विधानसभा सत्र दो दिनों में हुआ स्थगित, विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि 29 नवंबर से 5 दिसंबर तय की गई थी। लेकिन सत्र को दो दिनों में ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। दो दिनों में सत्र की कार्यवाही कुल 13 घंटे 47 मिनट तक चली। इस दौरान विनियोग विधेयक सहित 14 विधेयक सदन से पारित हुए। सत्र के दौरान विधायकों के 619 सवालों में से स्वीकार किए गए सवालों पर सरकार ने जवाब भी दिया। सदन से अनूपूरक बजट और विधेयकों के पास होने के बाद सदन की कार्यवाही दूसरे दिन ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

जिस पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया है। यशपाल आर्य का कहना है कि जनता से जुड़े कई मुद्दे विधायक सदन में उठाना चाहते थे लेकिन जवाबदेही से बचने के लिए सरकार ने आनन फानन में सत्र स्थगित करा दिया।

वहीं स्पीकर ऋतु खंडूड़ी का कहना है कि सदन को बिजनेस के बगैर चलना जनता के पैसे की बर्बादी है। टैक्सपेयर जनता बड़ी मुश्किल से पैसे कमाती है इसलिए किसी का राजनीतिक एजेंडा पूरा करने के लिए सत्र नहीं चलाया जा सकता।

शीतकालीन सत्र गैरसैंण की बजाय देहरादून में कराने पर पहले ही विपक्ष के तेवर तल्ख रहे। और अब देहरादून में भी सत्र दो दिनों में स्थगित करने को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाने साध रहा है। लेकिन स्पीकर ने साफ कर दिया है कि जो भी बयानबाजियां हो रही हैं पर केवल राजनीतिक दिखावे के लिए सत्र लंबा चलाकर टैक्सपेयर जनता के पैसे की बर्बादी नहीं की जाएगी।

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