शिक्षकों के आगे शर्मसार हुआ शिक्षा विभाग, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही

देश के प्रधानमंत्री मोदी से लेकर यूपी की योगी सरकार तक शिक्षा विभाग को दुरुस्त बनाने के लिए काफी मेहनत करती हुई नजर आ रही है। ऐसे में बता दें केंद्र से लेकर राज्य सरकार इसको सही बनाने के लिए काफी मेहनत भी कर रही है। लेकिन कुछ लापरवाह शिक्षक और भ्रष्ट शिक्षा अधिकारियों के कारण ये फिलहाल केई जगहों पर असंभव सा होता दिखाई दे रहा है। सरकार कोशिश कर रही है की राज्य के साथ देश के केई स्कूल भी कॉन्वेंट स्कूलों की तरह सही पढ़ाई मुहैया कराया जा सकें। लेकिन स्थानीय अधिकारियों और अध्यापकों की वजह से सरकारी योजनाएं बिल्कुल ही धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं।

बता दें यूपी में केई ऐसे जिले हैं जिन्में दर्जनों ऐसे विद्यालय शामिल हैं। जहां पर छात्र-छात्राओं की संख्या एक दर्जन से भी कम है। ऐसे में विद्यालयों में बच्चों को मेन्यू के हिसाब से मिलने वाले मिड-डे-मिल का भोजन के साथ ना तो फल मिल रहा है।शिक्षा विभाग की माने तो राज्य में कई स्कूलों में गैस सिलेंडर की जगह उपले पर ही खाना बनाया जा रहा है। कई जिलों के अध्यापक तो अधिकारियों की जेब गरम कर बिना रोकटोक के घर बैठकर नौकरी करते हुए पाए जा रहे हैं।

दरअसल पूरा मामला शहाबगंज बीआरसी अंतर्गत कम्पोजिट विद्यालय बनभिसमपुर का है। जहां विद्यालय निरिक्षण के दौरान पाया गया की वहां पर जितने अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी उनमें से केवल 4 अध्यापक ही मौके पर मौजूद पाए गए थे। वहीं विद्यालय की प्रधानाध्यापक मंजुलता 30/04/2022 से ही स्कूल से लापता हैं। स्थानीय लोगों से पूछा गया तो पता चला की मंजुलता के लिए ये कोई नई बात नहीं है। जब स्कूल का प्रधानाध्यापक ही ऐसा करते हुए पाया जाएगा तो अन्य शिक्षकों से भला और क्या उम्मीद किया जा सकता है। बता दें पूरे स्कूल में केवल 12 बच्चे ही मौजूद पाए गए थे। जब एक चौथी क्लास के बच्चे से सवाल पूछा गया की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम उसने नरेंद्र योगी बताया तो वहीं प्रधानमंत्री का नाम नारायण बताया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस स्कूल के शिक्षक किस तरह का स्मार्ट स्कूल बना रहे हैं ये आप बच्चों से पूछे गए सवाल से ही पता लगा सकते है। हालांकि सरकार के लिए सबसे बड़ा सवाल है कि उनके द्वारा चुने गए अध्यापक और अधिकारी किस तरह से देश के भविष्य की जिंदगियों के साथ खेलवाड़ करते हुए नजर आ रहे है।

रिपोर्ट – मिथिलेश सिंह

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