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	<title>खेत-खलिहान Archives - Hindi Khabar</title>
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	<description>Hindi Khabar: Latest News Breaking News, हिंदी खबर चैनल, Hindi Khabar Live,Hindi News</description>
	<lastBuildDate>Fri, 05 Jun 2026 10:42:21 +0000</lastBuildDate>
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	<title>खेत-खलिहान Archives - Hindi Khabar</title>
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	<item>
		<title>वर्ष 2025-26 के दौरान बिस्त-दोआब नहरी नेटवर्क के तहत सिंचाई क्षेत्र में 167% की वृद्धि: बरिंदर गोयल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/barinder-goyal-announcement-167-percent-irrigation-growth-bist-doab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 10:42:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Barinder Kumar Goyal statement]]></category>
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		<category><![CDATA[Bist Doab canal network]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab agriculture news]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Irrigation System]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab Agriculture : पंजाब की ऐतिहासिक जीवन-धारा में नई जान फूंकते हुए पंजाब सरकार ने बिस्त दोआब नहर की पुनः बहाली से दोआबा क्षेत्र के खेतों की तस्वीर बदलते हुए किसानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया है। प्रदेश के सिंचाई नेटवर्क को बड़ा बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab Agriculture : </strong>पंजाब की ऐतिहासिक जीवन-धारा में नई जान फूंकते हुए पंजाब सरकार ने बिस्त दोआब नहर की पुनः बहाली से दोआबा क्षेत्र के खेतों की तस्वीर बदलते हुए किसानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया है। प्रदेश के सिंचाई नेटवर्क को बड़ा बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा नहर को पुनर्जीवित करने से वर्ष 2025-26 के दौरान बिस्त-दोआब नहरी नेटवर्क के तहत सिंचित क्षेत्र में 167% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।</p>



<p>इस संबंध में अधिक जानकारी साझा करते हुए जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि इस विस्तार से 1,10,762 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र नहरी सिंचाई के तहत लाया गया है, जिससे इलाके के कृषि क्षेत्र की नींव मज़बूत हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दोआबे की नहर में पानी प्रवाह में सुधार</h3>



<p>दोआबे की जीवन-रेखा मानी जाने वाली इस नहर में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में लक्षित प्रयासों के तहत पानी के प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इन प्रयासों से जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर, कपूरथला और होशियारपुर के कुछ हिस्सों में लंबे समय से चली आ रही पानी की कमी को दूर करते हुए सिंचाई प्रणाली को मज़बूत किया गया।</p>



<p>गोयल ने कहा कि रोपड़ हेडवर्क्स से निकलने वाले इस नहरी नेटवर्क, जिसमें इसके राजबाहें, माइनर और खाले शामिल हैं, का व्यापक कायाकल्प किया गया है। इससे पानी का वितरण और अधिक सुचारू और कुशल हुआ है, जिससे सिंचित क्षेत्र में काफ़ी वृद्धि हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">19213 एकड़ कृषि योग्य क्षेत्र को मिला नहरी पानी</h3>



<p>उन्होंने कहा कि पुनः बहाली की बड़ी उपलब्धि यह भी है कि बिस्त-दोआब नहरी नेटवर्क के तहत लगभग 19213 एकड़ कृषि योग्य क्षेत्र को पहली बार नहरी पानी मिला है। यह उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो पहले भूजल और बारिश पर निर्भर थे।</p>



<p>कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पानी के प्रवाह में आए सुधार ने बलाचौर क्षेत्र में काठगढ़ लिफ्ट स्कीम के माध्यम से लिफ्ट सिंचाई प्रणाली को मज़बूत किया गया है। शहीद भगत सिंह नगर के बंगा व मुकंदपुर और जालंधर ज़िले के अपरा, नूरमहल, मलसियां, नकोदर, आदमपुर और काला संघियां जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मज़बूत हुआ है, जबकि जालंधर ब्रांच से जुड़े पुनर्जीवित किए राजबाहों ने आखिरी खेत तक पानी के वितरण में वृद्धि की है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जालंधर ब्रांच में 150 क्यूसेक अतिरिक्त पानी आवंटित</h3>



<p>नहर के सुदृढ़ीकरण से अब शहरी क्षेत्र में पानी की ज़रूरतें भी पूरी हो रही हैं। शहर को पेयजल आपूर्ति में सुधार के लिए जालंधर ब्रांच को अतिरिक्त 150 क्यूसेक पानी आवंटित किया गया है। इससे जालंधर नगर निगम की भूजल पर निर्भरता कम हो रही है और अधिक टिकाऊ तथा भरोसेमंद जल आपूर्ति प्रणाली विकसित हो रही है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि बिस्त-दोआब नहर की बहाली सिंचाई प्रणाली को आधुनिक बनाने, किसानों की सहायता करने और सुदृढ़ जल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन पानी को सुरक्षित रखा जा सकेगा।</p>



<p>कैबिनेट मंत्री ने कहा कि यह केवल एक बहाली नहीं, बल्कि पूर्ण कायाकल्प है, जो पंजाब की कृषि जीवनशैली की संरक्षण क्षमता और आजीविका को बढ़ाने और स्वर्णिम भविष्य की ओर बढ़ने का ईमानदार प्रयास है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>हरियाणा किसानों के लिए बड़ा कदम, ‘गो ग्लोबल’ से अफ्रीकी देशों तक पहुंचेगा कृषि उत्पाद</title>
		<link>https://hindikhabar.com/haryana-farmers-go-global-agriculture-products-africa-export-step/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:35:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Haryana]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture News]]></category>
		<category><![CDATA[farmers]]></category>
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		<category><![CDATA[Natural Farming]]></category>
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					<description><![CDATA[Haryana Go Global : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ‘गो ग्लोबल’ पहल को नई गति मिली है। इस पहल के तहत राज्य के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विभिन्न समझौतों पर किए हस्ताक्षर इस अवसर पर एमडीएच के साथ एक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Haryana Go Global : </strong>हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ‘गो ग्लोबल’ पहल को नई गति मिली है। इस पहल के तहत राज्य के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विभिन्न समझौतों पर किए हस्ताक्षर</h3>



<p>इस अवसर पर एमडीएच के साथ एक करार किया गया है, जिसके तहत अब हरियाणा के किसान तंजानिया, केन्या सहित कई अफ्रीकी देशों में खेती और कृषि उत्पादों के व्यापार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 6 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) ने भी विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना और उनकी कृषि उपज को बेहतर मूल्य दिलाना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्राकृतिक खेती शुरू करने की योजना</h3>



<p>योजना के तहत मोरनी क्षेत्र में अदरक, हल्दी, मिर्च और अन्य मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके साथ ही शुरुआती चरण में लगभग 4 हजार एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती शुरू करने की योजना बनाई गई है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को किसी भी प्रकार के नुकसान की स्थिति में भरपाई दी जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों को मिलेगा अधिक लाभ</h3>



<p>इसके अलावा प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को कंपनी की ओर से बाजार मूल्य से 10 प्रतिशत अधिक कीमत देने का प्रावधान भी किया गया है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक लाभ मिलेगा।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/dr-archana-gupta-takes-charge-haryana-bjp-president-cm-naib-saini-honours/">Haryana News : डॉ. अर्चना गुप्ता ने संभाली हरियाणा BJP की कमान, CM नायब सैनी ने किया सम्मानित</a></p>



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		<item>
		<title>प्रदेश से हर महीने 10-10 लाख मीट्रिक टन चावल और गेहूं की ढुलाई की आवश्यकता : लाल चंद कटारूचक्क</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-needs-10-lakh-metric-ton-rice-wheat-transport-every-month-lal-chand-kataruchak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 07:52:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Food and Civil Supplies]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab Food Grain Storage]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा भंडारण स्थान (स्टोरेज स्पेस) के महत्वपूर्ण मुद्दे को हल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है, क्योंकि यह मुद्दा प्रदेश के खरीद कार्यों से मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab News :</strong> मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा भंडारण स्थान (स्टोरेज स्पेस) के महत्वपूर्ण मुद्दे को हल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है, क्योंकि यह मुद्दा प्रदेश के खरीद कार्यों से मुख्य रूप से जुड़ा हुआ है।</p>



<p>खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने मंगलवार को यहां एक बैठक के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी से कई बैठकें की गई हैं और उन्हें पंजाब में उचित भंडारण स्थान के मुद्दे से अवगत कराया गया है। मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार हमेशा खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी भागीदारों के हितों को ध्यान में रखती है और इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष पुनः उठाने में कोई देरी नहीं की जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रदेश के पास 181 लाख मीट्रिक टन भंडारण स्थान उपलब्ध</h3>



<p>मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के पास 181 लाख मीट्रिक टन (एल.एम.टी.) भंडारण स्थान उपलब्ध है, लेकिन भंडार किये गए अनाज की मात्रा 190 एल.एम.टी. है, जो कुल भंडारण स्थान का 105 प्रतिशत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गेहूं की लिफ्टिंग करना अनिवार्य</h3>



<p>कटारूचक्क ने बताया कि प्रदेश के पास चावल का पिछला स्टॉक 37.76 एल.एम.टी. है, जबकि गेहूं का स्टॉक 40 एल.एम.टी. है। उन्होंने आगे कहा कि हालातों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश से हर महीने कम से कम 10 एल.एम.टी. चावल और 10 एल.एम.टी. गेहूं की लिफ्टिंग करना अनिवार्य है और इस संबंध में अगले 4 महीने अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए कृषि क्षेत्र से संबंधित हर मुद्दा राज्य सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>



<p>इस अवसर पर अन्य के अलावा प्रमुख सचिव राहुल तिवारी, अतिरिक्त सचिव कमल कुमार गर्ग, अतिरिक्त निदेशक डॉ. अंजुमन भास्कर और अजयवीर सिंह सराओ तथा जीएम (वित्त) सरवेश कुमार उपस्थित थे।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>हरित पंजाब की दिशा में बड़ा कदम, मानसून में 4,117 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा पौधारोपण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/green-punjab-mission-monsoon-plantation-drive-4117-hectare-afforestation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 08:57:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[afforestation Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[CAMPA scheme Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Green Punjab Mission]]></category>
		<category><![CDATA[monsoon plantation campaign]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab forest department]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab plantation drive]]></category>
		<category><![CDATA[tree plantation Punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : राज्य को हरा-भरा बनाने तथा स्वच्छ एवं साफ-सुथरा पंजाब सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग ने एक विस्तृत योजना तैयार की है। 4117.49 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा आगामी मानसून सीजन के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पौधारोपण संबंधी लक्ष्यों को अंतिम रूप दिया गया है। इसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab News : </strong>राज्य को हरा-भरा बनाने तथा स्वच्छ एवं साफ-सुथरा पंजाब सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग ने एक विस्तृत योजना तैयार की है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">4117.49 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा</h3>



<p>आगामी मानसून सीजन के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पौधारोपण संबंधी लक्ष्यों को अंतिम रूप दिया गया है। इसके तहत कैंपा योजना के अंतर्गत 4117.49 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा, जबकि 584 हेक्टेयर क्षेत्र में भी पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 45 पवित्र वनों की स्थापना तथा ग्रीन पंजाब मिशन योजना के अंतर्गत 650 नानक बगीचियां स्थापित की जाएंगी।</p>



<p>इसी प्रकार विभाग की योजनाओं में विभागीय नर्सरियों में पौधों की तैयारी, नर्सरी स्टॉक का रखरखाव, सिंचाई, निराई-गुड़ाई एवं ग्रेडिंग के साथ-साथ पॉलीबैग और रूट ट्रेनर तैयार करना भी शामिल है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>प्रतापगढ़ के पान किसानों की मुसीबत, बढ़ती लागत और कम आय से परेशान किसान</title>
		<link>https://hindikhabar.com/pratapgarh-pan-farmers-challenges-agriculture/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 12:01:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Betel Leaf]]></category>
		<category><![CDATA[farmer issues]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Pan Farming]]></category>
		<category><![CDATA[Pratapgarh]]></category>
		<category><![CDATA[RuralEconomy]]></category>
		<category><![CDATA[UP Agriculture]]></category>
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					<description><![CDATA[Farmers Update : प्रतापगढ़ जिले के पट्टी इलाके में पान की खेती लंबे समय से किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत रही है। यहां करीब 30,000 किसान पान की खेती में सक्रिय हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इस पारंपरिक कारोबार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती में लागत बढ़ गई &#8230;]]></description>
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<p><strong>Farmers Update :</strong> प्रतापगढ़ जिले के पट्टी इलाके में पान की खेती लंबे समय से किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत रही है। यहां करीब 30,000 किसान पान की खेती में सक्रिय हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इस पारंपरिक कारोबार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती में लागत बढ़ गई है और पर्याप्त सरकारी सहायता न मिलने के कारण किसानों की आमदनी घट रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मंडी में नहीं मिलता उचित मूल्य</h3>



<p>किसानों ने बताया कि खेती के लिए जरूरी बांस, पैरा और अन्य सामग्री महंगी हो गई है। पान की फसल के लिए बने छायादार ढांचे, जिन्हें बरेजा कहा जाता है, की लागत भी कई किसानों के लिए भारी साबित हो रही है। खेती से लेकर मंडी तक पान पहुंचाने की प्रक्रिया में पूरे परिवार की मेहनत लगती है, फिर भी मंडी में उचित मूल्य नहीं मिलता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">असमानता बढ़ा रही किसानों की परेशानी</h3>



<p>सरकारी मदद की कमी एक बड़ी समस्या है। पान को कृषि विभाग में शामिल न किया जाना, बैंक लोन और बीमा सुविधाओं का अभाव, और अनुदान वितरण में असमानता किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की आवश्यकता है, लेकिन उद्यान विभाग द्वारा पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पान निर्यात बंद होने से पड़ा असर</h3>



<p>मौसम और प्राकृतिक आपदाएं भी नुकसान का कारण हैं। अचानक बारिश, अत्यधिक गर्मी और ठंड पान की फसल को बर्बाद कर देते हैं। कई किसान मजबूरी में बनारस, जौनपुर और सुल्तानपुर जैसे शहरों में जाकर पान बेचने को मजबूर हैं। निर्यात में कमी भी किसानों की आय पर असर डाल रही है, खासकर पाकिस्तान को पान निर्यात बंद होने से बिक्री घट गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पान को दिया जाए कृषि का दर्जा</h3>



<p>भारत में पान की खेती 100,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में की जाती है, जिसमें उत्तर पूर्वी राज्य जैसे असम, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक प्रमुख हैं। यूपी के कई जिलों में भी पान खेती आमदनी का जरिया है। किसान चाहते हैं कि पान को कृषि का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें लोन, बीमा और अनुदान जैसी सुविधाएं मिल सकें और पारंपरिक खेती सुरक्षित बनी रहे। प्रतापगढ़ के पान किसान अब सरकारी हस्तक्षेप और बेहतर बाजार व्यवस्था की उम्मीद में हैं, ताकि यह सदियों पुरानी परंपरा और आजीविका बनी रहे।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>Cotton Crisis : कपास संकट गहराया, क्यों घाटे का सौदा बनती जा रही है देश की ‘सफेद सोना’ फसल?</title>
		<link>https://hindikhabar.com/cotton-crisis-why-white-gold-cotton-crop-is-becoming-a-loss-making-deal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 14:41:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture India]]></category>
		<category><![CDATA[Cotton Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[Cotton Farming]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers Issue]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[White Gold]]></category>
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					<description><![CDATA[Cotton Crisis : कपास की खेती, जो कभी भारतीय किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार मानी जाती थी, आज कई चुनौतियों के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 20 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई कम होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था में आए बड़े बदलाव &#8230;]]></description>
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<p><strong>Cotton Crisis :</strong> कपास की खेती, जो कभी भारतीय किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार मानी जाती थी, आज कई चुनौतियों के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 20 लाख हेक्टेयर में कपास की बुआई कम होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था में आए बड़े बदलाव का संकेत है। </p>



<p>भारत, जो कभी कपास का बड़ा निर्यातक था, अब कई मामलों में आयात पर निर्भर होता दिख रहा है। इसकी प्रमुख वजहों में तकनीकी पिछड़ापन, मूल्य अस्थिरता और नीतिगत कमियाँ शामिल हैं, जिन्होंने इस फसल की उत्पादकता और लाभ दोनों को प्रभावित किया है। देश की औसत कपास उत्पादकता अब भी वैश्विक स्तर से पीछे है, जो किसानों की चिंता को और बढ़ाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आधुनिक तकनीक और बेहतर बीज</h3>



<p>इसी स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में “कपास उत्पादकता मिशन” को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2031 तक प्रति हेक्टेयर उत्पादन को 440 किलोग्राम से बढ़ाकर 755 किलोग्राम तक पहुंचाना है। इसके तहत कुल उत्पादन को 498 लाख गांठ तक ले जाने की योजना है। इस मिशन में देश के 14 राज्यों के 140 जिलों को शामिल किया गया है, जहां आधुनिक तकनीक और बेहतर बीजों के उपयोग पर जोर दिया जाएगा। साथ ही करीब 2000 प्रसंस्करण इकाइयों को विकसित करने की भी योजना है, जिससे लगभग 32 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फसल को बॉलवर्म जैसे कीटों से बचाना</h3>



<p>भारत में कपास की उत्पादकता में एक बड़ा बदलाव Bt Cotton तकनीक के आने के बाद देखा गया था, जिसे 2002 में व्यावसायिक रूप से अपनाया गया। यह तकनीक शुरू में Bollgard-I और बाद में Bollgard-II के रूप में विकसित हुई, जिसका उद्देश्य फसल को बॉलवर्म जैसे कीटों से बचाना था। शुरुआती वर्षों में इससे उत्पादन में वृद्धि भी हुई और 2013-14 के आसपास कपास उत्पादन अपने उच्च स्तर पर पहुंचा। लेकिन समय के साथ कीटों ने इस तकनीक के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लिया, जिससे इसका प्रभाव कम होने लगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंदरूनी हिस्से को पहुंचाता है नुकसान</h3>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार, कपास उत्पादन में गिरावट की एक बड़ी वजह गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) का बढ़ता प्रकोप भी है। यह कीट कपास के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाता है और उस पर सामान्य कीटनाशकों का असर भी सीमित होता है। कई राज्यों में यह कीट 30 से 90 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा चुका है, जिससे किसान लगातार कपास की खेती से दूरी बनाने लगे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रभावी कीट नियंत्रण पर काम</h3>



<p>इसके अलावा, पुराने और नए बीजों के बीच संतुलन की कमी, लगातार नई तकनीक का अभाव और कीट प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था भी इस संकट को और गहरा कर रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते नई तकनीक, बेहतर बीज और प्रभावी कीट नियंत्रण पर काम नहीं किया गया, तो भारत की कपास अर्थव्यवस्था पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पुरानी सफलताओं पर निर्भर रहकर…</h3>



<p>कुल मिलाकर, कपास की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि केवल पुरानी सफलताओं पर निर्भर रहकर आगे बढ़ना संभव नहीं है, बल्कि लगातार नवाचार और मजबूत नीति समर्थन की आवश्यकता है।</p>



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		<item>
		<title>Plant Care Tips : घर लाते ही मुरझा जाते हैं पौधे, एक्सपर्ट ने बताए बचाने के तरीके</title>
		<link>https://hindikhabar.com/plants-wilt-after-bringing-home-expert-tips-to-keep-them-healthy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:32:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Green Living]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Home Garden]]></category>
		<category><![CDATA[Organic Gardening]]></category>
		<category><![CDATA[Plant Care]]></category>
		<category><![CDATA[plant care tips]]></category>
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					<description><![CDATA[Plant Care Tips : घर की सजावट और ताजगी के लिए लोग अक्सर नर्सरी से पौधे लाते हैं, लेकिन कई बार वही पौधे कुछ दिनों में मुरझाने लगते हैं। ऐसे में लोग नर्सरी को दोष देते हैं, जबकि असल वजह पौधों की सही देखभाल का अभाव होता है। सही तरीके अपनाए जाएं तो नर्सरी से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Plant Care Tips :</strong> घर की सजावट और ताजगी के लिए लोग अक्सर नर्सरी से पौधे लाते हैं, लेकिन कई बार वही पौधे कुछ दिनों में मुरझाने लगते हैं। ऐसे में लोग नर्सरी को दोष देते हैं, जबकि असल वजह पौधों की सही देखभाल का अभाव होता है। सही तरीके अपनाए जाएं तो नर्सरी से लाया गया पौधा लंबे समय तक हरा-भरा रह सकता है।</p>



<p>इसी विषय पर नोएडा में आयोजित एक फ्लावर फेस्टिवल के दौरान बागवानी विशेषज्ञ आनंद शर्मा ने कुछ अहम सुझाव साझा किए। इस कार्यक्रम में कई तरह के पौधों की किस्में प्रदर्शित की गईं और लोगों को गार्डनिंग से जुड़ी जानकारी दी गई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मिट्टी और खाद का सही मिश्रण जरूरी</h3>



<p>विशेषज्ञ के अनुसार, जब भी पौधे को नए गमले में लगाया जाए, तो मिट्टी तैयार करते समय पोषक तत्वों का संतुलन जरूरी है। इसमें ऑर्गेनिक खाद के साथ DAP, पोटाश और नीम आधारित तत्व मिलाने से पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं और कीटों से भी सुरक्षा मिलती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तुरंत धूप में न रखें</h3>



<p>नर्सरी से लाए गए पौधे को सीधे तेज धूप में रखना सही नहीं है। नई जगह पर आने के बाद पौधे को थोड़ा समय चाहिए होता है ताकि वह वातावरण के अनुसार खुद को ढाल सके। इसलिए शुरुआत में उसे छांव या हल्की रोशनी वाली जगह पर रखना बेहतर होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पानी देने में न करें जल्दबाजी</h3>



<p>अक्सर लोग रोजाना पानी देकर पौधे को नुकसान पहुंचा देते हैं। पौधे को तभी पानी दें जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी लगे। साथ ही, इतना ही पानी दें कि गमले के नीचे से हल्का-सा निकलने लगे। ज्यादा पानी देने से जड़ें खराब हो सकती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शुरुआत में खाद देने से बचें</h3>



<p>नया पौधा पहले से ही पोषक तत्वों के साथ आता है, इसलिए उसे तुरंत खाद देने की जरूरत नहीं होती। कुछ हफ्तों बाद हल्की ऑर्गेनिक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की खाद दी जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बार-बार जगह न बदलें</h3>



<p>पौधे को एक जगह से दूसरी जगह बार-बार रखने से उसकी ग्रोथ प्रभावित होती है। बेहतर है कि एक सही स्थान तय करके वहीं स्थिर रखें, ताकि पौधा आराम से बढ़ सके। अगर इन आसान बातों का ध्यान रखा जाए, तो नर्सरी से लाया गया पौधा लंबे समय तक स्वस्थ और हरा-भरा बना रह सकता है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>किसान क्रेडिट कार्ड से कितनी मिलती है लोन की सुविधा, जानें नियम और पूरी प्रक्रिया</title>
		<link>https://hindikhabar.com/how-much-loan-facility-is-available-through-kisan-credit-card-know-the-rules-and-complete-process/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 09:02:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
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					<description><![CDATA[Kisan Credit Card : आज के समय में खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए किसानों के सामने पैसों की व्यवस्था करना पहले जितना कठिन नहीं रहा. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना इस दिशा में काफी मददगार साबित हो रही है, जिसके जरिए किसान कम ब्याज दर पर आसानी से कृषि कार्यों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Kisan Credit Card :</strong> आज के समय में खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए किसानों के सामने पैसों की व्यवस्था करना पहले जितना कठिन नहीं रहा. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना इस दिशा में काफी मददगार साबित हो रही है, जिसके जरिए किसान कम ब्याज दर पर आसानी से कृषि कार्यों के लिए ऋण प्राप्त कर सकते हैं.</p>



<p>इस योजना में सबसे अहम बदलाव इसकी बढ़ी हुई लोन सीमा है. अब किसान इस सुविधा के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक का ऋण ले सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 3 लाख रुपये तक थी. सरकार का उद्देश्य है कि किसान बिना वित्तीय दबाव के आधुनिक तकनीक और संसाधनों के साथ खेती कर सकें. बिना किसी गारंटी के भी इस योजना के तहत 1.60 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाता है. वहीं, अगर किसान को अधिक राशि की आवश्यकता होती है, तो जमीन के दस्तावेजों के आधार पर वह 5 लाख रुपये तक की सीमा तक पहुंच सकता है.</p>



<p>ब्याज दर की बात करें तो यह योजना अन्य सामान्य बैंक ऋणों की तुलना में काफी सस्ती है. इसमें सामान्यत: 9 प्रतिशत ब्याज दर लागू होती है, लेकिन सरकार की ओर से 2 प्रतिशत की छूट दी जाती है. साथ ही समय पर भुगतान करने पर 3 प्रतिशत तक की अतिरिक्त राहत भी मिलती है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">समय पर भुगतान करने पर कम ब्याज का लाभ</h3>



<p>इस तरह समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर लगभग 4 प्रतिशत रह जाती है, जो इसे बेहद किफायती बनाती है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान अब साहूकारों पर निर्भर रहने के बजाय इस योजना का लाभ ले रहे हैं.</p>



<p>इसके दायरे को भी बढ़ाया गया है और अब इसमें केवल खेती ही नहीं बल्कि पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं. इससे किसान इन क्षेत्रों में भी निवेश कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">आसान आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज</h3>



<p>इस कार्ड को प्राप्त करना भी सरल प्रक्रिया है. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज लेकर नजदीकी बैंक शाखा में आवेदन किया जा सकता है. एक बार जारी होने के बाद यह कार्ड 5 वर्षों तक मान्य रहता है और हर साल बैंक इसकी क्रेडिट लिमिट की समीक्षा करता है, ताकि जरूरत के अनुसार सुविधा मिलती रहे.</p>



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			</item>
		<item>
		<title>कम लागत में ज्यादा मुनाफा, गाजर की खेती बन रही किसानों की पहली पसंद</title>
		<link>https://hindikhabar.com/low-investment-high-profit-carrot-farming-becoming-farmers-first-choice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:58:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[carrot]]></category>
		<category><![CDATA[Carrot Cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[Carrot Farming]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
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					<description><![CDATA[Carrot Farming : आज के समय में खेती में कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फसलों की जगह अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें जोखिम कम और कमाई ज्यादा होती है। इन्हीं फसलों में गाजर की खेती किसानों के लिए एक अच्छा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Carrot Farming : </strong>आज के समय में खेती में कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फसलों की जगह अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें जोखिम कम और कमाई ज्यादा होती है। इन्हीं फसलों में गाजर की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा</h3>



<p>गाजर की खेती में बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती। एक छोटे से खेत में केवल कुछ हजार रुपये की लागत लगाकर किसान अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह फसल लगभग 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में अन्य फसलें भी आसानी से ले सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों को मिल जाता है तुरंत लाभ</h3>



<p>इसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है, क्योंकि गाजर का उपयोग सलाद, जूस और मिठाइयों में बड़े पैमाने पर होता है। यही कारण है कि फसल तैयार होते ही इसे आसानी से बेच दिया जाता है और किसानों को तुरंत लाभ मिल जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार</h3>



<p>गाजर की खेती के लिए हल्की और उपजाऊ मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सही समय पर सिंचाई और खेत की उचित देखभाल से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। गोबर की खाद का इस्तेमाल फसल को और बेहतर बनाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम</h3>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार, गाजर की खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि इसके हर हिस्से का उपयोग किया जा सकता है। इसके पत्तों का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अधिक लाभ मिलने की संभावना</h3>



<p>अगर किसान सही समय पर बुवाई और कटाई करें तथा खरपतवार पर नियंत्रण रखें तो उत्पादन और मुनाफा दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। ऑफ-सीजन में गाजर की खेती करने पर और भी अधिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।</p>



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<p><br></p>
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			</item>
		<item>
		<title>गर्मी में पशुओं की देखभाल से बचाएं डेयरी का नुकसान, जानें आसान टिप्स</title>
		<link>https://hindikhabar.com/care-for-animals-in-summer-to-prevent-dairy-loss-easy-tips/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:57:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Animal Care]]></category>
		<category><![CDATA[Dairy Animal Care]]></category>
		<category><![CDATA[Heat Stress Prevention]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Live Stock Care]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006413168</guid>

					<description><![CDATA[Dairy Animal Care : गर्मी अब केवल मौसम नहीं, बल्कि पशुपालकों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे दुधारू पशुओं जैसे गाय, भैंस आदि पर इसका प्रभाव दिखने लगा है। कई पशु सुस्त पड़ने लगे हैं, चारा कम खाने लगे हैं और दूध उत्पादन भी घटने लगा है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Dairy Animal Care :</strong> गर्मी अब केवल मौसम नहीं, बल्कि पशुपालकों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे दुधारू पशुओं जैसे गाय, भैंस आदि पर इसका प्रभाव दिखने लगा है। कई पशु सुस्त पड़ने लगे हैं, चारा कम खाने लगे हैं और दूध उत्पादन भी घटने लगा है। अचानक बदलता मौसम, तेज धूप और हल्की बारिश की वजह से यह समस्या और बढ़ गई है। अगर समय रहते उचित देखभाल न की जाए, तो बीमारी और दूध उत्पादन में गिरावट के कारण पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है कमजोर</h3>



<p>पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, गर्मी में कुछ आसान उपाय अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और डेयरी की कमाई को बचाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस समय दुधारू पशुओं के टीकाकरण के लिए यह सबसे अच्छा वक्त है। अगर गर्मी के मौसम में समय पर टीके लगाए जाएं, तो बुखार, FMD, HS और ब्लैक क्वार्टर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। गर्मी में पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, इसलिए छोटी सी लापरवाही बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">2-3 बार साफ और ठंडा पानी पिलाएं</h3>



<p>इसके अलावा, गर्मी में दुधारू पशुओं की खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा हरा चारा, संतुलित दाना और मिनरल मिक्सचर देना चाहिए, ताकि शरीर में आवश्यक पोषक तत्व बने रहें और दूध उत्पादन पर असर कम पड़े। पानी की कमी भी गर्मी में बड़ा खतरा होती है, इसलिए पशुओं को दिन में 2-3 बार साफ और ठंडा पानी पिलाना चाहिए। कभी-कभी पानी में थोड़ा नमक मिलाकर देने से मिनरल बैलेंस बना रहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">घास-फूस या टाट की छांव लगाएं</h3>



<p>गर्मी में पशुओं को राहत देने का एक आसान तरीका है उन्हें नियमित रूप से नहलाना। पशुओं को हर दिन या कम से कम एक दिन छोड़कर नहलाना चाहिए। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और हीट स्ट्रेस कम होता है। खासकर भैंसों के लिए यह और भी जरूरी है। इसके अलावा, शेड को हवादार रखें, घास-फूस या टाट की छांव लगाएं और जहां संभव हो, पंखों या पानी के छिड़काव का इंतजाम करें। यह ठंडक पशुओं को बीमारियों से बचा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समय पर पानी और नियमित नहलाना</h3>



<p>यदि गर्मी में पशु बीमार पड़ते हैं, तो सबसे पहले दूध उत्पादन घटता है, जिससे डेयरी की कमाई पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टीकाकरण, पानी की व्यवस्था, हरा चारा और ठंडक का ध्यान रखा जाए, तो पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन सामान्य रहता है। छोटे-छोटे उपाय जैसे साफ शेड, समय पर पानी और नियमित नहलाना बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।</p>



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