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Sexual Harassment: वकील पर अपने मुवक्किल से रेप करने का आरोप, SC में सुनवाई

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Sexual Harassment: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार, 01 दिसम्बर को अपने मुवक्किल या क्लाइंट से बलात्कार के आरोपी दो वकीलों को अग्रिम जमानत देने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने आरोपी वकीलों को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने को चुनौती देने वाली पीड़िता द्वारा दायर याचिका पर केरल सरकार और आरोपियों से जवाब मांगा। बता दें कि केरल उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक का आदेश चार सप्ताह के लिए दिया।

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Sexual Harassment: होटल में बुलाया और किया दुष्कर्म

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी ने इस तथ्य पर ध्यान दिया था कि मुवक्किल ने आरोपी के खिलाफ जून 2023 में ही शिकायत दर्ज की थी, भले ही उसने दावा किया था कि जब वह तलाक के लिए एक वकील के पास पहुंची थी तब से उसका यौन शोषण किया गया था। इसके बाद मामला 2021 में पारिवारिक अदालत के समक्ष पहुंचा। आरोप है कि वकील ने उसे एक होटल में बुलाया और ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आगे आरोप लगाया गया कि वकील ने उसे एक घर खरीदने और उसके बच्चों की देखभाल करने का वादा किया था।

Sexual Harassment: गंभीर अपराध के लिए मामला दर्ज

दोनों वकीलों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), 120 बी (आपराधिक साजिश), और 34 (सामान्य इरादा) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। आरोपियों ने शिकायतकर्ता के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि तलाक के मामले में पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने पर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि शिकायतकर्ता इस तथ्य से भी व्यथित थी कि याचिकाकर्ता-वकील उसके बच्चे को शिक्षित करने या घर खरीदने में मदद करने के लिए वित्तीय सहायता देने के अपने प्रस्तावों पर अमल नहीं कर सके।

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