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	<title>खेत-खलिहान Archives - Hindi Khabar</title>
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	<title>खेत-खलिहान Archives - Hindi Khabar</title>
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		<title>पंजाब के लिए बड़ी राहत: अनाज लिफ्टिंग बढ़ाने, फंड और किसानों के मुद्दों पर केंद्र से बनी सहमति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 11:18:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य के किसानों और मंडियों के लिए कई महत्वपूर्ण राहत उपाय सुनिश्चित किए। इस दौरान केंद्र ने पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज &#8230;]]></description>
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<p><strong>Punjab News : </strong>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य के किसानों और मंडियों के लिए कई महत्वपूर्ण राहत उपाय सुनिश्चित किए। इस दौरान केंद्र ने पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने पर सहमति दे दी, जिससे रबी मंडीकरण सीजन से पहले राज्य में अनाज भंडारण संबंधी गंभीर संकट से निपटने में मदद मिलेगी।</p>



<p>इस हस्तक्षेप के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब पर बोझ बने संरचनात्मक मुद्दों के समाधान पर जोर दिया, जिसमें उच्च नकद ऋण ब्याज दरें, ग्रामीण विकास फंड के तहत लंबित 9,000 करोड़ रुपए, ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और आढ़तियों की लंबे समय से लंबित मांगें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सचिव स्तरीय व्यवस्था बनाने सहित ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीएम ने एक्स पर दी जानकारी</h3>



<p>एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि “आज दिल्ली में मैंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी जी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान हमने आढ़तियों की मांगों सहित पंजाब से संबंधित विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।”</p>



<p>मुख्यमंत्री ने आगे लिखा: “बैठक के दौरान केंद्र के सामने महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए, जिसमें पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की तुरंत लिफ्टिंग तथा आरडीएफ के तहत बकाया 9,000 करोड़ रुपए की तुरंत अदायगी के मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही, नकद ऋण सीमा के तहत राज्यों पर लगाई गई उच्च ब्याज दरों को कम करने और आढ़तियों की केंद्र से संबंधित मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने की मांग की गई। इसके अलावा, मंडी मजदूरों के ईपीएफ से संबंधित मुद्दों को तुरंत हल करने की अपील की गई और असामयिक बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई।”</p>



<p>उन्होंने आगे लिखा, “मुझे बेहद खुशी हो रही है कि केंद्रीय मंत्री जी ने इन सभी मुद्दों पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हम पंजाब के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">फसलों के भंडारण संबंधी भारी कमी पर बात</h3>



<p>फसलों के भंडारण संबंधी भारी कमी पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के कवरड गोदामों में 180.88 लाख मीट्रिक टन अनाज (151.20 लाख मीट्रिक टन चावल और 29.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं) पहले से ही स्टोर किया गया है, जबकि कुल उपलब्ध कवरड भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन (173 लाख मीट्रिक टन कवरड गोदाम + 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं साइलो) है। नतीजतन, चावलों के लिए केवल 0.50 लाख मीट्रिक टन कवरड स्पेस और गेहूं के लिए 1.75 लाख मीट्रिक टन साइलो स्पेस उपलब्ध है।” उन्होंने कहा, “राज्य में 1 अप्रैल, 2026 से रबी मंडीकरण सीजन (आरएमएस) 2026-27 शुरू हो गया है, जिसमें संभावित रूप से 130-132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जाएगी।”</p>



<p>मौजूदा स्टॉक के बोझ को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल के 38 लाख मीट्रिक टन गेहूं के स्टॉक में से लगभग 8.71 लाख मीट्रिक टन स्टॉक पहले ही राज्य में सीएपी या खुली स्टोरेज में पड़ा है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से भंडारण क्षमता की कमी हो गई है और लगभग 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं को कम अनुकूल परिस्थितियों में स्टोर करना पड़ेगा।</p>



<p>अनाज की धीमी उठाई का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार लगातार गेहूं और चावल की राज्य से उठाई की मांग करती रही है ताकि चावल की खरीद और स्टोरेज के लिए जरूरी भंडारण क्षमता बनाई जा सके। हालांकि पिछले कई महीनों से राज्य से गेहूं और चावल की औसत उठाई प्रति माह केवल 5 लाख मीट्रिक टन रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अनाज उठान बढ़ाने और वितरण पर जोर</h3>



<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि हर महीने कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की उठाई की जाए या वैकल्पिक रूप से, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान आम लोगों को पेश मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत अनाज का वितरण बढ़ाने जैसे प्रबंध किए जाएं, जैसा कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि इससे रबी मंडीकरण सीजन 2026-27 के दौरान सुचारू खरीद कार्य सुनिश्चित होंगे और खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए धान की मिलिंग को तेज किया जा सकेगा।</p>



<p>एक अन्य मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खरीद के लिए फंडों का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टेट बैंक जो ब्याज दर वसूल रहा है, वह भारतीय खाद्य निगम पर लागू रिकवरी दर से 0.5 प्रतिशत अधिक है और मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लगा रहा है।</p>



<p>उन्होंने आगे कहा कि हालांकि भारत सरकार द्वारा हर सीजन के लिए जारी की गई अस्थायी लागत शीटों में राज्य को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की ब्याज दर पर केवल साधारण ब्याज की अनुमति है। नतीजतन पंजाब राज्य को हर सीजन में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिससे बचा जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ग्रामीण फंड और सड़कों के सुधार पर जोर</h3>



<p>उन्होंने आगे कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्रीय वित्त मंत्री के पास भी उठाया है। तीसरा मुद्दा ग्रामीण विकास फंड से संबंधित है। हमने बार-बार कहा है कि हमारी मंडियों तक जाने वाली सड़कों के निर्माण की जरूरत है और हमने विधानसभा में एक बिल भी पास किया है जिसमें कहा गया है कि यह पैसा केवल मंडियों की मरम्मत, मंडियों के आधुनिकीकरण और मंडियों की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने इन फंडों का दुरुपयोग किया, जिसके कारण यह पैसा रोका गया है।</p>



<p>उन्होंने आगे कहा कि हम इस मुद्दे पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं और मामला फिलहाल विचाराधीन है। मुकदमेबाजी को लंबा खींचने की बजाय केंद्र सरकार को पंजाब के जायज बकाए जारी कर देने चाहिए। यह पंजाब का हिस्सा है और पंजाब का हक है और हम केवल वही मांग रहे हैं जो हमारा जायज हक है।</p>



<p>उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र के बजट में कोई रुकावट है तो फंड किस्तों में या किसी भी तरीके से जो उचित समझा जाए, जारी किए जा सकते हैं। लेकिन यह राशि अब 9000 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसे अभी भी जारी नहीं किया जा रहा है।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमने इस मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया है और हमें भरोसा दिया गया है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में कोई व्यवस्था बनाने के लिए सचिव स्तर पर बैठक बुलाई जाएगी, जिसके माध्यम से यह फंड जारी होना शुरू हो जाएंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्याज दर और आढ़तियों के कमीशन पर विवाद</h3>



<p>उन्होंने अपील की, “पंजाब को भारतीय खाद्य निगम की ब्याज दर के बजाय, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा नकद ऋण सीमा (सीसीएल) पर लगाए जाने वाले ब्याज दर के अनुसार मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लेने की अनुमति दी जाए।” आढ़तियों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि आढ़ती 2.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार ने अपना कमीशन मौजूदा दरों पर निर्धारित किया है।”</p>



<p>आढ़तियों के कमीशन के मुद्दे पर विचार करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने आढ़तियों (कमीशन एजेंट) के कमीशन को खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2020-21 के लिए धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल और रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2021-22 के लिए गेहूं के लिए 46.00 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था।”</p>



<p>उन्होंने आगे कहा, “उस समय से हर साल धान और गेहूं दोनों के लिए एक समान निर्धारित कमीशन जारी रखा गया है, जिसके कारण आढ़ती असंतुष्ट हैं और राज्य सरकार आढ़तियों का कमीशन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को लगातार लिख रही है।”</p>



<p>मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय ने गेहूं के लिए 4.75 रुपये प्रति क्विंटल (46 रुपए से 50.75 रुपए) और धान के लिए 4.73 रुपये प्रति क्विंटल (45.88 रुपए से 50.61 रुपए) के कमीशन में मामूली बढ़ोतरी की है, जो आरएमएस 2026-27 से लागू होगी।” उन्होंने आगे कहा, “आढ़तियों द्वारा इस मामूली बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं किया गया है और मांग की गई है कि पंजाब कृषि उत्पाद बाजार अधिनियम, 1961 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार, आढ़तियों का कमीशन एमएसपी के 2.5 प्रतिशत पर निर्धारित किया जाए।”</p>



<p>उन्होंने अपील की, “भारत सरकार को डीएफपीडी के माध्यम से आढ़तियों के कमीशन में इस मामूली बढ़ोतरी की समीक्षा करनी चाहिए और पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 के अनुसार एमएसपी के 2.5 प्रतिशत की दर से कमीशन को मंजूरी दी जानी चाहिए।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">एफसीआई भुगतान रोकने से आढ़तियों पर बोझ</h3>



<p>एक अन्य चिंता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले कई सालों से, भारतीय खाद्य निगम ईपीएफ से संबंधित मुद्दों के कारण हर सीजन में खरीदी जाने वाली फसलों के लिए भुगतान किए जाने वाले मंडी लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रख रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके परिणामस्वरूप, आढ़तियों से संबंधित लगभग 50 करोड़ रुपए की राशि एफसीआई के पास पड़ी है, जिससे उनका वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।”</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य की एजेंसियां आढ़तियों से अंडरटेकिंग या हलफिया बयान प्राप्त करने के बाद उन्हें भुगतान कर रही हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि ईपीएफ अधिकारियों द्वारा कोई देनदारी निर्धारित की जाती है, तो आढ़ती इसे पूरा करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए ईपीएफ के हिसाब से लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रखना किसी भी तरह उचित नहीं है।” केंद्रीय मंत्री से अपील की कि वे एफसीआई को राज्य एजेंसियों की तरह हलफिया बयान लेकर भुगतान जारी करने के निर्देश दें।</p>



<p>राष्ट्रीय खाद्य खरीद प्रणाली में पंजाब की प्रमुख भूमिका को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र द्वारा इन मुद्दों पर समय पर हस्तक्षेप करने की जरूरत है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>पंजाब सरकार को मिली बड़ी सफलता, पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत कमी पर मिला राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-govt-parali-burning-94-percent-reduction-national-award-success/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 06:29:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
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		<category><![CDATA[94 percent decrease]]></category>
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		<category><![CDATA[stubble burning reduction]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि राज्य ने पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025 हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में पंजाब की रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय भगवंत &#8230;]]></description>
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<p><strong>Punjab News : </strong>पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि राज्य ने पर्यावरण श्रेणी में प्रतिष्ठित स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025 हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में पंजाब की रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के निरंतर और सुनियोजित प्रयासों को दिया।</p>



<p>पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में फसली अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2020-21 में जहां ऐसे मामलों की संख्या 83,002 थी, वहीं 2025-26 में यह घटकर मात्र 5,114 रह गई है। यह गिरावट राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन का प्रमाण है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों और सरकार के प्रयासों को सराहना</h3>



<p>मंत्री ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) और प्रदेश के किसान समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि किसानों की जागरूकता, सहयोग और प्रशासन की दूरदर्शी सोच का संयुक्त परिणाम है। उन्होंने कहा, “यह पुरस्कार पंजाब के किसानों की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारी सरकार की प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व में हमने इस गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया है।”</p>



<p>उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है, जिसमें आधुनिक मशीनरी पर सब्सिडी, वास्तविक समय (रीयल-टाइम) निगरानी, कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना तथा पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का प्रावधान शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पुरस्कार को उन सभी किसानों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने पराली जलाने की हानिकारक परंपरा को छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया।</p>



<p>स गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि राज्य के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इस वर्ष 25,000 सीआरएम मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">योजना के तहत मशीनों पर सब्सिडी जारी</h3>



<p>उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और इसके लिए 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी पहले ही जारी की जा चुकी है। मशीनों की सुचारु उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।</p>



<p>मंत्री ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में आई इस बड़ी कमी का सकारात्मक प्रभाव न केवल पर्यावरण पर पड़ा है, बल्कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब का यह मॉडल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, पर्याप्त वित्तीय सहायता और समाज की सक्रिय भागीदारी एक साथ हो, तो किसी भी पर्यावरणीय चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://महाराजा रणजीत सिंह इंस्टीट्यूट के 20 कैडेट एनडीए मेरिट सूची में शामिल, अमन अरोड़ा ने दी बधाई">महाराजा रणजीत सिंह इंस्टीट्यूट के 20 कैडेट एनडीए मेरिट सूची में शामिल, अमन अरोड़ा ने दी बधाई</a></p>



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		<title>रेड ग्लो पपीता: 8 महीने में कमाई, मुनाफा बढ़ाने के लिए अपनाएं यह बुवाई तरीका</title>
		<link>https://hindikhabar.com/red-glow-papaya-earn-in-8-months-adopt-this-sowing-method-to-increase-profits/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 10:02:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[8 months profit]]></category>
		<category><![CDATA[agriculture tips]]></category>
		<category><![CDATA[high yield]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[papaya farming]]></category>
		<category><![CDATA[planting method]]></category>
		<category><![CDATA[profitable crops]]></category>
		<category><![CDATA[Red Glow Papaya]]></category>
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					<description><![CDATA[Red Glow Papaya : कृषि में बदलाव की लहर के साथ अब किसान सिर्फ रूटीन फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते. इस दौर में रेड ग्लो पपीता एक ऐसा अवसर बनकर उभरा है, जो किसानों की जेब को जल्दी भरने में मदद कर रहा है. खास बात यह है कि यह हाई-ब्रीड वैरायटी सिर्फ 8-10 &#8230;]]></description>
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<p><strong>Red Glow Papaya : </strong>कृषि में बदलाव की लहर के साथ अब किसान सिर्फ रूटीन फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते. इस दौर में रेड ग्लो पपीता एक ऐसा अवसर बनकर उभरा है, जो किसानों की जेब को जल्दी भरने में मदद कर रहा है. खास बात यह है कि यह हाई-ब्रीड वैरायटी सिर्फ 8-10 महीनों में फल देने लगती है, जबकि पारंपरिक किस्मों को तैयार होने में सालों लग जाते हैं.</p>



<p>रेड ग्लो पपीते के पौधे छोटे कद के होते हैं, जिससे फलों की देखभाल और तुड़ाई आसान हो जाती है. बावजूद इसके, हर पौधा औसतन 100 किलो तक फल दे सकता है, जिससे किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ती है. छोटे खेत वाले किसान भी इसे उगाकर अच्छे लाभ कमा सकते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वाद और मार्केट वैल्यू</h3>



<p>इस पपीते का गहरा लाल रंग और मीठा स्वाद इसे बाजार में बेहद लोकप्रिय बनाता है. सख्त छिलके की वजह से यह लंबी दूरी तक ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है और जल्दी खराब नहीं होता. इसलिए सुपरमार्केट और मंडियों में इसकी उच्च मांग और बेहतर कीमत बनी रहती है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">खेती का स्मार्ट तरीका</h3>



<p>अधिक पैदावार के लिए बुवाई में सही गैप और ड्रेनेज का ध्यान रखना जरूरी है. रेड ग्लो के सर्टिफाइड बीज सरकारी संस्थाओं जैसे एनएससी (NSC) या ऑनलाइन स्टोर्स से खरीदे जा सकते हैं.</p>



<p>रेड ग्लो पपीता रोगों के प्रति रेजिस्टेंट है, जिससे कीटनाशकों पर खर्च कम आता है. कम समय में ज्यादा उत्पादन होने के कारण छोटे और मझोले किसान भी इस फसल से अपनी आर्थिक स्थिति बदल रहे हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">सरकार का समर्थन</h3>



<p>अब किसान हाई-वैल्यू फसलों के लिए ट्रेनिंग और सब्सिडी भी ले सकते हैं. बस सही बीज चुनें, आधुनिक खेती तकनीक अपनाएं और रेड ग्लो के साथ अपनी कमाई को बढ़ाएं. रेड ग्लो पपीता न केवल खेत की उत्पादकता बढ़ा रहा है, बल्कि यह किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा हासिल करने का एक भरोसेमंद विकल्प बन गया है.</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/haryana-murder-case-daylight-financier-murder-shooting-14-rounds-of-gunfire/">हरियाणा में दिनदहाड़े फाइनेंसर की गोली मारकर हत्या, 14 राउंड फायरिंग से दहला इलाका</a></p>



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		<item>
		<title>Agriculture : छत्तीसगढ़ के युवा किसान कमा रहे तगड़ा मुनाफा, कम समय में खोजा कमाई का रास्ता</title>
		<link>https://hindikhabar.com/young-farmers-in-chhattisgarh-earn-substantial-profits-discovering-a-path-to-income-in-a-short-span-of-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:12:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Green Vegetables]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Young Farmers]]></category>
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					<description><![CDATA[Agriculture : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान ने गर्मी के मौसम में बढ़ती हरी सब्जियों की मांग को पहचानते हुए पालक की खेती को अपनाया और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विकास बताते हैं कि वे ‘किसान केशरी’ किस्म के बीज का उपयोग करते हैं, जो केवल 15-20 दिन में तैयार &#8230;]]></description>
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<p><strong>Agriculture :</strong> छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान ने गर्मी के मौसम में बढ़ती हरी सब्जियों की मांग को पहचानते हुए पालक की खेती को अपनाया और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विकास बताते हैं कि वे ‘किसान केशरी’ किस्म के बीज का उपयोग करते हैं, जो केवल 15-20 दिन में तैयार हो जाती है। इस किस्म की खासियत यह है कि जड़ काली नहीं पड़ती, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जुताई कर बनाई जाती हैं क्यारियां</h3>



<p>खेती की प्रक्रिया में विकास बताते हैं कि सबसे पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी की जाती है। खेत को वीडर से जुताई कर क्यारियां बनाई जाती हैं। बीज बोने के बाद तुरंत सिंचाई की जाती है और गर्मी में फसल को रोजाना पानी देना जरूरी होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बेहतर उत्पादन के बेहतर खाद</h3>



<p>पालक की फसल में कैटरपिलर (इल्ली) का खतरा रहता है, इसलिए नियमित निगरानी जरूरी है। बेहतर उत्पादन के लिए नाइट्रोजन युक्त खाद और 100 ग्राम NPK घोल का स्प्रे किया जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उच्च मांग के कारण लाभदायक विकल्प</h3>



<p>कम समय में तैयार होने वाली यह फसल, कम लागत और उच्च मांग के कारण किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है। विकास सोनकर जैसे युवा किसान आधुनिक तकनीकों और मेहनत के जरिए न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/haryana-cabinet-takes-key-decisions-minimum-wage-hiked-to-15220-read-full-details/">हरियाणा मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण फैसले, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 15,220 की गई, डिटेल में पढ़ें</a></p>



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		<item>
		<title>अब बागबानी क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, मोहिंदर भगत ने दिए बड़े पैमाने पर फलदार पौधे तैयार करने के निर्देश</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-horticulture-boost-mohinder-bhagat-orders-large-scale-fruit-plant-production/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:05:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[climate resilient farming]]></category>
		<category><![CDATA[fruit plants production]]></category>
		<category><![CDATA[high value crops Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[horticulture development Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[JICA projects India]]></category>
		<category><![CDATA[Mohinder Bhagat]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Farmers Income]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab horticulture]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब के बागबानी मंत्री मोहिंदर भगत ने मंगलवार को बागबानी विभाग के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए बागबानी क्षेत्र को नई रफ्तार देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अधिकारियों को निर्देश दिए कि फलदार पौधे बड़े पैमाने पर तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि फलों &#8230;]]></description>
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<p><strong>Punjab News : </strong>पंजाब के बागबानी मंत्री मोहिंदर भगत ने मंगलवार को बागबानी विभाग के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए बागबानी क्षेत्र को नई रफ्तार देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अधिकारियों को निर्देश दिए कि फलदार पौधे बड़े पैमाने पर तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि फलों के लिए मार्केट की मांग और किसानों की सुविधा के अनुसार ही फलदार पौधों की पौध तैयार की जाए।</p>



<p>इस बैठक के दौरान बागबानी विभाग के सचिव अरशदीप सिंह थिंद और डायरेक्टर मनीष कुमार ने विभाग के विभिन्न प्रोजेक्टों की प्रगति के बारे में मंत्री को जानकारी दी। इस मौके पर विभाग में नई भर्ती और अधिकारियों की प्रमोशन संबंधी भी विशेष चर्चा की गई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जिका सहयोग से बागबानी प्रोजेक्टों को बढ़ावा</h3>



<p>इस अवसर पर बागबानी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में बागबानी क्षेत्र को प्रफुल्लित करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जिका) के सहयोग से लगभग 1300 करोड़ रुपये के मंजूर प्रोजेक्टों की लगातार पैरवी की जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्टों का मकसद पंजाब में मौसम परिवर्तन के अनुकूल और उच्च मूल्य वाली बागबानी फसलों को प्रोत्साहित करना है।</p>



<p>इस मौके पर मंत्री भगत ने अधिकारियों को हिदायत दी कि बागबानी विभाग के अधीन प्रगति अधीन सभी प्रोजेक्टों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्थानीय पंचायतों और किसानों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क बनाए रखें और किसानों को सरकारी निर्देशों के अनुसार हर संभव सहायता करें। अधिकारियों ने मंत्री को हर काम समय पर पूरा करने का भरोसा दिया।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>रेतीली मिट्टी में भी करें मुनाफे वाली खेती, लगाएं ये फलदार पेड़</title>
		<link>https://hindikhabar.com/sandy-soil-profitable-farming-fruit-trees-guide/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 09:38:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[dragon fruit farming]]></category>
		<category><![CDATA[fig farming]]></category>
		<category><![CDATA[fruit trees for sandy soil]]></category>
		<category><![CDATA[grape cultivation sandy soil]]></category>
		<category><![CDATA[low water crops]]></category>
		<category><![CDATA[mulberry cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[pomegranate farming]]></category>
		<category><![CDATA[profitable farming sandy soil]]></category>
		<category><![CDATA[sandy soil farming]]></category>
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					<description><![CDATA[Fruit Farming : रेतीली मिट्टी को अक्सर खेती के लिए कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पानी और पोषक तत्व ज्यादा देर तक नहीं टिकते। लेकिन यदि सही फलदार पेड़ों का चयन किया जाए और थोड़ी तकनीकी देखभाल अपनाई जाए, तो यही मिट्टी किसानों के लिए बेहतर मुनाफे का जरिया बन सकती है। गहरी जड़ों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Fruit Farming : </strong>रेतीली मिट्टी को अक्सर खेती के लिए कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पानी और पोषक तत्व ज्यादा देर तक नहीं टिकते। लेकिन यदि सही फलदार पेड़ों का चयन किया जाए और थोड़ी तकनीकी देखभाल अपनाई जाए, तो यही मिट्टी किसानों के लिए बेहतर मुनाफे का जरिया बन सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गहरी जड़ों वाले पेड़ बनते हैं सबसे बेहतर विकल्प</h3>



<p>ब्लैक मिशन फिग जैसे पेड़ रेतीली मिट्टी के लिए बेहद उपयुक्त माने जाते हैं। इसकी जड़ें गहराई तक जाती हैं, जिससे यह मिट्टी में मौजूद नमी को बनाए रखता है और साल में दो बार फल भी देता है। इसी तरह शहतूत भी अपनी गहरी जड़ों के कारण कम पानी में अच्छी पैदावार देता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने वाले फल</h3>



<p>एल्बर्टा पीच और अनार जैसे पेड़ तेज धूप और कम पानी में भी अच्छे फल देते हैं। खासकर अनार रेतीली मिट्टी में सबसे ज्यादा सफल फसल मानी जाती है, क्योंकि इसमें जलभराव की समस्या नहीं होती और फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गर्म और सूखे वातावरण में उगने वाले पेड़</h3>



<p>फ्यूयू पर्सिमन जैसे पेड़ धीमी लेकिन स्थिर वृद्धि के साथ कम संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन देते हैं। ये मिट्टी के पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करते हैं और छोटे बागानों के लिए भी उपयुक्त हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विदेशी फलों से बढ़ाएं मुनाफा</h3>



<p>रेतीली मिट्टी में जुजुबे और ड्रैगन फ्रूट जैसे विदेशी फल भी आसानी से उगाए जा सकते हैं। इनकी बाजार में मांग अच्छी होती है और देखभाल भी ज्यादा कठिन नहीं होती।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सही तकनीक से बढ़ेगी पैदावार</h3>



<p>ब्लूबेरी और अंगूर जैसी फसलों के लिए मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ मिलाना और मल्चिंग करना जरूरी होता है। इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई या सोखने वाली पाइप का इस्तेमाल करने से पानी की बचत होती है और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>क्या आपने देखा है सिंदूर का पौधा? घर पर लगाएं और केमिकल से छुटकारा पाएं</title>
		<link>https://hindikhabar.com/have-you-seen-a-vermilion-plant-grow-one-at-home-and-get-rid-of-chemicals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 08:44:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[chemical-free solution]]></category>
		<category><![CDATA[eco-friendly gardening]]></category>
		<category><![CDATA[grow at home]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[home remedy plant]]></category>
		<category><![CDATA[indoor gardening]]></category>
		<category><![CDATA[natural pest control]]></category>
		<category><![CDATA[Sindoor plant]]></category>
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					<description><![CDATA[Sindoor Plant : सिंदूर का पौधा असल में एक वास्तविक पौधा है, जिसे Kamila Tree, Kumkum Tree या Annatto Tree के नाम से भी जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Bixa orellana है. यह छोटे आकार का पेड़ या झाड़ी जैसा होता है, जिसके हरे पत्ते और गुलाबी-सफेद फूल दिखाई देते हैं. इसका सबसे खास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Sindoor Plant :</strong> सिंदूर का पौधा असल में एक वास्तविक पौधा है, जिसे Kamila Tree, Kumkum Tree या Annatto Tree के नाम से भी जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Bixa orellana है. यह छोटे आकार का पेड़ या झाड़ी जैसा होता है, जिसके हरे पत्ते और गुलाबी-सफेद फूल दिखाई देते हैं. इसका सबसे खास हिस्सा इसके लाल-नारंगी रंग के फल हैं, जिनके भीतर छोटे बीज होते हैं. ये बीज पारंपरिक रूप से प्राकृतिक लाल रंग बनाने में काम आते हैं.</p>



<p>इस पौधे को &#8220;सिंदूर का पौधा&#8221; इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके बीज से निकलने वाला रंग असली सिंदूर जैसी गहरी लाल रंगत देता है. इसे पुराने समय से लिपस्टिक, कपड़े रंगने और पूजा में उपयोगी रंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह रंग रासायनिक रूप से तैयार सिंदूर से अलग है और पूरी तरह प्राकृतिक होता है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">गर्मियों और मॉनसून में हल्की देखभाल</h3>



<p>आपको बता दें कि इसे घर पर उगाना आसान है. बीज या कलम से इसे गमले या बगीचे में लगाया जा सकता है. हल्की दोमट मिट्टी और जैविक खाद पौधे की वृद्धि के लिए उपयुक्त होती है. पौधे को हल्की अप्रत्यक्ष धूप और मिट्टी की नमी के अनुसार पानी देना चाहिए. गर्मियों और मॉनसून में हल्की देखभाल की जरूरत होती है. सामान्य परिस्थितियों में यह पौधा तेजी से बढ़ता है और लाल-नारंगी फल देता है.</p>



<p>घर पर सिंदूर का पौधा उगा कर रासायनिक सिंदूर के बजाय प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बीजों से निकाले गए रंग को पूजा, सजावट या सौंदर्य सामग्री में सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है.</p>



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			</item>
		<item>
		<title>कम लागत ज्यादा मुनाफा, गर्मियों में तोरई की खेती से किसानों को लाभ</title>
		<link>https://hindikhabar.com/low-cost-high-profit-tindora-farming-summer-benefits-for-farmers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 07:51:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[agricultural techniques]]></category>
		<category><![CDATA[Barabanki farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Indian vegetable market]]></category>
		<category><![CDATA[low-cost high-profit farming]]></category>
		<category><![CDATA[profitable vegetable crops]]></category>
		<category><![CDATA[seasonal vegetable demand]]></category>
		<category><![CDATA[summer vegetables cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[Tindora farming]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006411107</guid>

					<description><![CDATA[Vegetable Farming : गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियों की मांग बढ़ने से किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। बेल वाली सब्जियों में तोरई की खेती खासतौर पर लाभदायक साबित हो रही है। यह साल में दो बार उगाई जा सकती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अच्छा स्रोत मिलता है। कम लागत, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Vegetable Farming :</strong> गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियों की मांग बढ़ने से किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। बेल वाली सब्जियों में तोरई की खेती खासतौर पर लाभदायक साबित हो रही है। यह साल में दो बार उगाई जा सकती है, जिससे किसानों को नियमित आय का अच्छा स्रोत मिलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कम लागत, अधिक मुनाफा</h3>



<p>तोरेई की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत और अधिक उत्पादन है। एक बीघे में खेती की लागत करीब 7–8 हजार रुपये आती है, जबकि फसल की पैदावार से 70–80 हजार रुपये तक मुनाफा कमाया जा सकता है। बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे बिक्री में परेशानी नहीं होती।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मिट्टी और कृषि तकनीक</h3>



<p>तोरई की अच्छी पैदावार के लिए रेतेली या दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकास वाली भूमि जरूरी है। किसान मचान बनाकर खेती करते हैं, जिससे फसल की पैदावार बेहतर होती है और खाद व दवाओं का छिड़काव आसान होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमन कुमार का उदाहरण</h3>



<p>बाराबंकी के बडेल गांव के किसान अमन कुमार ने पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की खेती शुरू की और तोरई से अच्छा मुनाफा कमाया। उन्होंने आधे एकड़ में देसी तोरई की खेती की है और हर फसल से 70–80 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तोरई की खेती की प्रक्रिया</h3>



<p>खेत की गहरी जुताई के बाद मेड बनाकर एक-एक फिट की दूरी पर बीज बोया जाता है। 10–12 दिन बाद पौधा निकलने के बाद सिंचाई शुरू होती है। बांस और तार का स्टेचर बनाकर बेल को डोरी से बांधा जाता है, जिससे पौधा फैलता है और दो महीने के भीतर फसल तैयार हो जाती है। फसल को रोज तोड़कर बाजार में बेचा जा सकता है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>6 अप्रैल तक किसान अलर्ट: जानें अगले 4 दिन के मौसम से बचने के आसान और जरूरी उपाय</title>
		<link>https://hindikhabar.com/farmers-alert-till-april-6-learn-easy-and-important-measures-to-avoid-the-weather-of-the-next-4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 09:55:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[agriculture safety tips]]></category>
		<category><![CDATA[April 6 weather warning]]></category>
		<category><![CDATA[farmer precautions weather]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers weather alert]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006410987</guid>

					<description><![CDATA[Farmers Weather Alert : अप्रैल की शुरुआत होते ही मौसम का रंग बदल गया है और देश के कई हिस्सों में अनियमित बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 6 अप्रैल तक का समय किसानों के लिए नाजुक माना जा रहा है क्योंकि खेतों में कट चुकी फसलें अभी भी सुरक्षित नहीं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Farmers Weather Alert :</strong> अप्रैल की शुरुआत होते ही मौसम का रंग बदल गया है और देश के कई हिस्सों में अनियमित बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 6 अप्रैल तक का समय किसानों के लिए नाजुक माना जा रहा है क्योंकि खेतों में कट चुकी फसलें अभी भी सुरक्षित नहीं हैं और थोड़ी सी लापरवाही कि वजह से पूरी मेहनत पर असर पड़ सकता है.</p>



<p>आजकल मौसम बेहद बदलता रहने वाला हो गया है. सुबह तेज धूप होती है और शाम तक अचानक बादल छा जाते हैं. अगर आप खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, तो अगले चार दिन विशेष सतर्कता बरतें. फसल को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि नुकसान कम से कम हो और फसल की कमाई सुरक्षित रहे.</p>



<h3 class="wp-block-heading">खेतों में पकी फसल सबसे ज्यादा जोखिम में</h3>



<p>वहीं, खेतों में रखी पकी फसल सबसे ज्यादा खतरे में है. इसलिए अगर फसल तैयार है, तो उसे तुरंत काटकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना समझदारी है. हार्वेस्टिंग के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग करें ताकि काम जल्दी खत्म हो जाए और अचानक बारिश से पहले फसल घर पहुंच जाए. अगर कटाई के बाद फसल खेत में ही सुखाई जा रही है, तो पानी या बारिश से बचाने के लिए वॉटरप्रूफ तिरपाल तैयार रखें. मंडी ले जाते समय उपज की क्वालिटी और नमी का ध्यान रखें और खुले में अनाज न रखें.</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>कट चुकी फसल को ढकने के लिए वॉटरप्रूफ तिरपाल का इंतजाम करें.</li>



<li>हार्वेस्टिंग में कंबाइन मशीनों का उपयोग करें ताकि काम तेजी से हो सके.</li>



<li>मंडी में उपज ले जाने से पहले क्वालिटी और नमी की जांच करें.</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">तेज हवा या बारिश में खेतों में पानी न दें</h3>



<p>बता दें कि आने वाले चार दिनों में सिंचाई की योजना मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार बनाएं. तेज हवाओं या बारिश की संभावना में खेतों में पानी न दें क्योंकि गीली मिट्टी में फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है. इसी तरह, इस दौरान किसी भी तरह के रासायनिक खाद या पेस्टिसाइड का छिड़काव न करें क्योंकि बारिश होने पर दवाइयां धुल सकती हैं और मेहनत बेकार हो सकती है. आधुनिक एग्रीकल्चर ऐप्स का उपयोग करें, जो मौसम और फसल की जानकारी लाइव देते हैं.</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>तेज हवा और बारिश के दौरान सिंचाई टालें.</li>



<li>पेस्टिसाइड या खाद छिड़कने से पहले 24 घंटे का मौसम पूर्वानुमान देखें.</li>



<li>मौसम खराब होने पर खेतों में जल निकासी के रास्ते साफ रखें.<br><br></li>
</ul>



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		<item>
		<title>गौड़ाबौराम में आंधी-तूफान से मकई और गेहूं की फसलें बर्बाद, किसानों पर आर्थिक संकट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/maize-and-wheat-crops-destroyed-by-storm-in-gaudabauram-farmers-face-financial-crisis/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:56:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers Update]]></category>
		<category><![CDATA[Financial Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[Gaudabauram]]></category>
		<category><![CDATA[Maize]]></category>
		<category><![CDATA[Wheat Crops]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006410876</guid>

					<description><![CDATA[Bihar Agriculture : गौड़ाबौराम प्रखंड में हाल ही में आए आंधी, तूफान और बारिश ने किसानों की मकई और गेहूँ की फसलें पूरी तरह नष्ट कर दी हैं। इससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात और कठिन हो गए किसानों सिया शरण पंडित, सत्येंद्र सिंह और कपिलेश्वर यादव ने बताया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Bihar Agriculture :</strong> गौड़ाबौराम प्रखंड में हाल ही में आए आंधी, तूफान और बारिश ने किसानों की मकई और गेहूँ की फसलें पूरी तरह नष्ट कर दी हैं। इससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हालात और कठिन हो गए</h3>



<p>किसानों सिया शरण पंडित, सत्येंद्र सिंह और कपिलेश्वर यादव ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल बोई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण यह पूरी तरह बर्बाद हो गई। उनका कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारी अभी तक फसल नुकसान का आकलन करने या मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने नहीं आए, जिससे उनके हालात और कठिन हो गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मुआवजा मिलने से संभल सकेंगे हालात</h3>



<p>किसानों ने प्रशासन से जल्द फसल नुकसान का सर्वेक्षण कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि मुआवजा मिलने से वे आर्थिक रूप से संभल सकेंगे और अगली फसल की तैयारी कर सकेंगे। किसानों की यह शिकायत स्थानीय प्रशासन में भी पहुंचाई गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। खबर में आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है।</p>



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