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	<title>उच्चतम न्यायालय Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>Delhi: सुप्रीम कोर्ट के लिए आज व्यस्त दिन, 9 जजों की संविधान पीठ करेगी 4 मामलों की सुनवाई</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-today-is-a-busy-day-for-the-supreme-court-the-constitution-bench-of-9-judges-will-hear-4-cases/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Oct 2023 04:19:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi: शीर्ष कोर्ट के लिए आज व्यस्त दिनों में से एक दिन होने वाला है। नौ जजों की संविधान पीठ द्वारा 12 अक्टूबर, गुरुवार को चार मामलों की सुनवाई की जाएगी। बता दें, नौ जजों की पीठ द्वारा सुने जाने वाले कुछ मामले दो से तीन दशकों से भी अधिक समय से समाधान का इंतजार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi: </strong>शीर्ष कोर्ट के लिए आज व्यस्त दिनों में से एक दिन होने वाला है। नौ जजों की संविधान पीठ द्वारा 12 अक्टूबर, गुरुवार को चार मामलों की सुनवाई की जाएगी। बता दें, नौ जजों की पीठ द्वारा सुने जाने वाले कुछ मामले दो से तीन दशकों से भी अधिक समय से समाधान का इंतजार कर रहा है। इस केस पर कोर्ट की यह अंतिम सुनवाई नहीं हैं, बल्कि यह केवल प्रक्रियात्मक सुनवाई है। </p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Delhi:</strong> <strong>मामला जिसपर कोर्ट सुनवाई करेगा</strong></h3>



<p>पहला मामला संविधान के अनुच्छेद-39(बी) से जुड़ा है जिसमे &#8220;समुदाय के भौतिक संसाधनों&#8221; की व्याख्या करना शामिल है। यह केस महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के अध्याय VIIIA की संवैधानिक वैधता के बारे में है। याचिकाकर्ता, जो संपत्ति मालिक है उन्होंने इस अध्याय की वैधता को चुनौती दी है। मुद्दा यह है कि क्या कोई संवैधानिक संशोधन, एक बार रद्द हो जाने पर, मूल या प्रतिस्थापित अनुच्छेद को फिर से लागू करेगा। दूसरा केस स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ा है। यह मामला बिहार कोयला खनन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 1992 और उसके तहत बनाए गए नियमों को चुनौती से संबंधित है, जो खनिज-युक्त भूमि से भूमि राजस्व पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कुछ अन्य मामले जिसपर कोर्ट की रहेगी नजर</strong><strong></strong></h3>



<p>तीसरा मामला औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा-2(जे) के तहत &#8216;उद्योग&#8217; की परिभाषा को प्रतिबंधात्मक रूप से पढ़े जाने का है। &#8216;उद्योग&#8217; शब्द को औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा-2 (जे) के तहत परिभाषित किया गया है और इसमें माल और सेवाओं के उत्पादन, आपूर्ति या वितरण के लिए नियोक्ता और उसके श्रमिकों के बीच सहयोग से जुड़ी कोई भी संगठित गतिविधि शामिल है। चौथा केस संविधान में वर्णित समवर्ती सूची से संबंधित है जिसमें उद्योग(विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 की धारा-18जी द्वारा राज्य के लिए अपनी समवर्ती शक्तियों का प्रयोग करने में उत्पन्न बाधा के विषय पर कोर्ट सुनवाई करेगा।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/national/batla-house-encounter-delhi-hc-will-give-its-verdict-on-the-death-sentence-of-the-accused-today/">Batla House Encounter: आरोपी की फांसी की सजा पर आज दिल्ली HC सुनाएगा फैसला</a></p>
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		<item>
		<title>Supreme Court: व्यस्त होने वाला है 12 अक्टूबर का दिन, 7 जजों की संविधान पीठ करेगी छह मामलों की सुनवाई</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-october-12-is-going-to-be-a-busy-day-constitution-bench-of-7-judges-will-hear-six-cases/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Oct 2023 14:29:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[संवैधानिक बेंच]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट के लिए कल यानी 12 अक्टूबर, 2023 का दिन बहुत व्यस्त होने वाला है। कोर्ट 12 अक्टूबर को कम-से-कम छह मामलों की सुनवाई करेगा। और ये सभी सुनवाई सात जजों की संवैधानिक पीठ करेगी। बता दें, मामला अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हैं, बल्कि यह केवल प्रक्रियात्मक सुनवाई के लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Supreme Court:</strong> सुप्रीम कोर्ट के लिए कल यानी 12 अक्टूबर, 2023 का दिन बहुत व्यस्त होने वाला है। कोर्ट 12 अक्टूबर को कम-से-कम छह मामलों की सुनवाई करेगा। और ये सभी सुनवाई सात जजों की संवैधानिक पीठ करेगी। बता दें, मामला अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हैं, बल्कि यह केवल प्रक्रियात्मक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Supreme Court:</strong> मामला जो कल सुनवाई की जानी है</h3>



<p>पहला मामला उड़ीसा से संबंधित है यह मामला उड़ीसा बिक्री कर अधिनियम, 1947 की धारा 5ए की वैधता को चुनौती से संबंधित है। मामले में प्राथमिक मुद्दा अधिनियम की धारा-8 के स्पष्टीकरण की संवैधानिकता थी। दूसरा मामला यह है कि क्या मौलिक अधिकार संसदीय विशेषाधिकारों पर हावी हो सकते हैं? यह मामला 2003 में सामने आया था जब तमिलनाडु विधानसभा द्वारा विशेषाधिकार हनन और घोर अवमानना ​​के आरोप में पत्रकारों की गिरफ्तारी के आदेश के बाद पत्रकार एन रवि और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुछ अन्य मामला जो सूचीबद्ध है</h3>



<p>तीसरा केस अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़ा है। जिसमें अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने की बात 2019 में की गई थी जिसे सात जजों की संविधान पीठ को भेजा गया था। चौथा केस यह तब शुरू हुआ था जब 2010 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग (सेवाओं में आरक्षण) अधिनियम, 2006 की धारा 4(5) को असंवैधानिक करार दिया। अधिनियम की धारा 4(5) सार्वजनिक सेवाओं में अनुसूचित जाति आरक्षण के लिए वाल्मिकी और मजभी सिख जातियों को &#8216;पहली प्राथमिकता&#8217; प्रदान करती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुछ और विषय जिसपर कल होगी सुनवाई</h3>



<p>पांचवां मामला धनविधेयक से संबंधित है। जिसमें राज्यसभा को दरकिनार करने के लिए धन विधेयक के रूप में कानूनों को पारित किया गया था। वित्त अधिनियम, 2017, जिसने वित्त अधिनियम, 1994 में कुछ संशोधन पेश किए, इसको भारतीय संविधान के अनुच्छेद-110 के तहत &#8220;धन विधेयक&#8221; माना जा सकता है। न्यायालय के समक्ष सवाल यह है कि क्या वित्त अधिनियम, 2017 के माध्यम से किए गए संशोधन धन विधेयक के दायरे में थे। छठा विषय स्पीकर की शक्तियों से संबंधित है 7 जजों की संवैधानिक पीठ द्वारा तय किया जाना है कि &#8220;क्या स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने के इरादे का नोटिस जारी करना स्पीकर को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने से रोकता है&#8221;।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/national/delhi-high-court-cannot-tolerate-obstruction-in-judicial-system/">Delhi High Court: न्यायिक प्रणाली में बाधा नहीं कर सकते बर्दाश्त</a></p>
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		<title>संसद सदस्यता निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में AAP सांसद राघव</title>
		<link>https://hindikhabar.com/aap-mp-raghav-approaches-supreme-court-against-suspension-of-parliament-membership/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Oct 2023 10:14:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[AAP सांसद राघव चड्ढा]]></category>
		<category><![CDATA[आम आदमी पार्टी]]></category>
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		<category><![CDATA[राज्यसभा सांसद]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[AAP MP Raghav Chadhha Moves SC: आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद से अपने अनिश्चितकालीन निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राघव चड्ढा को उनके खिलाफ विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 11 अगस्त, 2023 को संसद के ऊपरी सदन से निलंबित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>AAP MP Raghav Chadhha Moves SC:</strong> आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद से अपने अनिश्चितकालीन निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राघव चड्ढा को उनके खिलाफ विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 11 अगस्त, 2023 को संसद के ऊपरी सदन से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन की वजह में बताया गया था कि चयन समिति के लिए उनके नाम प्रस्तावित करने से पहले पांच राज्यसभा सदस्यों की सहमति नहीं ली गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मानसून सत्र के दौरान किए गए थे निलंबित</h3>



<p>सांसद को मानसून सत्र के दौरान निलंबित कर दिया गया था, राघव चड्ढा ने तर्क दिया है कि उनका निलंबन राज्यसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद-14 और 21 का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट में दायर इस सिविल रिट याचिका में राज्यसभा सचिवालय और उसके अध्यक्ष प्रतिवादी हैं। चड्ढा ने दलील दी है कि किसी भी सदस्य को शेष सत्र से अधिक अवधि के लिए निलंबित करना प्रतिबंध है। उन्हें इस साल संसद के मानसून सत्र के आखिरी घंटे से निलंबित कर दिया गया।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/national/israel-palestine-war-israeli-embassy-can-be-targeted-security-agency-on-alert-mode/">Israel- Palestine War: इजरायली दूतावास को बनाया जा सकता है निशाना, अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसी</a></p>
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		<item>
		<title>दिल्ली: लक्षद्वीप सांसद मोहम्मद फैज़ल पदीपुरा को शीर्ष अदालत से राहत, संसद से अयोग्य किए गए थे घोषित</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-relief-from-the-apex-court-to-lakshadweep-mp-mohammad-faizal-padipura-who-was-declared-disqualified-from-parliament/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Oct 2023 11:36:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उच्चतम न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[मोहम्मद फैजल]]></category>
		<category><![CDATA[मोहम्मद फैज़ल पदीपुरा]]></category>
		<category><![CDATA[लक्षद्वीप प्रशासन]]></category>
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					<description><![CDATA[Mohammed Faizal Padippura Case: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार, 09 अक्टूबर को केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी। जिसमें हत्या के प्रयास के मामले में लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल पदीपुरा की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया गया था। केरल उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाकर, न्यायमूर्ति हृषिकेश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Mohammed Faizal Padippura Case:</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार, 09 अक्टूबर को केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी। जिसमें हत्या के प्रयास के मामले में लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल पदीपुरा की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया गया था। केरल उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाकर, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और संजय करोल की पीठ ने फैज़ल की लोकसभा सदस्यता को प्रभावी ढंग से बहाल कर दिया, जो उच्च न्यायालय के आदेश के बाद संसद से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लक्षद्वीप प्रशासन से मांगी प्रतिक्रिया</h3>



<p>शीर्ष अदालत ने सजा पर रोक लगाते हुए मामले में लक्षद्वीप प्रशासन और शिकायतकर्ताओं से भी प्रतिक्रिया मांगी। बता दें, 11 जनवरी को, कावारत्ती की एक सेशन कोर्ट ने 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक विवाद के संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेता, पीएम सईद के दामाद पदनाथ सलीह की हत्या के प्रयास के लिए फैज़ल और तीन अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। सभी चार आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा प्रभावी रूप से 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रिहाई के लिए किया था आवेदन</h3>



<p>मामले में चारों दोषियों ने 12 जनवरी को केरल उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की। उन्होंने अपनी दोषसिद्धि और सजा को निलंबित करने और अपील के लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा करने के लिए आवेदन दायर किया। इसी साल 25 जनवरी को, केरल उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई गई दोषसिद्धि और सजा को निलंबित कर दिया, जिसके बाद केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने शीर्ष अदालत में अपील की। इसके बाद शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सांसद के खिलाफ थे प्रथम दृष्टया सबूत</h3>



<p>उच्च न्यायालय ने मामले की दोबारा सुनवाई की और दोषसिद्धि को निलंबित करने से इनकार कर दिया, हालांकि सजा पर रोक लगा दी। इसने राय दी कि सांसद के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत थे। इसके चलते फैज़ल को शीर्ष अदालत के समक्ष वर्तमान अपील का सामना करना पड़ा।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/national/delhi-state-information-commission-should-conduct-hybrid-hearing-instructions-from-supreme-court/">दिल्ली: राज्य सूचना आयोग करें हाइब्रिड सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश</a></p>
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		<item>
		<title>दिल्ली: राज्य सूचना आयोग करें हाइब्रिड सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-state-information-commission-should-conduct-hybrid-hearing-instructions-from-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Oct 2023 10:48:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उच्चतम न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्रीय सूचना आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[जनहित याचिका]]></category>
		<category><![CDATA[पीआईएल]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य सूचना आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[सूचना आयुक्त]]></category>
		<category><![CDATA[हाइब्रिड सुनवाई]]></category>
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					<description><![CDATA[Hybrid Hearing By State Information Commission: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान सभी राज्य सूचना आयोगों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत शिकायतों और अपीलों को सुनने के लिए एक हाइब्रिड प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने आदेश दिया है कि राज्य सूचना आयोग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Hybrid Hearing By State Information Commission:</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान सभी राज्य सूचना आयोगों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत शिकायतों और अपीलों को सुनने के लिए एक हाइब्रिड प्रणाली स्थापित करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने आदेश दिया है कि राज्य सूचना आयोग को हाइब्रिड सुनवाई के लिए विकल्प चुनने और वीडियो लिंक साझा करने का विकल्प प्रदान करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग को सभी पक्षकारों के लिए कुशल और सुलभ बनाया जाना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एक महीने के अंदर उठाए कदम</h3>



<p>कोर्ट ने निर्णय दिया कि &#8220;सभी राज्य और केंद्रीय मंत्रालय के ईमेल संकलित करने के लिए एक महीने की अवधि के भीतर कदम उठाएंगे, जिसे सभी एसआईसी और सीआईसी को प्रस्तुत किया जाएगा। इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए, डीओपीटी एक बैठक बुलाएगा। &#8220;सभी राज्य और केंद्रीय सूचना आयुक्तों को दिए गए निर्देश का पालन करने के लिए एक समयसीमा तैयार करनी होगी। शीर्ष अदालत ने आगे निर्देश दिया कि राज्य जहां भी आवश्यक हो, फंड उपलब्ध कराए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">न्याय तक पहुंच अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार</h3>



<p>आदेश पारित करते समय, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह भी कहा कि न्याय तक पहुंच संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत एक मौलिक अधिकार है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक अनिवार्य घटक है। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि तकनीक का उपयोग अब एक विकल्प नहीं बल्कि एक आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) अपनी कार्यवाही हाइब्रिड तरीके से करता है, जिससे नागरिकों के लिए पहुंच आसान हो जाती है।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/business/delhi-corrective-petition-against-the-decision-of-the-supreme-court/">दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ “Corrective Petition”</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में “द्विभाषी” रखने पर किया जा रहा है विचार, बधिर भी समझ सकेंगे कार्यवाही</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-consideration-is-being-made-to-have-bilingual-in-the-supreme-court-even-the-deaf-will-be-able-to-understand-the-proceedings/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Oct 2023 10:33:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उच्चतम न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[द्विभाषी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायालय कार्यवाही]]></category>
		<category><![CDATA[वकील सारा सनी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Supreme Court Wants interpreter For Its Constitution Bench: देशभर में रोज सैकड़ों अदालती कार्यवाही होती है। अधीनस्थ न्यायलय से लेकर उच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक लेकिन ये जरूरी नहीं है कि देश के प्रत्येक नागरिक कोर्ट की कार्यवाही को आसानी से समझ सकें। देश के नागरिक कानून कार्यवाही को सुगम तरीके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Supreme Court Wants interpreter For Its Constitution Bench:</strong> देशभर में रोज सैकड़ों अदालती कार्यवाही होती है। अधीनस्थ न्यायलय से लेकर उच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक लेकिन ये जरूरी नहीं है कि देश के प्रत्येक नागरिक कोर्ट की कार्यवाही को आसानी से समझ सकें। देश के नागरिक कानून कार्यवाही को सुगम तरीके समझ सके इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि वह संविधान पीठ की सभी सुनवाई के दौरान एक दुभाषिया मौजूद रखने पर विचार कर रहा है ताकि अदालती कार्यवाही को बधिर व्यक्तियों सहित सभी आमजन समझ सकें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Deaf Lawyer सारा सनी पर गौर करने के बाद आया सुझाव</h3>



<p>भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एक मामले की सुनवाई कर रही बहरी यानी Deaf वकील सारा सनी की उपस्थिति पर गौर करने के बाद आज यह सुझाव दिया। शीर्ष अदालत ने अपने खर्च पर एक दुभाषिया नियुक्त करने का फैसला किया था ताकि वकील सारा सनी सुनवाई का बेहतर तरीके से पालन कर सकें। सीजेआई चंद्रचूड़ ने संकेत दिया है कि इस कदम को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">पहली बार अदालत द्वारा नियुक्त हुआ दुभाषिया</h3>



<p>बता दें, भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, &#8220;मैं महासचिव से कह रहा था कि अब संविधान पीठों के लिए, हमें एक दुभाषिया रखना चाहिए ताकि सुनवाई सभी को समझ में आ सके। यह पहली बार है कि अदालत द्वारा नियुक्त दुभाषिया यहां उपस्थित हुआ है।&#8221; बता दें, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इस सुझाव का स्वागत किया और टिप्पणी की, &#8220;यह वास्तव में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है। इस अदालत में यह निर्णय सही मायने में विविधता को दर्शाता है।&#8221;</p>



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