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	<title>पंकज चौधरी, Pankaj Chaudhary Blogs in Hindi, Hindi Blogs - Hindi Khabar</title>
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	<title>पंकज चौधरी, Pankaj Chaudhary Blogs in Hindi, Hindi Blogs - Hindi Khabar</title>
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		<title>कब बेपर्दा होगा स्टॉक मार्केट का &#8220;हिमालयी बाबा&#8221;  </title>
		<link>https://hindikhabar.com/when-will-the-stock-market-himalayan-baba-be-exposed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Mar 2022 11:30:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज चौधरी]]></category>
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					<description><![CDATA[पंकज चौधरी&#160;&#160; नई दिल्ली:&#160;राऊज एवेन्यू स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)&#160;को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)&#160;की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को को-लोकेशन घोटाला मामले में सात दिन की हिरासत में रखने की अनुमति दे दी है.&#160; सीबीआई चित्रा रामकृष्ण को 14 दिनों के रिमांड पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><a href="https://hindikhabar.com/news/blogs/pankaj-chaudhary/">पंकज चौधरी&nbsp;&nbsp;</a></strong></p>



<p><strong>नई दिल्ली:&nbsp;राऊज एवेन्यू स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)&nbsp;को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)&nbsp;की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को को-लोकेशन घोटाला मामले में सात दिन की हिरासत में रखने की अनुमति दे दी है.&nbsp;</strong></p>



<p><strong>सीबीआई चित्रा रामकृष्ण को 14 दिनों के रिमांड पर लेना चाहती थी ताकि मुख्तलिफ एजेंसियों के सामने उन्हें पेश कर उस रहस्यमयी हिमालयी बाबा के बारे में कुछ जाना जा सके. गौरतलब है कि, चित्रा रामकृष्ण को तमाम अनियमितताओं के मद्देनज़र&nbsp;&nbsp;सीबीआई ने रविवार को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया था.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कौन है चित्रा रामकृष्ण&nbsp;</strong><strong>?&nbsp;</strong></h2>



<p><strong>एक समय था जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की इस सुप्रीमो को बतौर &#8220;बाजारों की रानी&#8221;&nbsp;&nbsp;पुकारा जाता था. हमेशा ही कांजीवरम साड़ी पहने रामकृष्ण को दुनिया की 50 सबसे शक्तिशाली महिला व्यवसायियों की फॉर्च्यून सूची में शामिल किया गया था. भारत से इस सूची में मात्र चार भारतीय महिला शामिल हैं. इतना ही नहीं, कर्नाटक संगीत की प्रेमी और वीणा-वादन के लिए एक जुनून रखने वाली चित्रा रामकृष्ण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक स्टॉक एक्सचेंज का नेतृत्व करने वाली तीसरी महिला थीं.&nbsp;</strong></p>



<p><strong>रामकृष्ण एनएसई की स्थापना के बाद से ही इसका हिस्सा थीं. उन्हें इनसाइडर-ट्रेडिंग अनियमितताओं के आरोप में हटा दिया गया था. शुरूआती जाँच के बाद ये पता चला कि उन्होंने नियामक प्राधिकरण सेबी की छतरी के ठीक नीचे बैठ जबरदस्त कमाई की. उनपर घोर कदाचार</strong><strong>,&nbsp;</strong><strong>अपने पोजिशन का दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता जैसे आरोप लगे हैं.&nbsp;</strong><strong>&nbsp;</strong></p>



<p><strong>चित्रा रामकृष्ण ही एक ऐसी शख्स थी जिन्होंने सरकार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पास पड़े कोष को शेयर बाजारों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था. बाद में सरकार ने उनकी सिफारिश पर अमल किया.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>रहस्यमयी हिमालयी बाबा&nbsp;&nbsp;</strong></h2>



<p><strong>चित्रा रामकृष्ण को गिरफ्तार करने से पहले आयकर विभाग ने चित्रा रामकृष्ण और आनंद सुब्रमण्यम के ऑफिस परिसरों की तलाशी ली थी. आनंद सुब्रामण्यम वही हैं जिनकी नियुक्ति एक कथित&nbsp;&#8220;हिमालयी योगी&#8221;&nbsp;के ई-मेल के बाद की गई थी. कहते हैं कि हिमालयी बाबा ने चित्रा को एक ई-मेल लिखकर कहा था कि आनंद की नियुक्ति की जाए. इसके बाद उसके वेतन बढ़ाने की भी संस्तुति&nbsp;&#8220;हिमालयी बाबा&#8221;&nbsp;ने की थी.&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>बहरहाल, चित्रा रामकृष्ण ने पूछताछ में बताया कि वो इस &#8220;हिमालयी योगी&#8221; से कभी नहीं मिली क्योंकि उनका कोई शारीरिक रूप नहीं था और वो जब चाहें तब कहीं भी प्रकट हो सकते थे.  लेकिन इस हिमालयी योगी के पास एक ई-मेल आईडी था जिसकी मदद से वो एनएसई के रोजमर्रा के काम-काज में दखल देते थे, चित्रा रामकृष्ण के साथ पत्र-व्यवहार करते और उसे निर्देश भी देते थे.  </strong></p>



<h2 class="wp-block-heading">ईमेल के जरिए स्टॉक मार्केट हो रहा था संचालित ?</h2>



<p><strong>चित्रा रामकृष्ण तमाम गोपनीय सूचनाओं को नियमित रूप से अज्ञात योगी को मेल के जरिए साझा करती थीं. और जो भी मेल बाबा को भेजा जाता था उसे आनंद सुब्रमण्यम को भी कापी कर दिया जाता था. योगी और रामकृष्ण के बीच मेल के आदान प्रदान से पता चलता है कि हिमालयी बाबा नियमित रूप से किसी न किसी को प्रमोशन या &#8220;हाई एप्राईजल&#8221; देने की संस्तुति किया करता था. चित्रा रामकृष्ण ने जाँच एजेंसियों को बताया कि वो पिछले 20 वर्षों से इस &#8216;योगी&#8217; से सलाह तो ले रही थीं, लेकिन वह कभी भी उनसे नहीं मिली थीं. उनके अनुसार उनके पास &#8216;भौतिक&#8221; रूप नहीं है लेकिन वो अपनी इच्छा से प्रकट हो सकते हैं. लेकिन फिर भी हिमालयी बाबा के पास एक ईमेल है और वह नियमित रूप से एनएसई प्रमुख से संवेदनशील अंदरूनी जानकारी मांगता है.  </strong></p>



<p><strong>कई ईमेल ऐसे भी थे जिसमें सीईओ की खास लुक को लेकर तारीफ की गई. एक मेल में चित्रा को आकर्षक दिखने के लिए हेयर – स्टाईल बदलने के टिप्स भी दिए गए. कभी सेशेल्स में तो कभी दिल्ली में &#8216;एनएसई के संचालन पर चर्चा करने के लिए&#8217; एक गुप्त बैठक&#8221; करने जैसी बातें&#8230;. वगैरह वगैरह . जाहिर है, हर गुजरते दिन के साथ मामला और गहरा होता जाता है. </strong></p>



<h2 class="wp-block-heading">फरवरी में इन लोगों पर लगा था जुर्माना</h2>



<p><strong>फरवरी में इन लोगों को सजा भी दी गई. जैसे सेबी ने रामकृष्ण पर 3 करोड़ रुपये और एनएसई,&nbsp;सुब्रमण्यम और एनएसई के पूर्व एमडी और सीईओ रवि नारायण पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. इसके आलावा,&nbsp;6 लाख रुपये का जुर्माना वीआर नरसिम्हन पर लगाया गया,&nbsp;जो एक्सचेंज में मुख्य नियामक और अनुपालन अधिकारी थे. बहरहाल, इन लोगों के लिए 2-3 करोड़ कोई बहुत बड़ी राशि नहीं थी क्योंकि इनकी सालाना कमाई ही 15-20 करोड़ रुपये होती थी. सेबी की इस कार्रवाई को महज लीपा-पोती ही माना गया.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इन लोगों ने एक लैपटॉप को नष्ट कर दिया गया था, जिसमें कदाचार से संबंधित महत्वपूर्ण सबूत थे. इतना ही नहीं, गहन जांच से बचने के लिए सभी डिजिटल सबूतों को काफी सावधानी से मिटा दिया गया. सूत्र बताते हैं कि, कुछ ब्रोकरेज हाउसों को रामकृष्ण के कार्यकाल के दौरान संवेदनशील वित्तीय जानकारी दी जाती थी जिससे उनको काफी लाभ हुआ. </strong></p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या हिमालयी बाबा और आनंद सुब्रमण्यम एक ही शख्स हैं ?</h2>



<p><strong>जाँच एजेंसियों के मुताबिक एक मेल को नियमित रूप से दो लोगों को भेजा जाता था – एक तो हिमालयी बाबा खुद होते थे और दूसरे आनंद सुब्रमण्यम. जाँच एजेंसियों ने पाया कि सूचनाओं और मेल के आदान-प्रदान का फायदा आनंद सुब्रमण्यम ही उठाता था. इसलिए जाँच एजेंसियों के कुछ अफसरान का मानना है कि शायद तथाकथित योगी और सुब्रमण्यम एक ही शख्स हैं. रिपोर्टों के अनुसार,&nbsp;सीबीआई ने भी ये माना है कि सुब्रमण्यम ही योगी है.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>2015 तक चित्रा रामकृष्ण स्टॉक एक्सचेंज में सबकी प्रिय थी. फिर एक ट्रेडिंग घोटाला सामने आया और सिंगापुर के एक व्हिसलब्लोअर ने शिकायत की कि कुछ हाई – फ्रिक्वेन्सी वाले कारोबारियों को एमएसई की तरफ से हर सूचनाएं मुहैय्या कराई जाती हैं&nbsp;और यहाँ तक कि उनकी पहुँच सर्वर तक है. और फिर इसके बाद से एनएसई के सीईओ के लिए चीजें मुश्किल होने लगीं.&nbsp;</strong></p>



<p><strong>साल 2016 में सेबी ने एक जाँच पैनल का गठन किया था. इस जाँच पैनल के गठन के बाद रामकृष्ण और सुब्रमण्यम ने इस्तीफा दे दिया. सेबी को कारपोरेट घपलेबाजी के आरोपों में दम नजर आया था और वो इन दोनों को बर्खास्त करते, इससे पहले ये दोनों इस्तीफा देकर चलते बने. बहरहाल, इस साल फरवरी में,&nbsp;रामकृष्ण और हिमालयी योगी के बीच ईमेल लीक होने पर तमाम वित्तीय कदाचार और इनसाईड &#8211; ट्रेडिंग के नए आरोपों के साथ स्टॉक मार्केट में हंगामा खड़ा हो गया.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>बहरहाल, इस स्टॉक बाजार की घपलेबाजी की जाँच में क्या हमारी जाँच एजेंसियाँ उस रहस्यमयी हिमालयी बाबा तक पहुँच पाएगी &#8230;जिसने पर्दे के पीछे रहकर 20 सालों तक स्टॉक मार्केट का संचालन किया.&nbsp;&nbsp;</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पांचवे चरण में भी 27 फीसदी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार मैदान में- ADR रिपोर्ट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/in-the-fifth-phase-also-candidates-with-27-criminal-background-are-in-the-fray/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 11:57:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज चौधरी]]></category>
		<category><![CDATA[ADR REPORTS]]></category>
		<category><![CDATA[UPPolls]]></category>
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					<description><![CDATA[Written By: पंकज चौधरी एसोशियेसन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने उत्तर प्रदेश में पांचवे चरण के उम्मीदवारों की कुंडली का विश्लेषण किया है। पांचवें चरण में कुल 693 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन एडीआर ने 685 उम्मीदवारों के शपथ पत्र का विश्लेषण किया है। आठ उम्मीदवारों ने जो शपथ पत्र अपलोड किए वो स्पष्ट नहीं थे, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Written By:</strong> <strong>पंकज चौधरी</strong></p>



<p>एसोशियेसन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म ने उत्तर प्रदेश में पांचवे चरण के उम्मीदवारों की कुंडली का विश्लेषण किया है। पांचवें चरण में कुल 693 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन एडीआर ने 685 उम्मीदवारों के शपथ पत्र का विश्लेषण किया है। आठ उम्मीदवारों ने जो शपथ पत्र अपलोड किए वो स्पष्ट नहीं थे, इसलिए एडीआर ने अपने आंकड़ों में उन्हें शामिल नहीं किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="689" height="368" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-2.jpg" alt="" class="wp-image-213006148184" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-2.jpg 689w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-2-300x160.jpg 300w" sizes="(max-width: 689px) 100vw, 689px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading" id="आपर-ध-क-प-ष-ठभ-म-व-ल-स-य-सतद">आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सियासतदां</h2>



<p>685 उम्मीदवारों में 185 यानि कि 27 फीसदी उम्मीदवारों ने ये ऐलान किया है कि उनके खिलाफ आपरादिक मामले लंबित हैं। इसमें करीब 141 (21%) उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं।</p>



<p>एडीआर (ADR) ने समाजवादी पार्टी के 59 में से 42 उम्मीदवारों, अपना दल के 7 में 4 उम्मीदवार, भाजपा के 52 में 25 (48%) उम्मीदवार, बसपा के 61 में 23 (38%) उम्मीदवार, कांग्रेस के 61 में 23 (38%) उम्मीदवार और आम आदमी पार्टी के 52 में 10 (19%) उम्मीदवारों के शपथ पत्र का विश्लेषण किया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="629" height="317" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-3.jpg" alt="" class="wp-image-213006148186" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-3.jpg 629w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-3-300x151.jpg 300w" sizes="(max-width: 629px) 100vw, 629px" /></figure>



<p>प्रमुख पार्टियों में समाजवादी पार्टी के 59 में 29 ( 49%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों का खुलासा किया है। इसी तरह अपना दल (सोनेलाल) के 7 में 2, भाजपा के 52 में 22 (42%), बसपा के 61 में से 17 (28%), कांग्रेस के 61 में से 17 (28%) और आप के 52 में से 7 (14%) उम्मीदवारों ने ये कबूल किया है कि उनके खिलाफ गंभीर मामले लंबित हैं।<br>इसमें 12 उम्मीदवारों ने ये माना है कि वे महिलाओं के खिलाफ वाले आपराधिक मामलों में फंसे हुए हैं। इन 12 में एक के खिलाफ तो बालात्कार का मामला भी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="हत-य-ज-स-म-मल-म-भ-ह-न-मजद">हत्या जैसे मामलों में भी हैं नामजद</h2>



<p id="हत-य-ipc-section-302-ज-स-जघन-य-म-मल-म-8-उम-म-द-व-र-फ-स-ह-ए-ह">हत्या ( IPC Section – 302 ) जैसे जघन्य मामलों में 8 उम्मीदावार फंसे हुए हैं।</p>



<p>हत्या की कोशिश (IPC Section-307) जैसे आपराधिक मामलों में 31 उम्मीदवार का नाम है।</p>



<p>अपराधों की सूची के आधार पर 61 निर्वाचन क्षेत्रों में 39(64%) ऐसे हैं जहाँ रेड एलर्ट जारी किया गया है। रेड एलर्ट वाले वो चुनावी क्षेत्र होते हैं जहाँ कम से कम 3 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="689" height="333" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-4.jpg" alt="" class="wp-image-213006148188" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-4.jpg 689w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/ADR-4-300x145.jpg 300w" sizes="(max-width: 689px) 100vw, 689px" /></figure>



<p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में उम्मीदवारों के चयन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को राजनीतिक दलों ने नकार दिया है। एक बार फिर, आपराधिक मामलों वाले लगभग 27% उम्मीदवारों को टिकट देने की पुरानी परंपरा का पालन किया है।</p>



<p>उत्तर प्रदेश में पांचवे चरण का चुनाव लड़ने वाले सभी प्रमुख दलों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित करने वाले 19 फीसदी से 71 फीसदी उम्मीदवारों को टिकट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी, 2020 के अपने निर्देशों में विशेष रूप से राजनीतिक दलों को इस तरह के चयन के लिए कारण बताने का निर्देष दिया था। साथ ही ये भी कहा था कि वे यह बताएं कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अन्य व्यक्तियों को उम्मीदवारों के रूप में क्यों नहीं चुना जा सकता है। </p>



<p>हाल ही में 2020-21 में हुए 6 राज्य के विधानसभा चुनावों के दौरान, यह देखा गया कि राजनीतिक दलों ने व्यक्ति की लोकप्रियता, अच्छे सामाजिक कार्य, मामले राजनीति से प्रेरित जैसे निराधार और आधारहीन कारण बताए। एडीआर के आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि राजनीतिक दलों को चुनावी व्यवस्था में सुधार लाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। नतीजतन हमारा लोकतंत्र कानून तोड़ने वालों को कानून बनाने की जिम्मेदारी देता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="कर-ड-पत-उम-म-दव-र-क-स-ख-य-म-बढ-तर">करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी</h2>



<p>एडीआर ने जिन 685 उम्मीदवारों के शपथ पत्र का विशलेषण किया है, उसमें 246(36%) उम्मीदवार करोड़पति हैं। जाहिर है सभी सियासी दलों की पहली पसंद धन-कुबेर उम्मीदवार ही होते हैं। भाजपा के 52 उम्मीदवारों में 47 (90 %) उम्मीदवार करोड़पति हैं जबकि समाजवादी पार्टी के 59 में 49 ( 83%) उम्मीदवार करोड़पति हैं। अपना दल (सोनेलाल) के 7 में 6 (86%), बसपा के 61 में 44(72%) उम्मीदवार, कांग्रेस के 61 में 30(49%) उम्मीदवार करोड़पति हैं।</p>



<p>पांचवे चरण में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के पास औसत संपत्ति करीबन 2.48 करोड़ रूपए की है।</p>



<p>भाजपा के 52 उम्मीदवारों के पास औसतन दौलत 9.95 करोड़ रूपए हैं , सपा के 59 उम्मीदवारों के पास औसतन संपत्ति 5.90 करोड़ रूपए हैं, 61 बसपा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.63 करोड़ रूपए हैं जबकि कांग्रेस के 61 उम्मीदवारों के पास औसतन 2.90 करोड़ रूपए हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पश्चिम यूपी में अखिलेश का &#8216;भाईचारा बनाम बीजेपी&#8217;, क्या दिलाएगा वोट ???</title>
		<link>https://hindikhabar.com/akhileshs-brotherhood-vs-bjp-in-western-up-what-will-get-votes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Feb 2022 10:13:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज चौधरी]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[UP Polls 2022]]></category>
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					<description><![CDATA[पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहले दो दौर की चुनावी लड़ाई अब निर्णायक फेज में पहुँच गई है. सभी महत्वपूर्ण पार्टी जैसे सत्तारूढ़ भाजपा, रालोद-सपा गठबंधन, बसपा और कांग्रेस के नेतागण जी-जान से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. पश्चिम यूपी की 58 सीटों पर पहले दौर का मतदान 10 फरवरी को है और इसके लिए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहले दो दौर की चुनावी लड़ाई अब निर्णायक फेज में पहुँच गई है. सभी महत्वपूर्ण पार्टी जैसे सत्तारूढ़ भाजपा, रालोद-सपा गठबंधन, बसपा और कांग्रेस के नेतागण जी-जान से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. पश्चिम यूपी की 58 सीटों पर पहले दौर का मतदान 10 फरवरी को है और इसके लिए चुनाव प्रचार 8 फरवरी को थम जाएगा.</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading" id="ब-ज-प-य-द-द-ल-रह-ह-म-जफ-फरनगर-द-ग-और-क-र-न-पल-यन">बीजेपी याद दिला रही है मुजफ्फरनगर दंगे और कैराना पलायन</h2>



<p>भाजपा के तमाम शीर्षस्थ नेता पश्चिमी यूपी के दौरे पर हैं. इन सभी नेताओं के भाषण में मुजफ्फरनगर दंगा, कैराना पलायन और अखिलेश यादव के शासनकाल के दौरान कानून-व्यवस्था की तथाकथित दैनीय स्थिति की चर्चा होती है. </p>



<p>बीते रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शामली और मुजफ्फरनगर का दौरा किया. इस दोरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम यूपी के लोगों से “दो लड़कों की जोड़ी” के नारे को लेकर सावधान रहने को कहा है. जाहिर है ये दो लड़के हैं &#8212; समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी. योगी ने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए इस गठबंधन के पास कोई रोड-मैप नहीं है.</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="700" height="525" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/muzzafarnagar.jpg" alt="" class="wp-image-213006146363" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/muzzafarnagar.jpg 700w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/muzzafarnagar-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>



<p>मुजफ्फरनगर दंगे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर योगी काफी आक्रमक नजर आए. उन्होंने कहा कि दंगों के बाद जब लोग कैराना से पलायन कर रहे थे तो ये लोग अपनी मांद में छिपे हुए थे. उनमें से एक ने लखनऊ में बैठकर दंगे करवाए, जबकि सुरेश राणा, संजीव बालियान जैसे भाजपा नेता अपनी जान जोखिम में डाल कर लोगों की हिफाजत कर रहे थे. योगी ने दावा किया कि साल 2017 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही इलाके में शांति बहाल हुई थी.</p>



<p>योगी ने भीड़ से सवाल किया कि सचिन और गौरव जैसे युवाओं का क्या कसूर था? वे बस अपनी बहनों को बचाने की कोशिश कर रहे थे और बदले में एसपी के गुंडों ने उन दोनों को मार डाला. उन्होंने कहा, &#8220;अब ये दंगाई अपने गले में तख्तियां लटकाए हुए अपने जीवन की भीख मांगते हुए घूम रहे हैं.&#8221;</p>



<p>योगी ने अपने भाषणों में कहा कि आज कैराना और कांदला से पलायन नहीं हो रहा और पश्चिमी यूपी की हर बेटी अपने सुरक्षित महसूस करती है.</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="सप-क-व-ट-द-कर-म-फ-य-ओ-क-सच-व-लय-म-मत-ब-ठ-न-श-ह">सपा को वोट देकर माफियाओं को सचिवालय में मत बैठाना- शाह</h2>



<p>इसी तरह बुलंदशहर में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, &#8220;यदि आप (सपा को) वोट देने की गलती करते हैं तो माफिया लोग लखनऊ के राज्य सचिवालय में बैठेंगे .” शाह ने भीड़ को याद दिलाया कि योगी आदित्यनाथ के शासन में माफिया या तो जेल में हैं, या यूपी से भाग गए हैं या सपा के उम्मीदवारों की सूची में हैं.</p>



<p>गौरतलब है कि भाजपा ने 2017 में सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद डिवीजनों में 71 में से 51 सीटें जीती थीं. पिछले तीन चुनावों के दौरान प्राप्त जनाधार को बरकरार रखने के मद्देनज़र भाजपा एक बार फिर से &#8220;मुजफ्फरनगर मॉडल&#8221; और “ कैराना पलायन“ जैसे मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की रणनीति पर काम कर रही है. </p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="624" height="291" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Amit-Shah.jpg" alt="Amit Shah" class="wp-image-213006145807" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Amit-Shah.jpg 624w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/02/Amit-Shah-300x140.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 624px) 100vw, 624px" /><figcaption>BJP</figcaption></figure>



<p>बहरहाल, ये मुद्दे फिर इन इलाकों में कितने जोर-शोर से मतदाताओं को प्रभावित करेंगे ये आने वाला समय ही बताएगा. लेकिन इस हकीकत को नकारा नहीं जा सकता कि इलाके का एक बड़ा वर्ग रोजगार, गन्ना की बकाया राशि, कृषि सुधारों जैसे मुद्दों को लेकर काफी उद्वेलित है.</p>



<p>हालांकि, सपा-रालोद गठबंधन भी तरीके से भाजपा के हमले का जवाब दे रही है. अलीगढ़ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पश्चिम यूपी में किसानों के मुद्दों को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा को ये एहसास है कि किसान विरोधी नीतियों की वजह से इन इलाकों में उनकी हार तय है. इसी हताशा-निराशा में योगी &#8220;गर्मी निकल जाएगी&#8221; जैसी बेतुका टिप्पणी कर रहे हैं. </p>



<h4 class="wp-block-heading" id="अख-ल-श-क-भ-ईच-र-बन-म-भ-जप">अखिलेश का &#8220;भाईचारा बनाम भाजपा&#8221; </h4>



<p>अखिलेश यादव ने कहा कि सपा-रालोद गठबंधन चुनाव में &#8220;भाईचारा बनाम भाजपा&#8221; के नारे के साथ उतरी है. इस गठबंधन का दावा है कि ये भाईचारा किसी भी सूरत में माहौल को जहरीला नहीं बनाने देगा और न ही भाजपा को कोई ऐसा मौका मिलेगा जिससे इलाके में वोटों का ध्रुवीकरण हो सके।</p>



<p>ये एक हकीकत है कि पश्चिमी यूपी के इलाकों में किसानों के दिलो-दिमाग में अभी भी कई महीनों तक किसान आंदोलन की याद तरो ताजा है. वे उस मुश्किल दौर को भूल नहीं पाए है. </p>



<h4 class="wp-block-heading" id="सत-त-क-नश-म-च-र-ह-भ-जप-ज-ट-मतद-त">सत्ता के नशे में चूर है भाजपा- जाट मतदाता</h4>



<p>इलाके के एक जाट मतदाता रविन्द्र टिकैत कहते हैं, “भाजपा सत्ता के मद में चूर थी. और उनके घमंड ने आधा हिस्सा कानून-वापसी के तौर पर मटियामेट कर ही दिया गया। बाकी आधा घमंड चुनाव के दौरान समाप्त कर दिया जाएगा.” </p>



<p>जाट समुदाय इस इलाके का एक ताकतवर और प्रभावशाली वर्ग है जो ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है. ग्रामीण इलाकों में जाट समुदाय छोटी जातियों को भी प्रभावित करता है क्योंकि छोटी जातियों का वित्तीय हित जाट समुदाय के साथ जूड़ा हुआ है.</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="क-य-गन-न-कर-ग-सप-र-ल-द-क-ज-त-क-र-ह-आस-न">क्या गन्ना करेगा सपा-रालोद की जीत की राह आसान</h2>



<p>इतना ही नहीं, सपा-रालोद गठबंधन भी ये समझ रहा है कि इलाके के किसानों को जज्बाती मुद्दों से नहीं बल्कि उनकी समस्या और आर्थिक पहलू पर संवेदनशील एप्रोच रख कर ही मतदाता को रिझाया जा सकता है. तभी तो पश्चिमी यूपी के चुनावी दौरे के दौरान गठबंधन ने अपने विजय रथ पर गन्ने का एक बंडल रखा था और लोगों का अभिवादन वे इसी गन्ने के बंडल को दिखा कर रहे थे. इस प्रचार का संदेश स्पष्ट था कि सपा-रालोद गठबंधन किसानों के मुद्दों के इर्द-गिर्द खुद को रखना चाहती है.</p>



<p>गन्ने की बकाया राशि का भुगतान भी न सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि रूहेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी एक बड़ा मुद्दा है. और किसानों की नब्ज पकड़ते हुए अखिलेश यादव ने ये ऐलान कर दिया है कि सारी बकाया राशि का भुगतान 15 दिनों के अंदर किया जाएगा और इसके लिए वो एक फंड भी बनाएंगे. </p>



<p>काफी लंबे समय से भारतीय किसान संघ (बीकेयू) ये मांग उठाता रहा है. बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कैराना और मुजफ्फरनगर मॉडल पुराना हो चुका है और इस चुनाव में काम नहीं करेगा . उन्होंने कहा, “अगर बीजेपी सचिन और गौरव के परिवार (उनकी हत्याओं ने 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे को भड़काया था) के बारे में चिंतित है, तो भाजपा को उसके परिवार के सदस्यों को एमपी या एमएलसी बनाना चाहिए. ऐसा करने के बाद ही उन्हें सचिन और गौरव के बारे में बात करनी चाहिए.“</p>



<p>बहरहाल, चुनाव के बाद इस इलाके में किसकी जीत होगी ये तो 10 मार्च को ही पता चल पाएगा लेकिन अभी के हालात को देखकर ये कहा जा सकता है कि सपा-रालोद बढ़त बनाए हुए है. जाट-गौरव, किसानों के मुद्दे और जाट-मुस्लिम भाईचारे का साफ असर फिलहाल तो दिख ही रहा है.</p>



<p><strong>Written By:</strong> <strong>पंकज चौधरी</strong></p>
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		<title>हिजाब पर पाबंदी- क्या ये है भाजपा सरकार का नया हथकंडा या जरूरत ? </title>
		<link>https://hindikhabar.com/hijab-ban-is-this-the-new-tactic-of-the-bjp-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Feb 2022 14:34:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[Other States]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज चौधरी]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक में बसवराज बोम्मई की सरकार हरेक फ्रंट पर फिसड्डी साबित हो रही है. कोविड -19 महामारी से निबटने में बिल्कुल नाकाम रही. सूबे में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो रही है. राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई है . ऐसे में संकट के दलदल में फंसी बोम्मई सरकार की पहली प्राथमिकता ये है कि &#8230;]]></description>
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<p><strong>कर्नाटक में बसवराज बोम्मई की सरकार हरेक फ्रंट पर फिसड्डी साबित हो रही है. कोविड -19 महामारी से निबटने में बिल्कुल नाकाम रही. सूबे में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो रही है. राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई है . ऐसे में संकट के दलदल में फंसी बोम्मई सरकार की पहली प्राथमिकता ये है कि वो जनता का ध्यान इन मूलभूत मुद्दों से हटाए. और इसके लिए उसे किसी सांप्रदायिक मुद्दे की तलाश थी जो राज्य में हंगामा खड़ा कर सके.  </strong></p>



<p><strong>उत्तर प्रदेश के चुनाव में बार-बार हिन्दु मुस्लिम ( 80:20 ), जिन्ना, पाकिस्तान जैसे मुद्दे उठाने के बावजूद भी भाजपा को कोई बहुत ज्यादा फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा. फिलहाल, उत्तर प्रदेश के मतदाता रोजगार और दूसरी बुनियादी जरूरतों के इर्द – गिर्द ही सरकार से सवाल कर रही है. बीते चुनावों में लव -जिहाद का हौवा खड़ा कर वोटों के ध्रुवीकरण में काफी हद तक भाजपा कामयाब रही थी. लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading" id="कर-न-टक-क-ह-ज-ब-क-आ-च-क-य-पह-च-ग-उत-तर-प-रद-श">कर्नाटक के हिजाब की आंच क्या पहुंचेगी उत्तर प्रदेश</h2>



<p><strong>बहरहाल , सवाल ये है कि कर्नाटक में हिजाब की आँच क्या उत्तर प्रदेश तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. भाजपा किस हद तक अपने इस हथकंडे को कामयाबी के मुकाम तक पहुँचाती है ये तो आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएगा . बहरहाल , कर्नाटक में जो हालात हैं उसके आधार पर ये कहा जा सकता है कि सरकार काफी सुनियोजित तरीके से हिजाब के मुद्दे को आगे बढ़ा रही है. मुस्लिम महिलाओं को अपनी पसंद का हिजाब पहनने का मौलिक अधिकार है. और उनके इस मौलिक हक के खिलाफ हिन्दुओं को लामबंद करने की कोशिश की जा रही है.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading" id="क-य-अच-नक-उड-प-क-ल-ज-क-प-र-स-पल-क-लग-क-ल-ज-म-ह-न-च-ह-ए-य-न-फ-र-म-स-व-ल-क-ड">क्यों अचानक उडुपी कॉलेज के प्रिंसिपल को लगा कॉलेज में होना चाहिए युनिफॉर्म सिविल कोड</h2>



<p><strong>अचानक एक दिन उडुपी कॉलेज के प्रिंसिपल को लगा कि कॉलेजों में युनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना चाहिए. जाहिर है कि प्रिसिपल साहेब अपने दम पर ये कदम कतई भी नहीं उठा सकते हैं. उनके साथ भाजपा की सरकार है. तभी तो उनके फैसले के समर्थन में राज्य के गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री तत्काल कूद पड़े. भाजपा और सरकार को भी सहूलियत हुई कि उन्हें प्रिंसिपल साहेब के कंधे पर से गोली चलाने का मौका मिल गया.&nbsp;सरकार ने प्रिंसिपल की तरफदारी ये कहते हुए किया कि हिजाब पहनना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है.&nbsp;सरकार ने एक कमिटी का भी गठन कर लिया है जो शैक्षणिक संस्थानों में सख्त युनिफार्म कोड स्थापित करने के मुद्दे पर काम करेगी.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading" id="भ-जप-क-म-ल-रह-ह-ह-द-त-व-एज-ड-क-आग-बढ-न-क-म-क">भाजपा को मिल रहा है हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाने का मौका</h2>



<p><strong>निस्संदेह भाजपा को अपने हिंदुत्व एजेंडे को आगे बढ़ाने का मौका मिल गया है.&nbsp;आज देखा गया है कि अन्य कॉलेज भी उडुपी के इस साप्रंदायिक एजेंडे के साथ हो रहे हैं.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>हिजाब विवाद का सांप्रदायिक पहलू तो हो सकता है लेकिन न्यायपालिका ने पहले ही इसपर अपने राय साफ तौर पर रखे हैं. साल&nbsp;2016 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने हिजाब पहनने वाले उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा में शामिल होने से मना किया था . लेकिन तब केरल उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि छात्र हिजाब पहनकर परीक्षा दे सकते हैं क्योंकि यह उम्मीदवारों की धार्मिक आस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है.&nbsp;</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading" id="क-य-म-स-ल-म-मह-ल-ओ-क-ह-ज-ब-पहनन-करत-ह-क-स-मजहब-क-अन-दर">क्या मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना करता है किसी मजहब का अनादर</h2>



<p><strong>इतना ही नहीं, भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने और प्रचार करने की इजाजत देता है. और हरेक नागरिक अपनी इस आज़ादी का पालन तभी तक कर सकता है जब तक कि वह अन्य व्यक्तियों के धर्म में हस्तक्षेप या दूसरे के धर्म का अनादर न करे . इसमें कोई दो मत नहीं कि मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने से न तो किसी घर्म की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप होता और न ही किसी और मजहब का अनादर.&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>बहरहाल , सवाल ये है कि आखिर हिजाब से परेशानी क्या है&nbsp;?&nbsp;क्या सिख समुदाय के भाईयों को भी पगड़ी पहनने से रोका जाएगा ये कहते हुए कि वो भी समान युनिफार्म के अनुशासन का पालन नहीं करते हैं. क्या ब्राह्मण युवकों को चोटी नहीं रखने के लिए कहा जाएगा या फिर हिन्दु लड़कियों को बिन्दी, मंगलसूत्र या चूड़ी पहनने से रोका जाएगा.&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p><strong>बहरहाल, हिजाब मुस्लिम महिलाओं के लिए अपने धर्म के प्रति आस्था और सम्मान का प्रतीक है. उनके लिए यह केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं है बल्कि मर्यादा का एक प्रतीक है . हिजाब मुसलमानों की पहचान में से एक है और उन्हें इस पहचान को बनाए रखना चाहिए. उनकी इस ख्वाईश को महज अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी भी सूरत में रौंदना नहीं चाहिए.   </strong></p>



<p></p>



<p><strong>Written By: Pankaj Chowdhary</strong></p>
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