शन किये जा सकते हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों का कहना है कि देवी मां हर भक्त की मनोकमना पूर्ण करती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मन्नत पूरी होने पर भक्त चढ़ाते हैं घंटे</h3>



<p class="wp-block-paragraph">शहर से 20 किलोमीटर की दूरी पर सातऊ की शीतला माता का मंदिर है। सातऊ की शीतला मंदिर अंचल के गुर्जर समाज की अगाध श्रद्धा है। बताया जाता है कि शीतला माता के मंदिर का निर्माण 1669 में कराया गया था। इस मंदिर से बागियों (डकैतों) की भी आस्था रहती थी। पांच दशक पूर्व तक मंदिर बीहड़ में होने के कारण मंदिर 70 से 80 के दशक में डकैत भी मन्नत पूरी होने पर घंटे चढ़ाने के लिए आते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यहां प्रचलित किदवंती के अनुसार माता के पहले भक्त गजाधर मंदिर के पास ही बसे सातऊ गांव में रहते थे। वे गाय के दूध से नियमित रूप से भिंड जिले की गोहद तहसील के खरौआ गांव के प्राचीन देवी मंदिर अभिषेक करते थे। एक दिन देवी ने उन्हें दर्शन देकर अपने साथ चलने को कहा। मां की आज्ञा पर वह सातऊ गांव आ गये। यहां उन्होंने देवी का आहवान किया। देवी प्रकट हो गईं। और उसी जंगल में मंदिर बनाने के लिए कहकर माता एक स्थान पर विराजित हो गईं, उसी स्थान पर भव्य देवी मंदिर हैं। अंचल के लोग चैत्र की नवरात्रि पर पैदल दर्शन करने के लिये आते हैं। नवरात्रि के अलावा प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु आते हैं। यहां सत्यनारायण की कथा कराने का भी महत्व है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नवरात्रि में इन बातों का रखें खास ध्यान, माँ दुर्गा होंगी प्रसन्न</title>
		<link>https://hindikhabar.com/take-special-care-of-these-things-in-navratri-maa-durga-will-be-happy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 04:25:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Durga]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja]]></category>
		<category><![CDATA[navratri special]]></category>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि का त्योहार काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों में एक अलग तरह की राैनक रहती है।साल में चार तरह के नवरात्रि चैत्र नवरात्रि, माघ गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि मनाए जाते हैं। शारदीय नवरात्रि जहां आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर में तो चैत्र नवरात्रि मार्च व अप्रैल &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि का त्योहार काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घरों में एक अलग तरह की राैनक रहती है।साल में चार तरह के नवरात्रि चैत्र नवरात्रि, माघ गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि मनाए जाते हैं। शारदीय नवरात्रि जहां आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर में तो चैत्र नवरात्रि मार्च व अप्रैल में मनाए जाते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो रहे हैं। देवी दुर्गा को समर्पित इस उत्सव में भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए विशेष प्रयास करते हैं। इस दाैरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। मान्यता है कि मां दुर्गा भक्तों से प्रसन्न होती है और उनको आशीर्वाद देते हुए उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या करें</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>दुर्गा सप्तशती पढें-</li>



<li>नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती के श्लोकों का पाठ करने से मां प्रसन्न होती हैं।</li>



<li>मां आरती करें</li>



<li>पूरे नौ दिनों तक विधिपूर्वक पूजन करें। सुबह और संध्या मां की आरती करें।</li>



<li>लाल रंग भेंट करें</li>



<li>मां दुर्गा को लाल रंग बेहद प्रिय है उनकी पसंद के फूल व वस्त्र उन्हें समर्पित करें।</li>



<li>ब्रह्मचर्य का पालन</li>



<li>नवरात्रि के दिनों में व्रत रखने वाले भक्त ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें।</li>



<li>महिलाओं का सम्मान</li>



<li>मां दुर्गा की दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए हमेशा महिलाओं का सम्मान करें।</li>



<li><br><strong>क्या न करें</strong></li>



<li>लड़ाई-झगड़ा न करें</li>



<li>नाै दिनों के दौरान किसी भी तरह की कलह या लड़ाई-झगड़ा न करें।</li>



<li>तंबाकू न खाएं</li>



<li>नवरात्रि के दाैरान सिगरेट, तंबाकू-गुटखा आदि से परहेज करें।</li>



<li>मदिरापान से बचें</li>



<li>नवरात्रि के दौरान मांस-मदिरा, लहसुन-प्&#x200d;याज का प्रयोग न करें।</li>



<li>बाल न कटवाएं</li>



<li>नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान बाल कटवाने और शेविंग करने से बचें।</li>



<li>गलत न करें</li>



<li>नवरात्रि में किसी के विषय में गलत न सोचें व किसी का बुरा न करें।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Chaitra navratri 2023: नवरात्रि पर घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और नियम जानें</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chaitra-navratri-2023-know-the-auspicious-time-and-rules-of-ghatasthapana-on-navratri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Mar 2023 10:38:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja]]></category>
		<category><![CDATA[navratri special]]></category>
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					<description><![CDATA[नवरात्रि का महापर्व साल में दो बार आता है। पहले चैत्र नवरात्रि और फिर शारदीय नवरात्रि। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च यानि कल से लेकर 30 मार्च दिन गुरुवार तक रहने वाले हैं। नवरात्रि के इस पवित्र दिनों में मां दुर्गा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि का महापर्व साल में दो बार आता है। पहले चैत्र नवरात्रि और फिर शारदीय नवरात्रि। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च यानि कल से लेकर 30 मार्च दिन गुरुवार तक रहने वाले हैं। नवरात्रि के इस पवित्र दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व बताया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आपको बता दें कि चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 21 मार्च को रात 10 बजकर 52 मिनट से लेकर 22 मार्च को रात 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट को लेकर सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी घटस्थापना के लिए आपको कुल 01 घंटा 09 मिनट की अवधि मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">घटस्थापना या कलश स्थापना के दौरान कुछ विशेष नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहले देवी मां की चौकी सजाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा का स्थान चुनें। इस स्थान को साफ कर लें और गंगाजल से शुध्द करें। एक लड़की की चौकी रखकर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर देवी मां की मूर्ति की स्थापना करें। इसके बाद प्रथम पूज्य गणेश जी का ध्यान केरं और कलश स्थापना करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब कलश स्थापना या घटस्थापना के लिए नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधे। कलश में जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी हल्दी की गांठ, दूर्वा और रुपए का सिक्का डालें। अब कलश में आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें और फिर इस कलश को दुर्गा की प्रतिमा की दाईं ओर स्थापित करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Chaitra Navratri 2023: सज गया माता का दरबार, कल से लगेगी भक्तों की कतार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chaitra-navratri-2023-matas-court-decorated-devotees-will-queue-from-tomorrow/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Mar 2023 10:11:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra navratri 2023]]></category>
		<category><![CDATA[decorated]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja]]></category>
		<category><![CDATA[navratri special]]></category>
		<category><![CDATA[Sharda Navratri]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्र सर्वार्थ सिद्धि योग में बुधवार यानि कल से प्रारंभ होंगीं। नवरात्र में आदिशक्ति की आराधना के लिए शहर के देवी के दरबार सज गया है। ऐसे मंदिरों पर सुरक्षा के दृ​ष्टिकोण से विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जहां खासी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इनमें मांढरे की माता, नहर वाली माता, पहाड्या &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">चैत्र नवरात्र सर्वार्थ सिद्धि योग में बुधवार यानि कल से प्रारंभ होंगीं। नवरात्र में आदिशक्ति की आराधना के लिए शहर के देवी के दरबार सज गया है। ऐसे मंदिरों पर सुरक्षा के दृ​ष्टिकोण से विशेष तैयारियां की जा रही हैं, जहां खासी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इनमें मांढरे की माता, नहर वाली माता, पहाड्या वाली माता, आमखो व हाइकोर्ट वाली काली माता, झांसी रोड स्थित वैष्णो देवी, महलगांव स्थित करौली माता मंदिर सहित अन्य मंदिर शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देवी के भक्तों ने घरों में भी कलश स्थापना, दुर्गासप्ती पाठ सहित नौ दिन माता की आराधना में रमे रहने की तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। मंगलवार की रात से शीतला माता मंदिर सातऊ पर भक्तों का पैदल दर्शन करने के लिए जाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। नगर में नवरात्र व नवसंत्सर को लेकर उत्साह और उमंग का वातावरण है। मंदिरों में जागरण शुरू हो जाएंगे। कुछ देवी भक्त कठोर संकल्प के साथ नौ दिन का व्रत भी रखेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सिंधिया राजवंश की कुलदेवी मांढरे की माता पर नवरात्र की तैयारियां पूर्ण कर लीं गईं हैं। यहां नौ दिन तक मेला जैसा माहौल रहता है। मंदिर के नीचे प्रसाद व खेल-खिलौने की दुकानें सज गईं हैं। यहां बड़ी संख्या में देवी भक्त दर्शनों के लिए जाते हैं। मांढरे की माता के नीचे ही आमखो वाली कालीमाता का मंदिर हैं। यहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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