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	<title>राज्य in Hindi, राज्यों की खबरें, हिंदी खबर, State Politics - Hindi Khabar</title>
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		<title>UP की 3.80 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा बड़ा तोहफा, हर साल मिलेगी अतिरिक्त साड़ी, 19 करोड़ से अधिक रुपये शीघ्र होंगे जारी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/up-3-80-lakh-anganwadi-workers-extra-saree-19-crore-funds-yogi-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 15:01:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[UP News : उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित वेशभूषा में काम करने के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत देने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार ने विभाग में कार्यरत 3.80 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>UP News :</strong> उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित वेशभूषा में काम करने के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत देने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार ने विभाग में कार्यरत 3.80 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हर साल एक अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए 19 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही अतिरिक्त साड़ी के लिए धनराशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">वर्दी के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों से जुड़ी सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभानी होती है। इसके लिए उन्हें नियमित रूप से क्षेत्र में भी जाना पड़ता है। मौजूदा व्यवस्था में सामान्य योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 के अनुपात में प्रतिवर्ष दो साड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं। अब एक अतिरिक्त साड़ी मिलने से निर्धारित वेशभूषा में ड्यूटी करने के दौरान उन्हें सहूलियत मिलेगी। साड़ी गंदी होने, धुलाई या खराब मौसम के कारण दूसरी वेशभूषा की जरूरत पड़ने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">3.80 लाख से अधिक कर्मियों को मिलेगा लाभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में 1,90,145 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए इतनी ही संख्या में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पद स्वीकृत हैं। इस तरह कुल 3,80,290 कर्मियों को अतिरिक्त साड़ी देने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेवाओं के संचालन को बेहतर बनाने के साथ कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए निर्धारित वर्दी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">19 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रति साड़ी 500 रुपये की दर से इस व्यवस्था पर कुल 19,01,45,000 रुपये खर्च होने का अनुमान है। अतिरिक्त साड़ी उपलब्ध कराने का फैसला कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की कार्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब महिला एवं बाल विकास विभाग की तैयारी इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने पर केंद्रित है। धनराशि उपलब्ध होने और वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को इसका लाभ मिल सकेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/yogi-adityanath-citizen-satisfaction-public-servants-report-card-office-office-statement/">‘ऑफिस-ऑफिस’ सीरियल की तरह न भटके आम आदमी, नागरिक संतुष्टि ही लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड- सीएम योगी</a></p>



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		<title>‘ऑफिस-ऑफिस’ सीरियल की तरह न भटके आम आदमी, नागरिक संतुष्टि ही लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड- सीएम योगी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/yogi-adityanath-citizen-satisfaction-public-servants-report-card-office-office-statement/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 14:22:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[ACR Promotion]]></category>
		<category><![CDATA[AI Centre of Excellence]]></category>
		<category><![CDATA[Civil Servants]]></category>
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		<category><![CDATA[Public Grievance Redressal]]></category>
		<category><![CDATA[UP Administration]]></category>
		<category><![CDATA[Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[UP Administration : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक आम आदमी का अपने काम के लिए कार्यालय दर कार्यालय भटकना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे समयबद्ध समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। नागरिक &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>UP Administration :</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक आम आदमी का अपने काम के लिए कार्यालय दर कार्यालय भटकना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे समयबद्ध समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता, उपलब्धियों और सक्सेस स्टोरी को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण पहल की घोषणा करते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने, पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने तथा ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान, सरल प्रक्रियाएं और बेहतर जनसेवाएं सुनिश्चित करना है। रुपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;ऑफिस-ऑफिस’ जैसी स्थिति से मुक्ति के लिए जरूरी है संवेदनशील प्रशासन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम योगी ने कहा कि आज भी किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सामान्य नागरिक की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पाता। ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक नागरिक का सामान्य से काम के लिए विभिन्न कार्यालयों में भटकना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। समस्याओं को जानबूझकर लटकाना या जानकारी के अभाव में समाधान न कर पाना, दोनों स्थितियां प्रशासन के लिए गंभीर हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना भी खतरनाक है और एक लापरवाह व्यक्ति का वहां बने रहना भी। कई बार कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन अपने दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते। इसलिए कार्मिकों की क्षमता का निरंतर विकास होना चाहिए, उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए और उनके कार्य का मूल्यांकन भी होना चाहिए। बार-बार शिकायत के आदी व्यक्ति से अलग, एक सामान्य नागरिक की वास्तविक समस्या का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को निराश लौटना पड़े और उसे समयबद्ध समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एआई, स्थानीय निकाय और सही तैनाती पर तीन प्रमुख पहल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश में क्षमता विकास के लिए रुपाम को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की दिशा में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक शासन का स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं। लोक सेवकों को इन बदलावों के अनुरूप सक्षम बनाना आवश्यक है। तकनीक शासन को गति दे सकती है, प्रक्रियाएं सरल कर सकती है और निर्णयों को बेहतर बना सकती है, लेकिन प्रशासन को संवेदनशील उसका सेवा भाव ही बनाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम ने कहा कि इसके साथ ही ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कार्मिकों की क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनकी कार्यक्षमता मजबूत होगी, तभी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से रुपाम के साथ मिलकर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और सक्सेस स्टोरी को उनकी एसीआर तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे कार्मिकों की योग्यता के अनुरूप जिम्मेदारी तय करने और सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। हालांकि, प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता इन आंकड़ों से आगे जाकर देखी जानी चाहिए। इसका आकलन इस आधार पर हो कि प्रशिक्षण के बाद निर्णय कितने बेहतर हुए, प्रक्रियाएं कितनी सरल हुईं और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवा मिली।</p>



<h3 class="wp-block-heading">केवल डिग्री और नियुक्ति पत्र से कोई दक्ष नहीं बन जाता</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभियंताओं ने उसे जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा उठा दिया। इससे आसपास की घनी आबादी के लोगों का आवागमन बाधित हो गया। शिकायत मिलने पर वह स्वयं मौके पर पहुंचे और सड़क को मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए। यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं था, बल्कि कार्य की व्यावहारिक समझ और नागरिकों की जरूरतों को समझने की क्षमता का प्रश्न था। डिग्री और नियुक्ति पत्र प्राप्त कर लेना ही किसी व्यक्ति को योग्य अभियंता या सक्षम अधिकारी नहीं बना देता। नई तकनीक अपनाना, परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेना और अपने दायित्वों को समझने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। इसी सोच के साथ क्षमता विकास की जरूरत महसूस हुई। क्षमता विकास आयोग की स्थापना और एस. राधा चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद इस विषय पर उनकी बातचीत हुई थी। रुपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास इसी सोच का हिस्सा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">36 सेक्टोरल पॉलिसीज के साथ कार्यसंस्कृति में बदलाव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने नीतिगत ठहराव से बाहर निकलकर विभिन्न क्षेत्रों में 36 सेक्टोरल पॉलिसीज तैयार की हैं। इस परिवर्तन में क्षमता विकास और मिशन कर्मयोगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्नति पोर्टल जैसे मंच प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और श्रेष्ठ कार्यपद्धतियां साझा करने का अवसर देते हैं। इससे एक संस्थान की सफलता दूसरे संस्थानों के लिए प्रेरणा बन सकती है और परस्पर सीखने की संस्कृति विकसित हो सकती है। मिशन कर्मयोगी केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का राष्ट्रीय अभियान है। विकसित भारत का निर्माण केवल बेहतर नीतियां बनाने से नहीं होगा, इसके लिए उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन भी चाहिए। जब नागरिक की परेशानी कम होगी, उसे समय पर समाधान मिलेगा और उसके चेहरे पर संतोष दिखाई देगा, तभी लोक सेवा का उद्देश्य सार्थक होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पहले संभावनाएं थीं, लेकिन उन्हें उपलब्धियों में बदलने की इच्छाशक्ति नहीं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ अत्यंत उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधनों और देश की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति वाला प्रदेश है। इसके बावजूद लंबे समय तक प्रदेश विपन्नता और अराजकता से जूझता रहा तथा अपनी पहचान के लिए संघर्ष करता रहा। यहां संभावनाओं की कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें उपलब्धियों में बदलने के लिए आवश्यक क्षमता विकास और राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था। इसी कारण उत्तर प्रदेश जैसे उत्सवपूर्ण प्रदेश की पहचान उपद्रवग्रस्त राज्य के रूप में बनी थी। शासन व्यवस्था नागरिक केंद्रित होने के बजाय सत्ता केंद्रित हो गई थी। आम आदमी का व्यवस्था से विश्वास उठने लगा था। सरकारी नौकरी का विज्ञापन निकलते ही युवाओं को चयन प्रक्रिया में सिफारिश और लेनदेन की आशंका सताने लगती थी। उन्हें भरोसा नहीं था कि पारदर्शी तरीके से नियुक्ति मिल पाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रदेश सड़क, रेल और हवाई संपर्क में नंबर वन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम योगी ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। वर्ष 2017 में प्रदेश के पास लगभग डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है। प्रदेश सड़क, रेल और हवाई संपर्क में नंबर वन है। यहां देश की पहली रैपिड रेल संचालित है और सात शहरों में मेट्रो सेवाएं चल रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साढ़े नौ वर्षों में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए, तीन करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए और 15 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ मिल रहा है। इस अवधि में प्रदेश में कोई व्यक्ति भूख से नहीं मरा और योजनाओं का लाभ ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में हर घर नल योजना, सभी 75 जिलों में बिजली की उपलब्धता, कृषि विकास दर को आठ से 18 प्रतिशत तक पहुंचाने और गन्ना किसानों को नियमित भुगतान को भी राज्य में आए बदलाव के विभिन्न उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इंसेफेलाइटिस के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष, फिर प्रशासन को बनाया जवाबदेह</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की व्यवस्था तब विफल होती है, जब विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डाल देते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौतों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इसे केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या माना गया। जिलों में मौतों को अज्ञात बीमारी बताकर दूसरे विभाग अपनी जिम्मेदारी से अलग हो जाते थे। बतौर सांसद वर्ष 1998 से 2017 तक उन्होंने इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया। संसद में इस विषय पर चर्चा की मांग करने और स्थगन प्रस्ताव देने के दौरान भी उन्हें कहा गया कि यह राज्य का मामला है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया कि इंसेफेलाइटिस को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या मानकर नहीं छोड़ा जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, दिव्यांगजन कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी अभियान से जोड़ा गया। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल स्टाफ, बाल रोग विशेषज्ञों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और 108 एंबुलेंस सेवा की भूमिका तय करते हुए प्रशिक्षण दिया गया। चार दशकों में इंसेफेलाइटिस से लगभग 50 हजार बच्चों की मौत हुई थी, लेकिन विभागीय समन्वय और क्षमता विकास से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ और अब प्रदेश में इससे होने वाली मौतों की संख्या शून्य है। यह उदाहरण साबित करता है कि किसी समस्या का समाधान केवल एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। स्पष्ट जिम्मेदारी, प्रशिक्षित कार्मिक और सतत निगरानी से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस राधा चौहान, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन शशि प्रकाश गोयल, मेंबर सीबीसी डॉ. अलका मित्तल, सेक्रेटरी सीबीसी जगदीप गुप्ता, डीजी रुपाम एम देवराज समेत विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/up-maharishi-valmiki-jayanti-october-26-ramayana-path-75-districts-bhajan-kirtan-temples/">26 अक्टूबर को UP में गूंजेगा रामायण पाठ, 75 जिलों में भव्य तरीके से मनेगी महर्षि वाल्मीकि जयंती, सैकड़ों मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन</a></p>



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		<title>26 अक्टूबर को UP में गूंजेगा रामायण पाठ, 75 जिलों में भव्य तरीके से मनेगी महर्षि वाल्मीकि जयंती, सैकड़ों मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन</title>
		<link>https://hindikhabar.com/up-maharishi-valmiki-jayanti-october-26-ramayana-path-75-districts-bhajan-kirtan-temples/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 13:12:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[Maharishi Valmiki Jayanti : योगी सरकार 26 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में धूमधाम से वाल्मीकि जयंती मनाएगी। इस अवसर पर आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सैकड़ों महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Maharishi Valmiki Jayanti :</strong> योगी सरकार 26 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में धूमधाम से वाल्मीकि जयंती मनाएगी। इस अवसर पर आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सैकड़ों महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन आयोजनों के जरिए आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना ‘रामायण’ में निहित मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी है। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली चित्रकूट में वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी योगी सरकार स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूपी के सभी जनपदों में होंगे आयोजन, लवकुश प्रसंग भी होगा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">योगी सरकार के निर्देशानुसार 26 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। सभी देव मंदिरों, महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों आदि पर दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान के साथ-साथ रामायण पाठ कराए जाएंगे। यह कार्यक्रम जनपद, तहसील व विकास खंड स्तर पर होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीएम योगी ने हर आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था का निर्देश दिया है। आयोजन में पूजन-हवन के साथ लवकुश प्रसंग समेत अन्य कार्यक्रम भी होंगे। इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर कानपुर, वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या, प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश में आयोजन होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर (चित्रकूट) में होगा वृहद आयोजन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा ने बताया कि योगी सरकार के निर्देशानुसार महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम होंगे। यहां रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों द्वारा भजन आदि की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती भी होगी। इसमें हजारों श्रद्दालु शामिल होंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी योगी सरकार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">योगी सरकार देव मंदिरों में होने वाले रामायण पाठ समेत अन्य कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच उपलब्ध कराएगी। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा जनपद में चयनित मंदिरों व स्थलों पर कार्यक्रम के लिए कलाकारों का चयन किया गया है। इसका समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना-जनसंपर्क विभाग, जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद द्वारा किया जाएगा। हर जनपद में आयोजन के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। योगी सरकार का कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ जनसहभागिता पर जोर है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पिछले वर्ष 600 से ज्यादा मंदिरों में हुए थे कार्यक्रम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण कृति है। इसमें वर्णित अनेक स्थलों को राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाना जाता है। देशभर में ऐसे करीब 280 स्थल मौजूद हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के भी कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया इन स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के लिए मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ 8, 12 या 24 घंटे तक अनवरत वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उन्होंने बताया पिछले वर्ष प्रदेश के 600 से ज्यादा मंदिरों में कार्यक्रम हुए थे। इस वर्ष भी वृहद आयोजन होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/up-farmer-registry-1-44-crore-registrations-digital-identity-farmers/">UP में किसानों की डिजिटल पहचान को रफ्तार, फार्मर रजिस्ट्री में 1.44 करोड़ से ज्यादा पंजीकरण</a></p>



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		<item>
		<title>UP में किसानों की डिजिटल पहचान को रफ्तार, फार्मर रजिस्ट्री में 1.44 करोड़ से ज्यादा पंजीकरण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/up-farmer-registry-1-44-crore-registrations-digital-identity-farmers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 12:37:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Farmer Registry]]></category>
		<category><![CDATA[Farmer Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Gharauni Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Swamitva Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[up government news]]></category>
		<category><![CDATA[UP Revenue Reforms]]></category>
		<category><![CDATA[Yogi Government]]></category>
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					<description><![CDATA[UP Digital Farmers : उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की भूमिका अब केवल जमीन के रिकॉर्ड के रख-रखाव तक सीमित नहीं रह गई है। योगी सरकार में ग्रामीण परिवारों को आवासीय संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने, किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने और सहायता राशि के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने पर विशेष ध्यान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>UP Digital Farmers :</strong> उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग की भूमिका अब केवल जमीन के रिकॉर्ड के रख-रखाव तक सीमित नहीं रह गई है। योगी सरकार में ग्रामीण परिवारों को आवासीय संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने, किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने और सहायता राशि के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियों का निर्माण और वितरण किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री में भी 1.44 करोड़ से अधिक पंजीकरण पूरे किए जा चुके है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्ष 2017 से पहले घरौनी निर्माण और फार्मर रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं में उपलब्धि शून्य थी। इससे पहले राजस्व सेवाओं का दायरा मुख्य रूप से पारंपरिक अभिलेखों और कार्यालय आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भर था। योगी सरकार ने इन सेवाओं को विस्तार देते हुए ग्रामीण संपत्ति के रिकॉर्ड और किसान संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ग्रामीण परिवारों को मिला संपत्ति का दस्तावेज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वामित्व योजना के तहत घरौनी निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व सुधारों की प्रमुख पहल बनी। घरौनी के माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्र की आवासीय संपत्ति की पहचान और उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया। विभाग के मुताबिक एक करोड़ पांच लाख से अधिक घरौनियों का निर्माण और वितरण हो चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आवासीय संपत्ति से संबंधित विवरण का दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद मिली है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फार्मर रजिस्ट्री के मामले में यूपी देश में पहले स्थान पर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">किसानों से जुड़े विवरण को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से फार्मर रजिस्ट्री का विस्तार किया गया। प्रदेश में एक करोड़ 44 लाख से अधिक फार्मर रजिस्ट्री की जा चुकी हैं और उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में पहले स्थान पर है। अब डिजिटल रिकॉर्ड से किसानों की पहचान और विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित पात्रता के सत्यापन में सुविधा मिल सकती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 से पहले ऐसी व्यवस्था की उपलब्धि शून्य थी। वर्तमान पहल किसानों से संबंधित विवरण को एक जगह व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दुर्घटना सहायता के भुगतान में बदलाव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के संचालन में भी बदलाव किया गया। पहले यह योजना बीमा कंपनी के माध्यम से संचालित होती थी, जबकि अब जिलाधिकारी के माध्यम से सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में अंतरित (खाते में पैसे भेजा जाना) की जाती है। इससे सहायता वितरण की प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक प्रत्यक्ष बनाया गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रमाणपत्र और शिकायतों के निस्तारण पर भी ध्यान</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आधार से लिंक करने और परिवार के एक सदस्य का प्रमाणपत्र बनने के बाद अन्य पात्र सदस्यों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया कम करने की व्यवस्था भी की गई है। वहीं, जनशिकायतों के निस्तारण के लिए आईजीआरएस के माध्यम से निगरानी और विभिन्न स्तरों पर क्रॉस चेकिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी शिकायतों के निस्तारण की निगरानी की जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/yogi-adityanath-good-governance-public-life-change-viksit-bharat-up-role/">जनता के जीवन में बदलाव ही सुशासन की असली पहचान, विकसित भारत के निर्माण में UP की अहम भूमिका- सीएम योगी</a></p>



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		<title>जनता के जीवन में बदलाव ही सुशासन की असली पहचान, विकसित भारत के निर्माण में UP की अहम भूमिका- सीएम योगी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/yogi-adityanath-good-governance-public-life-change-viksit-bharat-up-role/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 11:58:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Civil Servants]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Maximum Governance]]></category>
		<category><![CDATA[Minimum Government]]></category>
		<category><![CDATA[UP governance]]></category>
		<category><![CDATA[viksit bharat]]></category>
		<category><![CDATA[Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[Viksit Bharat : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन से प्रशासन की सार्थकता सिद्ध होती है। उन्होंने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर साधना शृंखला-2026 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सुशासन का संकल्प जनकल्याण के रूप में होता है साकार मुख्यमंत्री ने लिखा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Viksit Bharat :</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन से प्रशासन की सार्थकता सिद्ध होती है। उन्होंने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर पोस्ट कर साधना शृंखला-2026 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुशासन का संकल्प जनकल्याण के रूप में होता है साकार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने लिखा कि जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण संवाहक हमारे लोक सेवक हैं। जब प्रशासनिक तंत्र दक्ष, संवेदनशील एवं उत्तरदायी होता है, तभी शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचता है और सुशासन का संकल्प जनकल्याण के रूप में साकार होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सरकार ने प्रदेश की कार्यसंस्कृति को किया था प्रभावित</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार की बीमार मानसिकता, परिवारवाद, तुष्टीकरण तथा भ्रष्टाचार को प्राथमिकता ने प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता, कार्यकुशलता और कार्य-संस्कृति को गंभीर रूप से प्रभावित किया। अपराध, माफियाराज, नीतिगत उदासीनता और पहचान के संकट ने प्रदेश की असीम संभावनाओं पर ग्रहण लगा रखा था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को मिल रही नई दिशा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार मिशन कर्मयोगी जैसी पहल के माध्यम से देश की प्रशासनिक कार्य संस्कृति को नई दिशा दे रही है। पिछले साढ़े 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बीमारू छवि को समाप्त करते हुए बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू स्टेट बनने तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। उत्तर प्रदेश अपने प्रशासनिक, आर्थिक और संस्थागत स्ट्रक्चर को री-डिफाइन करते हुए विकास के नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">प्रशासन की सार्थकता जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन से सिद्ध होती है और इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण संवाहक हमारे लोक सेवक हैं।<br><br>जब प्रशासनिक तंत्र दक्ष, संवेदनशील एवं उत्तरदायी होता है, तभी शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचता…</p>&mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) <a href="https://x.com/myogiadityanath/status/2113448230369505298?ref_src=twsrc%5Etfw">October 23, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<h3 class="wp-block-heading">साधना श्रृंखला-2026 का शुक्रवार को होगा शुभारंभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने लिखा कि इसी परिवर्तनकारी यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए आज राजधानी लखनऊ में केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में 8 राज्यों एवं 4 केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता से दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 का शुभारंभ हो रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने लिखा कि &#8216;मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस&#8217; की भावना के अनुरूप कर्मयोगी उत्तर प्रदेश अंत्योदय के संकल्प को साकार करते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी विश्वास के साथ साधना शृंखला-2026 की सफलता के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/hospital-bill-drug-medical-supplies-high-cost-pricing-explained-how-patients-are-overcharged/">इलाज के बिल में क्यों बढ़ता है खर्च? दवाओं और मेडिकल सामग्री की कीमतों का पूरा गणित, जानें कैसे ठगे जा रहे मरीज़</a></p>



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		<item>
		<title>मुंबई में धमकी भरा ईमेल, अमिताभ बच्चन का बंगला, दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट और स्कूल निशाने पर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/threatening-email-in-mumbai-amitabh-bachchans-bungalow-a-diljit-dosanjh-concert-and-schools-targeted/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 09:29:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Other States]]></category>
		<category><![CDATA[Amitabh Bachchan]]></category>
		<category><![CDATA[Celebrity Threat]]></category>
		<category><![CDATA[Diljit Dosanjh]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Bomb Threat]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Police]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Threat Email]]></category>
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					<description><![CDATA[Mumbai Threat Email : मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े और अन्य अधिकारियों को धमकी भरा ईमेल मिलने से हड़कंप मच गया है. ईमेल में अभिनेता अमिताभ बच्चन के बंगले और गायक दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट को निशाना बनाने की धमकी दी गई है. इसके अलावा मुंबई के एक स्कूल और महालक्ष्मी रेस कोर्स में भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mumbai Threat Email :</strong> मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े और अन्य अधिकारियों को धमकी भरा ईमेल मिलने से हड़कंप मच गया है. ईमेल में अभिनेता अमिताभ बच्चन के बंगले और गायक दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट को निशाना बनाने की धमकी दी गई है. इसके अलावा मुंबई के एक स्कूल और महालक्ष्मी रेस कोर्स में भी हमले की धमकी दी गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के मुताबिक, 23 अक्टूबर को सुबह 11:31 बजे भेजे गए ईमेल में मुंबई मेयर कार्यालय में रात 3:11 बजे धमाका करने की धमकी दी गई. ईमेल में 31 अक्टूबर को मुंबई के एक स्कूल में ग्रेनेड हमला करने की भी बात कही गई है. इसके अलावा 27 नवंबर को महालक्ष्मी रेस कोर्स में बम धमाके की धमकी दी गई है. ईमेल में खालिस्तान समर्थक नारे का भी उल्लेख किया गया है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">धमकी भरे ईमेल में गायक दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट को भी निशाना बनाने की बात कही गई है. दिलजीत का कॉन्सर्ट 27 नवंबर 2026 को मुंबई में आयोजित होने वाला है. वहीं, अभिनेता अमिताभ बच्चन के बंगले को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">जांच में नहीं मिली संदिग्ध वस्तु</h3>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, डीसीपी मनीष कलवानिया ने बताया कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को धमकी भरा ईमेल मिला था. जांच के दौरान कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया. इसके अलावा दादर के स्कूलों को भी धमकियां मिली हैं. पुलिस अब धमकी भरे ईमेल की जांच कर रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/aman-arora-congress-punjab-2027-free-electricity-health-cover-women-financial-assistance-statement/">अगर 2027 में गलती से भी कांग्रेस सत्ता में आ गई, तो वह फ्री बिजली, ₹10 लाख का हेल्थ कवर और महिलाओं की वित्तीय मदद छीन लेगी- अमन अरोड़ा</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, बंगला साहिब और जंतर-मंतर पर जाम की आशंका, दिल्ली पुलिस अलर्ट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-sir-protest-bangla-sahib-jantar-mantar-traffic-jam-police-alert/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 09:23:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Ashutosh Ranka]]></category>
		<category><![CDATA[Bangla Sahib Protest]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi SIR Protest]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Traffic Advisory]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Neha Bora Case]]></category>
		<category><![CDATA[People Against SIR]]></category>
		<category><![CDATA[Saurav Das]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006430211</guid>

					<description><![CDATA[Delhi SIR Protest : दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शन जारी है। इसे ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने बुलाया है। प्रदर्शन में अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, अभिनेता प्रकाश राज और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के शामिल होने की संभावना जताई गई है। प्रदर्शनकारियों की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Delhi SIR Protest : </strong>दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शन जारी है। इसे ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने बुलाया है। प्रदर्शन में अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, अभिनेता प्रकाश राज और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के शामिल होने की संभावना जताई गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदर्शनकारियों की संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यातायात संबंधी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर और बंगला साहिब के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में इन इलाकों की सड़कों पर यातायात प्रभावित हो सकता है और लंबा जाम लगने की आशंका है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पिछले सप्ताह बना ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">SIR के विरोध में अलग-अलग समूहों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन का गठन पिछले सप्ताह किया गया था। इसमें नागरिक समूहों के साथ किसान यूनियनों, मजदूर संगठनों तथा महिला और युवा संगठनों को शामिल किया गया है। इस मंच का उद्देश्य SIR के विरोध में चल रही गतिविधियों को एकजुट करना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सौरव-रांका को दोबारा नोटिस भेज सकती है क्राइम ब्रांच</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कॉकरोच पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए फिर से नोटिस भेज सकती है। पुलिस ने दोनों को इससे पहले गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए। दोनों ने पुलिस से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दोनों नेताओं को बुधवार को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत से जमानत मिली थी। उन्हें 50-50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दोनों को हिरासत में लिया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला आज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली हाईकोर्ट आज AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर भी फैसला सुनाएगा। बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और एक जमानतदार पेश करने को कहा गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पहले भी हुई थी कार्रवाई</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके बावजूद 13 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास तिरंगा लेकर वहां पहुंच गए थे। शांति संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप में दोनों को हिरासत में लेकर पांच दिन के लिए जेल भेजा गया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मामले में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि दोनों नेताओं को पहले मजिस्ट्रेट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। यदि फैसले से वे संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे उच्च अदालत का रुख कर सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/driving-license-new-rules-75-percent-test-marks-different-colors-indians-foreigners/">ड्राइविंग लाइसेंस के नियम बदलने की तैयारी, अब 75% अंक लाना होगा जरूरी?, भारतीयों-विदेशियों के होंगे अलग-अलग रंग</a></p>



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		<title>ड्राइविंग लाइसेंस के नियम बदलने की तैयारी, अब 75% अंक लाना होगा जरूरी?, भारतीयों-विदेशियों के होंगे अलग-अलग रंग</title>
		<link>https://hindikhabar.com/driving-license-new-rules-75-percent-test-marks-different-colors-indians-foreigners/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 08:09:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[यूटिलिटी न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[DL New Rules]]></category>
		<category><![CDATA[DL Renewal]]></category>
		<category><![CDATA[Driving License Rules]]></category>
		<category><![CDATA[Driving License Update]]></category>
		<category><![CDATA[Driving Test]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Required Documents]]></category>
		<category><![CDATA[road transport ministry]]></category>
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					<description><![CDATA[Driving License Rules : केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव करने पर विचार कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में लाइसेंस के रंग, ऑनलाइन मूल्यांकन में पास होने के लिए जरूरी अंक, दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Driving License Rules :</strong> केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव करने पर विचार कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में लाइसेंस के रंग, ऑनलाइन मूल्यांकन में पास होने के लिए जरूरी अंक, दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि, ये बदलाव अभी प्रस्तावित हैं। इन्हें लागू करने के लिए अंतिम नियम जारी होना बाकी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग के लाइसेंस का प्रस्ताव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्ताव के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस पर धारक की राष्ट्रीयता का उल्लेख किया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग के लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था पर विचार किया गया है। इसका उद्देश्य लाइसेंस देखकर धारक की राष्ट्रीयता की पहचान आसान बनाना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऑनलाइन ड्राइविंग असेसमेंट में 75% अंक जरूरी हो सकते हैं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में शामिल ऑनलाइन ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट’ के मानक सख्त करने का प्रस्ताव है। फिलहाल इसमें उत्तीर्ण होने के लिए 60 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। प्रस्ताव के तहत न्यूनतम अंक बढ़ाकर 75 प्रतिशत किए जा सकते हैं। इससे आवेदकों की सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़ी जानकारी का अधिक प्रभावी मूल्यांकन करने का लक्ष्य है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उम्र और पते के प्रमाण के लिए दस्तावेजों के नियम बदल सकते हैं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ड्राफ्ट में उम्र और पते के प्रमाण के तौर पर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी के सामने दिए गए शपथ-पत्रों के इस्तेमाल को सीमित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस बनवाने की आशंका कम करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड और पिछले तीन महीनों के बिजली या गैस बिल जैसे दस्तावेज प्रस्तावित सूची में शामिल हैं। उम्र के प्रमाण के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल बोर्ड की मार्कशीट स्वीकार किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं, पहचान के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट और पैन कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट की जानकारी देना हो सकता है अनिवार्य</h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तावित नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को अपना ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और आपातकालीन संपर्क की जानकारी देनी पड़ सकती है। इसके अलावा, नाम, पता और संपर्क नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारियों में बदलाव से जुड़ी कुछ सेवाओं के लिए शुल्क माफ करने का प्रस्ताव है। इन सेवाओं का लाभ ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण के जरिए दिए जाने की व्यवस्था भी की जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कई सेवाओं के लिए एक ही आवेदन फॉर्म लाने की तैयारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण, डुप्लिकेट लाइसेंस जारी करने, लाइसेंस में वाहन की नई श्रेणी जोड़ने और व्यक्तिगत जानकारी बदलने जैसी सेवाओं के लिए एक साझा आवेदन फॉर्म का प्रस्ताव रखा है। इससे अलग-अलग सेवाओं के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आवेदन पर फैसला लेने के लिए तय होगी समय-सीमा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ड्राफ्ट के मुताबिक, अधिकारियों को व्यक्तिगत जानकारी में बदलाव से जुड़े ऑनलाइन आवेदनों पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना पड़ सकता है। आवेदन अस्वीकार किए जाने की स्थिति में उसके कारण बताना भी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, पते में बदलाव के आवेदन पर 30 दिनों तक निर्णय नहीं होने पर उसे स्वीकृत मानने का प्रावधान लाने पर विचार किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन प्रस्तावों का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाना, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाना और ऑनलाइन सेवाओं को आसान बनाना है। फिलहाल आवेदकों को इन संभावित बदलावों को लागू नियम नहीं मानना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई व्यवस्था की पुष्टि होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/3-foods-more-vitamin-c-than-lemon-immunity-benefits/">नींबू से भी ज्यादा Vitamin C देते हैं ये 3 फूड्स, इम्यूनिटी के लिए हैं फायदेमंद</a></p>



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		<item>
		<title>मेयर ऋतु तावड़े के कार्यालय और 3-4 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल से मचा हड़कंप</title>
		<link>https://hindikhabar.com/threat-to-blow-up-mayor-ritu-tawdes-office-and-3-4-schools-email-sparks-panic/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 07:35:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Other States]]></category>
		<category><![CDATA[bomb threat email]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Bomb Threat]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Mayor Office]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai Police]]></category>
		<category><![CDATA[Mumbai School Bomb Threat]]></category>
		<category><![CDATA[Ritu Tawde]]></category>
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					<description><![CDATA[BombThreat : मुंबई के 3 से 4 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से हड़कंप मच गया. मुंबई पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत सभी संबंधित स्थानों की जांच कराई, लेकिन कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. पुलिस अब ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी है. &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>BombThreat : </strong>मुंबई के 3 से 4 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से हड़कंप मच गया. मुंबई पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत सभी संबंधित स्थानों की जांच कराई, लेकिन कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली. पुलिस अब ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं, मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े के कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिला है. मेयर को धमकी मिलने की यह तीसरी घटना बताई जा रही है. लगातार मिल रही धमकियों के बाद पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और धमकी देने वाले का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/aman-arora-congress-punjab-2027-free-electricity-health-cover-women-financial-assistance-statement/">अगर 2027 में गलती से भी कांग्रेस सत्ता में आ गई, तो वह फ्री बिजली, ₹10 लाख का हेल्थ कवर और महिलाओं की वित्तीय मदद छीन लेगी- अमन अरोड़ा</a></p>



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		<item>
		<title>Punjab में पराली जलाने की घटनाओं में 93% से ज्यादा गिरावट, मान सरकार की बड़ी कामयाबी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-stubble-burning-incidents-down-over-93-percent-mann-government-success/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Oct 2026 07:32:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[Crop Residue]]></category>
		<category><![CDATA[Farm Machinery]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[punjab farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Stubble Burning]]></category>
		<category><![CDATA[Stubble Management]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : हर साल सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर बहस तेज हो जाती है। हवा जहरीली होने लगती है तो पराली जलाने के मुद्दे पर सबसे पहले पंजाब का नाम चर्चा में आ जाता है। लेकिन अब सरकारी आंकड़े इस पुरानी बहस की बदलती तस्वीर सामने रख रहे हैं। मुख्यमंत्री &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab News : </strong>हर साल सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर बहस तेज हो जाती है। हवा जहरीली होने लगती है तो पराली जलाने के मुद्दे पर सबसे पहले पंजाब का नाम चर्चा में आ जाता है। लेकिन अब सरकारी आंकड़े इस पुरानी बहस की बदलती तस्वीर सामने रख रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने पिछले चार वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी कमी दर्ज की है। दूसरी ओर, बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं ने केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब में यह गिरावट किसानों की भागीदारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में घटकर महज 5,114 रह गईं। और 2026 में अभी तक सिर्फ 474 घटनाएं भी सामने आई है। यानी लगभग 93 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब पराली प्रबंधन देश की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और कृषि संबंधी चुनौतियों में शामिल है। पंजाब में यह गिरावट किसानों की भागीदारी, आधुनिक कृषि मशीनों की बढ़ती उपलब्धता और भगवंत मान सरकार की ओर से लागू की गई सब्सिडी योजनाओं के बीच दर्ज हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस पंजाब को वर्षों तक पराली जलाने के मुद्दे पर राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा, वहां घटनाएं तेजी से घटी हैं, जबकि बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश में इसके उलट रुझान दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 2021 के दौरान पराली जलाने की 8,160 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2022 में बढ़कर 11,737, वर्ष 2023 में 12,500 और 2024 में 16,360 तक पहुंच गईं। वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में 17,067 घटनाएं दर्ज हुईं। यानी जहां पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं लगातार कम हुईं, वहीं मध्य प्रदेश में इनकी संख्या बढ़ती चली गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब सवाल यह है कि जब पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में इतनी बड़ी गिरावट संभव है, तो मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सभी राज्यों में पराली प्रबंधन की योजनाओं की प्रभावशीलता का समान रूप से मूल्यांकन कर रही है? और क्या राष्ट्रीय स्तर पर पराली के मुद्दे पर होने वाली राजनीतिक बहस में सभी राज्यों के आंकड़ों को बराबर महत्व दिया जा रहा है?</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब में 88, उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस साल के शुरुआती आंकड़े भी इसी अंतर की ओर इशारा करते हैं। वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के CREAMS कार्यक्रम द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को जारी बुलेटिन के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की कुल 287 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें सबसे ज्यादा 118 घटनाएं मध्य प्रदेश में दर्ज की गईं, जबकि पंजाब में 88, उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं सामने आईं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान पंजाब में किसी भी दिन पराली जलाने की घटनाएं दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंचीं, जबकि मध्य प्रदेश में पांच दिन ऐसे रहे जब घटनाओं की संख्या दहाई में दर्ज हुई। पंजाब के लिए यह पिछले सात वर्षों की समान शुरुआती अवधि के मुकाबले सबसे कम आंकड़ा बताया गया है, जबकि मध्य प्रदेश में इसी अवधि के लिए सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज हुईं। हालांकि बादलों के कारण कुछ इलाकों में उपग्रह से आग की पहचान प्रभावित होने की बात भी बुलेटिन में कही गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कृषि मशीनों पर भारी सब्सिडी देने की नीति</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले साल के पूरे निगरानी सीजन के आंकड़े देखें तो मध्य प्रदेश में स्थिति और चिंताजनक दिखाई देती है। वर्ष 2025 में छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 33,028 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 17,067 घटनाएं हुईं, जो कुल मामलों के 50 प्रतिशत से अधिक थीं। इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में 7,290 और पंजाब में 5,114 घटनाएं दर्ज हुईं। पंजाब में आए बदलाव के पीछे सरकार द्वारा किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे विकल्पों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि मशीनों पर भारी सब्सिडी देने की नीति अपनाई है। सरकार का जोर इस बात पर रहा है कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए केवल जुर्माने और कानूनी कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय उन्हें खेतों में काम आने वाले व्यावहारिक साधन भी उपलब्ध कराए जाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें खरीदी हैं। इनमें सबसे अधिक 14,384 सुपर सीडर शामिल हैं। इसके अलावा 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक खरीदी गई हैं। इन मशीनों के जरिए किसानों को पराली जलाए बिना अगली फसल की बुवाई करने और फसल अवशेषों का दूसरे कार्यों में उपयोग करने की सुविधा मिल रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों को भी आधुनिक मशीनों की सुविधा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी दे रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक मशीनों की सुविधा देना है, जो अपने स्तर पर महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">धान की कटाई और गेहूं की बुवाई में कम समय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल, पंजाब के किसानों के सामने पराली जलाने की समस्या सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी नहीं रही है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय मिलता है। खेतों से पराली हटाने में मशीनों, मजदूरी और परिवहन का अतिरिक्त खर्च आता है। छोटे किसानों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं को केवल किसानों की लापरवाही के रूप में देखना समस्या की वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भगवंत मान सरकार की नीति में इसी आर्थिक और व्यावहारिक चुनौती को ध्यान में रखते हुए मशीनों पर सब्सिडी, सामूहिक मशीन केंद्रों और जागरूकता अभियानों को महत्व दिया गया है। किसानों को पराली जलाने के नुकसान समझाने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि फसल अवशेषों का इस्तेमाल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, अगली फसल की बुवाई और जैव ऊर्जा उत्पादन में किस तरह किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन की 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना भी तैयार की है। इसके तहत कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को तकनीकी सहायता देने और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में भी CRM मशीनरी के लिए लगभग 395 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी, जिससे हजारों किसानों और संस्थाओं को लाभ पहुंचा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पराली को किसानों की अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनाने के प्रयास भी सामने आ रहे हैं। पंजाब में कुछ किसान पराली को इकट्ठा करके बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के लिए बेच रहे हैं। संगरूर के एक किसान द्वारा लगभग 12 हजार क्विंटल पराली बेचकर करीब 16 लाख रुपये की आय अर्जित करने का उदाहरण भी सामने आया है। हालांकि ऐसी कमाई बाजार, पराली की मात्रा, परिवहन लागत और खरीदारों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, लेकिन इससे फसल अवशेषों के आर्थिक उपयोग की संभावनाएं जरूर दिखाई देती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पराली जलाने की घटनाओं में 93 प्रतिशत की कमी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब में इस बदलाव का श्रेय केवल सरकारी मशीनरी को देना भी पर्याप्त नहीं होगा। राज्य के उन हजारों किसानों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जिन्होंने अपनी खेती के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव किया और पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों तथा वैकल्पिक प्रबंधन के उपाय अपनाए। किसानों के सहयोग के बिना किसी भी सरकारी योजना का खेतों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना संभव नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यही कारण है कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 93 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट को सरकार की नीतियों और किसानों के साझा प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू किए गए कार्यक्रमों ने किसानों के सामने विकल्प बढ़ाए हैं और राज्य में पराली प्रबंधन को कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सभी संबंधित राज्यों की जवाबदेही जरूरी है</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ते मामलों ने बीजेपी सरकार की पराली प्रबंधन रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जब पंजाब में मशीनों की मदद से पराली जलाने की घटनाएं तेजी से कम हो सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में ऐसी योजनाओं का विस्तार किस स्तर तक हुआ है? किसानों को मशीनें कितनी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं? क्या छोटे किसानों तक सब्सिडी और सामूहिक मशीन केंद्रों की सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही हैं? इन सवालों का जवाब राज्य और केंद्र सरकार, दोनों को देना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र सरकार के सामने भी चुनौती है कि वह पराली जलाने की समस्या को केवल कुछ राज्यों तक सीमित राजनीतिक बहस के बजाय राष्ट्रीय कृषि और पर्यावरण नीति के रूप में देखे। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए पराली के अलावा वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों, धूल और मौसम की परिस्थितियों की भी भूमिका होती है। इसलिए प्रदूषण के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक मूल्यांकन और सभी संबंधित राज्यों की जवाबदेही जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कार्ययोजना और किसानों की सक्रिय भागीदारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब में दर्ज गिरावट निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, अब पराली जलाने की समस्या काफी तेजी से लगभग खत्म हो गई है। राज्य में किसानों तक मशीनों की समय पर पहुंच, पराली उठाने और परिवहन की लागत, छोटे किसानों के लिए सहायता तथा फसल अवशेषों की स्थायी खरीद व्यवस्था जैसी चुनौतियों पर लगातार काम किया जा रहा है। इसके बाद पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पंजाब में पराली प्रबंधन की दिशा में बहुत बड़ा बदलाव आया है। भगवंत मान सरकार की मशीनरी सब्सिडी, वित्तीय कार्ययोजना और किसानों की सक्रिय भागीदारी के बीच पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब के आंकड़े देते हैं महत्वपूर्ण संदेश</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अब असली सवाल यह है कि केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी शासित मध्य प्रदेश इस अनुभव से क्या सीखेंगे? क्या जिन राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहां किसानों को बेहतर सुविधाएं और आर्थिक सहायता देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर हर सर्दी प्रदूषण बढ़ने के बाद वही पुरानी राजनीतिक बयानबाजी दोहराई जाएगी? पंजाब के आंकड़े एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं कि किसानों को समस्या का हिस्सा मानने के बजाय समाधान में भागीदार बनाया जाए तो बदलाव संभव है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वास्तविक प्रगति</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं और पंजाब के किसानों ने भी अपने प्रयासों से इस बदलाव में योगदान दिया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पराली प्रबंधन के प्रभावी उपाय देश के दूसरे राज्यों तक भी पहुंचें, ताकि किसानों की आर्थिक मुश्किलें कम हों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वास्तविक प्रगति हो सके।</p>



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