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आलोक शर्मा के बयान पर कांग्रेस ने सीएम और शर्मा को दिया नमाज पढ़ने का न्योता

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मध्यप्रदेश में चुनावी साल में नेताओं के बीच बयानबाजी तेज है। भोपाल के पूर्व मेयर और बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक शर्मा ने हनुमान जन्मोत्सव के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को लेकर बयान दिया। आलोक शर्मा ने कहा- जब कोई अपने समाज के कार्यक्रम में आपको आने नहीं देता, तो क्यों बुलाते हो? प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा, अब से कोई असूद नहीं, मसूद नहीं। यह हमारा हिन्दू समाज है। आलोक शर्मा के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा- यही बात यदि किसी कांग्रेसी ने कही होती, तो अब तक रासुका लगा दी जाती।

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भोपाल में हनुमान जयंती पर काली घाट मंदिर से हनुमान जन्मोत्सव का जुलूस निकाला गया। इसी दौरान, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक शर्मा ने कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को लेकर कहा- हम सब लोग सनातन धर्म को मानते हैं, तो मंदिर में दूसरे संप्रदाय के व्यक्ति को आने दोगे क्या?? दूसरे के संप्रदाय में आपको आने देता है क्या? दूसरे संप्रदाय के लोग आपको आने देता है क्या? कोई असूद नहीं, कोई मसूद नहीं। हमारा इतवारे में कुचबंदिया समाज है। ये हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है। इनके ऊपर कोई आंख उठाकर न देखे। हिन्दू समाज कुचबंदिया समाज के साथ खड़ा है। हम सब इसी तरह अपने त्योहारों को मनाते रहेंगे।

दरअसल, हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा को काजीकैम्प से निकलने से मना किए जाने पर आलोक शर्मा भड़क उठे। उन्होंने इसी बात को लेकर हनुमान जन्मोत्सव में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को अपने (हिन्दुओं) के कार्यक्रमों में न आने देने की बात कही।

आलोक शर्मा के बयान पर कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अब्बास हाफिज ने कहा – आलोक शर्मा बीजेपी की विचारधारा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। लोगों को बांटने का काम कर रहे हैं। वो कह रहे हैं कि मंदिर में एक मुस्लिम विधायक को क्यों बुला लिया? वो क्या मस्जिद में हमें बुलाते हैं। इस तरह की बातें भोपाल में हमने पहले कभी नहीं सुनी थी। मैंने देखा है कि मंदिर – मस्जिद में हर समुदाय के लोग जाते हैं। अजमेर दरगाह में हर समुदाय के लोग जाते । आज मैं सीएम शिवराज सिंह चौहान और आलोक शर्मा को आमंत्रित कर रहा हूं कि वे जिस मप्र की जिस मस्जिद में आना चाहें, नमाज पढ़ना चाहें। मैं उन्हें लेकर चलूंगा। वो जब जाना चाहें जिस वक्त की नमाज पढ़ना चाहें मैं साथ चलूंगा। वो चलें और इबादत करें।

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