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	<title>अग्रसेन की बावली Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>अग्रसेन की बावली का बदलेगा रंग-रूप, दर्शकों को मिलेंगी कई सुविधाएं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Oct 2023 03:32:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कनॉट प्लेस में उग्रसेन की बावली का रंग रूप बदला जाएगा। ऐसे में यह अपने नए लुक से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करेगा। बारिश, मौसम परिवर्तन और भूकंप से कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सीढ़ियों और मेहराबों को संरक्षित किया गया है। जहां पत्थर निकल गए हैं, वहां नए रख दिए जाएंगा। शाम को लोग घूमने &#8230;]]></description>
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<p>कनॉट प्लेस में उग्रसेन की बावली का रंग रूप बदला जाएगा। ऐसे में यह अपने नए लुक से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करेगा। बारिश, मौसम परिवर्तन और भूकंप से कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सीढ़ियों और मेहराबों को संरक्षित किया गया है। जहां पत्थर निकल गए हैं, वहां नए रख दिए जाएंगा।</p>



<p><strong>शाम को लोग घूमने आते हैं</strong></p>



<p>खास बात यह है कि दीयों से रोशनी की भी योजना है। ऐसे में पर्यटक यहां शाम के समय भी आ सकते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसका कार्य आठ साल बाद करेगा। एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। राजधानी में जहां कई शताब्दी पुराने तालाब हैं, वहीं ऐतिहासिक बावड़ियों का भी अच्छा खासा हिस्सा है। इनमें से कई समय के साथ संरक्षण के अभाव में नष्ट हो गए और कई कंक्रीट के जंगल में कहीं खो गए।</p>



<p>हालांकि, बावड़ियाँ जो आज भी मौजूद हैं, लोगों को भूजल और वर्षा जल के भंडारण के महत्व की याद दिलाती हैं। ऐसे में छह साल बाद उग्रसेन कुएं में फिर से पानी आ गया, जो अब लबालब नजर आ रहा है। इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं।</p>



<p><strong>इसे अग्रोही के राजा उग्रसेन ने तैयार करवाया था</strong></p>



<p>इतिहासकारों के अनुसार माना जाता है कि इसे महाभारत काल में उग्रसेन नामक अग्रोही राजा ने तैयार कराया था। बाद के ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, इसका पुनर्निर्माण 14वीं शताब्दी में अग्रवाल समुदाय द्वारा किया गया था, जिन्हें महाराजा अग्रसेन का वंशज माना जाता था। जल स्तर तक जाने के लिए 100 से अधिक सीढ़ियाँ हैं, और जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, तापमान भी गिरता जाता है।</p>



<p><strong>बावली में पानी आने लगा</strong></p>



<p>इसे संरक्षित करने का काम चल रहा है। उनका काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। लंबे समय बाद किसी कुएं में प्राकृतिक पानी देखना भी कम खुशी की बात नहीं है। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ</p>



<p><strong>विद्यार्थियों की संख्या अधिक रहती है</strong></p>



<p>हेली रोड पर स्थित यह बावड़ी मूल रूप से 60 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा कुआं है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। सीढ़ी के अंत तक पहुँचने के लिए आपको लगभग 103 से 105 सीढ़ियाँ उतरनी होंगी। यहां बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और विद्यार्थियों के साथ-साथ पर्यटक भी आते हैं। इन लोगों की संख्या पहले से भी ज्यादा बढ़ती जा रही है। लाल बलुआ पत्थर की दीवारों वाली यह बावड़ी ऊपर से बेहद खूबसूरत दिखती है, लेकिन जैसे-जैसे आप सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं तो गहरी रहस्यमयी खामोशी छा जाती है।</p>
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