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	<title>आलोक वर्मा ब्लॉग, Alok Verma Blogs in Hindi, हिंदी ब्लॉग - Hindi Khabar</title>
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	<title>आलोक वर्मा ब्लॉग, Alok Verma Blogs in Hindi, हिंदी ब्लॉग - Hindi Khabar</title>
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		<title>भारत की पुलिस का चेहरा कब बदलेगा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/when-will-the-face-of-indias-police-change/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Jan 2022 09:28:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[India News]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Police System]]></category>
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					<description><![CDATA[आलोक वर्मा भारत की पुलिस और इसका चेहरा कब बदलेगा? सवाल आपके जेहन में हर उस वक्त में उठता होगा जब आप भारत की पुलिस के बारे में सोचते होंगे या इससे पाला पड़ता होगा। सवाल जायज भी है आजादी की अमृत महोत्सव हम धूमधाम से मना रहे हैं मगर पुलिस अत्याचार की खबरें अभी &#8230;]]></description>
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<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/IMG-20211218-WA0029.jpg" alt="Alok Verma" class="wp-image-213006139408" width="89" height="95"/><figcaption><a href="https://hindikhabar.com/author/alok-verma/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"><strong>आलोक वर्मा</strong></a></figcaption></figure></div>



<p>भारत की पुलिस और इसका चेहरा कब बदलेगा? सवाल आपके जेहन में हर उस वक्त में उठता होगा जब आप भारत की पुलिस के बारे में सोचते होंगे या इससे पाला पड़ता होगा। सवाल जायज भी है आजादी की अमृत महोत्सव हम धूमधाम से मना रहे हैं मगर पुलिस अत्याचार की खबरें अभी भी आम ही हैं। चाहे वह ग्रेटर नोएडा में बदमाश भूरा का फर्जी एनकाउंटर हो या गोरखपुर में होटल में ठहरे कारोबारी को घसीटकर मारने की घटना। </p>



<p>यूपी हो या दिल्ली या फिर कोई और राज्य पुलिस की बर्बरता की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कोरोना की शुरूआत में भारत की पुलिस ने अपना इंसानियत वाला चेहरा दिखाने की पूरजोर कोशिश की थी। दिल्ली पुलिस ने दिल की पुलिस का नारा दिया था तो दूसरे राज्यों की पुलिस भी अनाज, भोजन वितरण कर अपनी सहृदयता दिखाने की कोशिश की थी।  लेकिन फिर समय के साथ दिल वाली पुलिस का चेहरा बदल रहा है।</p>



<p>कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने पुलिस हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामलों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रक्षा कवच के बावजूद अभी भी पुलिस हिरासत में शोषण, उत्पीड़न और मौत होती है। इसके चलते पुलिस स्टेशनों में ही मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। हमारे देश में कस्टोडियल डेथ हमेशा ही बहस का विषय रहा है और इस बाबत आंकड़े हमेशा ही डराने वाले रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या कहता है एमसीआरबी</h3>



<p>नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक 2017 में पुलिस हिरासत में कम-से-कम 100 लोगों की मौत हुई जिनमें से अधिकांश निर्दोष थे। इनमें से 58 तो ऐसे थे जिन्हें गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट के सामने पेश भी नहीं किया जा सका था। जबकि 42 ऐसे थे जो पुलिस या न्यायिक रिमांड पर थे।</p>



<p>एनसीआरबी के ही मुताबिक 2001 से 2018 के बीच पुलिस हिरासत में 1,727 लोग मरे। वहीं नेशनल कैंपेन अगेंस्ट टार्चर नामक संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि केवल 2019 में हिरासत के दौरान 1,731 मौतें हुईं। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सभी लोग पुलिस की पिटाई से ही मरते हैं। इनमें कुछ बीमारी तो कुछ दूसरे कारणों से भी अपनी जान गंवाते हैं।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="800" height="450" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1.jpg" alt="" class="wp-image-213006141617" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1.jpg 800w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1-300x169.jpg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-1-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure></div>



<h3 class="wp-block-heading">भारत की पुलिस के लिए लोगों के दिलों में खौफ क्यों?</h3>



<p>ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि  तमाम सरकारी कवायदों भारत की  पुलिस का चेहरा अंग्रेजों की पुलिस से अलग क्यों नहीं हो रही, क्यों लोगों के दिल में पुलिस से मित्रता की जगह खौफ निवास करती है। प्रायः देखा जाता है कि यातनाओं के मामले में पुलिसकर्मी बच कर निकल जाते हैं। ज्यादा कुछ हुआ तो कुछ दिनों के लिए निलंबित हो जाते हैं और फिर काम पर लौट आते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में जिन सौ कैदियों की मौत हुई, उन मौतों के लिए एक भी पुलिस अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। </p>



<p>एनसीआरबी द्वारा 2001 से 2018 के बीच जिन 1,727 लोगों की मौत का आंकड़ा दिया गया है, उन मामलों में सिर्फ 26 अधिकारी ही दोषी ठहराए जा सके हैं और इनमें से ज्यादातर जमानत पर बाहर हैं। कस्टोडियल डेथ से अलग देखें तो साल 2000 से 2018 के दौरान पुलिस के खिलाफ 2,041 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें सिर्फ 344 पुलिसकर्मी ही दोषी साबित हो सके। पुलिसकर्मियों के आसानी से बचकर निकल जाने से ही हिरासत में हो रही मौतों पर लगाम नहीं लग पा रही है। वे कैदियों से सच उगलवाने के लिए यातना और हिंसा को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करते हैं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-background" style="background-color:#fffb00"><strong>यह भी पढ़ें:</strong> <a href="https://hindikhabar.com/one-such-group-of-police-system-which-is-cracking-down-on-the-miscreants-of-742-districts/" target="_blank" rel="noreferrer noopener"><strong>पुलिस सिस्टम का एक ऐसा ग्रुप जो 742 जिलों के बदमाशों पर कस रहा नकेल</strong></a></p>



<p>दूसरी वजह है कि देश में पुलिस सुधार का अभाव है। बार-बार सरकारी समितियां और अदालतें पुलिस सुधार की बात करती रही हैं, लेकिन पुलिस सुधार के निर्देशों को हमेशा ही नजरअंदाज किया जाता रहा है। पुलिस सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट गिरफ्तारी के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दे चुका है। इस मामले में 1996 के डीके बसु केस बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला एक नजीर है। गिरफ्तारी को लेकर कोर्ट ने 11 सूत्रीय दिशानिर्देश जारी किए थे। </p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="450" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2.jpg" alt="" class="wp-image-213006141618" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2.jpg 800w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2-300x169.jpg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2022/01/Indian-Police-2-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure></div>



<p>कुछ महत्वपूर्ण निर्देशों की बात करें तो इनमें एक यह है कि गिरफ्तार या पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मी अपने नाम और पहचान का नेम प्लेट लगा कर रखेंगे। दूसरा, गिरफ्तारी का विवरण रजिस्टर पर दर्ज किया जाएगा जिसमें गिरफ्तारी की तारीख, समय और स्थान का जिक्र होगा। परिवार के किसी सदस्य द्वारा सत्यापित सभी विवरण शामिल होंगे। तीसरा, गिरफ्तारी के समय एक गवाह और गिरफ्तार व्यक्ति के दस्तखत लिए जाएंगे। उसे एक मित्र या रिश्तेदार से बात करने का मौका दिया जाएगा और गिरफ्तार व्यक्ति को उसके अधिकार की सूचना दी जाएगी, लेकिन इन निर्देशों के पालन में कोताही बरती जा रही है।</p>



<p>हालांकि इन सबसे बड़ी बात राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। सता चाहे जिसकी भी हो पुलिस पर अधिकार रखे बिना पावर की फिलिंग ना आने की बात राजनेताओं में घर की हुई है इसकी वजह से पुलिस विभाग का राजनीतिकरण हो गया है। चूंकि पुलिस राज्य का मामला है, ऐसे में राज्य सरकारें अपनी छवि चमकाने के लिए अक्सर ही पुलिस के गुनाहों पर पर्दा डालने की कोशिश करती रहती हैं। साथ ही राज्य सरकारों पर कई बार पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप भी लगते रहे हैं। दशकों से पुलिस सुधार के विभिन्न पहलुओं पर सरकारों की खामोशी समस्या को और जटिल बनाती रही है।</p>



<p>भारत की पुलिस की छवि कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश में रह रहे भारत के गुनहगारों के प्रत्यर्पण में अपेक्षा के विपरीत समय लगता है। क्रिकेट सट्टेबाजी के मामले में सट्टेबाज संजीव चावला ब्रिटेन की अदालत में यह तर्क देकर दो दशक तक प्रत्यर्पण से बचता रहा था कि भारतीय जेलों और पुलिस हिरासत में यातना जगजाहिर है जिससे उसे अपनी जान का खतरा है। जाहिर है पुलिस की यह शैली न केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि विश्व समुदाय में भारत की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भारत में साइबर अटैक 31 देशों में मुल्जिमों की तलाश</title>
		<link>https://hindikhabar.com/cyber-attack-in-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Jan 2022 10:16:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[Cyber Attack]]></category>
		<category><![CDATA[cyber crime]]></category>
		<category><![CDATA[Cyber Crime in India]]></category>
		<category><![CDATA[hacking cyber attack]]></category>
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					<description><![CDATA[आलोक वर्मा 3 साल पहले भारत के एक बैंक में ऐसा साइबर अटैक हुआ था जिसका संबंध 31 देशों से है। हैकरों ने कुछ इस तरह से एक बैंक के करोड़ों रुपये पर हाथ साफ किया था कि साइबर अटैक की दुनिया में हलचल मच गई थी। तीन साल से चल रही जांच अब साइबर &#8230;]]></description>
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<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/IMG-20211218-WA0029.jpg" alt="Alok Verma" class="wp-image-213006139408" width="87" height="93"/><figcaption><strong><a href="https://hindikhabar.com/author/alok-verma/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">आलोक वर्मा</a></strong></figcaption></figure></div>



<p>3 साल पहले भारत के एक बैंक में ऐसा साइबर अटैक हुआ था जिसका संबंध 31 देशों से है। हैकरों ने कुछ इस तरह से एक बैंक के करोड़ों रुपये पर हाथ साफ किया था कि साइबर अटैक की दुनिया में हलचल मच गई थी। तीन साल से चल रही जांच अब साइबर क्राइम इंवेस्टिगेशन की दुनिया का नजीर बन सकती है। इस मामले में पुलिस के हाथ 18 लोग लग चुके हैं मगर पूरी साजिश का खुलासा होना अभी बाकी है।</p>



<p>पुणे के एक कॉपरेटिव बैंक में हुए घोटाले के लिए 31 देशों की मदद ली जा रही है। इनमें अमरीका और कनाडा भी शामिल है। मामला पुणे के बैंक से 94 करोड़ से ज्यादा पर हाथ साफ करने का है। हैकरों की मदद से इस वारदात को 2018 में अंजाम दिया गया था। ऑनलाइन फ्रॉड का यह मामला पुणे स्थित कॉसमस कॉपरेटिव बैंक के मुख्यालय का है।</p>



<p>यह मामला इसलिए काबिले गौर है क्योंकि हैकरों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए 5 हजार क्लोन कार्ड का इस्तेमाल किया था। यही नहीं संभवतः दुनिया में पहली बार हैकरों ने पैसा निकालने के लिए कैरियर एजेंट भी भारी संख्या में भाड़े पर लिया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्लोन कार्ड का इस्तेमाल</h3>



<p>क्लोन कार्ड का इस्तेमाल कर भारत सहित 32 देशों में एक ही दिन में कैश निकाले गए थे। कैश निकालने के लिए 100 से ज्यादा लोगों का इस्तेमाल किया गया था। इन लोगों को एटीएम से पैसे निकालते वक्त ये मालूम ही नहीं था कि वह बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा बनने जा रहे हैं। पुलिस बुल्गारिया, संयुक्त राज्य अमीरात(यूएई), हांगकांग, तुर्की, पोलैंड, फ्रांस, इजरायल, यूक्रेन आदि देशों से मदद मांगने वाली है। इसके लिए पुणे पुलिस की साइबर सेल ने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा है। वह मामले से संबंधित जानकारी लेने में मदद चाहती है। उसे 31 देशों से मामले की जानकारी चाहिए।  यह वह देश हैं जहां क्लोन कार्ड के जरिए कैश निकाला गया। अमरीका से उसी साल हुए साइबर हमलों के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया गया है।</p>



<p>गौरतलब है कि साइबर हमलों के बारे में जांच करते हुए अमेरिकी एजेंसियों को पता लगा था कि 2018 में हुए हमलो में उतरी कोरिया की खुफिया एजेंसी रिकानिसेंस जनरल ब्यूरो (Rcb) के लिए काम करने वाले एजेंट शामिल थे। 2016 में बांग्लादेश के बैंक से 81 मिलियन डॉलर पर हाथ साफ करने का संदेह भी उन्हीं पर किया जाता है। इस मामले में अमरीकी एजेंसियों ने दोहरी नागरिकता रखने वाले एक नागरिक के खिलाफ आरोप लगाए थे। आरोप था कि इसी शख्स ने उत्तरी कोरिया के खुफिया एजेंटों के लिए पैसे स्थानांतरित किए। इस मामले में अमरीकी कोर्ट ने इस शख्स को सजा भी दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमरीकी जानकारी अहम&nbsp;</h3>



<p>पुणे पुलिस का मानना है कि अमरीका से मिली जानकारी काफी अहम हो सकती है क्योंकि अमरीकी एजेंसियां कॉसमस बैंक में हुए मामले के समान मामले की जांच कर रही है। अमरीकी एजेंसियों की जांच उतरी कोरिया की खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाले तीन लोगों पर केंद्रित थी। इन तीनों पर साल 2018 में दुनिया भर में साइबर हमले की साजिश रचने का संदेह है।</p>



<p>पुणे पुलिस ने केंद्र को यूएई के लिए एक प्रत्यर्पण अनुरोध भी भेजा है। यह अनुरोध यूएई में पकड़े गए सुमेर शेख नामक शख्स को भारत लाने के लिए है। उसके खिलाफ यूएई में इसी साल मार्च में मामला दर्ज हुआ था। पुलिस को सुमेर से इस मामले के कई सुराग मिलने की उम्मीद है। &nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">यह है मामला</h3>



<p>गौरतलब है कि 11 अगस्त 2018 को शाम 3 से 5 बजे के बीच बैंक के कंप्यूटराइज्ड एटीएम हैक किए गए और भारत सहित 31 देशों में 80.05 करोड़ रु नकद निकाल लिए गए। इसके दो दिन बाद सुबह 11.30 बजे स्वीफ्ट सुविधा के माध्यम से 13.92 करोड़ रुपये हांगकांग में निकाल लिया गया। बाद में पुणे पुलिस और विदेश मंत्रालय की अथक कोशिश के बाद हांगकांग की कोर्ट ने गत फरवरी में 5.72 करोड़ वापस करने का निर्देश दिया है।</p>



<p>संदेह है कि कॉसमस बैंक के 5 हजार क्लोन कार्ड की मदद से दुनिया भर के 12 हजार एटीएम से 78 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके अलावा 2.5 करोड़ के लिए 2849 ट्रांजक्शन देश के मध्य प्रदेश राजस्थान औऱ महाराष्ट्र के एटीएम की मदद ली गई। पुणे पुलिस ने इस सिलसिले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया। हैकरों ने इस घोटाले के लिए डाटा खरीदकर रुपे और वीजा कार्ड की जानकारी ली थी। बहरहाल दुनिया के 32 देश इस मामले को सुलझाने के लिए आपसी तालमेल का सहारा ले रहे हैं मगर साइबर क्राइम की दुनिया में यह सबसे बड़ा अटैक माना जा रहा है। विशेषज्ञों को भविष्य में होने वाले इस तरह के हमलों से बचाव का रास्ता फिलहाल नहीं सूझ रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुजरता साल आता साल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/gujarta-saal-aata-saal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Dec 2021 07:11:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[Corona Virus]]></category>
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		<category><![CDATA[Omicron Virus]]></category>
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					<description><![CDATA[आलोक वर्मा साल 2021 के विदाई का वक्त आ गया है, साथ ही साल 2022 के आने का वक्त भी हो चला है। ये वो वक्त है जब हमसे महीने बाद मिलने वाले पूछते हैं कि साल कैसा रहा। बीसवीं सदी का दूसरा शतक यानि साल 2021 के बारे में आपसे कोई पूछे तो आपका &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/IMG-20211218-WA0029.jpg" alt="" class="wp-image-213006139408" width="94" height="100"/><figcaption><strong>आलोक वर्मा</strong></figcaption></figure></div>



<p>साल 2021 के विदाई का वक्त आ गया है, साथ ही साल 2022 के आने का वक्त भी हो चला है। ये वो वक्त है जब हमसे महीने बाद मिलने वाले पूछते हैं कि साल कैसा रहा। बीसवीं सदी का दूसरा शतक यानि साल 2021 के बारे में आपसे कोई पूछे तो आपका जवाब क्या होगा। साल 2021 कोरोना के खतरे के बीच शुरू जरूर हुआ था मगर टीके के रूप में एक उम्मीद भी लेकर आया था। 26 जनवरी से देश में चरणबद्ध तरीके से वैक्सीन लगनी शुरू हो गई थी। </p>



<p>उस समय जब संक्रमण घट चुका था, होली की हुल्लड़बाजी हो रही थी, चुनावी रैलियों का दौर चल रहा था। ठीक उसी समय अचानक हालात बदल गए। दो महीने यानि अप्रैल और मई ने तबाही के वो दर्दनाक मंजर दिखाए जिसकी टीस शायद हरेक के जीवन में जख्म के रूप में मौजूद है। गूगल सर्च रिपोर्ट का दावा है कि लोगों ने उस दौरान जो सबसे ज्यादा सर्च किया वह था घर में आक्सीजन बनाने की तरीका। हो भी क्यों ना, देश में तब ऑक्सीजन की मांग 12 गुना बढ़ गई थी।</p>



<p>विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों में 33.5 प्रतिशत महिलाएं थीं। देश के कुल कार्यबल में वैसे भी महिलाओं की भागीदारी केवल 24 प्रतिशत थी। जब लॉकडाउन के चलते नौकरियां छूटीं तो उसमें से 28 प्रतिशत नौकरियां महिलाओं की चली गईं। अब बुजुर्गों की सुन लीजिए, एज वेल फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, 73 प्रतिशत बुजुर्ग आबादी को तालाबंदी के दौरान उत्पीड़न झेलना पड़ा। कोरोना की लड़ाई जीत चुके बुजुर्ग अब लांग कोविड की मार झेल रहे हैं।</p>



<p>लांसेट में छपे एक शोध के मुताबिक, भारत में दूसरी लहर के दौरान करीब 1.1 लाख बच्चों ने अपने मां या पिता को खो दिया। इससे भी खतरनाक बात ये है कि देश में हर दिन 31 बच्चों ने आत्महत्या की है। खैर टीस भरा साल 2021 अब जाने को है मगर जाते-जाते ओमीक्रोन जैसे खतरे से डरा रहा है। इसके साथ ही कोरोना के मामलो में भी बढ़ोत्तरी होने लगी है। </p>



<p>कोविड सुपरमॉडल पैनल का अनुमान है कि ओमीक्रोन के चलते देश में तीसरी लहर आ सकती है। फरवरी 22 में इसके चरम पर होने का अनुमान है। इसका अंदाजा सहजता से इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केवल 20 दिन में ही ओमीक्रोन एक दर्जन से ज्यादा राज्यो में पहुंच चुका है। चिंता ये भी है कि दूसरी लहर के दौरान सर्वाधिक मार झेलने वाले महाराष्ट्र और दिल्ली में इस वैरिएंट के सबसे ज्यादा मरीज हैं।</p>



<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चिंता व्यक्त करने के साथ-साथ उपायों के बारे में भी कदम उठा चुके हैं। राज्य सरकारें भी रात्रि कर्फ्यू के रूप में अपनी गंभीर चिंता जाहिर कर रही हैं। अदालतें भी बोल रही हैं, लेकिन इन सबकी कोशिश का कोई लाभ नहीं जब तक हम आप इस पर गंभीर ना हों। जब तक हम और आप नहीं सोचेंगे कि नहीं चेते तो कोई अपना जा सकता है, तब तक इससे मुकाबला संभव नहीं है। इसलिए हमें ही फैसला करना होगा कि साल 2022 टीस वाला हो या आनंद वाला।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पुलिस सिस्टम का एक ऐसा ग्रुप जो 742 जिलों के बदमाशों पर कस रहा नकेल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/one-such-group-of-police-system-which-is-cracking-down-on-the-miscreants-of-742-districts/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Dec 2021 12:28:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलोक वर्मा]]></category>
		<category><![CDATA[All India Police Family]]></category>
		<category><![CDATA[Judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[National Police]]></category>
		<category><![CDATA[National Police Group]]></category>
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		<category><![CDATA[State Police]]></category>
		<category><![CDATA[Women Police]]></category>
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					<description><![CDATA[पुलिस सिस्टम&#8230;। एक ऐसा सिस्टम जो ब्रिटिश राज में बना और अब तक चल रहा है। पुलिस सिस्टम जहां इलाके को लेकर पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई ना करने की बातें आम हैं। जहां ज्यूरिस्डिक्शन(अपने इलाके) को लेकर पुलिसवाले अक्सर आपस में ही उलझते रहते हैं। इसी सिस्टम में चंद पुलिसवालों ने एक ऐसा सामानांतर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पुलिस सिस्टम&#8230;। एक ऐसा सिस्टम जो ब्रिटिश राज में बना और अब तक चल रहा है। पुलिस सिस्टम जहां इलाके को लेकर पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई ना करने की बातें आम हैं। जहां ज्यूरिस्डिक्शन(अपने इलाके) को लेकर पुलिसवाले अक्सर आपस में ही उलझते रहते हैं। इसी सिस्टम में चंद पुलिसवालों ने एक ऐसा सामानांतर सिस्टम खड़ा कर लिया, जिसमें पूरे देश की पुलिस एक हो गई है। मैं इसी सिस्टम की कहानी लेकर हाजिर हूं।</strong></p>



<h4 class="wp-block-heading">बड़ा होता पुलिस सिस्टम</h4>



<p>पुलिस का यह सिस्टम सोशल मीडिया पर खड़ा हो गया है। पुलिस विभाग में यह सिस्टम नेशनल पुलिस ग्रुप के नाम से जाना जाता है। यह पुलिस सिस्टम देश भर के 28 स्टेट, 8 केंद्र-शासित प्रदेश, 742 जिले और 15700 पुलिस थानों तक फैला हुआ है। वर्तमान में नेशनल पुलिस ग्रुप के 13 हजार सदस्य हैं। इनमें 500 से अधिक महिलाएं हैं।</p>



<p>कांस्टेबल से लेकर डीजीपी तक इस ग्रुप के सदस्य हैं। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने वाले इस ग्रुप की परिकल्पना दिल्ली पुलिस के एसीपी राजपाल डबास, एसीपी (यूपी पुलिस) विनोद सिंह सिरोही, इंस्पेक्टर (उत्तराखंड) हरपाल सिंह ने की थी। </p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1.jpg" alt="" class="wp-image-213006138298" width="600" height="413" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1.jpg 431w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2021/12/National-police-group-1-300x207.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>



<h4 class="wp-block-heading">हम पंछी एक डाल के नाम से बना व्हाट्सएप ग्रुप</h4>



<p>हम पंछी एक डाल के नामक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। बाद में सदस्यों की संख्या बढ़ती गई तो हरियाणा पुलिस के यशवंत,सुरेंद्र, केवल सिंह और महाराष्ट्र पुलिस के श्रीराम घोडके आदि भी सक्रिय हुए औऱ टेलीग्राम एप्प पर इस ग्रुप का संचालन शुरू हुआ। समूह आपसी विश्वास के सिद्धांत पर काम करता है और सदस्यों से एक-दूसरे की हरसंभव मदद करने की अपेक्षा की जाती है। समूह में कई सुपरकॉप औऱ एक्सपर्ट हैं।</p>



<p>साल 2014 में 50 पुलिस अफसरों के साथ यह ग्रुप शुरू हुआ था। इस ग्रुप में ना केवल पुलिस के बल्कि सीबीआई, साइबर एक्सपर्ट, आईबी, मिलिट्री इंटेलीजेंस, एनसीबी, एनएचआरसी, एनएचएआई, सेना, कस्टम, नेवी, एयरफोर्स,&nbsp; सभी पैरामिलिट्री फोर्स, एनआईए,डीआरआई, रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी, तकनीकी एकस्पर्ट, नेपाल पुलिस औऱ मिसिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं। </p>



<p>नेशनल के अलावा सभी राज्यों और सुरक्षा बलों में भी अलग से ग्रुप बनाए गए है। इसके अलावा क्राइम और क्रिमिनल के तौर तरीकों पर आधारित ग्रुप भी इसी बैनर के अंतर्गत बनाए गए हैं। ग्रुप के सदस्यों को संबंधित राज्य से मदद के लिए प्रशंसा पत्र देने का रिवाज भी इस ग्रुप में है। ग्रुप के सदस्यों में आपसी तालमेल बना रहे इसके लिए हर साल एक गेट-टूगेदर का आयोजन भी किया जाता है। </p>



<h3 class="wp-block-heading">जहां ग्रुप के सदस्य अपराध और आपराधिक सूचनाओं या डाटा को साझा करते हैं। </h3>



<p>इसी तरह महिलाओं के लिए भी अलग से ग्रुप काम कर रहा है जिसमें सभी राज्यों से सिपाही से आईजी स्तर तक की 500 महिलाएं हैं। यहां ग्रुप एडमिन ना होकर एडमिन का समूह होता है। सभी राज्यों औऱ केंद्रशासित प्रदेश से 4-5 लोगों को एडमिन बनाया जाता है। इसके तहत एक कोर ग्रुप भी है जो फैसले लेने का काम करता है। इसी तरह ये ग्रुप फेसबुक पर भी काम करता है। फेसबुक पर इस समय इसके 54 सौ से ज्यादा सदस्य हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading">हर गुजरते दिन के साथ, समूह बड़ा और बड़ा होता जा रहा है, और आने वाले समय में,इसका महत्व और उपयोगिता कैसी होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।</h4>



<p>देश की सीमा से निकलकर इस ग्रुप के सदस्य नेपाल तक पहुंच गए हैं। नेपाल पुलिस के साथ साथ ग्रुप में एनसीबी, एमआईए, आईबी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी, आरपीएफ, असम राइफल्स, एयरफोर्स, सेना आदि के जवान और अधिकारी भी इसके सदस्य हैं। जब भी ग्रुप का कोई सदस्य किसी दूसरे इलाके में पुलिसिया कार्रवाई के लिए जाता है ग्रुप के सदस्य उसकी मदद करते हैं। विशेष हालातो में मदद के लिए इस ग्रुप में विभिन्न क्षेत्रों में एक्सपर्ट सीविलियन को भी शामिल किया गया है।</p>
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