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	<title>मां चंद्रघंटा की कथा Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>नवरात्र के तीसरे दिन करें देवी चंद्रघंटा का पूजन, मिलेंगे यह लाभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Apr 2022 02:48:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Chaitra Navratri special 2022]]></category>
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		<category><![CDATA[चैत्र नवरात्रि विशेष 2022]]></category>
		<category><![CDATA[मां चंद्रघंटा की कथा]]></category>
		<category><![CDATA[मां चंद्रघंटा पूजन]]></category>
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					<description><![CDATA[आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, यानि मां दुर्गा की तीसरी शक्ति की पूजा का दिन है। आज मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जायेगी। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम शांतिदायक &#8230;]]></description>
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<p>आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, यानि मां दुर्गा की तीसरी शक्ति की पूजा का दिन है। आज मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जायेगी। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।</p>



<p>धर्म के अनुसार देवी चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर निर्भरता, सौम्यता और विनम्रता जैसी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। चंद्रघंटा की पूजा करने से अशुभ ग्रह के बुरे प्रभाव खत्म हो जाते हैं। मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। जिनके दस हाथों में से चार दाहिनी हाथों में कमल का फूल, धनुष, जप माला और तीर है और पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है। जबकि चार बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है और पांचवा हाथ वरद मुद्रा में रहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मां च्रंदघंटा की कथा</strong></h3>



<p>हिंदू शास्त्र के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चल रहा था तब असुरों का स्वामी महिषासुर ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर इंद्र का सिंहासन छीन लिया और खुद स्वर्ग का स्वामी बन बैठा। इसे देखकर सभी देवता गण काफी दुखी हुए। स्वर्ग से निकाले जाने के बाद सभी देवतागण इस समस्या से निकलने के लिए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास गए। वहां जाकर सभी देवताओं ने असुरों के किए गए अत्याचार और इंद्र, चंद्रमा, सूर्य, वायु और अन्य देवताओं के सभी छीने गए अधिकार के बारे में भगवान को बताया।</p>



<p>देवताओं ने भगवान को बताया कि महिषासुर के अत्याचार के कारण स्वर्ग लोक तथा पृथ्वी पर अब विचरन करना असंभव हो गया है। तब यह सुनकर ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव शंकर अत्यंत क्रोधित हो गए। उसी समय तीनो भगवान के मुख से एक ऊर्जा उत्पन्न हुई। देवतागणों के शरीर से निकली हुई उर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई। यह ऊर्जा दसों दिशाओं में व्याप्त होने लगी। तभी वहां एक कन्या उत्पन्न हुई। तब शंकर भगवान ने देवी को अपना त्रिशूल भेट किया। भगवान विष्णु ने भी उनको चक्र प्रदान किया। इसी तरह से सभी देवता ने माता को अस्त्र-शस्त्र देकर सजा दिया। इंद्र ने भी अपना वज्र एवं ऐरावत हाथी माता को भेंट किया।</p>



<p>सूर्य ने अपना तेज, तलवार और सवारी के लिए शेर प्रदान किया। तब देवी सभी शास्त्रों को लेकर महिषासुर से युद्ध करने के लिए युद्ध भूमि में आ गई। उनका यह विशाल का रूप देखकर महिषासुर भय से कांप उठा। तब महिषासुर ने अपनी सेना को मां चंद्रघंटा के पर हमला करने को कहा। तब देवी ने अपने अस्त्र-शस्त्र से असुरों की सेनाओं को भर में नष्ट कर दिया। इस तरह से मां चंद्रघंटा ने असुरों का वध करके देवताओं को अभयदान देते हुए अंतर्ध्यान हो गई।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>मां चंद्रघंटा का पूजन</strong></h4>



<p>देवी चंद्रघंटा के पूजा में श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए पिले या गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ मानते है। तीसरे दिन भगवती की पूजा में दूध की प्रधानता होनी चाहिए और पूजन के बाद वह दूध ब्राह्मण को देना उचित माना जाता है। इस दिन सिंदूर लगाने का भी रिवाज है।</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>मां चंद्रघंटा का भोग</strong></h4>



<p>कन्याओं को खीर, हलवा या स्वादिष्ट मिठाई भेट करने से माता प्रसन्न होती है। माता चंद्रघंटा को प्रसाद के रूप में गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाने से जातक को सभी बिघ्न बाधाओं से मुक्ति मिलाती है|</p>



<h4 class="wp-block-heading"><strong>मां चंद्रघंटा पूजन के सिद्ध मंत्र</strong></h4>



<p>देवी चंद्रघंटा पूजा में इन मंत्रों को करने से सौम्यता और विनम्रता जैसी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। आइऐ जानते है वो मंत्र</p>



<p><strong>या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।<br>नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।</strong></p>



<p><strong>पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।<br>प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥</strong></p>
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