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सुपरटेक ट्विन टावरों को गिराने के आदेश के पीछे की वजह, कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को कहा- आपके यहां भष्ट्राचार टपकता है!

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नोएडा: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने आदेश दिया कि ट्विन टावरों को गिराने का काम तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए और बिल्डर को ही इसके खर्च का भुगतान करना पड़ेगा।

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इस दौरान कोर्ट ने कहा कि ट्विन टावरों के निर्माण के दौरान बिल्डर ने सीधे-सीधे बिल्डिंग प्लान का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि ट्विन टावरों के सभी फ्लैट मालिकों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ प्रतिपूर्ति की जाए।


क्या है मामला


नोएडा प्राधिकरण ने नवंबर 2009 में ट्विन टावरों के निर्माण के लिए मंजूरी दी थी। ट्विन टावरों के निर्माण के दौरान न्यूनतम दूरी और राष्ट्रीय भवन कोड का उल्लंघन किया गया। अब शीर्ष न्यायालय ने अपने आदेश में इसे तीन महीने के भीतर गिराने के आदेश दिए।

कोर्ट ने आदेश में कहा है, ‘इस मामले का रिकॉर्ड ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जो नोएडा के अधिकारियों और अपीलकर्ता और उसके प्रबंधन के बीच मिलीभगत को उजागर करते हैं। मामले ने कानून के प्रावधानों के बिल्डर द्वारा उल्लंघन में प्राधिकरण की नापाक संलिप्तता का खुलासा किया है’।


कोर्ट ने फ्लैट बायर्स के हितों के संदर्भ में कहा कि, ‘उनका जीवन स्तर सबसे अधिक प्रभावित होता है। फिर भी, बिल्डर की आर्थिक ताकत और नियोजन निकायों द्वारा संचालित कानूनी अधिकार की ताकत का सामना करते हुए जो कुछ आवाज उठाते हैं उन्हें परिणामों की थोड़ी निश्चितता के साथ अधिकारों के लिए एक लंबी और महंगी लड़ाई का पीछा करना पड़ता है’।


बिल्डर कंपनी सुपरटेक एमराल्ड के वकील विकास सिंह ने कहा कि ट्विन टावर बिल्डिंग का निर्माण 2009 में शुरु हुआ था लेकिन फ्लैट बायर्स को कोर्ट जाने में 3 साल का समय लगा, ये संदेहजनक स्थिति है।


कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब प्राधिकरण ने बिल्डर का पक्ष लिया इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप बिल्डर की भाषा बोल रहे हैं,आप गैर-निजी संस्था हैं, आपके अंग-अंग से भ्रष्टाचार टपकता है।

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